Masai ने FY27 में 450 करोड़ का रेवेन्यू टारगेट रखा

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13 Apr 2026
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News Synopsis

बेंगलुरु का एडटेक स्टार्टअप Masai एक साफ़ फ़ाइनेंशियल लक्ष्य और पब्लिक-मार्केट की महत्वाकांक्षा के साथ अपनी ग्रोथ की योजनाओं को और मज़बूत कर रहा है। कंपनी का लक्ष्य FY27 में लगभग 450 करोड़ रुपये का रेवेन्यू हासिल करना है, और वह अगले 24 महीनों में IPO के लिए तैयार होने की दिशा में काम कर रही है, इसकी तैयारियाँ FY27–FY28 के दौरान शुरू होने की उम्मीद है।

यह घोषणा ऐसे समय में हुई है, जब भारत के एडटेक सेक्टर को हेडलाइन ग्रोथ से कम और बिज़नेस ड्यूरेबिलिटी, लर्निंग आउटकम और मार्जिन डिसिप्लिन से ज़्यादा आंका जा रहा है। इस बैकग्राउंड में मसाई के नए प्लान एक ज़्यादा स्टेबल और इंस्टीट्यूशन-बैक्ड ग्रोथ मॉडल बनाने की कोशिश का इशारा देते हैं, न कि सिर्फ़ डायरेक्ट-टू-स्टूडेंट प्लेबुक पर निर्भर रहने का, जिसने इस सेक्टर के पहले के ज़्यादातर विस्तार को तय किया था।

Masai, जिसे पहले Masai School के नाम से जाना जाता था, पहले ही रेवेन्यू का एक अहम पड़ाव पार कर चुका है। FY25 में कंपनी ने 100 करोड़ रुपये से ज़्यादा का रेवेन्यू दर्ज किया। FY26 के लिए कंपनी ने बताया कि ग्रोथ 60–70% की रेंज में रही, जिसमें B2B एक अहम ग्रोथ इंजन बनकर उभरा। कंपनी अब अपने विस्तार के अगले चरण को आगे बढ़ाने के लिए एंटरप्राइज़ ट्रेनिंग और इंस्टीट्यूशनल प्रोग्राम पर ज़्यादा ध्यान दे रही है।

यह बिज़नेस मिक्स मसाई की मौजूदा स्ट्रेटेजी का सेंटर है। कंपनी ने कहा कि विकास का उसका अगला चरण तीन क्षेत्रों पर आधारित होगा: आईआईटी, आईआईएम और उद्यमों के साथ साझेदारी का विस्तार करना, प्लेसमेंट-आधारित कार्यक्रमों जैसे परिणाम-जुड़े मॉडलों को गहरा करना, और AI-लेड टूल्स के ज़रिए अपने प्रोडक्ट लेयर को मज़बूत कर रहा है। कंपनी के अनुसार इन लीवर्स का मकसद इंस्टीट्यूशनल क्रेडिबिलिटी, आउटकम अकाउंटेबिलिटी और स्केलेबल डिलीवरी को एक सिस्टम में जोड़ना है।

मसाई ने कहा कि FY26 मज़बूत लर्निंग इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने का साल था। कंपनी द्वारा हाईलाइट किए गए प्रोडक्ट डेवलपमेंट में से एक है, सिम्युलेटेड एडैप्टिव लर्निंग, या SAL, जो ऐसे लाइव एडैप्टिव माहौल बनाता है, जहाँ सीखने की गति और मुश्किल का स्तर रियल टाइम में बदलता रहता है, जबकि कोहोर्ट फ़ॉर्मेट भी बना रहता है।

इसके साथ ही स्टार्टअप ने एक मल्टीलिंगुअल AI ट्यूटर और एक AI इंटरव्यूअर पेश किया, जिन्हें असल दुनिया की समस्याओं को सुलझाने और हायरिंग के माहौल को सिम्युलेट करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। चीफ़ एग्ज़ीक्यूटिव प्रतीक शुक्ला Prateek Shukla ने कहा कि सीखना कैसे असल काबिलियत में बदलता है, न कि सिर्फ़ कोर्स पूरा करने पर।

कंपनी की फ़ंडिंग हिस्ट्री भी उसके मौजूदा प्रयासों को समझने में मदद करती है। मसाई की पिछली फ़ंडरेज़िंग 2022 में इंडिया कोशिएंट और ON मॉरीशस से हुई Series B राउंड थी, जिससे कुल जुटाई गई पूंजी $13 मिलियन हो गई। कंपनी ने कहा कि इस कैपिटल का इस्तेमाल IITs, IIMs और BITS के साथ इंस्टीट्यूशनल पार्टनरशिप बढ़ाने, टेक्नोलॉजी इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने और लर्नर एक्विजिशन को बढ़ाने के लिए किया गया।

मसाई का मुनाफ़े का दावा भी उतना ही अहम है। स्टार्टअप ने कहा कि वह जनवरी 2025 से मुनाफ़े में है, और उम्मीद करता है, कि जैसे-जैसे उसका विस्तार होगा, उसके मार्जिन में और सुधार होगा। इसका कारण B2C और एंटरप्राइज़ ट्रेनिंग, डिसिप्लिन्ड यूनिट इकोनॉमिक्स और इंस्टीट्यूशनल डाइवर्सिफिकेशन का ज़्यादा बैलेंस्ड मिक्स बताया गया। एक ऐसे उद्योग में जहाँ मुनाफ़ा अक्सर मुश्किल से मिलता है, इस दावे पर बारीकी से नज़र रखी जाएगी, क्योंकि मसाई संभावित लिस्टिंग के रास्ते के करीब पहुँच रहा है।

मसाई भारत से बाहर भी देख रहा है। कंपनी ने कहा कि वह मिडिल ईस्ट और साउथ-ईस्ट एशिया के मार्केट में एंट्री करने का प्लान बना रही है, जहां IITs और IIMs जैसे इंडियन इंस्टीट्यूशनल ब्रांड्स की अच्छी पहचान है। यह इंटरनेशनल दिलचस्पी सिर्फ़ स्टूडेंट की डिमांड से ही नहीं, बल्कि विदेशी मार्केट में इंडियन हायर एजुकेशन पार्टनर्स की ब्रांड वैल्यू से भी जुड़ी हुई लगती है।

प्रतीक शुक्ला ने कहा कि सर्टिफ़िकेशन और अपस्किलिंग मार्केट ऊपर से भले ही भरा हुआ लगे, लेकिन जब आउटकम अकाउंटेबिलिटी को बेंचमार्क माना जाता है, तो यह सेगमेंट काफ़ी कमज़ोर रहता है। उन्होंने कहा कि मसाई की खासियत केवल उसके कंटेंट में ही नहीं है, बल्कि एक व्यापक इकोसिस्टम में है, जिसमें IIT और IIM सहित 22 राष्ट्रीय महत्व के संस्थानों का नेटवर्क और 2,500 से ज़्यादा कंपनियों के साथ रोज़गार संबंध शामिल हैं।

मसाई के लिए अब सबसे बड़ी चुनौती इसे लागू करना है। 450 करोड़ रुपये का राजस्व लक्ष्य, मुनाफ़े की कहानी, AI-आधारित उत्पादों के दावे और IPO की तैयारी—ये सभी चीज़ें कंपनी को और भी कड़ी जाँच के दायरे में लाती हैं। लेकिन वे यह भी दिखाते हैं, कि नई एडटेक कहानी कैसे लिखी जा रही है: किसी भी कीमत पर स्केल के बारे में कम, और नतीजों, पार्टनरशिप और फाइनेंशियल क्रेडिबिलिटी के बारे में ज़्यादा।

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