केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रल्हाद जोशी ने कहा है कि कक्षा 10 से 12 तक के छात्रों के लिए संशोधित NCERT पाठ्यपुस्तकें मिशन मोड में तैयार की जा रही हैं। इन किताबों को नए National Curriculum Framework (NCF) के अनुरूप विकसित किया जा रहा है, ताकि स्कूली शिक्षा को बदलती जरूरतों और आधुनिक तकनीक के साथ जोड़ा जा सके।
मंत्री ने यह बात National Council of Educational Research and Training (NCERT) के 66वें स्थापना दिवस के अवसर पर अपने संबोधन में कही। उन्होंने बताया कि नए NCF के अनुसार कक्षा 1 से 9 तक की नई पाठ्यपुस्तकें पहले ही जारी की जा चुकी हैं, जबकि कक्षा 10 से 12 की किताबों पर तेजी से काम चल रहा है।
नई पाठ्यपुस्तकों की तैयारी ऐसे समय हो रही है जब भारतीय शिक्षा व्यवस्था में National Education Policy (NEP) 2020, डिजिटल लर्निंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और कौशल आधारित शिक्षा पर विशेष जोर दिया जा रहा है। ऐसे में आने वाली NCERT किताबों से छात्रों को केवल परीक्षा के लिए तैयार करने के बजाय उन्हें भविष्य की पढ़ाई और रोजगार की बदलती दुनिया के लिए तैयार करने की उम्मीद है।
केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रल्हाद जोशी Union Education Minister Pralhad Joshi के अनुसार, कक्षा 1 से 9 तक के लिए नए पाठ्यक्रम के अनुरूप किताबें उपलब्ध हो चुकी हैं। अब शिक्षा मंत्रालय और NCERT का ध्यान वरिष्ठ कक्षाओं यानी 10 से 12 पर है।
कक्षा 10 से 12 की शिक्षा छात्रों के लिए बेहद महत्वपूर्ण होती है। इसी दौरान विद्यार्थी उच्च शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं और करियर के लिए अपनी दिशा तय करते हैं। इसलिए इन कक्षाओं की पाठ्यपुस्तकों में विषयों की गहराई के साथ-साथ व्यावहारिक ज्ञान और आधुनिक कौशल को शामिल करना महत्वपूर्ण होगा।
नई पाठ्यपुस्तकों का उद्देश्य केवल पुराने अध्यायों को बदलना नहीं है। इनका व्यापक उद्देश्य शिक्षा को नए National Curriculum Framework के अनुरूप बनाना है।
NCF में सीखने को अधिक समझ-आधारित, कौशल-केंद्रित और विद्यार्थी-केंद्रित बनाने पर जोर दिया गया है। इसका मतलब है कि छात्रों को केवल तथ्यों और परिभाषाओं को याद करने के बजाय विषयों को समझने, उनका विश्लेषण करने और वास्तविक जीवन में उनका इस्तेमाल करने के अवसर दिए जाएं।
नई शिक्षा व्यवस्था में पढ़ाई को भविष्य की जरूरतों से जोड़ना महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसलिए नई NCERT किताबों में वैज्ञानिक सोच, समस्या समाधान, रचनात्मकता, डिजिटल क्षमता और अन्य जरूरी कौशल पर अधिक ध्यान दिए जाने की संभावना है।
इस तरह पाठ्यपुस्तकें छात्रों को परीक्षा की तैयारी के साथ-साथ उच्च शिक्षा और कार्यक्षेत्र की चुनौतियों के लिए भी तैयार करने में मदद कर सकती हैं।
शिक्षा मंत्री ने अपने संबोधन में Artificial Intelligence (AI) के तेजी से बढ़ते प्रभाव का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पिछले दो वर्षों में AI तेजी से हमारे रोजमर्रा के जीवन का हिस्सा बना है।
आज AI का इस्तेमाल पढ़ाई, कंटेंट तैयार करने, जानकारी खोजने, अनुवाद, कोडिंग, रिसर्च और कई अन्य क्षेत्रों में हो रहा है। ऐसे में स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों का AI से परिचित होना भी जरूरी होता जा रहा है।
मंत्री के अनुसार, जैसे-जैसे AI का उपयोग बढ़ रहा है, वैसे-वैसे कम उम्र के बच्चे भी इसका इस्तेमाल कर रहे हैं। इसलिए केवल AI के बारे में जानकारी देना पर्याप्त नहीं होगा।
छात्रों को यह समझना भी जरूरी है कि AI का इस्तेमाल सुरक्षित, जिम्मेदार और सोच-समझकर कैसे किया जाए। उन्हें AI से मिलने वाली जानकारी की जांच करना, गलत या भ्रामक जानकारी को पहचानना और अपनी पढ़ाई में AI का उचित इस्तेमाल करना सीखना होगा।
नई पाठ्यपुस्तकों और पाठ्यक्रमों में AI से जुड़े विषयों को शामिल करने का उद्देश्य छात्रों को इस तकनीक से डराने के बजाय उन्हें इसके अवसरों और सीमाओं को समझने में सक्षम बनाना हो सकता है।
केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने कहा कि National Education Policy (NEP) इन बदलती जरूरतों और चुनौतियों को ध्यान में रखती है।
NEP 2020 में शिक्षा को अधिक समग्र, कौशल आधारित और विद्यार्थी-केंद्रित बनाने पर जोर दिया गया है। इसमें रटने की बजाय समझ, प्रयोग, आलोचनात्मक सोच और विभिन्न कौशल विकसित करने की दिशा में बदलाव की बात की गई है।
AI जैसी नई तकनीक के बढ़ते प्रभाव के कारण शिक्षा व्यवस्था को लगातार बदलते रहना होगा। पाठ्यक्रमों और शिक्षण तरीकों को ऐसी तकनीकी प्रगति के अनुरूप तैयार करना आने वाले वर्षों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
शिक्षा मंत्री ने बच्चों द्वारा AI के इस्तेमाल को लेकर माता-पिता की भूमिका पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि माता-पिता को इस विषय में अधिक जागरूक किया जाना चाहिए और बच्चों को उचित सलाह और निगरानी मिलनी चाहिए।
आज बच्चे घर पर स्मार्टफोन, कंप्यूटर और इंटरनेट के माध्यम से कई AI tools तक आसानी से पहुंच सकते हैं। ऐसे में माता-पिता के लिए यह समझना जरूरी है कि बच्चे AI का इस्तेमाल किस उद्देश्य से कर रहे हैं।
बच्चों पर केवल प्रतिबंध लगाने के बजाय उन्हें AI के सही और गलत इस्तेमाल के बीच अंतर समझाना अधिक उपयोगी हो सकता है।
उदाहरण के लिए, AI का उपयोग किसी विषय को समझने, नए विचार खोजने या भाषा सीखने में मदद के लिए किया जा सकता है। लेकिन यदि छात्र बिना समझे AI से पूरा homework या assignment तैयार करवाने लगें, तो इससे उनकी सीखने की क्षमता प्रभावित हो सकती है।
इसलिए स्कूल और माता-पिता दोनों को मिलकर बच्चों को AI के जिम्मेदार इस्तेमाल की दिशा दिखाने की आवश्यकता होगी।
प्रल्हाद जोशी ने भारत की युवा आबादी को देश की महत्वपूर्ण ताकत बताया। उन्होंने कहा कि कई देशों में उम्रदराज आबादी बढ़ रही है, जबकि भारत के पास बड़ी युवा आबादी है।
यह जनसांख्यिकीय लाभ भारत के लिए महत्वपूर्ण अवसर पैदा कर सकता है। लेकिन युवा आबादी तभी आर्थिक और सामाजिक ताकत में बदल सकती है जब उसे गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, कौशल और रोजगार के अवसर मिलें।
भारत की युवा आबादी को सही शिक्षा और कौशल प्रदान करके देश न केवल अपने विकास को गति दे सकता है, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी अपनी मानव संसाधन क्षमता का योगदान बढ़ा सकता है।
तकनीक, AI, विज्ञान, इंजीनियरिंग, स्वास्थ्य सेवा, डिजिटल सेवाओं और अन्य क्षेत्रों में प्रशिक्षित युवाओं की मांग दुनिया के कई हिस्सों में बढ़ रही है। ऐसे में शिक्षा व्यवस्था को भविष्य के रोजगार और वैश्विक अवसरों को ध्यान में रखकर विकसित करना जरूरी होगा।
शिक्षा मंत्री ने NCERT की भूमिका को Viksit Bharat के निर्माण से भी जोड़ा। उनके अनुसार, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के जरिए ऐसे कुशल और सक्षम मानव संसाधन तैयार करना जरूरी है जो देश के विकास में योगदान दे सकें और वैश्विक जिम्मेदारियों को भी समझें।
NCERT देश की स्कूली शिक्षा में पाठ्यक्रम और पाठ्यपुस्तकों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसलिए नई किताबों में आधुनिक तकनीक, कौशल और बदलती सामाजिक-आर्थिक जरूरतों को शामिल करना लंबे समय में महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकता है।
कक्षा 10 से 12 की नई किताबों से छात्रों को अधिक आधुनिक और व्यावहारिक शिक्षा मिलने की उम्मीद है। इनमें विषयों को समझने के साथ-साथ तकनीक और वास्तविक जीवन से जोड़ने पर जोर दिया जा सकता है।
AI और डिजिटल तकनीक को पाठ्यक्रम से जोड़ना भी आने वाले समय में महत्वपूर्ण होगा। हालांकि, नई किताबों में किन विषयों को किस रूप में शामिल किया जाएगा, इसकी पूरी जानकारी संबंधित पाठ्यक्रम और पाठ्यपुस्तकों के आधिकारिक रूप से जारी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।
कक्षा 10 से 12 के लिए नई NCERT पाठ्यपुस्तकों की तैयारी भारतीय स्कूली शिक्षा में एक महत्वपूर्ण बदलाव का हिस्सा है। शिक्षा मंत्री प्रल्हाद जोशी के अनुसार, इन किताबों पर मिशन मोड में काम किया जा रहा है, जबकि कक्षा 1 से 9 के लिए नए NCF के अनुरूप किताबें पहले ही जारी हो चुकी हैं।
AI के बढ़ते इस्तेमाल को देखते हुए शिक्षा व्यवस्था के सामने नई चुनौतियां और अवसर दोनों हैं। छात्रों को AI का इस्तेमाल करना सिखाने के साथ-साथ उन्हें इसके जिम्मेदार और सुरक्षित उपयोग के बारे में भी जागरूक करना जरूरी होगा।
भारत की बड़ी युवा आबादी को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और आधुनिक कौशल से जोड़ना देश के लिए बड़ा अवसर है। यदि नई पाठ्यपुस्तकें ज्ञान के साथ कौशल, डिजिटल समझ, आलोचनात्मक सोच और जिम्मेदारी पर पर्याप्त ध्यान देती हैं, तो वे छात्रों को बदलती दुनिया के लिए बेहतर तरीके से तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।