आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से बदलते ग्लोबल टेक परिदृश्य के बीच टाटा ग्रुप की दिग्गज IT कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) एक निर्णायक दौर से गुजर रही है। जानकारी के मुताबिक टाटा संस के चेयरमैन N. Chandrasekaran अब TCS के साथ सीधे तौर पर जुड़ गए हैं, ताकि कंपनी को इस चुनौतीपूर्ण संक्रमण काल से सुरक्षित निकाला जा सके और ग्रुप के सबसे बड़े कैश जेनरेटर को मजबूत रखा जा सके।
रिपोर्ट के मुताबिक सूत्रों के हवाले से पता चला कि नए फोकस का एक अहम हिस्सा TCS को पूरे टाटा ग्रुप के लिए डिफॉल्ट AI पार्टनर के रूप में स्थापित करना है। इसके साथ ही AI-केंद्रित स्टार्टअप्स के अधिग्रहण पर भी गंभीरता से विचार किया जा रहा है, ताकि AI ट्रांसफॉर्मेशन की रफ्तार तेज की जा सके। एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक TCS का पारंपरिक बिजनेस मॉडल अब पहले जैसा नहीं रह सकता। उन्होंने बताया कि चंद्रशेखरन ने टॉप मैनेजमेंट को साफ संदेश दिया है, कि ग्रोथ और मार्केट शेयर बचाने के लिए हर जरूरी कदम उठाए जाएं।
वीकेंड में दुबई में हुए एक सालाना इवेंट में 700 से ज्यादा TCS कर्मचारियों को संबोधित करते हुए चंद्रशेखरन ने AI के असर को लेकर लगातार अपस्किलिंग की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने संकेत दिया कि आने वाले समय में टेक स्किल्स का तेजी से बदलना तय है, और कर्मचारियों को इसके लिए खुद को तैयार रखना होगा।
टाटा ग्रुप अपने विविध बिजनेस पोर्टफोलियो को सपोर्ट करने के लिए TCS के डिविडेंड पर काफी हद तक निर्भर है। 2024 तक टाटा संस के पास TCS की 71.74 फीसदी हिस्सेदारी थी, जबकि टाटा संस की करीब 80 फीसदी डिविडेंड इनकम TCS से आती थी। यही वजह है, कि TCS की ग्रोथ और स्थिरता टाटा संस के लिए स्ट्रैटेजिक रूप से बेहद अहम हो जाती है। चंद्रशेखरन यह सुनिश्चित करने के इच्छुक हैं, कि टेक्नोलॉजी और क्लाइंट डिमांड में तेजी से हो रहे बदलावों के बीच इसकी ग्रोथ स्ट्रेटेजी मजबूती से पटरी पर बनी रहे।
टाटा संस का नेतृत्व संभालने से पहले चंद्रशेखरन 2009 से 2017 तक TCS के CEO रह चुके हैं। सूत्रों के मुताबिक उन्हें हमेशा कंपनी के हर पहलू की गहरी समझ रही है, लेकिन मौजूदा हालात असाधारण हैं, और इसी वजह से वह TCS के इस बदलाव में खुद करीब से शामिल हैं।
TCS के चीफ एग्जीक्यूटिव के कृतिवासन और चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर आरती सुब्रमण्यम को चंद्रशेखरन के भरोसेमंद लेफ्टिनेंट के तौर पर देखा जाता है। उन्होंने चंद्रशेखरन के TCS चीफ एग्जीक्यूटिव के कार्यकाल के दौरान उनके साथ मिलकर काम किया था, और उनसे उम्मीद की जाती है, कि वे स्ट्रेटेजी को सख्ती से, शुरू से आखिर तक लागू करेंगे।
बदलती वास्तविकताओं के बीच TCS ने पहले ही कई कदम उठाए हैं, जिनमें वर्कफोर्स को तर्कसंगत बनाना, डेटा सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश, कंसल्टिंग पर बढ़ता फोकस और रणनीतिक अधिग्रहण शामिल हैं। जनवरी में कंपनी ने सेल्स फोर्स कंसल्टिंग फर्म कोस्टल क्लाउड को करीब 700 मिलियन डॉलर में खरीदा, जो अब तक का उसका सबसे बड़ा अधिग्रहण है।