मुथूट फिनकॉर्प, 139 साल पुराने मुथूट पप्पाचन ग्रुप की प्रमुख वित्तीय सेवा कंपनी ने अपनी विकास रणनीति के तहत एक बड़ा कदम उठाया है। कंपनी ने ₹4,000 करोड़ के प्रारंभिक सार्वजनिक निर्गम (IPO) की योजना को मंजूरी दी है। इसके साथ ही बोर्ड ने शेयर विभाजन (share split), कर्ज जारी करने और अन्य फंड जुटाने के कई प्रस्ताव भी स्वीकृत किए हैं। यह कदम FY26 में धीमी IPO गतिविधियों के बीच कंपनी की मजबूत विस्तार योजनाओं को दर्शाता है।
मुथूट फिनकॉर्प ने इक्विटी शेयरों के माध्यम से ₹4,000 करोड़ तक जुटाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। यह IPO ₹10 अंकित मूल्य वाले नए इक्विटी शेयरों का फ्रेश इश्यू होगा। हालांकि, यह प्रस्ताव शेयरधारकों की मंजूरी और नियामकीय स्वीकृतियों पर निर्भर रहेगा।
कंपनी ने स्पष्ट किया है, कि IPO की अंतिम लॉन्चिंग बाजार की स्थितियों, निवेशक भावना और नियामकीय मंजूरियों पर निर्भर करेगी। यह निर्णय भारत के पूंजी बाजार में मौजूदा अनिश्चितता को भी दर्शाता है, जहां FY25 की तुलना में IPO गतिविधियां धीमी रही हैं।
कंपनी ने अपने पूंजी ढांचे को मजबूत करने के लिए शेयर विभाजन को भी मंजूरी दी है। ₹10 फेस वैल्यू वाले प्रत्येक शेयर को विभाजित कर पांच ₹2 फेस वैल्यू वाले शेयरों में बदला जाएगा।
इस कदम का उद्देश्य शेयरों की तरलता बढ़ाना, रिटेल निवेशकों की भागीदारी बढ़ाना और शेयरों को अधिक सुलभ बनाना है। साथ ही, कंपनी ने अपने मेमोरेंडम ऑफ एसोसिएशन में आवश्यक संशोधनों को भी मंजूरी दी है।
IPO के अलावा मुथूट फिनकॉर्प ने कई अन्य फंड जुटाने के प्रस्तावों को भी मंजूरी दी है। कंपनी जुलाई 2026 से जून 2027 के बीच ₹4,000 करोड़ तक नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर्स (NCDs) जारी करेगी।
इसके अलावा ₹4,000 करोड़ तक निजी प्लेसमेंट के जरिए फंड जुटाने की भी योजना है, जिसमें NCDs, परपेचुअल डेब्ट इंस्ट्रूमेंट और सबऑर्डिनेटेड डेब्ट शामिल हो सकते हैं। ये सभी प्रस्ताव शेयरधारकों की मंजूरी पर निर्भर हैं।
कंपनी ने शॉर्ट टर्म लिक्विडिटी को बेहतर बनाने के लिए कमर्शियल पेपर जारी करने की भी मंजूरी दी है। इसकी कुल सीमा ₹30,000 करोड़ निर्धारित की गई है, जबकि किसी भी समय अधिकतम ₹10,000 करोड़ की आउटस्टैंडिंग सीमा रहेगी।
यह संरचना कंपनी को कार्यशील पूंजी और अल्पकालिक वित्तीय जरूरतों को बेहतर ढंग से प्रबंधित करने में मदद करेगी।
मुथूट फिनकॉर्प ने FY26 में मजबूत प्रदर्शन दर्ज किया है। कंपनी का शुद्ध लाभ बढ़कर ₹1,640 करोड़ पहुंच गया, जो FY25 के ₹787 करोड़ से दोगुना से अधिक है।
कंसोलिडेटेड आधार पर शुद्ध लाभ 204% बढ़कर ₹1,847.62 करोड़ हो गया। यह वृद्धि कंपनी की मजबूत परिचालन दक्षता और बढ़ते लोन डिमांड को दर्शाती है।
कंपनी का कंसोलिडेटेड राजस्व FY26 में 32% बढ़कर ₹11,227.80 करोड़ पहुंच गया। यह वृद्धि लोन विस्तार, ब्याज आय में सुधार और रिटेल वित्तीय सेवाओं के मजबूत प्रदर्शन के कारण हुई।
कंपनी की कुल Assets Under Management (AUM) ₹73,448.82 करोड़ रही, जो इसके बढ़ते लोन पोर्टफोलियो और मजबूत ग्राहक आधार को दर्शाती है।
भारत के IPO बाजार में FY26 के दौरान सुस्ती देखी गई है, जबकि FY25 में रिकॉर्ड स्तर पर फंड जुटाया गया था। पहले की तुलना में अब अधिकतर IPO सेकेंडरी ट्रांजैक्शन के रूप में हो रहे हैं, जहां मौजूदा निवेशक अपनी हिस्सेदारी बेचते हैं।
निवेशकों की सतर्कता और वैल्यूएशन को लेकर चिंताओं के कारण भी IPO गतिविधियों में कमी आई है। ऐसे माहौल में मुथूट फिनकॉर्प का IPO लाना कंपनी के भरोसे और मजबूत फंडामेंटल्स को दर्शाता है।
मुथूट फिनकॉर्प भारत के नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी (NBFC) सेक्टर में एक प्रमुख खिलाड़ी है। कंपनी मुख्य रूप से गोल्ड लोन और रिटेल लेंडिंग सेवाएं प्रदान करती है।
IPO और अन्य फंडरेजिंग योजनाएं कंपनी की कैपिटल बेस को मजबूत करेंगी और भविष्य में डिजिटल वित्तीय सेवाओं के विस्तार में मदद करेंगी।
निष्कर्ष:
मुथूट फिनकॉर्प का ₹4,000 करोड़ IPO और व्यापक फंडरेजिंग योजना कंपनी की मजबूत विकास रणनीति को दर्शाता है। शेयर विभाजन, कर्ज जारी करने और पूंजी विस्तार जैसे कदम कंपनी को NBFC सेक्टर में आगे बढ़ाने में मदद करेंगे।
FY26 के मजबूत वित्तीय प्रदर्शन के आधार पर कंपनी अपने आगामी IPO और विस्तार योजनाओं के लिए अच्छी स्थिति में नजर आ रही है।