केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने भारत के तेजी से बढ़ते स्टार्टअप इकोसिस्टम को देश के बड़े महानगरों से आगे छोटे शहरों और कस्बों तक पहुंचाने की जरूरत पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि भारत में नवाचार की क्षमता केवल दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद जैसे बड़े शहरों तक सीमित नहीं है, बल्कि Tier-2 और Tier-3 शहरों से भी बड़ी संख्या में युवा उद्यमी और नवोन्मेषक सामने आ रहे हैं।
कोलकाता में RISE Conclave 2026 के छठे संस्करण के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए जितेंद्र सिंह ने कहा कि वैज्ञानिक संस्थानों को छोटे शहरों में मौजूद प्रतिभाओं के साथ अधिक सक्रिय रूप से जुड़ना चाहिए। उन्होंने विज्ञान, उद्यमिता और उद्योग के बीच मजबूत संबंध बनाने की आवश्यकता भी बताई।
जितेंद्र सिंह के अनुसार, भारत के 50 से 60 प्रतिशत से अधिक स्टार्टअप महानगरों के बाहर स्थित हैं। यह आंकड़ा बताता है कि छोटे शहर देश की नवाचार आधारित अर्थव्यवस्था में तेजी से महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह Union Minister of State for Science and Technology Jitendra Singh ने कहा कि छोटे शहरों के युवा नवोन्मेषक अब बड़े तकनीकी केंद्रों के उद्यमियों के साथ प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं और कई मामलों में उनसे बेहतर प्रदर्शन भी कर रहे हैं। ऐसे में वैज्ञानिक और शोध संस्थानों को अपनी योजनाओं, संसाधनों और सहायता कार्यक्रमों को इन शहरों तक पहुंचाना चाहिए।
उनका मानना है कि प्रतिभाशाली युवाओं से यह अपेक्षा नहीं की जानी चाहिए कि वे अवसर पाने के लिए अनिवार्य रूप से किसी बड़े महानगर में स्थानांतरित हों।
RISE Conclave का उद्देश्य स्टार्टअप, वैज्ञानिक, शोधकर्ता, उद्योग जगत, निवेशक, मार्गदर्शक और सरकारी प्रतिनिधियों को एक साझा मंच पर लाना है। इस तरह के मंचों के माध्यम से वैज्ञानिक शोध को प्रयोगशालाओं से बाहर निकालकर वास्तविक जीवन में उपयोगी तकनीकों और उत्पादों में बदला जा सकता है।
जितेंद्र सिंह ने कहा कि विज्ञान और तकनीक की उपलब्धियों को केवल शोध पत्रों या प्रयोगशालाओं तक सीमित नहीं रहना चाहिए। Technology Transfer, Commercialisation और Entrepreneurship के माध्यम से वैज्ञानिक खोजों को बाजार और आम लोगों तक पहुंचाना जरूरी है।
उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि RISE को केवल साल में एक बार आयोजित होने वाले कार्यक्रम तक सीमित नहीं रखना चाहिए। इसे एक निरंतर Innovation Network के रूप में विकसित किया जाना चाहिए, जहां वैज्ञानिक, स्टार्टअप और उद्योग लगातार एक-दूसरे से जुड़े रहें।
जितेंद्र सिंह ने RISE Conclave के लिए कोलकाता को उपयुक्त स्थान बताते हुए शहर की लंबे समय से चली आ रही वैज्ञानिक और शैक्षणिक परंपरा का उल्लेख किया।
उन्होंने डॉ. बिधान चंद्र रॉय, प्रो. यू.एन. ब्रह्मचारी, सर सी.वी. रमन और डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जैसी प्रमुख हस्तियों के योगदान को याद किया।
मंत्री ने कहा कि वर्तमान पीढ़ी को बंगाल की इस वैज्ञानिक विरासत को आगे बढ़ाने की जरूरत है। उनका लक्ष्य कोलकाता को एक बार फिर विज्ञान और प्रौद्योगिकी के प्रमुख केंद्र के रूप में मजबूत करना है।
जितेंद्र सिंह ने बताया कि सरकार का “Whole-of-Government” दृष्टिकोण अब धीरे-धीरे “Whole-of-Science” मॉडल की ओर बढ़ रहा है। इसका उद्देश्य विभिन्न मंत्रालयों, शोध संस्थानों, विश्वविद्यालयों और उद्योगों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करना है।
उन्होंने CSIR की प्रयोगशालाओं और IIT खड़गपुर, IISER कोलकाता तथा NIT दुर्गापुर जैसे संस्थानों के बीच सहयोग की संभावनाओं पर जोर दिया।
इसके अलावा Department of Biotechnology, Department of Science and Technology, Department of Atomic Energy और Ministry of Earth Sciences से जुड़े संस्थान भी पूर्वी भारत में एक मजबूत ज्ञान और नवाचार गलियारा बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
जितेंद्र सिंह ने कहा कि अंतरिक्ष, परमाणु ऊर्जा और जैव प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ने से स्टार्टअप और कंपनियों के लिए नए अवसर पैदा हुए हैं।
इन क्षेत्रों में निजी कंपनियों की बढ़ती भागीदारी से भारतीय उद्यमियों को नई तकनीकों के विकास, परीक्षण और व्यावसायीकरण में शामिल होने का अवसर मिल रहा है। इससे देश के तकनीकी विकास को गति मिलने की उम्मीद है।
मंत्री ने सरकार के ₹1 लाख करोड़ Research, Development and Innovation Fund और Anusandhan National Research Foundation (ANRF) की भूमिका का भी उल्लेख किया।
इन पहलों का उद्देश्य उच्च जोखिम और उच्च संभावित लाभ वाले शोध को बढ़ावा देना तथा विश्वविद्यालयों, स्टार्टअप और उद्योगों के बीच मजबूत साझेदारी विकसित करना है।
जितेंद्र सिंह ने उद्योग जगत से भारतीय शोध संस्थानों में विकसित तकनीकों को बाजार तक पहुंचाने में अधिक सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि उद्योगों को केवल स्वदेशी तकनीक अपनाने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उनके विकास में निवेश करना और सफल तकनीकों को बड़े स्तर पर लागू करने में भी मदद करनी चाहिए।
यदि भारतीय तकनीकों को बड़े स्तर पर अपनाया जाना है, तो उद्योगों को उनके व्यावसायिक महत्व को समझना होगा। इससे शोध, निवेश, उत्पादन और बाजार के बीच एक मजबूत Innovation Cycle तैयार किया जा सकता है।
जितेंद्र सिंह ने मशीनों, ऑप्टिकल नेटवर्क और भारतीय शोध संस्थानों द्वारा विकसित अन्य तकनीकों की क्षमता बढ़ाने के लिए Artificial Intelligence और Digital Technologies के अधिक इस्तेमाल की आवश्यकता बताई।
वैज्ञानिक शोध को डिजिटल तकनीकों और उद्योग के अनुभव के साथ जोड़कर नई तकनीकों के विकास और व्यावसायीकरण की प्रक्रिया को तेज किया जा सकता है। इससे भारत को अपनी स्वदेशी तकनीकों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने में भी मदद मिल सकती है।
जितेंद्र सिंह ने पूर्वी भारत की औद्योगिक और वैज्ञानिक क्षमता को रेखांकित करते हुए कहा कि यह क्षेत्र भारत के तकनीकी विकास में बड़ी भूमिका निभा सकता है।
Steel, Aluminium, Mining, Jute, IT और Software जैसे क्षेत्रों में काम करने वाली कंपनियां स्टार्टअप और शोध संस्थानों के साथ मिलकर स्वदेशी तकनीकों को बड़े स्तर पर विकसित कर सकती हैं।
इससे वैज्ञानिक शोध को वास्तविक औद्योगिक जरूरतों से जोड़ने के साथ-साथ उद्यमियों के लिए नए अवसर भी पैदा होंगे।
दो दिवसीय RISE Conclave 2026 का आयोजन 6 और 7 सितंबर को कोलकाता के Salt Lake स्थित CSIR-Indian Institute of Chemical Biology में किया जा रहा है। इसका आयोजन CSIR-CGCRI, CSIR-IICB, CSIR-CMERI और CSIR-IMMT द्वारा संयुक्त रूप से किया जा रहा है।
कार्यक्रम की थीम “Driving Innovation & Entrepreneurship for Viksit Bharat 2047” है।
RISE Conclave में करीब 150 स्टार्टअप, लगभग 300 स्टार्टअप प्रतिनिधि और करीब 150 इनक्यूबेशन एवं Innovation Centres के प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं।
कार्यक्रम का 4M Framework चार प्रमुख क्षेत्रों पर आधारित है:
Minerals — खनिज
Medicine — चिकित्सा
Materials — सामग्री
Machines — मशीनें
यह चारों क्षेत्र आयोजन में शामिल CSIR की चार प्रमुख प्रयोगशालाओं की विशेषज्ञता को दर्शाते हैं।
RISE Conclave में 67 विशेषज्ञों के साथ आठ पैनल चर्चाएं आयोजित की जा रही हैं। इनमें Drug Discovery, Affordable Healthcare, MSME Manufacturing and R&D, Advanced Materials, Industrial Decarbonisation, Critical Minerals और Science Communication जैसे विषय शामिल हैं।
कार्यक्रम के दौरान तकनीक के व्यावसायीकरण पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसमें आठ MoUs और चार Technology Transfers के साथ-साथ दो Product Launches और एक नई सुविधा का उद्घाटन शामिल है।
वहीं, Startup Exhibition और S&T Pavilion के जरिए उद्यमियों को अपने नवाचार प्रदर्शित करने और निवेशकों, वैज्ञानिकों तथा उद्योग प्रतिनिधियों से जुड़ने का अवसर मिल रहा है।
RISE Conclave 2026 में जितेंद्र सिंह का संदेश भारत के स्टार्टअप और Innovation Ecosystem को महानगरों से आगे छोटे शहरों तक पहुंचाने की आवश्यकता को रेखांकित करता है। Tier-2 और Tier-3 शहरों में मौजूद युवा प्रतिभाओं को बेहतर संसाधन, मार्गदर्शन और निवेश उपलब्ध कराकर देश की नवाचार क्षमता को और मजबूत किया जा सकता है।
सरकार, वैज्ञानिक संस्थानों, विश्वविद्यालयों, स्टार्टअप और उद्योग के बीच मजबूत सहयोग से भारतीय तकनीकों को प्रयोगशालाओं से बाजार तक पहुंचाने में मदद मिल सकती है। AI, Biotechnology, Space, Nuclear Energy और Advanced Manufacturing जैसे क्षेत्रों में बढ़ते अवसर भारत के Technology-led Development को नई गति दे सकते हैं। ऐसे प्रयास Viksit Bharat 2047 के लक्ष्य को हासिल करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं