17 वर्षीय भारतीय तीरंदाज कुमकुम महोद ने शनिवार को एशियन गेम्स में इतिहास रच दिया। उन्होंने व्यक्तिगत रिकर्व स्पर्धा में दक्षिण कोरिया की येजिन ओह को बेहद रोमांचक मुकाबले में शूट-ऑफ के जरिए हराकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। इस जीत के साथ कुमकुम एशियन गेम्स के व्यक्तिगत रिकर्व मुकाबले में पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला बन गईं।
पांच सेट के बाद मुकाबला 5-5 की बराबरी पर पहुंच गया था। इसके बाद विजेता का फैसला एक तीर के शूट-ऑफ से हुआ। दक्षिण कोरिया की येजिन ओह ने शूट-ऑफ में 8 अंक का निशाना लगाया, जबकि कुमकुम ने दबाव के बीच शानदार प्रदर्शन करते हुए 10 अंक हासिल किए। इस परफेक्ट निशाने के साथ उन्होंने 6-5 से मुकाबला जीतकर स्वर्ण पदक पर कब्जा कर लिया।
एशियन गेम्स 2026 2026 Asian Games
कुमकुम की इस ऐतिहासिक जीत का एक और बड़ा महत्व है। इस सफलता के साथ भारत ने लॉस एंजिल्स 2028 ओलंपिक खेलों के लिए व्यक्तिगत कोटा स्थान हासिल कर लिया। कुमकुम और येजिन ओह ने अपने-अपने देशों के लिए एक-एक व्यक्तिगत कोटा स्थान सुनिश्चित किया।
फाइनल मुकाबले की शुरुआत कुमकुम महोद Kumkum Mahod के लिए आसान नहीं रही। दक्षिण कोरिया की येजिन ओह ने पहले सेट में 29-27 से जीत दर्ज कर 2-0 की बढ़त बना ली।
दूसरे सेट में दोनों तीरंदाजों ने 29-29 का स्कोर किया। इस परिणाम के बाद ओह के पास 3-1 की बढ़त हो गई। कुमकुम शुरुआती दो सेट में पिछड़ रही थीं, लेकिन उन्होंने इसके बाद जिस तरह मुकाबले में वापसी की, वह उनके धैर्य और आत्मविश्वास को दिखाता है।
तीसरे सेट में कुमकुम ने शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने लगातार तीन बार 10 अंक का निशाना लगाकर 30 का परफेक्ट स्कोर बनाया। इसके जवाब में येजिन ओह 29 अंक ही हासिल कर सकीं।
इस प्रदर्शन के साथ कुमकुम ने तीसरा सेट जीत लिया और मुकाबले का स्कोर 3-3 से बराबर हो गया। शुरुआती दबाव से बाहर निकलकर भारतीय तीरंदाज ने फाइनल में अपनी स्थिति मजबूत कर ली।
चौथे सेट में दोनों खिलाड़ियों के बीच एक बार फिर कड़ा मुकाबला देखने को मिला। येजिन ओह ने 28-27 से सेट अपने नाम किया और 5-3 की बढ़त हासिल कर ली।
अब दक्षिण कोरियाई तीरंदाज को स्वर्ण पदक जीतने के लिए केवल एक और सेट प्वाइंट की जरूरत थी। दूसरी ओर, कुमकुम के सामने मुकाबले में बने रहने और इसे शूट-ऑफ तक ले जाने की चुनौती थी।
निर्णायक पांचवें सेट में कुमकुम ने दबाव को अपने ऊपर हावी नहीं होने दिया। उन्होंने पहली ही तीर से 10 अंक हासिल किए और इसके बाद लगातार दो और 10 अंक के निशाने लगाए।
इस तरह उन्होंने पांचवें सेट में भी 30 का परफेक्ट स्कोर बनाया। येजिन ओह 28 अंक ही हासिल कर सकीं। कुमकुम की इस शानदार वापसी ने मुकाबले को 5-5 की बराबरी पर पहुंचा दिया और स्वर्ण पदक का फैसला शूट-ऑफ से होना तय हुआ।
शूट-ऑफ में दोनों खिलाड़ियों के पास केवल एक तीर चलाने का मौका था। ऐसे समय में छोटी सी गलती भी पूरे मुकाबले का परिणाम बदल सकती थी।
येजिन ओह ने पहले निशाना लगाया और 8 अंक हासिल किए। इसके बाद कुमकुम की बारी आई। भारतीय तीरंदाज ने बिना घबराए 10 अंक का सटीक निशाना लगाया।
इस 10 अंक के साथ कुमकुम ने 6-5 से मुकाबला जीत लिया और एशियन गेम्स के व्यक्तिगत रिकर्व में ऐतिहासिक स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिया।
कुमकुम की स्वर्ण पदक तक पहुंचने की यात्रा भी बेहद प्रभावशाली रही। उन्होंने रैंकिंग राउंड में 10वें स्थान पर रहते हुए क्वालिफाई किया था। इसके बाद उन्होंने क्वार्टर फाइनल में दक्षिण कोरिया की मौजूदा विश्व चैंपियन और ओलंपिक टीम स्वर्ण पदक विजेता कांग चेयंग को हराकर बड़ा उलटफेर किया।
यह जीत कुमकुम के लिए विशेष महत्व रखती थी, क्योंकि कांग चेयंग अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अनुभवी और सफल तीरंदाज हैं। क्वार्टर फाइनल में मिली इस जीत ने भारतीय खिलाड़ी के आत्मविश्वास को और मजबूत किया।
क्वार्टर फाइनल के बाद कुमकुम ने सेमीफाइनल में चीन की जिंगयी झू का सामना किया। उन्होंने इस मुकाबले में 6-2 से जीत दर्ज की और फाइनल में जगह बनाई।
जिंगयी झू भी मजबूत प्रतिद्वंद्वी थीं। उन्होंने 2025 विश्व चैंपियनशिप में रजत पदक जीता था। इसके बावजूद कुमकुम ने सेमीफाइनल में संयम बनाए रखा और सीधे सेटों में प्रभावी प्रदर्शन करते हुए फाइनल का टिकट हासिल किया।
इस जीत के साथ ही कुमकुम एशियन गेम्स के व्यक्तिगत रिकर्व फाइनल में पहुंचने वाली पहली भारतीय महिला बन गई थीं।
फाइनल में स्वर्ण पदक जीतने के बाद कुमकुम की उपलब्धि और भी महत्वपूर्ण हो गई। इस जीत के साथ भारत ने लॉस एंजिल्स 2028 ओलंपिक के लिए व्यक्तिगत कोटा स्थान हासिल कर लिया।
कुमकुम और येजिन ओह दोनों ने अपने-अपने देशों के लिए एक-एक कोटा स्थान सुनिश्चित किया। इस तरह एशियन गेम्स की व्यक्तिगत रिकर्व स्पर्धा में कुमकुम की सफलता का असर केवल वर्तमान प्रतियोगिता तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इससे भारत की 2028 ओलंपिक तैयारियों को भी महत्वपूर्ण आधार मिला।
व्यक्तिगत रिकर्व स्पर्धा में कांस्य पदक चीन की युवेई हुआंग ने जीता। उन्होंने कांस्य पदक के मुकाबले में अपनी ही देश की जिंगयी झू को 6-4 से हराया।
इस तरह पोडियम पर चीन की दो तीरंदाजों ने भी जगह बनाई, जबकि स्वर्ण पदक भारत की कुमकुम महोद के नाम रहा।
कुमकुम महोद की जीत भारतीय तीरंदाजी के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। केवल 17 वर्ष की उम्र में उन्होंने एशियन गेम्स जैसे बड़े मंच पर व्यक्तिगत रिकर्व में स्वर्ण पदक हासिल किया और इस स्पर्धा में भारतीय महिला तीरंदाजी के लिए एक नया इतिहास बनाया।
शुरुआती बढ़त गंवाने के बाद फाइनल में वापसी, दो अलग-अलग सेटों में लगातार तीन 10 अंक के निशाने और अंत में शूट-ऑफ में 10 अंक हासिल करना उनकी प्रतियोगिता की खास उपलब्धियां रहीं।
उनकी यह जीत यह भी दिखाती है कि बड़े अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में दबाव के बीच धैर्य और सटीक निशाना कितना महत्वपूर्ण होता है। कुमकुम ने पूरे अभियान में मजबूत प्रतिद्वंद्वियों को हराया और अंत में फाइनल में भी अपनी क्षमता साबित करते हुए भारत के लिए ऐतिहासिक स्वर्ण पदक हासिल किया।
एशियन गेम्स में व्यक्तिगत रिकर्व स्वर्ण के साथ कुमकुम महोद ने न केवल अपना नाम भारतीय तीरंदाजी के इतिहास में दर्ज कराया, बल्कि LA28 के लिए भारत का व्यक्तिगत ओलंपिक कोटा भी सुरक्षित किया। यह उपलब्धि उनके युवा अंतरराष्ट्रीय करियर में एक महत्वपूर्ण पड़ाव मानी जाएगी।