विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) ने 15 अक्टूबर 2026 को टेक्नोलॉजी भवन में उभरते विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार सम्मेलन (Emerging Science, Technology and Innovation Conclave यानी ESTIC 2026) के दूसरे संस्करण की तैयारियों की शुरुआत की। इस कार्यक्रम में भारत के विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में ऑटोनॉमस सिस्टम, फिजिकल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और रोबोटिक्स के बढ़ते महत्व पर प्रकाश डाला गया।
“रचनात्मक मस्तिष्क विज्ञान को गति देते हैं और तकनीक को सशक्त बनाते हैं” (Creative Minds Catalysing Science and Empowering Technology) विषय पर आयोजित होने वाले इस सम्मेलन में भारत और विदेश के प्रमुख वैज्ञानिक, नोबेल पुरस्कार विजेता, उद्योग जगत के प्रतिनिधि, तकनीकी कंपनियाँ, स्टार्टअप, उद्यमी और युवा शोधकर्ता शामिल होंगे।
इस सम्मेलन का उद्देश्य वैज्ञानिकों और उद्योगों के बीच सहयोग बढ़ाना, ज्ञान का आदान-प्रदान करना और वैज्ञानिक अनुसंधान को व्यावहारिक तकनीकी समाधानों से जोड़ना है।
नीति आयोग के सदस्य प्रोफेसर अभय करंदीकर ने सम्मेलन की शुरुआती गतिविधि में मुख्य अतिथि के रूप में भाग लिया। उन्होंने फिजिकल AI के भविष्य और साइबर-फिजिकल सिस्टम के विकास पर चर्चा करने के लिए ESTIC 2026 को महत्वपूर्ण मंच बताया।
साइबर-फिजिकल सिस्टम ऐसी तकनीकें हैं, जिनमें कंप्यूटिंग, संचार और वास्तविक दुनिया की भौतिक प्रक्रियाएँ एक साथ काम करती हैं। इनके माध्यम से मशीनें अपने आसपास की परिस्थितियों से जानकारी प्राप्त कर सकती हैं और उसके अनुसार काम कर सकती हैं।
इन प्रणालियों का उपयोग स्वचालन, वास्तविक समय में निगरानी और विभिन्न प्रक्रियाओं के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने में किया जा सकता है।
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव प्रोफेसर उमेश वाघमारे ने कहा कि ऑटोनॉमस सिस्टम, फिजिकल AI और रोबोटिक्स उद्योगों तथा सार्वजनिक सेवाओं को अधिक सुरक्षित और उत्पादक बनाने में मदद कर सकते हैं।
उन्होंने विनिर्माण, सटीक कृषि, स्वास्थ्य सेवा, पुनर्वास, सामान की आवाजाही, बुनियादी ढाँचे की निगरानी और आपदा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में इन तकनीकों की संभावनाओं को रेखांकित किया।
इन चर्चाओं का उद्देश्य प्रयोगशालाओं में होने वाले शोध को वास्तविक जरूरतों से जोड़ना और ऐसी तकनीकें विकसित करना है, जो रोजमर्रा की समस्याओं का समाधान कर सकें।
यह सम्मेलन शोधकर्ताओं, कारोबारियों, स्टार्टअप और नीति निर्माताओं को अपने विचार साझा करने तथा नई साझेदारियाँ तलाशने का अवसर प्रदान करेगा।
अलग-अलग वैज्ञानिक और औद्योगिक क्षेत्रों के लोगों को एक मंच पर लाकर सम्मेलन का उद्देश्य शोध के निष्कर्षों को उपयोगी तकनीकों में बदलने की प्रक्रिया को प्रोत्साहित करना है।
यह पहल विकसित भारत 2047 के व्यापक लक्ष्य से भी जुड़ी है। इस लक्ष्य के तहत आने वाले दशकों में भारत की आर्थिक और तकनीकी क्षमताओं को मजबूत बनाने पर जोर दिया जा रहा है।
प्रोफेसर वाघमारे ने इस बात पर भी जोर दिया कि नई तकनीकें विश्वसनीय, सुरक्षित और किफायती होनी चाहिए। साथ ही, उनका विकास भारत की आवश्यकताओं और यहाँ की परिस्थितियों को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए। कृषि, स्वास्थ्य सेवा और बुनियादी ढाँचे जैसे क्षेत्रों में यह दृष्टिकोण विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग ने राष्ट्रीय अंतर्विषयी साइबर-फिजिकल सिस्टम मिशन (National Mission on Interdisciplinary Cyber-Physical Systems) के अंतर्गत 25 टेक्नोलॉजी इनोवेशन हब स्थापित किए हैं।
इनका उद्देश्य वैज्ञानिक शोध को इंजीनियरिंग विकास, प्रयोगों और वास्तविक उपयोग से जोड़ना है। ये केंद्र शिक्षण संस्थानों, शोधकर्ताओं, उद्यमियों और उद्योगों के बीच सहयोग को भी बढ़ावा देते हैं।
TiHAN, IIT हैदराबाद: स्वायत्त दिशा-निर्धारण और मानवरहित प्रणालियों से जुड़ी तकनीकों के विकास पर ध्यान देता है।
IHFC, IIT दिल्ली: रोबोटिक्स और संबंधित तकनीकों में शोध तथा नवाचार को बढ़ावा देता है।
ARTPARK, भारतीय विज्ञान संस्थान, बेंगलुरु: कृत्रिम बुद्धिमत्ता और रोबोटिक्स के क्षेत्र में शोध एवं नवाचार को प्रोत्साहित करता है।
ये केंद्र शोधकर्ताओं को अपने विचारों की जाँच करने, शुरुआती नमूने विकसित करने और नई तकनीकों को व्यावहारिक उपयोग तक पहुँचाने के रास्ते तलाशने में मदद कर सकते हैं।
सम्मेलन की शुरुआती गतिविधि में नेशनल क्वांटम मिशन का भी उल्लेख किया गया। यह मिशन वैज्ञानिक अनुसंधान को तकनीकी विकास और उद्यमिता से जोड़ने के प्रयासों का एक उदाहरण है।
क्वांटम तकनीकों का उपयोग कंप्यूटिंग, संचार, संवेदन और मापन जैसे क्षेत्रों में किया जा सकता है। इन क्षमताओं को विकसित करने के लिए लगातार शोध, विशेष तकनीकी सुविधाओं और शिक्षण संस्थानों तथा उद्योगों के बीच सहयोग की जरूरत होती है।
यह मिशन ऐसे वातावरण के निर्माण के महत्व को दर्शाता है, जिसमें वैज्ञानिक खोजों को नई तकनीकों, व्यावसायिक अवसरों और उपयोगी समाधानों में बदला जा सके।
कार्यक्रम के दौरान विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग की संयुक्त सचिव ए. धनलक्ष्मी ने ESTIC 2026 के बारे में प्रस्तुति दी।
इसके अलावा, सम्मेलन से जुड़े प्रचार वीडियो दिखाए गए और कार्यक्रम की जानकारी देने वाली पुस्तिका जारी की गई। इन गतिविधियों के माध्यम से सम्मेलन के उद्देश्यों और प्रमुख विषयों की जानकारी साझा की गई।
ये तैयारियाँ मुख्य सम्मेलन से पहले विभिन्न हितधारकों को जोड़ने की दिशा में एक कदम हैं। इसका उद्देश्य शोध, उद्योग और सरकार से जुड़े लोगों को उभरती वैज्ञानिक प्राथमिकताओं तथा नवाचार के अवसरों पर चर्चा करने का मंच देना है।
उभरते विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार सम्मेलन का दूसरा संस्करण 27 से 29 अक्टूबर 2026 तक नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित किया जाना निर्धारित है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस कार्यक्रम का आयोजन वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR) कर रही है।
उभरती तकनीकों और विभिन्न विषयों के बीच सहयोग पर केंद्रित यह सम्मेलन भारत की शोध क्षमताओं को मजबूत बनाने और उन्नत तकनीकी समाधानों के विकास को गति देने पर चर्चा का अवसर प्रदान करेगा।
ESTIC 2026 में ऑटोनॉमस सिस्टम, फिजिकल AI और रोबोटिक्स की भूमिका पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। वैज्ञानिकों, उद्योग जगत के प्रतिनिधियों, स्टार्टअप और नीति निर्माताओं को एक मंच पर लाकर सम्मेलन का उद्देश्य शोध और व्यावहारिक उपयोग के बीच सहयोग बढ़ाना है।
टेक्नोलॉजी इनोवेशन हब और नेशनल क्वांटम मिशन जैसी पहलें भी देश में स्वदेशी तकनीकी क्षमताओं के विकास के महत्व को दर्शाती हैं। इन प्रयासों से नए शोध, नवाचार और व्यावसायिक अवसरों को बढ़ावा मिल सकता है।
आने वाले समय में इन तकनीकों का प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि उन्हें कितनी प्रभावी ढंग से वास्तविक जरूरतों के अनुसार विकसित और लागू किया जाता है। भारत के लिए सुरक्षित, विश्वसनीय और किफायती तकनीकी समाधान तैयार करना विकसित भारत 2047 के लक्ष्य की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।