डिजिटल पेमेंट और फिनटेक प्लेटफॉर्म MobiKwik को Reserve Bank of India से पेमेंट एग्रीगेटर-फिजिकल (PA-P) के रूप में काम करने के लिए इन-प्रिंसिपल मंजूरी मिल गई है। माना जा रहा है कि इस विकास से कंपनी के ऑफलाइन मर्चेंट पेमेंट इकोसिस्टम को मजबूती मिलेगी और भारत में उसके दीर्घकालिक विस्तार को गति मिलेगी।
मोबिक्विक को पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट 2007 के तहत पेमेंट एग्रीगेटर-फिजिकल इकाई के रूप में काम करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक से नियामकीय मंजूरी प्राप्त हुई है। कंपनी ने इस मंजूरी की जानकारी नेशनल स्टॉक एक्सचेंज और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज में दाखिल रेगुलेटरी फाइलिंग के जरिए दी।
यह इन-प्रिंसिपल मंजूरी कंपनी को ऑफलाइन मर्चेंट पेमेंट सेवाओं में अपने कारोबार का विस्तार करने की अनुमति देती है। फिनटेक सेक्टर में इसे मोबिक्विक के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है, क्योंकि कंपनी भारत के तेजी से बढ़ते डिजिटल पेमेंट बाजार में अपने मर्चेंट-फोकस्ड बिजनेस मॉडल को मजबूत करना चाहती है।
कंपनी के अनुसार यह मंजूरी 25 मई 2026 को प्रदान की गई थी, और इसकी कोई एक्सपायरी डेट नहीं है। मोबिक्विक ने यह भी स्पष्ट किया कि इस मंजूरी से संबंधित किसी प्रकार की सस्पेंशन नोटिस, पेनाल्टी या सुधारात्मक कार्रवाई जैसी कोई नियामकीय समस्या फिलहाल लागू नहीं है।
पेमेंट एग्रीगेटर-फिजिकल लाइसेंस कंपनियों को फिजिकल रिटेल लोकेशनों पर काम करने वाले व्यापारियों को पेमेंट एक्सेप्टेंस इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध कराने की अनुमति देता है। ऐसी कंपनियां प्वाइंट-ऑफ-सेल सिस्टम, पेमेंट गेटवे, एक्वायरिंग सर्विस, QR आधारित भुगतान और डिजिटल पेमेंट हार्डवेयर के जरिए लेनदेन को प्रोसेस करने में मदद करती हैं।
इस मंजूरी के साथ अब मोबिक्विक अपनी ऑफलाइन मर्चेंट अधिग्रहण रणनीति को तेज कर सकेगी और देशभर के व्यापारियों तथा रिटेल व्यवसायों को अधिक व्यापक पेमेंट समाधान उपलब्ध करा सकेगी।
उद्योग विशेषज्ञों का मानना है, कि ऑफलाइन पेमेंट सेगमेंट तेजी से महत्वपूर्ण होता जा रहा है, क्योंकि डिजिटल पेमेंट कंपनियां अब केवल ऑनलाइन ट्रांजैक्शन तक सीमित नहीं रहना चाहतीं और मजबूत मर्चेंट इकोसिस्टम तैयार करने पर जोर दे रही हैं। QR आधारित भुगतान, साउंडबॉक्स डिवाइस और EDC मशीनों की बढ़ती मांग ने फिजिकल रिटेल सेक्टर में मजबूत पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर की आवश्यकता को और बढ़ा दिया है।
मोबिक्विक ने कहा कि यह मंजूरी देशभर में उसके मर्चेंट पेमेंट कारोबार को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाएगी। कंपनी वर्तमान में UPI QR कोड, साउंडबॉक्स डिवाइस और इलेक्ट्रॉनिक डेटा कैप्चर (EDC) मशीनों सहित विभिन्न डिजिटल पेमेंट समाधानों के जरिए लगभग 4.9 मिलियन व्यापारियों को सेवाएं दे रही है।
कंपनी अगले 18 से 24 महीनों के दौरान इन सेवाओं का तेजी से विस्तार करने की योजना बना रही है। उसकी रणनीति मुख्य रूप से छोटे और मध्यम व्यवसायों, संगठित रिटेल चेन और देशभर के फ्यूल स्टेशनों पर केंद्रित रहने की उम्मीद है।
जैसे-जैसे डिजिटल पेमेंट भारत के रिटेल इकोसिस्टम में गहराई तक पहुंच रहा है, मोबिक्विक खुद को ऑफलाइन पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र में एक प्रमुख खिलाड़ी के रूप में स्थापित करना चाहती है। कंपनी ने वित्त वर्ष 2028 तक अपने मर्चेंट कारोबार को लगभग दस गुना बढ़ाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है।
मोबिक्विक के प्रमुख फोकस क्षेत्रों में साउंडबॉक्स और EDC मशीन नेटवर्क का विस्तार शामिल रहेगा। साउंडबॉक्स डिवाइस व्यापारियों के बीच काफी लोकप्रिय हो चुके हैं, क्योंकि वे भुगतान प्राप्त होने पर तुरंत वॉयस कन्फर्मेशन देते हैं, जबकि EDC मशीनें कार्ड आधारित लेनदेन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
कंपनी का मानना है, कि इन पेमेंट डिवाइसों की व्यापक तैनाती से फिजिकल रिटेल वातावरण में व्यापारियों के लिए लेनदेन प्रक्रिया अधिक आसान और सुविधाजनक बनेगी।
मोबिक्विक बढ़ते ऑफलाइन ट्रांजैक्शन वॉल्यूम को सपोर्ट करने के लिए अपनी पेमेंट प्रोसेसिंग क्षमता और एक्वायरिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को भी मजबूत करने की तैयारी कर रही है। यह कदम उस व्यापक इंडस्ट्री ट्रेंड के अनुरूप है, जिसमें फिनटेक कंपनियां मर्चेंट-केंद्रित हार्डवेयर और पेमेंट एक्सेप्टेंस सिस्टम में निवेश बढ़ा रही हैं।
इस घोषणा के बाद शेयर बाजार में सकारात्मक माहौल देखने को मिला। रिपोर्ट्स के अनुसार RBI की मंजूरी मिलने के बाद मोबिक्विक के शेयरों में तेजी दर्ज की गई।
निवेशकों ने इस नियामकीय मंजूरी को कंपनी के ऑफलाइन पेमेंट कारोबार की भविष्य की संभावनाओं के लिए सकारात्मक संकेत के रूप में देखा। विश्लेषकों का मानना है, कि यह मंजूरी मोबिक्विक को मर्चेंट एक्वायरिंग स्पेस में पहले से मौजूद अन्य फिनटेक और पेमेंट कंपनियों के साथ अधिक प्रभावी तरीके से प्रतिस्पर्धा करने में मदद कर सकती है।
भारत में ऑफलाइन पेमेंट बाजार तेजी से विस्तार कर रहा है, जिसका कारण रिटेल कारोबारियों के बीच डिजिटल अपनाने की बढ़ती प्रवृत्ति, सरकार का कैशलेस ट्रांजैक्शन को बढ़ावा और UPI आधारित भुगतान प्रणाली का तेजी से प्रसार है।
विस्तार योजनाओं के साथ-साथ मोबिक्विक ने FY26 के दौरान अपने वित्तीय प्रदर्शन में भी सुधार दर्ज किया है।
कंपनी का वार्षिक घाटा FY25 के 121.5 करोड़ रुपये से घटकर FY26 में 62.1 करोड़ रुपये रह गया। घाटे में यह कमी बेहतर परिचालन दक्षता और पेमेंट व फाइनेंशियल सर्विस कारोबार में बढ़ती मजबूती को दर्शाती है।
मार्च तिमाही के दौरान कंपनी की ऑपरेशनल आय भी बढ़ी। इस अवधि में परिचालन से राजस्व बढ़कर 288.7 करोड़ रुपये पहुंच गया, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 267.7 करोड़ रुपये था।
राजस्व में यह वृद्धि कंपनी के डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम, मर्चेंट सेवाओं और वित्तीय उत्पाद कारोबार में लगातार बढ़ोतरी को दर्शाती है।
भारत का डिजिटल पेमेंट उद्योग तेजी से बदलाव के दौर से गुजर रहा है, जहां फिनटेक कंपनियां अब ऑफलाइन पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर में बड़े स्तर पर निवेश कर रही हैं। ऑनलाइन पेमेंट के साथ-साथ फिजिकल मर्चेंट पेमेंट अब इस सेक्टर के सबसे बड़े ग्रोथ ड्राइवर के रूप में उभर रहे हैं।
पेमेंट एग्रीगेटर्स के लिए RBI का नियामकीय ढांचा अनुपालन को मजबूत करने, ट्रांजैक्शन सुरक्षा बढ़ाने और व्यापारियों व ग्राहकों के लिए अधिक भरोसेमंद पेमेंट इकोसिस्टम तैयार करने के उद्देश्य से बनाया गया है।
मोबिक्विक के लिए यह नई मंजूरी रणनीतिक रूप से काफी महत्वपूर्ण साबित हो सकती है, क्योंकि कंपनी भारत के प्रतिस्पर्धी फिनटेक बाजार में अपनी पकड़ मजबूत करने और मर्चेंट नेटवर्क को और गहरा करने पर ध्यान केंद्रित कर रही है।
लाखों व्यापारियों के साथ जुड़ाव और आक्रामक विस्तार योजनाओं के चलते कंपनी आने वाले वर्षों में ऑफलाइन डिजिटल पेमेंट क्षेत्र में अपनी मजबूत उपस्थिति बनाने की दिशा में आगे बढ़ती नजर आ रही है।