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भारत की सबसे बड़ी सरकारी बीमा कंपनी भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) ने अपने शेयरधारकों से 1:1 बोनस इश्यू को मंजूरी प्राप्त कर ली है। यह निर्णय कंपनी के पूंजी ढांचे में एक महत्वपूर्ण बदलाव है। इस कदम के तहत ₹6,352 करोड़ मूल्य के पूरी तरह भुगतान किए गए बोनस इक्विटी शेयर जारी किए जाएंगे। यह एलआईसी का अब तक का पहला बोनस इश्यू है।
LIC ने अपने शेयरधारकों की मंजूरी के बाद 1:1 अनुपात में बोनस शेयर जारी करने का निर्णय लिया है। इसका अर्थ है, कि प्रत्येक मौजूदा शेयर पर निवेशकों को एक अतिरिक्त शेयर मिलेगा।
यह बोनस इश्यू ₹10 फेस वैल्यू वाले शेयरों पर आधारित है, जिसका कुल मूल्य लगभग ₹6,352 करोड़ है। यह एलआईसी के इतिहास में पहली बार है, जब कंपनी ने बोनस शेयर जारी करने की घोषणा की है।
इस 1:1 बोनस इश्यू के बाद एलआईसी की पेड-अप शेयर पूंजी दोगुनी हो जाएगी। शेयरों की संख्या 632 करोड़ से बढ़कर 1,264 करोड़ हो जाएगी।
कंपनी के अनुसार बोनस शेयरों का आवंटन शेयरधारकों की मंजूरी की तारीख से दो महीने के भीतर पूरा कर दिया जाएगा। इसके बाद कंपनी की कुल पूंजी का मूल्य लगभग ₹12,649 करोड़ तक पहुंच जाएगा।
एलआईसी ने दिसंबर 2025 को समाप्त तिमाही में मजबूत वित्तीय प्रदर्शन दर्ज किया है। कंपनी का शुद्ध लाभ 17% बढ़कर ₹12,958 करोड़ हो गया।
पिछले वर्ष इसी अवधि में कंपनी का लाभ ₹11,056 करोड़ था, जिससे यह स्पष्ट होता है, कि कंपनी की आय में लगातार वृद्धि हो रही है।
कंपनी की शुद्ध प्रीमियम आय भी बढ़कर ₹1,25,613 करोड़ हो गई, जबकि पिछले वर्ष यह ₹1,06,891 करोड़ थी।
कुल आय भी बढ़कर ₹2,33,984 करोड़ हो गई, जो पिछले वर्ष इसी अवधि में ₹2,01,994 करोड़ थी। यह वृद्धि बीमा उत्पादों की मजबूत मांग को दर्शाती है।
मजबूत नतीजों और बोनस घोषणा के बावजूद एलआईसी के शेयर में 0.97% की गिरावट दर्ज की गई और यह ₹791.40 पर बंद हुआ। यह प्रदर्शन निफ्टी 50 के हल्के बढ़त (0.03%) से कमजोर रहा।
शेयर ने वर्ष-दर-वर्ष आधार पर 7.43% और पिछले 12 महीनों में 7.65% की गिरावट दर्ज की है, जो निवेशकों की सतर्कता को दर्शाता है।
विशेषज्ञों के अनुसार बोनस इश्यू आमतौर पर कंपनी की मजबूत वित्तीय स्थिति और भविष्य में विश्वास को दर्शाता है। इससे शेयर की तरलता बढ़ती है और छोटे निवेशकों की भागीदारी भी आसान होती है।
हालांकि शेयर का प्रदर्शन आगे कंपनी की कमाई और निवेश रिटर्न पर निर्भर करेगा।
एलआईसी ने घोषणा की है, कि वह गुरुवार शाम 7 बजे विश्लेषकों और निवेशकों के साथ एक अर्निंग्स कॉल आयोजित करेगी। इसमें मार्च 2026 को समाप्त तिमाही और वर्ष के वित्तीय परिणामों पर चर्चा की जाएगी।
इस कॉल में कंपनी की भविष्य की रणनीति और विकास योजनाओं पर भी जानकारी दी जाएगी।
एलआईसी भारत की सबसे बड़ी जीवन बीमा कंपनी है, जिसका व्यापक ग्राहक आधार और मजबूत वितरण नेटवर्क है। ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में इसकी मजबूत पकड़ है।
सरकारी समर्थन और बड़े निवेश पोर्टफोलियो के कारण एलआईसी बीमा क्षेत्र में एक प्रमुख खिलाड़ी बनी हुई है।
बीमा उत्पादों की बढ़ती मांग, बढ़ती वित्तीय जागरूकता और सरकारी योजनाओं के कारण एलआईसी का व्यवसाय लगातार बढ़ रहा है।
निजी कंपनियों से प्रतिस्पर्धा के बावजूद एलआईसी अपनी अग्रणी स्थिति बनाए हुए है।
निष्कर्ष:
एलआईसी द्वारा 1:1 बोनस इश्यू को मंजूरी देना कंपनी के इतिहास में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे न केवल कंपनी की शेयर पूंजी दोगुनी होगी, बल्कि निवेशकों के लिए भी यह एक सकारात्मक संकेत है।
मजबूत लाभ, बढ़ती प्रीमियम आय और बाजार में नेतृत्व के साथ एलआईसी भारतीय बीमा क्षेत्र की एक मजबूत आधारशिला बनी हुई है। हालांकि, शेयर बाजार में हालिया दबाव निवेशकों की सतर्कता को दर्शाता है और आगे के प्रदर्शन पर नजर बनी रहेगी।
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नए साल 2026 का आगाज शेयर बाजार के निवेशकों, खास तौर पर सरकारी बीमा कंपनी एलआईसी (LIC) के लिए किसी बुरे सपने जैसा रहा है, सरकार द्वारा सिगरेट पर एक्साइज ड्यूटी (उत्पाद शुल्क) लगाने की घोषणा भर से देश की दिग्गज एफएमसीजी कंपनी आईटीसी (ITC) के शेयर ताश के पत्तों की तरह बिखर गए, महज दो दिनों के भीतर आईटीसी के शेयरों में आई इस भारी गिरावट ने न केवल आम निवेशकों को बल्कि देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी LIC को भी तगड़ा झटका दिया है, एलआईसी की होल्डिंग वैल्यू में हजारों करोड़ रुपये की कमी दर्ज की गई है।
साल 2026 के पहले दो कारोबारी सत्र आईटीसी के लिए बेहद निराशाजनक साबित हुए, सरकार के सिगरेट पर टैक्स बढ़ाने के सख्त फैसले का असर यह हुआ कि आईटीसी के शेयरों में 14 फीसदी से ज्यादा की गिरावट आ गई, स्थिति इतनी खराब हो गई कि 2 जनवरी को ट्रेडिंग के दौरान शेयर लुढ़ककर 345.25 रुपये के स्तर पर आ गया, यह इस शेयर का पिछले 52 हफ्तों का सबसे निचला स्तर (Low) है।
बाजार के जानकारों के लिए यह गिरावट इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि आईटीसी में किसी प्रमोटर या प्रमोटर ग्रुप की हिस्सेदारी नहीं है, वित्त वर्ष 2026 की जुलाई-सितंबर तिमाही के आंकड़ों के अनुसार कंपनी की 100 फीसदी हिस्सेदारी पब्लिक शेयरहोल्डर्स के पास है, जिससे इस गिरावट का सीधा असर संस्थागत निवेशकों और आम जनता पर पड़ा है।
आईटीसी में आई इस गिरावट का सबसे बड़ा खामियाजा एलआईसी को भुगतना पड़ा है, आईटीसी में एलआईसी की हिस्सेदारी 15.86 फीसदी है, जो एक बहुत बड़ा हिस्सा है, आंकड़ों पर गौर करें तो 31 दिसंबर 2025 को आईटीसी में एलआईसी के निवेश की कुल वैल्यू 80,028 करोड़ रुपये थी, लेकिन शेयरों में आई भारी बिकवाली के बाद यह वैल्यू घटकर 68,560 करोड़ रुपये रह गई, यानी सिर्फ दो दिनों के भीतर एलआईसी को अपनी होल्डिंग पर 11,468 करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान उठाना पड़ा है।
सिर्फ एलआईसी ही नहीं, बल्कि अन्य सरकारी बीमा कंपनियों की बैलेंस शीट पर भी इसका असर दिखा है, जनरल इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (GIC), जिसकी आईटीसी में 1.73 फीसदी हिस्सेदारी है, उसे 1,254 करोड़ रुपये का घाटा हुआ, वहीं न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी को 1.4 फीसदी हिस्सेदारी के चलते 1,018 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ, इस तरह तीनों सरकारी कंपनियों को कुल मिलाकर करीब 13,740 करोड़ रुपये की चपत लगी है।
निवेशकों के लिए राहत की बात यह है, कि बीमा कंपनियों को हुआ यह भारी-भरकम नुकसान फिलहाल ‘नोशनल लॉस’ (Notional Loss) है, इसका मतलब यह है, कि यह नुकसान सिर्फ कागजों पर है, कंपनियों को वास्तविक घाटा तभी होगा जब वे आईटीसी के इन शेयरों को मौजूदा निचले स्तरों पर बेच देंगी, चूंकि बीमा कंपनियां लंबी अवधि के नजरिए से निवेश करती हैं, इसलिए वे अक्सर बाजार के ऐसे उतार-चढ़ाव को खपा लेती हैं।
गिरावट के इस दौर में आईटीसी का मार्केट कैपिटलाइजेशन (M-Cap) भी बुरी तरह प्रभावित हुआ है, दो दिनों की बिकवाली में कंपनी की मार्केट वैल्यू 72,000 करोड़ रुपये घट गई और अब यह 4,38,639 करोड़ रुपये पर आ गई है, हालांकि 2 जनवरी के कारोबार के अंत में थोड़ी रिकवरी देखी गई और शेयर करीब 4 फीसदी की गिरावट के साथ 350.10 रुपये पर बंद हुआ, वहीं दूसरी तरफ इस उथल-पुथल के बीच एलआईसी का अपना शेयर 1 फीसदी चढ़कर 861 रुपये पर बंद होने में कामयाब रहा।