भले ही एशिया के सबसे अमीर कारोबारी मुकेश अंबानी की कंपनी Reliance Industries के शेयरों में बुधवार को सेकंड हाफ में तेजी देखने को मिली हो, लेकिन कारोबारी सत्र के दौरान कंपनी के शेयरों में 1.50 फीसदी की गिरावट देखने को मिली थी, और कंपनी का शेयर 5 साल के लोओर लेवल पर चला गया था, खास बात तो ये है, कि जनवरी के महीने में 12.50 फीसदी से ज्यादा की गिरावट देखने को मिल चुकी है, जिसकी वजह से कंपनी की वैल्यूएशन में 2.66 लाख करोड़ यानी 29 बिलियन डॉलर की कमी देखने को मिल चुकी है, आइए बताते हैं, कि आखिर रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरों में किस तरह की गिरावट देखने को मिल रही है, और आने वाले दिनों में किस तरह के आंकड़े देखने को मिल सकते हैं।
जानकारों की मानें तो रिटेल कारोबार में मंदी और रूस से कच्चे तेल के इंपोर्ट में गिरावट के कारण ऑपरेटिंग और ट्रांजैक्शन (O2C) मार्जिन पर पड़ने वाले प्रभाव की आशंकाओं के चलते ये शेयर पिछले 5 वर्षों में सबसे अधिक ओवरसोल्ड स्तर पर कारोबा रकर रहे हैं, खास बात तो ये है, कि पिछले शुक्रवार को घोषित तीसरी तिमाही के नतीजों से भी शेयर की कीमत में कोई सुधार नहीं हुआ, रिपोर्ट के अनुसार मंगलवार को निफ्टी ब्लूचिप स्टॉक का 14-दिनों का रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (आरएसआई), जो प्रमुख तेजी का इंडीकेटर है, गिरकर 24 पर आ गया।
रिपोर्ट के अनुसार पिछले पांच वर्षों में आरएसआई इतना कम कभी नहीं रहा, जो अत्यधिक बिकवाली का संकेत देता है, आरआईएल के शेयर 2011 के बाद से साल की सबसे खराब शुरुआत दर्ज करने की राह पर हैं, तीसरी तिमाही के नतीजों के बाद रिटेल सेक्टर में गिरावट के कारण अधिकांश विश्लेषकों ने शेयर अनुमानों में 1-3 फीसदी की कटौती की है, आइए बताते हैं, कि आखिर जियो के आईपीओ आने से पहले रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरों का गिरावट किस तरह का संकेत दे रहा है।
जिन 28 ब्रोकरेज फर्मों ने इस स्टॉक पर कवरेज दी है, उनमें से एवरेज टारगेट प्राइस 1,717 रुपए रहा, जो मौजूदा मार्केट प्राइस से 23 फीसदी से ज्यादा की संभावना दर्शाता है, कम से कम 11 विश्लेषकों का टारगेट प्राइस 1,750 रुपए या उससे अधिक है, इनमें से 7 ब्रोकरेज फर्मों का टारगेट प्राइस 1,800 रुपए या उससे अधिक है, इन 28 ब्रोकरेज फर्मों में से 26 ने स्टॉक खरीदने/बढ़ाने की सिफारिश की है।
रिटेल सेक्टर के खराब प्रदर्शन का कारण कमर्शियल के तेजी से विस्तार फैशन और लाइफस्टाइल सेगमेंट में मंदी और नए लेबर कोड का प्रभाव बताया गया है, विश्लेषकों ने यह भी कहा है, कि रिटेल सेक्टर के लिए चौथी तिमाही का आधार मजबूत है, और निकट भविष्य में विकास दर मामूली रहने की संभावना है, विश्लेषकों द्वारा बताए गए निकट भविष्य के फैक्टर जियो की लिस्टिंग, टैरिफ में वृद्धि, नए ऊर्जा पारिस्थितिकी तंत्र का विकास और रिटेल सेक्टर की वृद्धि में सुधार हैं।
एचएसबीसी ने रिपोर्ट में कहा कि हम रिटेल सेक्टर में सुधार को लेकर पॉजिटिव बने हुए हैं, जियो लगातार बढ़ रहा है, और अपने घोषित आईपीओ के साथ मूल्य वृद्धि के लिए तैयार है, ऑनलाइन-टू-कॉमर्स (O2C) कारोबार में मांग में क्रमिक सुधार देखा जा रहा है, हालांकि हम अभी भी पूर्व के हाई मार्जिन को लेकर संशय में हैं, हमें यह भी उम्मीद है, कि नई ऊर्जा पूरी तरह से विकसित होने पर विकास का एक नया इंजन बनेगी, कंपनी ने ये भी कहा कि तीसरी तिमाही एक अस्थायी गिरावट थी, और गति पकड़ रही है, विश्लेषक बढ़ते जियो पॉलिटिकज टेंशन और रूसी कच्चे तेल के आयात पर बढ़ते ध्यान के कारण ऑनलाइन-टू-कॉमर्स कारोबार को लेकर सतर्क हैं।
कोटक इक्विटीज ने कहा कि जैसे-जैसे रूसी कच्चे तेल की जगह अधिक महंगे कच्चे तेल का इस्तेमाल बढ़ रहा है, O2C सेक्टर में चुनौतियां बनी हुई हैं, रिलायंस के लिए हमारे जीआरएम अनुमान रूढ़िवादी रहे हैं, क्योंकि हमारा मानना है, कि रूसी कच्चे तेल के आयात में गिरावट से कच्चे तेल की लागत (दुबई कच्चे तेल जैसे बेंचमार्क की तुलना में) बढ़ेगी और मार्जिन प्रभावित होगा।
खास बात तो ये है, कि रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरों में 3 हफ्तों में 12.50 फीसदी की गिरावट देखने को मिल चुकी है, आंकड़ों को देखें तो रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयर 31 दिसंबर 2025 को 1569.40 रुपए पर थे, जबकि 21 जनवरी को कारोबारी सत्र के दौरान कंपनी के शेयर 1373 रुपए पर आ गया, इसका मतलब है, कि कंपनी के शेयरों में 12.51 फीसदी की गिरावट देखने को मिल चुकी है, वैसे सेकंड हाफ के बाद कंपनी के शेयरों में रिकवरी देखने को मिली है, दोपहर 3 बजकर 10 मिनट पर कंपनी का शेयर 0.83 फीसदी की तेजी के साथ 1404.95 रुपए पर कारोबार कर रहा है।
जनवरी के महीने में 12.50 फीसदी से ज्यादा की गिरावट की वजह से कंपनी की वैल्यूएशन में काफी गिरावट देखने को मिल चुकी है, खास बात को ये है, कि कारोबारी सत्र के दौरान कंपनी की वैल्यूएशन 19 लाख करोड़ रुपए से भी कम हो गई थी, पिछले साल के आखिरी कारोबारी दिन कंपनी की वैल्यूएशन 21,22,655.42 करोड़ रुपए थी, जोकि 21 जनवरी को कंपनी का मार्केट कैप 18,57,019.17 करोड़ रुपए पर आ गया था, इसका मतलब है, कि की 3 हफ्तों में वैल्यूएशन में 2,65,636.25 करोड़ रुपए की कमी देखने को मिल चुकी है।