Nissan Magnite ग्लोबल न्यू कार असेसमेंट प्रोग्राम (GNCAP) में 5-स्टार सेफ्टी रेटिंग पाने वाली लेटेस्ट भारत निर्मित कार बन गई है। इस सबकॉम्पैक्ट SUV को एडल्ट ऑक्यूपेंट प्रोटेक्शन (AOP) के लिए 5-स्टार और चाइल्ड ऑक्यूपेंट प्रोटेक्शन (COP) के लिए 3-स्टार रेटिंग मिली है। ग्लोबल NCAP में मैग्नाइट के क्रैश टेस्ट का यह निसान का तीसरा प्रयास है।
पहले प्रयास में Magnite को पुराने ग्लोबल NCAP नियम के तहत AOP और COP के लिए दो-दो स्टार मिले थे। शुरुआत में मैग्नाइट में केवल दो स्टैंडर्ड एयरबैग थे। बाद में रिवाइज्ड स्टैंडर्ड्स के तहत छह एयरबैग के साथ इसका टेस्ट किया गया, जहाँ इसे AOP और COP के लिए चार-चार स्टार मिले।
इस बार इस क्रॉसओवर ने एडल्ट प्रोटेक्शन स्कोर में सुधार किया है, लेकिन चाइल्ड प्रोटेक्शन में गिरावट आई है। लेटेस्ट क्रैश टेस्ट में मैग्नाइट को एडल्ट सेफ्टी के लिए 34 में से 32.31 अंक और चाइल्ड सेफ्टी के लिए 49 में से 33.64 अंक मिले हैं। यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि पिछले साल के अंत में मैग्नाइट मिड-साइकिल फेसलिफ्ट में एसयूवी को कुछ सेफ्टी अपग्रेड प्राप्त हुए थे।
इसमें छह एयरबैग, ESC, बेहतर पेडेस्ट्रियन प्रोटेक्शन, बेहतर रेस्टरेंट सिस्टम और सभी पैसेंजर्स के लिए 3-पॉइंट सीट बेल्ट जैसी सेफ्टी फीचर्स सभी वेरिएंट में स्टैंडर्ड के रूप में शामिल थीं। दिलचस्प बात यह है, कि टेस्ट किया गया प्रोटोटाइप दक्षिण अफ्रीका में बेचा जाता है, लेकिन इसका निर्माण भारत में होता है।
ग्लोबल NCAP के CEO रिचर्ड वुड्स Richard Woods ने कहा "निसान द्वारा मैग्नाइट के सेफ्टी परफॉरमेंस को बेहतर बनाने पर ध्यान केंद्रित करना बहुत ही स्वागत योग्य है। यह फाइव स्टार रेटिंग दक्षिण अफ्रीका और भारत के कंस्यूमर्स के लिए प्रासंगिक है, और यह दर्शाती है, कि जब कोई मैन्युफैक्चरर NCAP प्रोसेस में शामिल होने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध होता है, तो अपेक्षाकृत कम समय में क्या हासिल किया जा सकता है।"
ग्लोबल एनसीएपी के क्रैश टेस्ट प्रोटोकॉल प्रत्येक मॉडल का इलेक्ट्रॉनिक स्टेबिलिटी कंट्रोल (ईएससी) की प्रभावशीलता के साथ-साथ फ्रंटल और साइड इम्पैक्ट प्रोटेक्शन के लिए इवैल्यूएशन करते हैं। किसी व्हीकल को उच्चतम स्टार रेटिंग प्राप्त करने के लिए, पेडेस्ट्रियन प्रोटेक्शन और साइड पोल इम्पैक्ट टेस्ट जैसे एडिशनल इवैल्यूएशन भी अनिवार्य हैं। उल्लेखनीय रूप से मैग्नाइट के बॉडी शेल को इवैल्यूएशन के दूसरे और तीसरे दोनों दौरों में स्थिर और एडिशनल भार सहने में सक्षम माना गया।
दोनों टेस्ट यूनिट ने साइड इम्पैक्ट और साइड पोल इम्पैक्ट आकलन में अच्छी सुरक्षा का प्रदर्शन किया। हालाँकि फ्रंटल इम्पैक्ट टेस्ट में 3 साल के बच्चे के डमी के लिए चाइल्ड सीट—जो आईएसओफिक्स एंकरेज और एक सपोर्ट लेग का उपयोग करके पीछे की ओर लगी थी, डमी के सिर को व्हीकल के इंटीरियर से टकराने से नहीं रोक पाई, जैसा कि ग्लोबल एनसीएपी ने नोट किया है।
इसके विपरीत 18 महीने के बच्चे के डमी के लिए चाइल्ड सीट—जो भी आईएसओफिक्स और एक सपोर्ट लेग के साथ पीछे की ओर लगी थी, और फ्रंटल इम्पैक्ट के दौरान सिर को किसी भी तरह के रिस्क से सफलतापूर्वक बचाया। इसके बावजूद टेस्ट प्रोटोकॉल द्वारा छाती की सुरक्षा को "अच्छा" माने जाने वाली सीमा से थोड़ा नीचे आंका गया था, जिसके कारण अंकों में थोड़ी कटौती की गई।