भारत सरकार का कपड़ा मंत्रालय (Ministry of Textiles) देश के GI (Geographical Indication) टैग वाले हस्तकरघा और हस्तशिल्प उत्पादों को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाने जा रहा है। 5 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में आयोजित होने वाले GI & Beyond 2.0 Summit के दौरान मंत्रालय डिजिटल हैंडलूम एटलस (Digital Handloom Atlas) लॉन्च करेगा।
इस समिट का उद्देश्य भारत की पारंपरिक बुनाई और हस्तशिल्प कला को देश और विदेश के बाजारों तक पहुंचाना, कारीगरों और बुनकरों को नए खरीदारों से जोड़ना तथा निर्यात को बढ़ावा देना है। इस कार्यक्रम का आयोजन डेवलपमेंट कमिश्नर (हैंडलूम) कार्यालय और हैंडलूम एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (HEPC) के सहयोग से किया जा रहा है।
इस समिट में विदेशी खरीदार, निर्यातक, उद्योग विशेषज्ञ, ई-कॉमर्स कंपनियां, सरकारी अधिकारी, शैक्षणिक संस्थान और GI उत्पादों से जुड़े प्रतिनिधि भाग लेंगे। साथ ही 100 से अधिक GI-पंजीकृत हस्तकरघा और हस्तशिल्प उत्पादों की प्रदर्शनी भी आयोजित की जाएगी। यह पहल भारत की समृद्ध वस्त्र विरासत को आधुनिक डिजिटल तकनीक से जोड़ते हुए वैश्विक बाजार में उसकी प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।
इस समिट में लगभग 10 देशों से विदेशी खरीदार शामिल होंगे। यह दर्शाता है कि भारतीय हस्तकरघा और हस्तशिल्प उत्पादों की मांग लगातार वैश्विक स्तर पर बढ़ रही है।
विदेशी खरीदारों की मौजूदगी से भारतीय बुनकरों, कारीगरों और निर्यातकों को अपने उत्पाद सीधे अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने का अवसर मिलेगा। इससे नए व्यापारिक समझौते होने और निर्यात बढ़ने की संभावना भी मजबूत होगी।
समिट में केवल विदेशी खरीदार ही नहीं, बल्कि देश और दुनिया के कई बड़े उद्योग प्रतिनिधि भी शामिल होंगे।
इनमें प्रमुख रूप से शामिल होंगे।
इन सभी हितधारकों की भागीदारी से नए व्यापारिक अवसर, निर्यात साझेदारियां और दीर्घकालिक व्यावसायिक सहयोग विकसित होने की उम्मीद है।
यह समिट भारतीय कारीगरों, बुनकरों, निर्माताओं और विदेशी खरीदारों को एक ही मंच पर लाएगा।
इससे कारीगरों को यह समझने में मदद मिलेगी कि वैश्विक बाजार में ग्राहकों की पसंद, गुणवत्ता की अपेक्षाएं और नए डिजाइन ट्रेंड क्या हैं। वहीं खरीदारों को भारत की पारंपरिक कला और उत्कृष्ट शिल्प कौशल को करीब से देखने और समझने का अवसर मिलेगा।
यह प्रदर्शनी भारत की समृद्ध वस्त्र परंपरा, क्षेत्रीय सांस्कृतिक विरासत और सदियों पुरानी बुनाई कला का शानदार प्रदर्शन करेगी।
प्रदर्शनी में ऐसे उत्पाद प्रदर्शित किए जाएंगे जो भारत के अलग-अलग क्षेत्रों की विशिष्ट पहचान और पारंपरिक शिल्प कौशल को दर्शाते हैं।
इन उत्पादों के माध्यम से आगंतुक यह जान सकेंगे कि भारत के प्रत्येक राज्य और क्षेत्र की अपनी अलग बुनाई शैली, डिज़ाइन, रंग संयोजन और सांस्कृतिक विशेषताएं हैं।
प्रदर्शनी में प्रदर्शित वस्त्र केवल कपड़े नहीं होंगे, बल्कि वे भारत की ऐतिहासिक विरासत, सांस्कृतिक पहचान और पीढ़ियों से चली आ रही पारंपरिक बुनाई कला का प्रतिनिधित्व करेंगे।
यह आयोजन दुनिया भर के खरीदारों को भारतीय हस्तकरघा उद्योग की गुणवत्ता और विविधता से परिचित कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
उत्पादों की प्रदर्शनी के साथ-साथ समिट में लाइव डेमो भी आयोजित किए जाएंगे।
इन लाइव प्रस्तुतियों के दौरान अनुभवी कारीगर पारंपरिक बुनाई, हस्तशिल्प निर्माण और अन्य कलात्मक तकनीकों का प्रदर्शन करेंगे।
इससे आगंतुक यह समझ सकेंगे कि एक उत्कृष्ट हस्तकरघा उत्पाद तैयार करने में कितनी मेहनत, समय और कौशल लगता है।
यह डिजिटल प्लेटफॉर्म भारत के हस्तकरघा उद्योग से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी को एक ही स्थान पर उपलब्ध कराएगा और भारतीय उत्पादों की वैश्विक पहुंच को मजबूत करेगा।
इस प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध होगी।
इस डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से भारत और विदेश के खरीदार आसानी से विभिन्न GI टैग वाले उत्पादों, उनके निर्माताओं और संबंधित बुनकर समूहों की जानकारी प्राप्त कर सकेंगे।
इससे भारतीय हस्तकरघा उत्पादों की दृश्यता बढ़ेगी और नए व्यापारिक अवसर भी विकसित होंगे।
डिजिटल हैंडलूम एटलस के माध्यम से कारीगर, सहकारी समितियां और उत्पादक सीधे निर्यातकों, रिटेल कंपनियों और वैश्विक ग्राहकों से जुड़ सकेंगे।
यह पहल बाजार तक पहुंच आसान बनाएगी, बिचौलियों पर निर्भरता कम करेगी और कारीगरों की आय बढ़ाने में भी मददगार साबित हो सकती है।
डिजिटल हैंडलूम एटलस का उद्देश्य केवल जानकारी उपलब्ध कराना नहीं है, बल्कि भारत की पारंपरिक हस्तकरघा कला को आधुनिक डिजिटल तकनीक से जोड़ना भी है।
इससे भारतीय हैंडलूम उद्योग वैश्विक प्रतिस्पर्धा के अनुरूप खुद को बेहतर ढंग से प्रस्तुत कर सकेगा और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपनी मजबूत पहचान बना पाएगा।
GI & Beyond 2.0 समिट में केवल नए व्यावसायिक अवसरों पर ही चर्चा नहीं होगी, बल्कि उन व्यक्तियों और संस्थाओं को भी सम्मानित किया जाएगा, जिन्होंने भारत के GI (Geographical Indication) उत्पादों के संरक्षण, प्रचार और विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
यह पहल भारत की पारंपरिक कला, शिल्प और बुनाई विरासत को संरक्षित करने वाले कारीगरों और संगठनों का मनोबल बढ़ाने का काम करेगी।
समिट के उद्घाटन समारोह के दौरान पंजीकृत GI उत्पाद स्वामियों (Registered Proprietors) और नए अधिकृत उपयोगकर्ताओं (Authorized Users) को GI प्रमाणपत्र (GI Certificates) प्रदान किए जाएंगे।
ये प्रमाणपत्र यह सुनिश्चित करते हैं कि संबंधित व्यक्ति या संस्था को उस विशेष GI उत्पाद के उत्पादन, विपणन और बिक्री का कानूनी अधिकार प्राप्त है।
GI प्रमाणन से किसी उत्पाद की क्षेत्रीय पहचान और मौलिकता सुरक्षित रहती है।
सरकार का मानना है कि इस प्रकार का सम्मान कारीगरों को अपनी पारंपरिक तकनीकों को संरक्षित रखने और नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए प्रेरित करेगा।
GI & Beyond 2.0 समिट के दौरान हैंडलूम एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (HEPC) अपने डायमंड जुबिली (Diamond Jubilee) लोगो का भी अनावरण करेगी।
यह अवसर HEPC की स्थापना के 60 वर्ष पूरे होने का प्रतीक होगा।
HEPC पिछले छह दशकों से भारतीय हस्तकरघा उत्पादों को वैश्विक बाजार तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
इस दौरान संस्था ने—
डायमंड जुबिली समारोह केवल उपलब्धियों का उत्सव नहीं होगा, बल्कि भविष्य की रणनीतियों पर भी ध्यान केंद्रित करेगा।
सरकार का उद्देश्य पारंपरिक उद्योगों को आधुनिक डिजिटल तकनीकों से जोड़कर अधिक प्रतिस्पर्धी बनाना है।
समिट के दौरान IIT Madras के विशेषज्ञ GI इकोसिस्टम में AI के उपयोग पर विशेष प्रस्तुति देंगे।
इस प्रस्तुति में बताया जाएगा कि AI तकनीक पारंपरिक उत्पादों की गुणवत्ता, पहचान और विपणन को कैसे बेहतर बना सकती है।
विशेषज्ञ बताएंगे कि AI का उपयोग निम्न क्षेत्रों में किया जा सकता है।
AI के उपयोग से पारंपरिक उद्योग आधुनिक तकनीक के साथ बेहतर तालमेल स्थापित कर सकेंगे।
GI & Beyond 2.0 समिट में विशेषज्ञों द्वारा कई तकनीकी सत्र भी आयोजित किए जाएंगे।
इन सत्रों का उद्देश्य कारीगरों, उद्यमियों और निर्यातकों को GI उत्पादों से जुड़े कानूनी, तकनीकी और व्यावसायिक पहलुओं की जानकारी देना है।
विशेषज्ञ निम्न विषयों पर विस्तृत जानकारी देंगे।
इन सत्रों के माध्यम से प्रतिभागियों को यह समझने में मदद मिलेगी कि बदलते वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा कैसे की जाए, ब्रांड वैल्यू कैसे बढ़ाई जाए और डिजिटल माध्यमों का प्रभावी उपयोग कैसे किया जाए।
सरकार का मानना है कि यह पहल कई स्तरों पर हस्तकरघा और हस्तशिल्प उद्योग को मजबूत बनाएगी।
डिजिटल हैंडलूम एटलस के माध्यम से कारीगर सीधे खरीदारों, निर्यातकों और वैश्विक ग्राहकों से जुड़ सकेंगे।
इससे बाजार तक पहुंच आसान होगी, डिजिटल परिवर्तन को गति मिलेगी और भारत के पारंपरिक हस्तकरघा उद्योग को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में नई पहचान मिलेगी।
GI & Beyond 2.0 समिट के दौरान डिजिटल हैंडलूम एटलस का लॉन्च भारत के हस्तकरघा और हस्तशिल्प क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि साबित हो सकता है। यह पहल केवल भारत की समृद्ध वस्त्र और शिल्प विरासत को दुनिया के सामने प्रस्तुत करने तक सीमित नहीं है, बल्कि कारीगरों, बुनकरों और उद्यमियों को आधुनिक डिजिटल तकनीकों के माध्यम से नए व्यापारिक अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में भी बड़ा कदम है।
समिट में विदेशी खरीदारों की भागीदारी, 100 से अधिक GI-पंजीकृत उत्पादों की प्रदर्शनी, AI आधारित समाधान, GI प्रमाणन, तकनीकी सत्र और डिजिटल हैंडलूम एटलस जैसी पहलें भारत के हस्तकरघा उद्योग को अधिक प्रतिस्पर्धी और वैश्विक स्तर पर मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।
यदि इन पहलों को प्रभावी ढंग से लागू किया जाता है, तो भारत न केवल GI उत्पादों के निर्यात में नई ऊंचाइयों तक पहुंचेगा, बल्कि लाखों कारीगरों और बुनकरों की आय बढ़ाने तथा देश की सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रखने में भी बड़ी सफलता हासिल कर सकेगा।