मारुति सुजुकी का बड़ा फैसला, FY2031 तक ग्रीन एनर्जी पर 925 करोड़ का निवेश

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06 Jun 2026
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News Synopsis

मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड ने अपनी ग्रीन एनर्जी और बायोगैस पहलों के विस्तार की घोषणा की है। यह कदम 5 जून 2026 को सामने आया, जिसका उद्देश्य कंपनी के मैन्युफैक्चरिंग नेटवर्क में पारंपरिक फॉसिल फ्यूल पर निर्भरता को कम करना और नवीकरणीय ऊर्जा के उपयोग को बढ़ाना है। कंपनी ने FY 2030–31 तक ₹925 करोड़ के निवेश की योजना बनाई है, जिससे उसके सस्टेनेबिलिटी लक्ष्यों को और मजबूती मिलेगी।

सस्टेनेबल मैन्युफैक्चरिंग की दिशा में बड़ा कदम

मारुति सुजुकी का यह नया कदम उसके दीर्घकालिक पर्यावरणीय रणनीति का हिस्सा है। कंपनी अपने उत्पादन केंद्रों में कार्बन उत्सर्जन को कम करने के लिए बायोगैस प्लांट, सोलर एनर्जी और वेस्ट-टू-एनर्जी तकनीकों को तेजी से अपनाने पर काम कर रही है।

इस पहल का उद्देश्य ऊर्जा दक्षता बढ़ाना, पर्यावरणीय प्रभाव को कम करना और सभी प्रमुख उत्पादन इकाइयों में टिकाऊ संचालन सुनिश्चित करना है।

मानेसर बायोगैस प्लांट का विस्तार बढ़ाएगा ग्रीन एनर्जी उत्पादन

कंपनी की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धियों में से एक मानेसर प्लांट का विस्तार है। इस बायोगैस प्लांट की क्षमता को 0.2 टन प्रति दिन (TPD) से बढ़ाकर 0.7 TPD कर दिया गया है।

मानेसर विस्तार के प्रमुख लाभ

इस अपग्रेडेड प्लांट से सालाना लगभग 3.6 लाख स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर बायोगैस उत्पादन होने की उम्मीद है। इससे कंपनी को हर साल लगभग 664 टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन कम करने में मदद मिलेगी।

इस प्लांट में विभिन्न प्रकार के जैविक कचरे का उपयोग किया जाता है, जिनमें शामिल हैं:

  • फूड वेस्ट
  • नेपियर घास
  • धान की पराली

यह सभी सामग्री एनारोबिक डाइजेशन प्रक्रिया से गुजरती हैं, जिसमें ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में जैविक पदार्थ टूटकर बायोगैस में बदलते हैं।

उत्पादित बायोगैस का उपयोग मुख्य रूप से पेंट शॉप हीटिंग और कैंटीन संचालन में किया जाता है, जिससे पारंपरिक ईंधनों पर निर्भरता कम होती है।

इसके अलावा इस प्रक्रिया से फर्मेंटेड ऑर्गेनिक मैन्योर (FOM) नामक उप-उत्पाद भी बनता है, जिसे आंतरिक ग्रीनरी और कृषि उपयोग के लिए उपयोग किया जाता है, जिससे सर्कुलर इकोनॉमी को बढ़ावा मिलता है।

खरखौदा बायोगैस प्लांट: बड़े स्तर की हरित ऊर्जा परियोजना

दूसरी प्रमुख परियोजना कंपनी के खरखौदा मैन्युफैक्चरिंग प्लांट में विकसित की जा रही है। यह नया बायोगैस प्लांट 10 TPD क्षमता वाला होगा और FY 2026–27 में चालू होने की उम्मीद है।

पर्यावरणीय प्रभाव

पूरी क्षमता पर कार्य करने के बाद यह प्लांट निम्नलिखित प्रभाव डालेगा:

  • हर साल लगभग 9,490 टन CO₂ उत्सर्जन में कमी
  • प्लांट की कुल गैस आवश्यकता का लगभग 20% पूरा करेगा

यह परियोजना कंपनी के अब तक के सबसे बड़े नवीकरणीय ऊर्जा प्रयासों में से एक है और फॉसिल फ्यूल पर निर्भरता को काफी कम करेगी।

बायोगैस परियोजनाओं में ₹150 करोड़ का संयुक्त निवेश

मानेसर और खरखौदा दोनों परियोजनाओं में कुल मिलाकर लगभग ₹150 करोड़ का निवेश किया जा रहा है। यह निवेश मारुति सुजुकी की व्यापक ग्रीन एनर्जी रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

यह योजना केवल लागत कम करने के लिए नहीं, बल्कि पर्यावरणीय स्थिरता और ऊर्जा दक्षता को दीर्घकालिक रूप से सुनिश्चित करने के लिए बनाई गई है।

FY2031 तक ₹925 करोड़ की ग्रीन एनर्जी प्रतिबद्धता

बायोगैस के अलावा कंपनी ने FY 2030–31 तक ₹925 करोड़ के समग्र ग्रीन एनर्जी निवेश की घोषणा की है।

इस योजना में शामिल हैं:

  • बायोगैस इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार
  • सोलर पावर परियोजनाओं का विकास
  • ऊर्जा दक्षता सुधार
  • सस्टेनेबल मैन्युफैक्चरिंग सिस्टम

इससे कंपनी अपने कार्बन फुटप्रिंट को काफी हद तक कम करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

सोलर एनर्जी क्षमता का विस्तार

मारुति सुजुकी अपनी सोलर एनर्जी क्षमता को भी तेजी से बढ़ा रही है। वर्तमान में कंपनी के पास 79 MWp सोलर क्षमता है।

दीर्घकालिक योजना के तहत इसे FY 2030–31 तक 319 MWp तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है।

यह कदम कंपनी को ऊर्जा आत्मनिर्भर बनाने और बाहरी बिजली स्रोतों पर निर्भरता कम करने में मदद करेगा।

मौजूदा सस्टेनेबिलिटी पहल से जुड़ा विस्तार

यह नई घोषणाएं कंपनी की पहले से चल रही सस्टेनेबिलिटी परियोजनाओं को और मजबूत करती हैं। उदाहरण के तौर पर हंसलपुर प्लांट में बायोगैस पहले ही लगभग 10% ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए प्राकृतिक गैस की जगह इस्तेमाल की जा रही है।

यह बदलाव LNG सप्लाई बाधाओं के दौरान भी उत्पादन को सुचारू बनाए रखने में सहायक रहा है।

कम कार्बन मैन्युफैक्चरिंग की ओर कदम

मारुति सुजुकी की यह पहल ऑटोमोबाइल उद्योग में सस्टेनेबल मैन्युफैक्चरिंग की दिशा में एक महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत देती है। बायोगैस, सोलर एनर्जी और वेस्ट-टू-एनर्जी तकनीकों के उपयोग से कंपनी अपने पर्यावरणीय प्रभाव को कम करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

यह रणनीति भारत में ग्रीन इंडस्ट्रियल ट्रांजिशन को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है, और आने वाले वर्षों में ऑटोमोबाइल सेक्टर के लिए एक उदाहरण प्रस्तुत करती है।

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