भारत तेजी से दूरसंचार और डिजिटल तकनीक के क्षेत्र में अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है। केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा है कि देश के पास वैश्विक तकनीकी महत्वाकांक्षाओं को आगे बढ़ाने के लिए जरूरी “मैनपावर, मोबिलिटी और माइंडसेट” यानी प्रतिभाशाली मानव संसाधन, आगे बढ़ने की क्षमता और नई सोच मौजूद है।
गुरुवार को इंडिया मोबाइल कांग्रेस 2026 India Mobile Congress 2026 को संबोधित करते हुए सिंधिया ने कहा कि इंडिया मोबाइल कांग्रेस को अब केवल भारत में होने वाला एक बड़ा तकनीकी आयोजन नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसे ऐसा मंच बनना चाहिए जहां दुनिया भारत की तकनीकी क्षमताओं को देख सके।
उन्होंने कहा कि भारत को अब अपने तकनीकी विकास को घरेलू बाजार तक सीमित रखने के बजाय वैश्विक बाजारों तक पहुंचाने पर ध्यान देना होगा।
केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया Union Communications Minister Jyotiraditya Scindia ने कहा कि पिछले एक दशक में भारत दुनिया के सबसे किफायती डेटा बाजारों में शामिल हो गया है। देश में ब्रॉडबैंड ग्राहकों की संख्या में भी जबरदस्त वृद्धि हुई है।
करीब एक दशक पहले भारत में ब्रॉडबैंड ग्राहकों की संख्या लगभग 6 करोड़ थी। अब यह संख्या बढ़कर 1.1 अरब से अधिक हो गई है।
यह वृद्धि भारत में इंटरनेट और डिजिटल सेवाओं के तेजी से विस्तार को दर्शाती है। सस्ते डेटा, स्मार्टफोन की बढ़ती पहुंच और डिजिटल सेवाओं के विस्तार ने देश में इंटरनेट के इस्तेमाल को बड़े स्तर पर बढ़ावा दिया है।
सिंधिया के अनुसार, यह बदलाव केवल दूरसंचार क्षेत्र की उपलब्धि नहीं है, बल्कि डिजिटल अर्थव्यवस्था के विस्तार का भी महत्वपूर्ण आधार है।
अगली पीढ़ी की दूरसंचार तकनीक के क्षेत्र में भी भारत अपनी क्षमता बढ़ा रहा है। सिंधिया ने बताया कि भारत 6G अलायंस में 90 संस्थान शामिल हैं और यह वैश्विक भागीदारों के साथ मिलकर काम कर रहा है।
भारत 6G अलायंस ने अब तक 7,700 पेटेंट स्थापित किए हैं। इनमें से 4,400 अंतरराष्ट्रीय पेटेंट हैं।
यह आंकड़ा बताता है कि भारत 6G जैसी अगली पीढ़ी की तकनीक के विकास में केवल एक उपयोगकर्ता के रूप में नहीं, बल्कि तकनीक बनाने और उसके मानक तय करने वाले देशों में शामिल होने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
सिंधिया ने कहा कि भारत के पास इस गति को अपनी सीमाओं से आगे ले जाने के लिए जरूरी मानव संसाधन, क्षमता और सोच मौजूद है।
संचार मंत्री ने भारत की तकनीकी यात्रा के अगले चरण को लेकर स्पष्ट संदेश दिया। उनके अनुसार, पिछले दशक में दुनिया भारत के डिजिटल बाजार और तकनीकी बदलाव को देखने के लिए भारत आई है। अब अगला दशक ऐसा होना चाहिए जिसमें भारत अपनी तकनीक और क्षमताओं को दुनिया तक पहुंचाए।
सिंधिया ने कहा, “पहला दशक दुनिया को भारत लेकर आया। अगले दशक को भारत को दुनिया तक ले जाना चाहिए।”
उनका यह बयान भारत के तकनीकी क्षेत्र की बदलती भूमिका को दर्शाता है। देश अब केवल बड़ी संख्या में तकनीकी सेवाओं और डिजिटल उत्पादों का इस्तेमाल करने वाला बाजार नहीं, बल्कि वैश्विक तकनीकी समाधान तैयार करने वाले प्रमुख केंद्र के रूप में अपनी पहचान मजबूत करना चाहता है।
सिंधिया ने देश में मोबाइल और तकनीकी उपकरणों के निर्माण को बढ़ावा देने में उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन योजना (PLI) की भूमिका पर भी प्रकाश डाला।
उन्होंने कहा कि PLI योजना की मदद से भारत केवल 22 महीनों में दुनिया के शीर्ष चार तकनीकी उपकरण उत्पादक देशों में शामिल हो गया।
इस योजना का उद्देश्य देश में उत्पादन बढ़ाना, निवेश आकर्षित करना और तकनीकी उपकरणों के निर्माण के लिए घरेलू क्षमता को मजबूत करना है। मोबाइल फोन और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के उत्पादन में भारत की बढ़ती भूमिका इसी बदलाव का हिस्सा है।
सिंधिया ने डिजिटल समावेशन को भी भारत की डिजिटल यात्रा का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का डिजिटल इंडिया मिशन दो प्रमुख उद्देश्यों पर आधारित है।
पहला उद्देश्य तकनीक का लोकतंत्रीकरण करना है, ताकि इसका लाभ केवल कुछ लोगों तक सीमित न रहे। दूसरा उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि तकनीकी प्रगति देश के हर नागरिक, हर उद्यम और हर समुदाय तक पहुंचे।
सिंधिया ने कहा कि तकनीक को हर उद्यम और हर समुदाय की सेवा करनी चाहिए। उनका कहना था कि डिजिटल विकास का वास्तविक लाभ तभी माना जाएगा जब देश के अलग-अलग हिस्सों में रहने वाले लोगों और व्यवसायों को इसका फायदा मिले।
ग्रामीण भारत में इंटरनेट और ब्रॉडबैंड पहुंच बढ़ाने के लिए सरकार की भारतनेट योजना भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
सिंधिया ने बताया कि करीब 15 अरब डॉलर के निवेश से समर्थित भारतनेट का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी को मजबूत करना है।
भारतनेट के माध्यम से करीब 2.6 लाख ग्राम पंचायतों तक मिडिल-माइल कनेक्टिविटी उपलब्ध कराने का लक्ष्य है। इसके अलावा देश के करीब 3.8 लाख अन्य गांवों को मांग के आधार पर कनेक्टिविटी उपलब्ध कराने की योजना है।
इससे ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट आधारित शिक्षा, स्वास्थ्य, सरकारी सेवाओं, डिजिटल कारोबार और दूसरे ऑनलाइन अवसरों को बढ़ावा मिल सकता है।
भारत का वैश्विक दूरसंचार संस्थानों के साथ जुड़ाव भी लगातार बढ़ रहा है। सिंधिया ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय दूरसंचार संघ (ITU) परिषद ने 2030 में ITU की प्लेनिपोटेंटियरी कॉन्फ्रेंस भारत में आयोजित करने के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है।
सिंधिया ने याद दिलाया कि भारत ने 2024 में ITU की विश्व दूरसंचार मानकीकरण सभा (WTSA) की मेजबानी की थी। उन्होंने इसे ITU के इतिहास में जिनेवा के बाहर आयोजित सबसे बड़ी WTSA सभाओं में से एक बताया।
उन्होंने कहा कि GSMA बोर्ड के साथ भारत की बढ़ती साझेदारी भी देश को भारत और दुनिया के बीच एक मजबूत पुल के रूप में स्थापित करने में मदद करेगी।
भारत में दूरसंचार क्षेत्र में आए बदलाव, डिजिटल बुनियादी ढांचे के विस्तार और 6G जैसी अगली पीढ़ी की तकनीकों में बढ़ती क्षमता ने देश के सामने नई संभावनाएं खोल दी हैं।
भारत के पास अब बड़ा डिजिटल बाजार होने के साथ-साथ तकनीक विकसित करने, पेटेंट हासिल करने और वैश्विक साझेदारियों को मजबूत करने की क्षमता भी बढ़ रही है। ऐसे में अगली चुनौती इन क्षमताओं को वैश्विक बाजारों में सफल उत्पादों और सेवाओं में बदलने की होगी।
इंडिया मोबाइल कांग्रेस 2026 के मंच से सिंधिया का संदेश साफ है कि भारत को आने वाले वर्षों में केवल तकनीक अपनाने वाला देश नहीं, बल्कि तकनीक विकसित करने, उसका निर्यात करने और वैश्विक डिजिटल व्यवस्था को दिशा देने वाला देश बनने की दिशा में आगे बढ़ना होगा।