पेंशन फंड नियामक एवं विकास प्राधिकरण (PFRDA) अगले दो वर्षों के भीतर पेंशन फंड को देश की बड़ी इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं में सीधे निवेश करने की अनुमति देने की योजना बना रहा है। PFRDA के चेयरमैन एस. रामन्न ने यह जानकारी दी है। इस कदम का उद्देश्य राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (NPS) के तहत निवेश के विकल्पों को और बढ़ाना तथा देश की लंबी अवधि की सेवानिवृत्ति बचत का एक हिस्सा ऐसी इंफ्रास्ट्रक्चर परिसंपत्तियों में लगाने का है, जिनके लिए लंबे समय तक निवेश बनाए रखना जरूरी होता है।
यह बदलाव पेंशन फंड के निवेश ढांचे में एक महत्वपूर्ण विस्तार के रूप में देखा जा रहा है। इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं में आमतौर पर लंबे समय तक पूंजी की जरूरत होती है और इन परियोजनाओं से मिलने वाला रिटर्न भी लंबी अवधि में विकसित होता है। ऐसे में सेवानिवृत्ति के लिए जमा की जाने वाली लंबी अवधि की बचत के साथ इनका तालमेल बनाया जा सकता है।
PFRDA के चेयरमैन एस. रामन्न PFRDA Chairman S. Ramanna के अनुसार, पेंशन फंड भविष्य में बड़ी इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं में सीधे निवेश कर सकते हैं और ऐसे निवेश को 10 से 15 वर्षों तक बनाए रखना संभव हो सकता है। सेवानिवृत्ति के लिए की जाने वाली बचत का स्वभाव भी लंबी अवधि का होता है, इसलिए इस तरह की परिसंपत्तियां पेंशन फंड के लिए एक संभावित निवेश विकल्प बन सकती हैं।
इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं में सड़क, ऊर्जा, परिवहन, शहरी विकास और अन्य बड़ी परियोजनाएं शामिल हो सकती हैं। ऐसी परियोजनाओं को पूरा होने और उनसे नियमित आय या आर्थिक लाभ मिलने में कई वर्ष लग सकते हैं। इसलिए पेंशन फंड के पास लंबे समय तक निवेश बनाए रखने की क्षमता इस क्षेत्र के लिए उपयोगी हो सकती है।
हालांकि, सीधे परियोजनाओं में निवेश करने के लिए जोखिम, परियोजना की गुणवत्ता, नियामकीय आवश्यकताओं और निवेशकों के हितों को ध्यान में रखना जरूरी होगा। PFRDA का प्रस्ताव इसी व्यापक निवेश ढांचे को आगे बढ़ाने की दिशा में देखा जा रहा है।
PFRDA पहले ही पेंशन फंड के लिए निवेश के दायरे का विस्तार कर चुका है। पेंशन फंड को रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट यानी REIT और इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट यानी InvIT में निवेश की अनुमति दी गई है। इसके अलावा, वैकल्पिक निवेश फंड यानी AIF को भी पेंशन फंड के निवेश विकल्पों में शामिल किया गया है।
इन माध्यमों के जरिए पेंशन बचत को पारंपरिक निवेश साधनों के अलावा रियल एस्टेट और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े अवसरों तक पहुंच मिलती है। अब बड़ी परियोजनाओं में सीधे निवेश की अनुमति देने की योजना इस दिशा को और आगे बढ़ा सकती है।
PFRDA केवल निवेश विकल्प बढ़ाने पर ही ध्यान नहीं दे रहा है, बल्कि राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली में अधिक लोगों को शामिल करने की भी तैयारी कर रहा है। नियामक का लक्ष्य सरकारी कर्मचारियों और औपचारिक क्षेत्र के कर्मचारियों से आगे बढ़कर उन लोगों तक राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (NPS) National Pension System (NPS) की पहुंच बनाना है, जो अभी इस व्यवस्था से पूरी तरह नहीं जुड़े हैं।
PFRDA के विस्तार अभियान में असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले लोग, स्व-रोजगार करने वाले व्यक्ति, व्यापारी और छोटे कारोबारी प्रमुख समूहों में शामिल हैं। इन लोगों के लिए नियमित और आसान तरीके से पेंशन खाते खोलना NPS के विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
PFRDA अगले दो वर्षों में NPS में दो से तीन करोड़ नए ग्राहकों को जोड़ने का लक्ष्य लेकर चल रहा है। इसके लिए डिजिटल तरीके से खाता खोलने की सुविधा को महत्वपूर्ण माध्यम माना जा रहा है।
NPS के विस्तार की रणनीति में डिजिटल ऑनबोर्डिंग को विशेष महत्व दिया जा रहा है। इसी उद्देश्य से NPS Tatkal विकसित किया जा रहा है, जिसे भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) के प्लेटफॉर्म पर तैयार किया जा रहा है।
NPS Tatkal के जरिए लोग UPI सेवा देने वाले प्रदाताओं की मदद से पेंशन खाता खोल सकेंगे। इसके साथ ही वे UPI के माध्यम से अपने पेंशन खाते में योगदान भी कर सकेंगे। इससे NPS में शामिल होने की प्रक्रिया अधिक आसान और डिजिटल हो सकती है।
इस पहल में पांच बड़े बैंक पहले ही शामिल हो चुके हैं। इसके अलावा, कॉमन सर्विस सेंटर यानी CSC के माध्यम से भी लोगों को NPS से जोड़ने की सुविधा उपलब्ध कराने की योजना है। इससे उन लोगों तक पहुंच बनाने में मदद मिल सकती है, जिन्हें डिजिटल सेवाओं तक सीधे पहुंचने में परेशानी होती है।
PFRDA NPS की पहुंच बढ़ाने के लिए जनधन खातों के व्यापक नेटवर्क का भी इस्तेमाल करना चाहता है। नियामक का दीर्घकालिक लक्ष्य वर्ष 2047 तक हर जनधन खाते को NPS खाते से जोड़ना है।
यह लक्ष्य देश में सेवानिवृत्ति बचत की पहुंच को बड़े स्तर पर बढ़ाने की दिशा में है। यदि अधिक से अधिक लोगों को कामकाजी उम्र से ही पेंशन बचत से जोड़ा जाता है, तो भविष्य में उनकी सेवानिवृत्ति के लिए वित्तीय आधार तैयार करने में मदद मिल सकती है।
एस. रामन्न के अनुसार, वर्तमान में NPS में सरकारी और गैर-सरकारी क्षेत्रों को मिलाकर लगभग 2.3 करोड़ ग्राहक हैं। NPS के तहत प्रबंधित कुल परिसंपत्तियों का मूल्य करीब ₹19 लाख करोड़ है।
यह आंकड़ा बताता है कि NPS पहले से ही देश की बड़ी दीर्घकालिक बचत व्यवस्थाओं में शामिल है। नए ग्राहकों को जोड़ने और निवेश के नए विकल्प उपलब्ध कराने की योजनाओं के साथ इसके आकार में आगे भी विस्तार की संभावना है।
PFRDA ने गैर-सरकारी ग्राहकों के लिए NPS Sanchay को डिफॉल्ट निवेश विकल्प के रूप में भी पेश किया है। यह उन लोगों के लिए तैयार किया गया है, जो अपने पेंशन निवेश में अलग-अलग परिसंपत्ति वर्गों के बीच धन का बंटवारा करने को लेकर सहज नहीं होते।
NPS Sanchay का उद्देश्य ऐसी निवेश संरचना उपलब्ध कराना है, जो सरकारी कर्मचारियों के लिए उपलब्ध निवेश व्यवस्था के समान हो। इससे उन ग्राहकों को सुविधा मिल सकती है, जिन्हें खुद से यह तय करने में कठिनाई होती है कि उनके पेंशन फंड का कितना हिस्सा अलग-अलग निवेश साधनों में होना चाहिए।
इस विकल्प के जरिए ग्राहक शेयर बाजार की वृद्धि में भी भाग ले सकते हैं। इस तरह PFRDA एक ओर NPS में अधिक लोगों को जोड़ने की कोशिश कर रहा है, वहीं दूसरी ओर निवेश प्रक्रिया को ऐसे लोगों के लिए सरल बनाने पर भी ध्यान दे रहा है, जिन्हें निवेश संबंधी निर्णय लेने का अधिक अनुभव नहीं है।
बड़ी इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं में सीधे पेंशन फंड निवेश की योजना PFRDA की दीर्घकालिक निवेश रणनीति का हिस्सा है। पेंशन फंड के पास लंबे समय की बचत होती है, जबकि इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं को भी लंबे समय तक पूंजी की आवश्यकता होती है।
आने वाले दो वर्षों में यदि नियामक इस तरह के सीधे निवेश की अनुमति देता है, तो NPS के तहत उपलब्ध निवेश विकल्पों का दायरा और बढ़ सकता है। साथ ही, NPS के विस्तार के लिए डिजिटल ऑनबोर्डिंग, UPI, CSC और जनधन नेटवर्क जैसे माध्यमों का इस्तेमाल देश के अधिक लोगों को औपचारिक पेंशन व्यवस्था से जोड़ने में मदद कर सकता है।
PFRDA की मौजूदा योजनाओं में निवेश विकल्पों के विस्तार और NPS की पहुंच बढ़ाने, दोनों पर समान रूप से जोर दिखाई देता है। आने वाले वर्षों में इन पहलों का उद्देश्य लंबी अवधि की सेवानिवृत्ति बचत को अधिक लोगों तक पहुंचाना और उसके लिए नए निवेश अवसर उपलब्ध कराना है।