राष्ट्रीय आयुष मिशन के तहत देशभर में बढ़ेगा आयुष संस्थानों का नेटवर्क

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06 Aug 2026
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News Synopsis

भारत सरकार देश की पारंपरिक चिकित्सा प्रणाली को मजबूत बनाने के लिए राष्ट्रीय आयुष मिशन (National AYUSH Mission - NAM) के तहत आयुष संस्थानों, अस्पतालों और स्वास्थ्य सुविधाओं का तेजी से विस्तार कर रही है। यह मिशन केंद्र प्रायोजित योजना (Centrally Sponsored Scheme) के रूप में राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों के सहयोग से संचालित किया जा रहा है।

इसका उद्देश्य आयुर्वेद, योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, सिद्ध, होम्योपैथी और अन्य आयुष चिकित्सा पद्धतियों पर आधारित गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं को देशभर में अधिक सुलभ बनाना है।

सरकार नए मेडिकल कॉलेज, एकीकृत आयुष अस्पताल, डिस्पेंसरी और आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं के विकास के माध्यम से चिकित्सा शिक्षा, शोध, रोगों की रोकथाम और समग्र स्वास्थ्य सेवाओं को बढ़ावा देना चाहती है। इस पहल से शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिलने की उम्मीद है।

साथ ही, यह मिशन भारत में पारंपरिक चिकित्सा प्रणाली को और अधिक मजबूत बनाकर वैश्विक स्तर पर देश की पहचान को भी मजबूत करेगा।

राष्ट्रीय आयुष मिशन: पारंपरिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की व्यापक पहल (National AYUSH Mission: A Comprehensive Healthcare Initiative)

आयुष स्वास्थ्य सेवाओं के विकास के लिए सरकार की प्रमुख योजना (Government's Flagship Programme for Strengthening AYUSH Healthcare)

राष्ट्रीय आयुष मिशन भारत सरकार की प्रमुख योजनाओं में से एक है, जिसका उद्देश्य देशभर में आयुष आधारित स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाना और उनका विस्तार करना है।

इस योजना के तहत राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों को नए आयुष अस्पतालों, मेडिकल कॉलेजों और स्वास्थ्य केंद्रों की स्थापना के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। साथ ही, पहले से मौजूद संस्थानों के आधुनिकीकरण और स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार पर भी विशेष ध्यान दिया जाता है।

केंद्र और राज्यों के बीच सहयोग के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जाता है कि प्रत्येक क्षेत्र की स्थानीय स्वास्थ्य आवश्यकताओं के अनुसार योजनाओं को लागू किया जाए।

राष्ट्रीय आयुष मिशन का उद्देश्य केवल नई स्वास्थ्य सुविधाएं विकसित करना ही नहीं, बल्कि पारंपरिक चिकित्सा प्रणाली को देश की मुख्यधारा की स्वास्थ्य व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाना भी है।

नए आयुष मेडिकल कॉलेजों से चिकित्सा शिक्षा को मिलेगा बढ़ावा (New AYUSH Colleges to Improve Medical Education)

मेडिकल शिक्षा और शोध को मिलेगा नया विस्तार (Expansion of Medical Education and Research)

राष्ट्रीय आयुष मिशन के तहत सरकार की प्रमुख प्राथमिकताओं में से एक देश में आयुष मेडिकल कॉलेजों की संख्या बढ़ाना है।

जिन राज्यों में आयुष शिक्षा संस्थानों की कमी है, वहां नए कॉलेज स्थापित करने के लिए सरकार वित्तीय सहायता प्रदान कर रही है।

नए कॉलेज खुलने से अधिक संख्या में प्रशिक्षित आयुष डॉक्टर और स्वास्थ्य विशेषज्ञ तैयार होंगे, जिससे देशभर में आयुष सेवाओं की बढ़ती मांग को पूरा करने में मदद मिलेगी।

इसके साथ ही आयुर्वेद, योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी जैसे विषयों में शोध, व्यावसायिक प्रशिक्षण और चिकित्सा शिक्षा को भी नया प्रोत्साहन मिलेगा।

इस पहल से भविष्य में कुशल स्वास्थ्य पेशेवरों की उपलब्धता बढ़ेगी और पारंपरिक चिकित्सा प्रणाली को और अधिक मजबूती मिलेगी।

देशभर में विकसित किए जा रहे हैं एकीकृत आयुष अस्पताल (Integrated AYUSH Hospitals Being Developed)

आधुनिक सुविधाओं के साथ मिलेंगी समग्र स्वास्थ्य सेवाएं (Comprehensive Healthcare Services with Modern Infrastructure)

देशभर में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए सरकार विभिन्न क्षेत्रों में एकीकृत (इंटीग्रेटेड) आयुष अस्पतालों की स्थापना को बढ़ावा दे रही है।

इस योजना के तहत निम्न प्रकार के अस्पताल स्थापित करने के लिए वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाती है।

  • 50 बेड वाले एकीकृत आयुष अस्पताल।
  • 30 बेड वाले एकीकृत आयुष अस्पताल।
  • 10 बेड वाले एकीकृत आयुष अस्पताल।

इन अस्पतालों का उद्देश्य आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं के साथ पारंपरिक चिकित्सा सेवाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध कराना है।

यहां मरीजों को रोगों की रोकथाम, स्वास्थ्य संवर्धन और उपचार से जुड़ी विभिन्न आयुष सेवाएं प्रदान की जाएंगी।

एकीकृत मॉडल से लोगों के बीच आयुष चिकित्सा पद्धतियों पर विश्वास बढ़ेगा और इन्हें देश की मुख्य स्वास्थ्य व्यवस्था में और अधिक स्थान मिलेगा।

मौजूदा आयुष अस्पतालों और डिस्पेंसरी का किया जा रहा है आधुनिकीकरण (Upgrading Existing Hospitals and Dispensaries)

बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के लिए मजबूत होगा इंफ्रास्ट्रक्चर (Modernising Healthcare Infrastructure for Better Patient Care)

राष्ट्रीय आयुष मिशन केवल नए संस्थानों की स्थापना तक सीमित नहीं है, बल्कि पहले से संचालित सरकारी आयुष अस्पतालों और डिस्पेंसरी को भी आधुनिक बनाया जा रहा है।

इस उद्देश्य के लिए सरकार निम्न कार्यों के लिए वित्तीय सहायता प्रदान कर रही है।

  • सरकारी आयुष अस्पतालों का उन्नयन।
  • मौजूदा आयुष डिस्पेंसरी को मजबूत बनाना।
  • आधुनिक चिकित्सा उपकरण उपलब्ध कराना।
  • स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार करना।

इन प्रयासों से मरीजों को बेहतर उपचार सुविधाएं मिलेंगी, अस्पतालों की कार्यक्षमता बढ़ेगी और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार होगा।

ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों तक पहुंचेगी आयुष चिकित्सा (Extending AYUSH Services to Rural and Remote Areas)

राष्ट्रीय आयुष मिशन का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य उन क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना है, जहां अभी भी आयुष आधारित चिकित्सा सुविधाएं सीमित हैं।

राज्य सरकारों को ऐसे क्षेत्रों में नई आयुष डिस्पेंसरी स्थापित करने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है।

इन नई स्वास्थ्य इकाइयों के शुरू होने से स्थानीय लोगों को अपने घर के नजदीक सस्ती और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकेंगी। इससे इलाज के लिए लंबी दूरी तय करने की आवश्यकता भी कम होगी।

यह पहल ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच स्वास्थ्य सेवाओं के अंतर को कम करने और पूरे देश में संतुलित स्वास्थ्य विकास सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

आयुष्मान आरोग्य मंदिरों के माध्यम से प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को मिल रही मजबूती (Ayushman Arogya Mandirs Strengthening Primary Healthcare)

राष्ट्रीय आयुष मिशन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा आयुष्मान आरोग्य मंदिर (AYUSH) भी हैं। इन केंद्रों का उद्देश्य समुदाय स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाना और लोगों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करना है।

इन केंद्रों के माध्यम से आयुर्वेद, योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी जैसी पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों को प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ा जा रहा है।

सरकार का लक्ष्य केवल बीमारियों का इलाज करना नहीं है, बल्कि लोगों को रोगों से बचाव, समय पर पहचान और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए जागरूक करना भी है।

इस पहल से दीर्घकालिक बीमारियों का बोझ कम करने, स्वास्थ्य जागरूकता बढ़ाने और प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाने में मदद मिलेगी।

राष्ट्रीय आयुष मिशन के सफल क्रियान्वयन में राज्य सरकारों की अहम भूमिका (State Governments Play a Key Role)

राष्ट्रीय आयुष मिशन का संचालन केंद्र और राज्य सरकारों की साझेदारी के मॉडल पर किया जा रहा है।

इस योजना के तहत राज्य सरकारें और केंद्र शासित प्रदेश अपनी स्टेट एनुअल एक्शन प्लान (State Annual Action Plan - SAAP) तैयार करके केंद्र सरकार को भेजते हैं। इन प्रस्तावों के आधार पर उन्हें वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाती है।

यह व्यवस्था प्रत्येक राज्य को अपनी स्थानीय स्वास्थ्य आवश्यकताओं, जनसंख्या और उपलब्ध स्वास्थ्य ढांचे के अनुसार परियोजनाओं को प्राथमिकता देने की सुविधा देती है।

इस सहयोगात्मक मॉडल से सरकारी धन का बेहतर उपयोग सुनिश्चित होता है और राज्यों को अपनी आवश्यकताओं के अनुसार स्वास्थ्य सेवाओं का विकास करने में मदद मिलती है।

आयुष इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए सरकार का बड़ा निवेश (Significant Investment in AYUSH Infrastructure)

भारत सरकार ने पिछले एक दशक में आयुष स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए बड़े स्तर पर निवेश किया है।

वित्त वर्ष 2015 से वित्त वर्ष 2026 के बीच राष्ट्रीय आयुष मिशन के तहत राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की स्वीकृत परियोजनाओं के लिए ₹64,069.92 करोड़ की वित्तीय सहायता जारी की गई।

इस निवेश से देशभर में आयुष अस्पतालों, मेडिकल कॉलेजों, डिस्पेंसरी और अन्य स्वास्थ्य सुविधाओं के विकास को गति मिली है।

साथ ही, चिकित्सा शिक्षा, अनुसंधान और पारंपरिक स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार में भी उल्लेखनीय प्रगति हुई है।

सरकार द्वारा लगातार वित्तीय सहायता उपलब्ध कराना यह दर्शाता है कि वह भारत की स्वदेशी चिकित्सा प्रणालियों को दीर्घकालिक रूप से मजबूत बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।

उत्तर प्रदेश, राजस्थान और मध्य प्रदेश रहे प्रमुख लाभार्थी (Uttar Pradesh, Rajasthan and Madhya Pradesh Received the Highest Support)

राष्ट्रीय आयुष मिशन के तहत कई राज्यों को स्वास्थ्य सेवाओं के विकास के लिए बड़ी वित्तीय सहायता प्रदान की गई है।

सबसे अधिक सहायता प्राप्त करने वाले राज्यों में शामिल हैं।

  • उत्तर प्रदेश – सबसे अधिक वित्तीय सहायता प्राप्त करने वाला राज्य।

  • राजस्थान – दूसरे स्थान पर रहा।

  • मध्य प्रदेश – तीसरे सबसे बड़े लाभार्थी के रूप में उभरा।

इन राज्यों में प्राप्त धनराशि का उपयोग आयुष अस्पतालों, मेडिकल कॉलेजों, डिस्पेंसरी और स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार के लिए किया जा रहा है।

इससे लाखों लोगों को बेहतर और सुलभ आयुष स्वास्थ्य सेवाएं मिलने की उम्मीद है।

आयुष क्षेत्र के विस्तार से बढ़ेंगे रोजगार और स्वास्थ्य सुविधाएं (Expansion of AYUSH to Boost Healthcare and Employment)

आयुष संस्थानों और स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार से देश को स्वास्थ्य और आर्थिक दोनों स्तरों पर अनेक लाभ मिलने की संभावना है।

इस पहल से मिलने वाले प्रमुख लाभों में शामिल हैं।

  • सस्ती और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं तक बेहतर पहुंच।

  • रोगों की रोकथाम पर आधारित चिकित्सा सेवाओं का विस्तार।

  • चिकित्सा शिक्षा और अनुसंधान को बढ़ावा।

  • डॉक्टरों और स्वास्थ्य पेशेवरों के लिए रोजगार के नए अवसर।

  • ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं का सुदृढ़ीकरण।

  • समग्र स्वास्थ्य (Holistic Healthcare) और वेलनेस को बढ़ावा।

इसके अलावा अस्पतालों, क्लीनिकों, मेडिकल कॉलेजों, वेलनेस सेंटरों और आयुष आधारित उद्योगों के विस्तार से उद्यमिता को भी नई गति मिलेगी।

आयुष शिक्षा, शोध और उपचार का वैश्विक केंद्र बनने की दिशा में भारत (India Moving Towards Becoming a Global Hub for AYUSH Education and Research)

भारत को आयुर्वेद, योग, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी जैसी कई प्राचीन चिकित्सा प्रणालियों का जन्मस्थान माना जाता है।

आयुष संस्थानों और स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार के माध्यम से सरकार भारत को पारंपरिक चिकित्सा के वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में काम कर रही है।

दुनियाभर में प्राकृतिक चिकित्सा, हर्बल दवाओं, योग और रोगों की रोकथाम पर आधारित स्वास्थ्य सेवाओं की मांग लगातार बढ़ रही है।

ऐसे में भारत के पास आयुष शिक्षा, शोध, उपचार और वेलनेस सेवाओं के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व हासिल करने का बड़ा अवसर है।

राष्ट्रीय आयुष मिशन इस दीर्घकालिक लक्ष्य को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

निष्कर्ष (Conclusion)

राष्ट्रीय आयुष मिशन के तहत आयुष संस्थानों, अस्पतालों और स्वास्थ्य सुविधाओं का लगातार विस्तार भारत सरकार की सुलभ, किफायती और समग्र स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने की मजबूत प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों के सहयोग से यह मिशन चिकित्सा शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं, अनुसंधान और रोगों की रोकथाम को नई मजबूती दे रहा है।

जैसे-जैसे नए आयुष कॉलेज, अस्पताल, डिस्पेंसरी और आयुष्मान आरोग्य मंदिर शुरू होंगे, वैसे-वैसे देशभर में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध होंगी, रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और भारत की पारंपरिक चिकित्सा प्रणाली को वैश्विक स्तर पर नई पहचान मिलेगी।

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