भारत में पेय पदार्थों के बाजार में बदलती पसंद को देखते हुए पेप्सिको इंडिया कम चीनी वाले और बिना चीनी वाले पेय पदार्थों पर अपना ध्यान बढ़ा रही है। कंपनी की रणनीति में इन उत्पादों की भूमिका लगातार बढ़ रही है। फिलहाल, कंपनी की कुल पेय पदार्थ बिक्री में ऐसे उत्पादों की हिस्सेदारी लगभग 73–74% तक पहुंच गई है। कंपनी का लक्ष्य आने वाले समय में इस हिस्सेदारी को और बढ़ाना है।
भारत पेप्सिको के लिए एक महत्वपूर्ण बाजार है। इसी को ध्यान में रखते हुए कंपनी अपने उत्पादों में बदलाव कर रही है, ताकि ग्राहकों की बदलती जरूरतों और अपेक्षाओं को पूरा किया जा सके। पिछले 18 महीनों में कंपनी ने कम चीनी और बिना चीनी वाले पेय पदार्थों की हिस्सेदारी बढ़ाने के प्रयास तेज किए हैं। यह बदलाव उसके उत्पादों की रणनीति में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
पेप्सिको इंडिया PepsiCo India और दक्षिण एशिया में पेय पदार्थ कारोबार के उपाध्यक्ष एवं महाप्रबंधक नितिन भंडारी के अनुसार, एक साल से कुछ अधिक समय पहले कंपनी के कुल पेय पदार्थों में कम चीनी और बिना चीनी वाले उत्पादों की हिस्सेदारी लगभग 50% थी। अब यह बढ़कर करीब 73–74% हो गई है।
भंडारी ने बिजनेसलाइन को बताया कि कंपनी आने वाले 18 महीनों में इन उत्पादों की हिस्सेदारी अपने कुल पेय पदार्थ कारोबार में लगभग 90% तक पहुंचाने की उम्मीद कर रही है। यह लक्ष्य कंपनी की बदलती व्यावसायिक रणनीति को दर्शाता है।
इस बदलाव से पता चलता है कि कंपनी पारंपरिक मीठे पेय पदार्थों के साथ दूसरे विकल्पों को भी बढ़ावा देना चाहती है। ग्राहक अब अलग-अलग स्वाद और कम चीनी वाले उत्पादों के विकल्प तलाश रहे हैं। ऐसे में PepsiCo अपने उत्पादों की विविधता बढ़ाकर बाजार में अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रही है।
PepsiCo की रणनीति केवल अपने उत्पादों में बदलाव तक सीमित नहीं है। यह बाजार में बिना चीनी वाले पेय पदार्थों की बढ़ती मांग को भी दर्शाती है। नितिन भंडारी के अनुसार, उद्योग स्तर पर जीरो-शुगर पेय पदार्थों की श्रेणी में लगभग 40% की वृद्धि हो रही है। इससे संकेत मिलता है कि इस तरह के उत्पादों में ग्राहकों की रुचि बढ़ रही है।
कंपनी ने अपने कई लोकप्रिय ब्रांडों के बिना चीनी वाले विकल्प पेश किए हैं। इनमें Pepsi, 7UP, Gatorade, Mountain Dew और Nimbooz Jeera Soda शामिल हैं। इन विकल्पों के माध्यम से कंपनी ग्राहकों को अधिक चुनाव देने और बदलते बाजार में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है।
जीरो-शुगर उत्पादों के साथ PepsiCo अपने मौजूदा पेय पदार्थों में भी चीनी की मात्रा कम कर रही है। इस प्रक्रिया को उत्पादों में सुधार या रीफॉर्म्युलेशन कहा जाता है। इसके तहत कंपनी अपने प्रमुख कार्बोनेटेड पेय ब्रांडों, जैसे Pepsi, 7UP और Mountain Dew के उत्पादों में बदलाव कर रही है।
भंडारी के अनुसार, कंपनी ने ऐसे कम चीनी वाले पेय पदार्थ विकसित किए हैं, जिनमें प्रति सर्विंग 100 कैलोरी से कम होती हैं। इस दौरान परिचित स्वाद को बनाए रखने का भी प्रयास किया जा रहा है।
इन प्रयासों में भारत स्थित PepsiCo का अनुसंधान एवं विकास केंद्र महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। कंपनी मिठास देने वाले पदार्थों और उनके मिश्रणों से जुड़ी अपनी तकनीकों का भी इस्तेमाल कर रही है। नए उत्पाद विकसित करना और पुराने उत्पादों की संरचना में बदलाव करना उसकी रणनीति के अहम हिस्से हैं।
PepsiCo अपने पेय पदार्थों के पोर्टफोलियो में बदलाव करके भविष्य की बाजार मांग के अनुसार खुद को तैयार करना चाहती है। कंपनी के अनुसार, ग्राहकों की पसंद को समझना और उसी के अनुसार उत्पाद तैयार करना उसकी प्राथमिकताओं में शामिल है।
नितिन भंडारी ने बताया कि कंपनी ऐसा उत्पाद पोर्टफोलियो तैयार करने पर काम कर रही है, जो भविष्य में ग्राहकों की जरूरतों को पूरा कर सके। इसके लिए उत्पादों में बदलाव और नई पेशकशों पर जोर दिया जा रहा है।
कंपनी का मानना है कि ग्राहकों की पसंद के अनुसार पेय पदार्थ उपलब्ध कराने से इस श्रेणी की मांग बढ़ सकती है और कारोबार के लिए नए अवसर पैदा हो सकते हैं। यह बदलाव पेय पदार्थ उद्योग में चल रहे उस व्यापक रुझान का भी हिस्सा है, जिसमें कंपनियां कम चीनी और बिना चीनी वाले विकल्पों के साथ अधिक विविधता पेश कर रही हैं।
भारत में पेय पदार्थों के बाजार में शहरी और ग्रामीण, दोनों क्षेत्रों में विकास की संभावनाएं मौजूद हैं। कंपनी का ध्यान ऐसे परिवारों तक भी पहुंचने पर है, जो नियमित रूप से बोतलबंद शीतल पेय का इस्तेमाल नहीं करते हैं।
Worldpanel by Kantar के आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष मार्च से मई के दौरान बोतलबंद शीतल पेय पदार्थों की घरेलू पहुंच 44.1% रही। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, यह इस श्रेणी के लिए घरों तक पहुंच का अब तक का सबसे ऊंचा स्तर था।
घरेलू पहुंच का अर्थ है कि किसी उत्पाद श्रेणी का इस्तेमाल कितने प्रतिशत परिवार करते हैं। यह आंकड़ा बाजार में उत्पादों की पहुंच और ग्राहकों के बीच उनकी स्वीकार्यता को समझने में मदद करता है।
PepsiCo को भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में कारोबार बढ़ाने की काफी संभावनाएं दिखाई दे रही हैं। नितिन भंडारी के अनुसार, कंपनी की वृद्धि में ग्रामीण बाजारों का योगदान लगभग आधा है। इससे स्पष्ट होता है कि ग्रामीण क्षेत्र कंपनी की व्यावसायिक रणनीति में महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं।
ग्रामीण बाजारों में उत्पादों की उपलब्धता बढ़ाना और अधिक परिवारों तक पहुंच बनाना कंपनी के लिए विकास के नए अवसर पैदा कर सकता है। हालांकि, इन अवसरों का लाभ उठाने के लिए ग्राहकों की पसंद, उत्पादों की कीमत और वितरण व्यवस्था पर भी ध्यान देना होगा।
PepsiCo India कम चीनी और बिना चीनी वाले पेय पदार्थों की हिस्सेदारी बढ़ाकर अपने कारोबार को नए स्वरूप में ढालना चाहती है। कंपनी के कुल पेय पदार्थों में इन उत्पादों की हिस्सेदारी पहले ही लगभग तीन-चौथाई तक पहुंच चुकी है। अब अगले 18 महीनों में इसे करीब 90% तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है।
इस दिशा में कंपनी उत्पादों की संरचना में सुधार, अनुसंधान एवं विकास, ग्राहकों को अधिक विकल्प देने और बाजार में अपनी पहुंच बढ़ाने पर ध्यान दे रही है। जीरो-शुगर उत्पादों का विस्तार और कम चीनी वाले नए विकल्प तैयार करना उसकी रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बना रहेगा।
भारत जैसे विविध बाजार में कंपनी की सफलता इस बात पर भी निर्भर करेगी कि वह अलग-अलग क्षेत्रों और ग्राहकों की जरूरतों के अनुसार अपने उत्पादों को किस तरह उपलब्ध कराती है।
PepsiCo India कम चीनी और बिना चीनी वाले पेय पदार्थों को अपनी विकास रणनीति का प्रमुख हिस्सा बना रही है। इन उत्पादों की हिस्सेदारी लगभग 73–74% तक पहुंचना कंपनी की दिशा में आए बड़े बदलाव को दिखाता है। अगले 18 महीनों में इसे करीब 90% तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।
इसके लिए कंपनी उत्पादों में सुधार, नई तकनीकों, ग्राहकों को अधिक विकल्प देने और ग्रामीण बाजारों में अपनी पहुंच बढ़ाने पर ध्यान दे रही है। हालांकि, इस लक्ष्य को हासिल करने में ग्राहकों की पसंद, उत्पादों की उपलब्धता और बाजार की मांग महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि PepsiCo अपने इस लक्ष्य को कितनी सफलता से पूरा कर पाती है।