Mukesh Ambani के नेतृत्व वाली रिलायंस इंडस्ट्रीज के Q4FY26 नतीजों में ग्रोथ और दबाव दोनों की झलक दिखी। कंपनी का रेवेन्यू बढ़ा, लेकिन मुनाफा सालाना और तिमाही दोनों आधार पर गिर गया है। तिमाही आधार पर मुनाफे में जहां करीब 4 फीसदी की गिरावट आई है। वहीं सालाना आधार पर यह गिरावट डबल डिजिट में पहुंच गई है। O2C सेगमेंट की कमजोरी सबसे बड़ा कारण रही, जबकि Jio और रिटेल ने कुछ हद तक संतुलन बनाया।
रिलायंस के Q4 नतीजे मिक्स्ड रहे। रेवेन्यू में ग्रोथ दिखी, लेकिन O2C की कमजोरी के चलते मुनाफा दबाव में रहा। Jio और रिटेल ने सहारा दिया, लेकिन आने वाले समय में मार्जिन रिकवरी ही स्टॉक की दिशा तय करेगी।
Reliance Industries का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट मार्च तिमाही (Q4FY26) में ₹16,971 करोड़ रहा, जो पिछले साल की समान तिमाही के ₹19,407 करोड़ से करीब ₹2,436 करोड़ कम है। यानी सालाना आधार पर मुनाफे में करीब 12.5% की गिरावट दर्ज हुई। वहीं ऑपरेशन से रेवेन्यू ₹2,69,496 करोड़ रहा, जो पिछले साल के ₹2,64,573 करोड़ से हल्की बढ़त दिखाता है। तिमाही आधार पर देखें, तो दिसंबर तिमाही में कंपनी का नेट प्रॉफिट ₹18,645 करोड़ रहा था। इस तरह तिमाही से तिमाही आधार पर प्रॉफिट 3.9% घटा है।
कंपनी के नतीजों पर सबसे बड़ा असर ऑयल-टू-केमिकल (O2C) सेगमेंट की कमजोरी का रहा। कमजोर ग्लोबल डिमांड, रिफाइनिंग मार्जिन में गिरावट और केमिकल स्प्रेड्स में नरमी के चलते ऑपरेटिंग मार्जिन दबाव में रहे, जिसका सीधा असर मुनाफे पर पड़ा।
जहां O2C दबाव में रहा, वहीं डिजिटल सर्विसेज (Jio) ने मजबूत सब्सक्राइबर ग्रोथ और ARPU सुधार के जरिए स्थिर कमाई बनाए रखी। रिटेल बिजनेस में भी कंजम्प्शन डिमांड बनी रही, जिससे ग्रोथ सपोर्ट मिला। इन दोनों सेगमेंट्स ने कुल प्रदर्शन को संतुलित करने में अहम भूमिका निभाई।
कंपनी के बोर्ड ने वित्त वर्ष 2026 के लिए ₹10 फेस वैल्यू वाले प्रति शेयर पर ₹6 डिविडेंड की सिफारिश की है, जो निवेशकों के लिए एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।
Q4FY26 में O2C सेगमेंट का प्रदर्शन मिश्रित रहा। रेवेन्यू 12% बढ़कर करीब ₹1.84 लाख करोड़ पहुंचा, लेकिन प्रॉफिटेबिलिटी पर दबाव दिखा और EBITDA 4% घटकर ₹14,520 करोड़ रह गया। बढ़ती क्रूड कीमतें, ऊंची फ्रेट और इंश्योरेंस लागत, कमजोर केमिकल स्प्रेड्स और विंडफॉल टैक्स जैसे फैक्टर्स ने मार्जिन को प्रभावित किया, जिससे यह सेगमेंट पूरे नतीजों पर बोझ बना।
डिजिटल बिजनेस ने शानदार प्रदर्शन जारी रखा। Q4 में Jio का रेवेन्यू 13% बढ़कर ₹44,928 करोड़ और प्रॉफिट 13% बढ़कर ₹7,935 करोड़ रहा। EBITDA में 18% की मजबूत बढ़त दर्ज हुई और ARPU बढ़कर ₹214 पहुंच गया। सब्सक्राइबर में 9.1 मिलियन की बढ़त और डेटा खपत में तेजी ने इस सेगमेंट को कंपनी का सबसे मजबूत ग्रोथ इंजन बनाए रखा।
रिटेल बिजनेस में स्थिर लेकिन मजबूत ग्रोथ देखने को मिली। Q4 में रेवेन्यू 11% बढ़कर ₹87,344 करोड़ और नेट प्रॉफिट हल्की बढ़त के साथ ₹3,563 करोड़ रहा। EBITDA 3% बढ़कर ₹6,690 करोड़ पहुंचा। कंपनी ने तिमाही में 333 नए स्टोर जोड़े और कुल स्टोर नेटवर्क 20,160 तक पहुंच गया, जबकि ग्राहक आधार 387 मिलियन हो गया, जो मजबूत कंजम्प्शन ट्रेंड को दर्शाता है।
इस सेगमेंट का प्रदर्शन कमजोर रहा। रेवेन्यू 9% घटकर ₹5,867 करोड़ और EBITDA 18% गिरकर ₹4,195 करोड़ रह गया। कमजोर गैस प्राइस रियलाइजेशन, KG-D6 बेसिन में उत्पादन दबाव और सरकारी लेवी बढ़ने से मार्जिन प्रभावित हुए, जिससे यह सेगमेंट कुल प्रदर्शन पर निगेटिव असर डालता दिखा।
मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म सेगमेंट ने भी मजबूत ग्रोथ दिखाई। Q4 में रेवेन्यू ₹9,784 करोड़ और EBITDA ₹827 करोड़ रहा। JioHotstar जैसे प्लेटफॉर्म पर 500 मिलियन मासिक यूजर्स और बड़े इवेंट्स के दौरान रिकॉर्ड व्यूअरशिप ने डिजिटल इकोसिस्टम को मजबूती दी, जिससे कंपनी के नए ग्रोथ एरिया का संकेत मिला।