भारत की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी Maruti Suzuki India Ltd ने पर्यावरण अनुकूल ऊर्जा (Green Energy) के क्षेत्र में एक बड़ा दीर्घकालिक निवेश योजना की घोषणा की है। कंपनी का लक्ष्य FY 2030–31 तक ₹925 करोड़ का निवेश करना है, जिसका मुख्य फोकस बायोगैस परियोजनाओं और नवीकरणीय ऊर्जा के उपयोग को बढ़ाना है।
Maruti Suzuki ने अपने परिचालन में स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए एक व्यापक रणनीति तैयार की है। यह पहल कंपनी की उस दीर्घकालिक प्रतिबद्धता का हिस्सा है, जिसके तहत वह कार्बन उत्सर्जन को कम करने और जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता घटाने पर काम कर रही है।
कंपनी द्वारा घोषित ₹925 करोड़ का निवेश FY 2030–31 तक चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा। इस योजना में बायोगैस संयंत्रों का निर्माण, सौर ऊर्जा क्षमता का विस्तार और अन्य हरित ऊर्जा परियोजनाएँ शामिल हैं।
इस योजना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हरियाणा स्थित खरखौदा विनिर्माण सुविधा में 10 टन प्रति दिन (TPD) क्षमता वाला नया बायोगैस संयंत्र स्थापित करना है।
इस संयंत्र को FY 2026–27 के दौरान चालू करने की योजना है। यह परियोजना जैविक कचरे को ऊर्जा में बदलने में मदद करेगी और स्वच्छ उत्पादन प्रणाली को बढ़ावा देगी।
इसके अलावा कंपनी ने अपने मानेसर स्थित बायोगैस संयंत्र की क्षमता को 0.2 TPD से बढ़ाकर 0.7 TPD कर दिया है।
यह विस्तार मौजूदा संरचना से अधिक ऊर्जा उत्पादन सुनिश्चित करेगा और कंपनी की हरित ऊर्जा क्षमता को मजबूत बनाएगा।
कंपनी ने कुल ₹925 करोड़ के निवेश में से लगभग ₹150 करोड़ केवल बायोगैस परियोजनाओं के लिए निर्धारित किए हैं।
यह राशि खरखौदा और मानेसर दोनों परियोजनाओं पर खर्च की जाएगी। शेष निवेश सौर ऊर्जा विस्तार, ऊर्जा दक्षता सुधार और अन्य हरित तकनीकों पर किया जाएगा।
Hisashi Takeuchi, प्रबंध निदेशक एवं सीईओ ने कहा कि कंपनी लगातार जीवाश्म ईंधन की खपत कम करने और तेल आयात पर निर्भरता घटाने के प्रयास कर रही है।
उन्होंने कहा कि बायोगैस परियोजनाएँ कंपनी की दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा हैं, जिसका उद्देश्य विनिर्माण प्रक्रियाओं में टिकाऊ ऊर्जा समाधान को शामिल करना है।
उन्होंने यह भी कहा कि वैश्विक ऊर्जा परिदृश्य में अनिश्चितता को देखते हुए ऐसी पहलें और भी महत्वपूर्ण हो जाती हैं।
कंपनी की बायोगैस परियोजनाएँ भारत सरकार की “Waste-to-Wealth” (कचरे से संपदा) मिशन के अनुरूप हैं।
इस पहल का उद्देश्य कचरे को उपयोगी ऊर्जा और मूल्यवान संसाधनों में बदलना है। मारुति सुजुकी की यह पहल इस राष्ट्रीय लक्ष्य को समर्थन देती है और पर्यावरण संरक्षण में योगदान करती है।
बायोगैस के अलावा कंपनी अन्य क्षेत्रों में भी नवीकरणीय ऊर्जा पर ध्यान दे रही है:
यह रणनीति कंपनी के समग्र सतत विकास लक्ष्य का हिस्सा है।
इस योजना से कई सकारात्मक प्रभाव पड़ने की उम्मीद है:
आने वाले वर्षों में इन परियोजनाओं के लागू होने से कंपनी की नवीकरणीय ऊर्जा उपयोग क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। यह कदम न केवल पर्यावरण संरक्षण बल्कि दीर्घकालिक औद्योगिक स्थिरता को भी मजबूत करेगा।
निष्कर्ष:
मारुति सुजुकी का ₹925 करोड़ का हरित ऊर्जा निवेश भारत के स्वच्छ ऊर्जा भविष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। बायोगैस, सौर ऊर्जा और अन्य नवीकरणीय स्रोतों के माध्यम से कंपनी अपने परिचालन को अधिक टिकाऊ और पर्यावरण अनुकूल बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है।