भारत सरकार यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) पर किए जाने वाले कुछ बड़े डिजिटल भुगतान पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (Merchant Discount Rate - MDR) दोबारा लागू करने पर विचार कर रही है। यदि यह प्रस्ताव मंजूर होता है, तो ₹2,000 से अधिक के बिजनेस संबंधी UPI भुगतान पर बैंक और पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर व्यापारियों से एक निश्चित शुल्क वसूल सकेंगे।
फिलहाल सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह केवल विचार-विमर्श के चरण में है और अभी तक इसकी समय-सीमा, शुल्क दर या लागू करने के तरीके पर कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि प्रस्तावित शुल्क सामान खरीदने वाले आम उपभोक्ताओं पर नहीं, बल्कि UPI भुगतान स्वीकार करने वाले व्यापारियों पर लागू हो सकता है।
यह प्रस्ताव वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण Finance Minister Nirmala Sitharaman द्वारा संसद में पेश किए गए Taxation and Other Laws (Amendment) Bill, 2026 में किए गए प्रस्तावित कानूनी संशोधनों के बाद सामने आया है। यदि कानून में बदलाव होते हैं, तो सरकार को भविष्य में चुनिंदा UPI लेनदेन पर MDR लागू करने का कानूनी अधिकार मिल सकता है।
प्रस्तावित संशोधनों का उद्देश्य उन मौजूदा कानूनी प्रावधानों को हटाना है, जो अभी तक बैंकों और पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स को UPI सहित कुछ इलेक्ट्रॉनिक भुगतान माध्यमों पर Merchant Discount Rate (MDR) वसूलने से रोकते हैं।
यदि संसद इस विधेयक को मंजूरी दे देती है, तो सरकार के पास भविष्य में व्यापारिक UPI लेनदेन पर MDR लागू करने का कानूनी आधार तैयार हो जाएगा।
हालांकि यह समझना जरूरी है कि प्रस्तावित संशोधन लागू होने का मतलब यह नहीं है कि MDR तुरंत लागू हो जाएगा।
इसके बजाय ये संशोधन केवल सरकार को भविष्य में आवश्यक होने पर अलग से अधिसूचना (Notification) जारी करके व्यापारियों पर शुल्क लगाने का अधिकार देंगे।
यानी, यदि कानून पारित भी हो जाता है, तब भी MDR लागू करने के लिए सरकार को अलग से आधिकारिक घोषणा करनी होगी।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, नीति-निर्माता ऐसे मॉडल पर विचार कर रहे हैं जिसके तहत ₹2,000 से अधिक के व्यापारिक UPI भुगतान पर 0.25% से 0.5% तक Merchant Discount Rate (MDR) लगाया जा सकता है।
इस प्रस्ताव का उद्देश्य आम उपभोक्ताओं से कोई अतिरिक्त शुल्क लेना नहीं है।
यदि MDR लागू होता है, तो भुगतान प्राप्त करने वाले व्यापारी यह शुल्क वहन करेंगे, ठीक उसी तरह जैसे वर्तमान में कुछ डेबिट कार्ड और क्रेडिट कार्ड लेनदेन में होता है।
इसका मतलब है कि ग्राहक UPI से भुगतान करते समय कोई अलग शुल्क नहीं देंगे।
प्रस्ताव के अनुसार, व्यक्ति से व्यक्ति (Person-to-Person - P2P) होने वाले सभी UPI ट्रांसफर पूरी तरह मुफ्त रहेंगे।
दोस्तों, परिवार के सदस्यों या अन्य व्यक्तियों को पैसे भेजने पर किसी भी प्रकार का MDR लागू नहीं किया जाएगा।
इससे रोजमर्रा के व्यक्तिगत डिजिटल लेनदेन पहले की तरह बिना किसी शुल्क के जारी रहेंगे।
सरकार इस बात पर भी विचार कर रही है कि छोटे व्यापारियों और छोटे व्यवसायों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ न पड़े।
एक अन्य प्रस्ताव के अनुसार, केवल लेनदेन की राशि के बजाय व्यापार के वार्षिक टर्नओवर को भी आधार बनाया जा सकता है।
यदि ऐसा मॉडल अपनाया जाता है, तो केवल बड़े कारोबार, जिनका डिजिटल भुगतान कारोबार काफी अधिक है, उन्हें MDR देना पड़ सकता है।
इस व्यवस्था के तहत छोटे दुकानदार, MSME, स्थानीय व्यापारियों और छोटे कारोबारियों को पहले की तरह बिना किसी MDR के UPI भुगतान स्वीकार करने की सुविधा मिल सकती है।
इससे छोटे व्यापारियों पर अतिरिक्त खर्च का बोझ नहीं पड़ेगा, जबकि बड़े व्यापारिक प्रतिष्ठानों से भुगतान इकोसिस्टम को राजस्व मिल सकेगा।
सरकारी अनुमानों के अनुसार, ₹2,000 से अधिक के UPI लेनदेन कुल ट्रांजैक्शन की संख्या का केवल एक छोटा हिस्सा हैं।
हालांकि इन बड़े लेनदेन की कुल राशि लगभग 65% तक होती है, लेकिन इनकी संख्या कुल UPI ट्रांजैक्शन का केवल लगभग 5% है।
यदि MDR लागू भी किया जाता है, तो रोजमर्रा की खरीदारी जैसे—
जैसे अधिकांश भुगतान पहले की तरह UPI के माध्यम से बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के किए जा सकेंगे।
कम राशि वाले अधिकांश UPI भुगतान करने वाले उपभोक्ताओं पर इस प्रस्ताव का कोई सीधा प्रभाव पड़ने की संभावना नहीं है।
इसलिए आम लोगों के लिए UPI का उपयोग पहले की तरह सुविधाजनक, तेज और लगभग निःशुल्क बना रहेगा।
पिछले कुछ वर्षों से Merchant Discount Rate (MDR) को लेकर सरकार, बैंकिंग क्षेत्र और डिजिटल पेमेंट उद्योग के बीच लगातार चर्चा होती रही है।
बैंक, पेमेंट एग्रीगेटर (Payment Aggregators) और फिनटेक (Fintech) कंपनियों का मानना है कि पूरी तरह शून्य शुल्क (Zero MDR) वाला UPI इकोसिस्टम लंबे समय तक टिकाऊ (Sustainable) नहीं रह सकता।
उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि हर दिन अरबों UPI ट्रांजैक्शन को सुरक्षित और तेज़ तरीके से प्रोसेस करने के लिए लगातार निवेश करना पड़ता है।
इस निवेश में कई महत्वपूर्ण क्षेत्र शामिल हैं, जैसे—
उनका कहना है कि यदि चुनिंदा बड़े व्यावसायिक UPI लेनदेन पर मामूली MDR लगाया जाता है, तो इससे पेमेंट इकोसिस्टम को स्थायी आय (Revenue) मिलेगी और भविष्य में नई तकनीकों तथा बेहतर सेवाओं में निवेश करना आसान होगा।
डिजिटल भुगतान उद्योग का मानना है कि जैसे-जैसे UPI का उपयोग तेज़ी से बढ़ रहा है, वैसे-वैसे इसकी क्षमता, सुरक्षा और विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए अधिक संसाधनों की आवश्यकता होगी।
ऐसे में सीमित दायरे में MDR लागू करना पूरे डिजिटल भुगतान इकोसिस्टम को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने का एक विकल्प माना जा रहा है।
भारत का यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) आज दुनिया की सबसे बड़ी रियल-टाइम डिजिटल पेमेंट प्रणाली (Real-Time Digital Payment System) बन चुका है।
पिछले कुछ वर्षों में करोड़ों उपभोक्ताओं और लाखों व्यापारियों ने UPI को अपने रोजमर्रा के भुगतान का प्रमुख माध्यम बना लिया है।
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, जुलाई 2026 के दौरान UPI ने लगभग—
यह उपलब्धि भारत की तेजी से बढ़ती डिजिटल अर्थव्यवस्था और कैशलेस भुगतान प्रणाली की सफलता को दर्शाती है।
आज UPI करोड़ों व्यापारियों और अरबों मासिक ट्रांजैक्शन को संभाल रहा है।
इसी वजह से कई देश भारत के डिजिटल पेमेंट मॉडल में रुचि दिखा रहे हैं और अपने यहां भी इसी तरह की तेज़, सुरक्षित और इंटरऑपरेबल भुगतान प्रणाली विकसित करने की दिशा में काम कर रहे हैं।
हालांकि MDR को लेकर चर्चाएं तेज़ हैं, लेकिन वर्तमान समय में UPI उपयोगकर्ताओं और व्यापारियों के लिए किसी भी प्रकार का नया नियम लागू नहीं किया गया है।
सरकारी अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यदि भविष्य में MDR लागू किया जाता है, तो उसके लिए अलग से आधिकारिक अधिसूचना (Notification) जारी करनी होगी।
फिलहाल सभी UPI भुगतान मौजूदा नियमों के अनुसार पूरी तरह निःशुल्क हैं।
उपभोक्ताओं को अपने भुगतान करने के तरीके में किसी भी प्रकार का बदलाव करने की आवश्यकता नहीं है।
यदि सरकार भविष्य में MDR लागू करने का निर्णय लेती है, तो उससे पहले—
के साथ विस्तृत चर्चा की जाएगी ताकि ऐसा समाधान तैयार किया जा सके जो सभी पक्षों के हितों का संतुलन बनाए रखे।
यदि सरकार सीमित दायरे में MDR लागू करती है, तो इससे डिजिटल भुगतान व्यवस्था को कई संभावित लाभ मिल सकते हैं।
सरकार को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि—
अंतिम निर्णय लेते समय सरकार इन सभी पहलुओं का सावधानीपूर्वक मूल्यांकन कर सकती है।
₹2,000 से अधिक के कुछ व्यावसायिक UPI लेनदेन पर Merchant Discount Rate (MDR) लागू करने का सरकार का प्रस्ताव भारत के डिजिटल भुगतान इकोसिस्टम के भविष्य को लेकर एक महत्वपूर्ण नीति चर्चा का संकेत देता है।
हालांकि अभी तक कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है, लेकिन प्रस्तावित कानूनी संशोधन भविष्य में सरकार को आवश्यकता पड़ने पर चुनिंदा व्यापारिक UPI लेनदेन पर MDR लागू करने का अधिकार दे सकते हैं।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि यदि ऐसा कोई कदम उठाया जाता है, तो उसका उद्देश्य आम उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ डालना नहीं होगा। व्यक्ति-से-व्यक्ति (P2P) भुगतान पहले की तरह मुफ्त रहने की संभावना है, जबकि शुल्क केवल कुछ व्यावसायिक लेनदेन तक सीमित रह सकता है।
UPI आज भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था की रीढ़ बन चुका है। इसलिए भविष्य में किसी भी नीति बदलाव का उद्देश्य डिजिटल भुगतान प्रणाली की स्थिरता (Sustainability), तकनीकी विकास, व्यापारियों की सुविधा और उपभोक्ताओं के हितों के बीच संतुलन बनाए रखना होगा।
सरकार ₹2,000 से अधिक के UPI भुगतान पर Merchant Discount Rate (MDR) लागू करने पर विचार कर रही है। जानिए प्रस्तावित नियम, व्यापारियों पर संभावित असर, उपभोक्ताओं पर प्रभाव और UPI से जुड़े सभी नए अपडेट।
The Indian government is evaluating MDR on UPI payments above ₹2,000 for merchants. Learn about the proposed legal changes, merchant charges, consumer impact, and the future of India's digital payment ecosystem.
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