IPO 2026: भारतीय IPO में तेज़ी आएगी: ये बड़ी कंपनियां होंगी लिस्ट

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07 Jan 2026
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News Synopsis

साल 2026 शेयर बाजार में स्टार्टअप्स के नाम रहने वाला है, इस साल भले ही रिलायंस इंडस्ट्रीज देश का सबसे बड़ा आईपीओ लेकर आएगी, लेकिन नई जेनरेशन की जितनी कंपनियां जिन्हें हम सभी बीते एक दशक में शुरू होने से लेकर जाएंट बनते हुए देखा है, अब वो शेयर बाजार में कदम रखने जा रही हैं, PhonePe, Zepto, Oyo, Boat, Infra.Market, Shadowfax और अन्य कंपनियां नए और ओएफएस के जरिये लगभग 50,000 करोड़ रुपए जुटाने की तैयारी कर रही हैं।

पिछले साल स्टॉक एक्सचेंजों पर लिस्टेड नई पीढ़ी की कंपनियों ने आईपीओ से से लगभग 36,000 करोड़ रुपए की पूंजी जुटाई, जिससे फाउंडर्स, शुरुआती निवेशकों और कर्मचारियों को काफी पैसा कमाने में मदद मिली, इसमें एथर एनर्जी, अर्बन कंपनी, लेंसकार्ट, मीशो, ग्रोव, फिजिक्सवाला और पाइन लैब्स शामिल थे, एचएसबीसी इंडिया के इन्वेस्टमेंट बैंकिंग के को-हेड रणवीर दावड़ा ने कहा कि 2025 में सार्वजनिक हुई नई पीढ़ी की कंपनियों का लिस्टिंग के बाद का प्रदर्शन काफी अच्छा रहा है, जो सार्वजनिक बाजार के निवेशकों के लिए ठोस रिटर्न का संकेत देता है, इस क्षेत्र को अब अधिक मैच्योर माना जा रहा है।

हेल्दी रिपोर्ट बनाएंगी पॉजिटिव सेंटीमेंट

एचएसबीसी के रणवीर दावड़ा ने कहा कि 2021, 2024 और 2025 में लिस्टेड कंपनियों के कई समूहों ने लिस्टिंग के बाद लगातार अच्छा वित्तीय प्रदर्शन दिखाया है, उन्होंने कहा कि सार्वजनिक होने वाली कंपनियों द्वारा जारी इनकम कॉल्स अगले ग्रुप के लिए बाजार के सेंटीमेंट तय करने में सहायक होंगी, रणवीर दावड़ा ने कहा कि आईपीओ प्राइसिंग भी अधिक संतुलित हो गया है, जो निजी बाजार के मानकों और सार्वजनिक निवेशकों के लिए दीर्घकालिक विकास में भाग लेने के आकर्षक अवसरों के बीच बेहतर तालमेल को दर्शाता है, संस्थागत निवेशक भी इन कंपनियों के लिए बाजार की भावना को समझने के लिए मैक्रो फैक्टर्स पर नजर रख रहे हैं।

मुंबई स्थित एक बड़े म्यूचुअल फंड के फंड मैनेजर ने कहा कि फरवरी के बजट के बाद मार्च के आसपास आईपीओ बाजार में तेजी आ सकती है, लेकिन गतिविधि की तीव्रता ब्रॉडर मैक्रो फैक्टर्स पर निर्भर करेगी, उन्होंने कहा कि हम संभावित अमेरिका-भारत व्यापार समझौते, तेल की कीमतों के रुझान और किसी भी लक्षित बजट उपायों पर नजर रख रहे हैं, उन्होंने कहा कि रिलायंस जियो और एसबीआई फंड्स जैसे बड़े आईपीओ का समय भी मायने रखेगा, इनके संभावित आकार को देखते हुए ये आईपीओ निवेशकों की काफी तरलता को सोख सकते हैं, और अन्य प्राइमरी मार्केट सौदों में पूंजी प्रवाह को प्रभावित कर सकते हैं।

2026 का आउटलुक

बड़े घरेलू और विदेशी संस्थान आईपीओ पोर्टफोलियो में अपनी मजबूत पकड़ बनाए हुए हैं, बीमा कंपनियों और पेंशन फंडों की भागीदारी बढ़ रही है, वहीं बड़े फ्री फ्लोट और लिस्टिंग के बाद शेयरों की बिक्री उभरते बाजारों के निवेशकों को आकर्षित कर रही है, एवेन्डस कैपिटल के एमडी और इक्विटी कैपिटल मार्केट्स के प्रमुख गौरव सूद ने कहा कि नई पीढ़ी की कंपनियों के प्रति रुचि मजबूत बनी हुई है, और 2025 में कुल आईपीओ फंड जुटाने में लगभग एक-चौथाई हिस्सेदारी इसी इकोसिस्टम की है, हालांकि निवेशकों ने शुरू में इन व्यावसायिक मॉडलों की बदलती प्रकृति को देखते हुए सुरक्षा मार्जिन की तलाश की, लेकिन बेहतर लाभप्रदता और स्पष्ट आय अनुमानों ने निवेशकों का विश्वास मजबूत किया है, गौरव सूद ने कहा कि माहौल पॉजिटिव है, लेकिन अधिक चयनात्मक है, बाजार प्रोफिटीबिलिटी की ओर बढ़ गया है, निवेशक विशेष रूप से उन स्पेसिफिक, ब्रॉडर प्लेटफॉर्मों का सपोर्ट करने में अधिक सहज महसूस कर रहे हैं, जहां मार्जिन नुकसान से सुरक्षा प्रदान करते हैं।

फोनपे से जेप्टो तक

क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म ज़ेप्टो ने दिसंबर में गोपनीय रूप से आवेदन दाखिल किया था, जिसमें उसने 11,000 करोड़ रुपये तक की नई पूंजी जुटाने का प्लान सामने रखा है, ज़ेप्टो कैश-खर्च करने वाले, 10 मिनट में डिलीवरी देने वाले बाज़ार में एटर्नल के ब्लिंकइट और स्विगी के इंस्टामार्ट से मुकाबला कर रहा है, कंपनी सितंबर तिमाही में लिस्ट होने की योजना बना रही है।

ज़ेप्टो के बाद हॉस्पिटैलिटी स्टार्टअप ओयो ने भी तीसरी बार सार्वजनिक होने का प्रयास किया, उसने 31 दिसंबर को गोपनीय रूप से आवेदन दाखिल किया, जिसमें उसने 6,650 करोड़ रुपये की नई पूंजी जुटाने की कोशिश की, कंपनी का लक्ष्य इस साल लिस्ट होना है, पिछले दो वर्षों में कोविड-19 महामारी से प्रभावित होने के बाद ओयो ने रेवेन्यू और प्रॉफिट और लाभ में सुधार दर्ज किया है, वित्त वर्ष 2024 में यह पहली बार लाभ में आया और तब से लाभ में बना हुआ है।

वॉलमार्ट के स्वामित्व वाली पेमेंट कंपनी PhonePe, जिसने सितंबर में गोपनीय रूप से आवेदन किया था, लगभग 13,000-14,000 करोड़ रुपये के आईपीओ के साथ सार्वजनिक होने की तैयारी में है, एचएसबीसी के रणवीर दावड़ा ने कहा कि उम्मीद है, कि निवेशकों का ध्यान बड़े पैमाने पर आयोजित आईपीओ पर ही रहेगा, और एक ही सेगमेंट की कई कंपनियों के बाजार में आने के साथ ही निवेश का तरीका अधिक सुनियोजित होगा, उन्होंने कहा जिन सेगमेंट में पहले से ही सूचीबद्ध कंपनियां मौजूद हैं, वहां चयन प्रक्रिया जमीनी स्तर से होने की संभावना है, जो फाउंडर और गवर्नेंस की क्वलिटी, ग्रोथ में स्थिरता, कैश फ्लो की स्पष्टता और प्रोफिटिबिलिटी के स्पष्ट मार्ग पर आधारित होगी।

वैल्यू में बढ़ोतरी

पिछले वर्ष लिस्टिंग की बाढ़ ने निकास प्रक्रिया को गति दी, जिसमें लगभग 18,000 करोड़ रुपये – या कुल आईपीओ आय का आधे से अधिक हिस्सा – निवेशकों, प्रारंभिक समर्थकों और संस्थापकों द्वारा ओएफएस से आया, पीक एक्सवी सबसे बड़े लाभार्थियों में से एक थी, जिसने मीशो, ग्रोव, वेकफिट, कैपिलरी टेक्नोलॉजीज और पाइन लैब्स जैसे स्टार्टअप्स में अपनी हिस्सेदारी कम कर दी, जिससे लिस्टिंग के बाद शेयर की कीमतों में वृद्धि होने पर उसकी शेष होल्डिंग्स का प्राइस बढ़ गया।

मीशो और लेंसकार्ट आईपीओ ने जापानी निवेशक सॉफ्टबैंक के लिए भी ऐसा ही किया, जिसकी पोर्टफोलियो कंपनी ओयो इस वर्ष संभावित रूप से सार्वजनिक हो सकती है, प्राइमरी फेज के निवेशक एक्सेल ने अर्बन कंपनी और ब्लूस्टोन को सार्वजनिक होते देखा, फाउंडर्स, सीनियर मैनेज्मेंट और कर्मचारियों को भी लाभ हुआ, कंपनियों के लिस्स होने पर लगभग 8,700 करोड़ रुपए, या लगभग 1 बिलियन डॉलर मूल्य के कर्मचारी स्टॉक विकल्प (ईएसओपी) पूल तरल हो गए।

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