फ्रांस की राजधानी पेरिस में 9 और 10 सितंबर को अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष सम्मेलन आयोजित होने जा रहा है। फ्रांस इस सम्मेलन के जरिए अंतरिक्ष के तेजी से बदलते क्षेत्र में यूरोप की भूमिका को मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। हालांकि, सम्मेलन शुरू होने से पहले ही इसे कुछ झटकों का सामना करना पड़ा है। अमेरिका की कुछ बड़ी अंतरिक्ष कंपनियों ने इससे दूरी बना ली है, जबकि यूरोप के कई प्रमुख नेताओं की गैरमौजूदगी ने भी सम्मेलन की अहमियत को लेकर सवाल खड़े किए हैं।
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों लंबे समय से अंतरिक्ष क्षेत्र में यूरोप की स्वतंत्र क्षमता बढ़ाने की वकालत करते रहे हैं। उनका मानना है कि अंतरिक्ष अब केवल वैज्ञानिक खोज और अनुसंधान का क्षेत्र नहीं रह गया है, बल्कि यह आर्थिक विकास, संचार, सुरक्षा और रणनीतिक ताकत से भी जुड़ गया है।
आयोजकों के अनुसार, पेरिस में होने वाला अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष सम्मेलन International Space Summit करीब 120 देशों के नीति-निर्माताओं, कंपनियों और वैज्ञानिकों को एक मंच पर लाएगा। इनमें अमेरिका और चीन जैसी प्रमुख अंतरिक्ष शक्तियां भी शामिल हैं।
सम्मेलन का उद्देश्य अंतरिक्ष के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाने और इस तेजी से विकसित हो रहे क्षेत्र के लिए बेहतर नियम तैयार करने के तरीकों पर चर्चा करना है। सम्मेलन में करीब 2,000 प्रतिनिधियों के शामिल होने की उम्मीद है।
यह आयोजन पेरिस के प्रसिद्ध ग्रां पाले में होगा। कांच की गुंबद वाली यह ऐतिहासिक इमारत एक सदी से भी अधिक समय पहले औद्योगिक और तकनीकी महत्वाकांक्षा के प्रतीक के रूप में बनाई गई थी।
सम्मेलन से पहले अमेरिका की कुछ प्रमुख अंतरिक्ष कंपनियों के पीछे हटने से फ्रांस की कोशिशों को झटका लगा है। सूत्रों के अनुसार, व्हाइट हाउस को सम्मेलन के एजेंडे में यूरोप समर्थक रुख की आशंका थी। इसके बाद चार अमेरिकी अंतरिक्ष कंपनियों ने सम्मेलन से हटने का फैसला किया।
इन कंपनियों में एलन मस्क की स्पेसएक्स और जेफ बेजोस की ब्लू ओरिजिन भी शामिल हैं। कंपनियों के पीछे हटने के कारण सम्मेलन के दौरान होने वाली कुछ घोषणाएं भी रद्द कर दी गई हैं।
हालांकि, आयोजकों ने इस घटनाक्रम को बहुत बड़ा मुद्दा नहीं बताया है। उनका कहना है कि सम्मेलन में अमेरिकी कंपनियों की भागीदारी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है और बड़ी संख्या में कारोबारी प्रतिनिधि अब भी इसमें शामिल होंगे।
सम्मेलन में यूरोप के कुछ प्रमुख नेताओं की अनुपस्थिति भी चर्चा का विषय बन गई है। जर्मनी आधिकारिक तौर पर इस सम्मेलन की सह-अध्यक्षता कर रहा है, लेकिन जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने अन्य व्यस्तताओं के कारण सम्मेलन में शामिल नहीं होने की जानकारी दी है।
इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी भी सम्मेलन में हिस्सा नहीं लेंगी। इससे फ्रांस और उसके यूरोपीय साझेदारों के बीच अंतरिक्ष नीति को लेकर मतभेदों की चर्चा तेज हो गई है।
फ्रांस यूरोप को अंतरिक्ष क्षेत्र में अधिक आत्मनिर्भर बनाने पर जोर दे रहा है। दूसरी ओर, जर्मनी स्पेसएक्स जैसी अमेरिकी कंपनियों के साथ सहयोग के विकल्प को पूरी तरह बंद करने के पक्ष में दिखाई नहीं देता है।
स्पेसएक्स आधुनिक रॉकेट प्रक्षेपण बाजार में एक प्रमुख कंपनी बन चुकी है। ऐसे में जर्मनी का रुख फ्रांस की उस नीति से कुछ अलग है, जिसमें यूरोप की अपनी अंतरिक्ष क्षमता और कंपनियों को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है।
दोनों देशों के बीच एलन मस्क की स्टारलिंक सेवा के प्रभाव को लेकर भी अलग-अलग दृष्टिकोण सामने आए हैं। फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों यूरोपीय संघ की IRIS² सुरक्षित उपग्रह प्रणाली का समर्थन कर रहे हैं। वहीं, जर्मनी अपनी अलग सुरक्षित उपग्रह संचार प्रणाली तैयार करने की योजना पर काम कर रहा है।
यह सम्मेलन किसी औपचारिक राजनीतिक निर्णय की घोषणा करने वाला आयोजन नहीं है। इसके बावजूद फ्रांस कुछ महत्वपूर्ण व्यापक घोषणाओं पर सहमति बनाने की कोशिश कर रहा है।
इनमें अंतरिक्ष यातायात को व्यवस्थित करना और अंतरिक्ष तक पहुंच से जुड़े मुद्दे शामिल हैं। इसके अलावा उन सीमित रेडियो आवृत्तियों की उपलब्धता पर भी चर्चा होगी, जिनकी जरूरत उपग्रहों और अन्य अंतरिक्ष प्रणालियों को संचालित करने के लिए होती है।
इन मुद्दों को लेकर अमेरिका और यूरोप की कंपनियों के बीच पहले से ही अलग-अलग राय देखने को मिलती रही है। इसलिए सम्मेलन में इस विषय पर बातचीत महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन गुरुवार को सम्मेलन में प्रमुख नीतिगत भाषण देंगी। इससे यूरोपीय संघ की अंतरिक्ष नीति और भविष्य की प्राथमिकताओं को लेकर महत्वपूर्ण संकेत मिलने की उम्मीद है।
चीन भी सम्मेलन में शामिल होने वाला है। हालांकि, अधिकारियों ने चीन की भागीदारी के बारे में विस्तृत जानकारी साझा नहीं की है। अमेरिका और चीन जैसे प्रमुख अंतरिक्ष देशों की मौजूदगी इस सम्मेलन को वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण बनाती है।
सम्मेलन केवल नीतिगत चर्चा तक सीमित नहीं रहेगा। इसे अंतरिक्ष क्षेत्र से जुड़ी कंपनियों के लिए नए कारोबारी समझौतों और घोषणाओं के मंच के रूप में भी देखा जा रहा है।
आयोजकों को उम्मीद है कि कई व्यावसायिक घोषणाएं सम्मेलन की अंतरराष्ट्रीय पहचान को मजबूत करेंगी। फ्रांस में पिछले साल आयोजित कृत्रिम बुद्धिमत्ता सम्मेलन के दौरान अरबों यूरो के कारोबारी समझौते और निवेश घोषणाएं सामने आई थीं। अंतरिक्ष सम्मेलन में भी इसी तरह की कारोबारी गतिविधियों की उम्मीद की जा रही है।
फ्रांस का अंतरिक्ष क्षेत्र में लंबा इतिहास रहा है। वह 1950 के दशक से ही अपनी बैलिस्टिक और अंतरिक्ष क्षमताओं को विकसित करता रहा है। हालांकि, यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी में योगदान के मामले में जर्मनी अब फ्रांस से आगे निकल चुका है।
यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी के महानिदेशक जोसेफ अशबाखर के अनुसार, यूरोप अंतरिक्ष क्षेत्र में अमेरिका की तुलना में लगभग पांच गुना कम निवेश करता है। यह अंतर यूरोप की अंतरिक्ष महत्वाकांक्षाओं के सामने एक बड़ी चुनौती है।
उन्होंने सम्मेलन से पहले कहा कि यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी ऐसी महत्वपूर्ण योजनाओं पर काम कर रही है, जिनके जरिए यूरोप मानव अंतरिक्ष यात्रियों को अंतरिक्ष में भेजने के लिए अमेरिकी रॉकेटों पर अपनी निर्भरता कम कर सके।
फ्रांस के उच्च शिक्षा मंत्री फिलिप बैप्टिस्ट के अनुसार, सम्मेलन में यूरोप की अंतरिक्ष क्षेत्र से जुड़ी कई चिंताओं पर चर्चा होगी। इनमें अंतरिक्ष सुरक्षा एक प्रमुख मुद्दा है।
उपग्रहों पर बढ़ती निर्भरता, अंतरिक्ष में बढ़ती प्रतिस्पर्धा और संचार प्रणालियों की रणनीतिक भूमिका ने अंतरिक्ष सुरक्षा को पहले से अधिक महत्वपूर्ण बना दिया है। ऐसे में यूरोप अपनी अंतरिक्ष क्षमता, सुरक्षा और तकनीकी आत्मनिर्भरता को मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ना चाहता है।
पेरिस सम्मेलन ऐसे समय हो रहा है जब अंतरिक्ष क्षेत्र में अमेरिका, चीन और अन्य देशों के बीच प्रतिस्पर्धा तेजी से बढ़ रही है। उपग्रह इंटरनेट, रॉकेट प्रक्षेपण, अंतरिक्ष अनुसंधान और सुरक्षा तकनीकों में निजी कंपनियों की भूमिका भी लगातार बढ़ रही है।
फ्रांस इस स्थिति में यूरोप को अधिक संगठित और आत्मनिर्भर देखना चाहता है। हालांकि, सम्मेलन से पहले अमेरिकी कंपनियों और कुछ यूरोपीय नेताओं की दूरी यह दिखाती है कि यूरोप के भीतर अंतरिक्ष नीति को लेकर अभी पूरी तरह एकमत नहीं है।
इसके बावजूद करीब 120 देशों के प्रतिनिधियों और हजारों विशेषज्ञों की मौजूदगी इस सम्मेलन को अंतरिक्ष के भविष्य पर वैश्विक चर्चा का एक महत्वपूर्ण मंच बना सकती है। आने वाले वर्षों में अंतरिक्ष क्षेत्र में सहयोग, प्रतिस्पर्धा और सुरक्षा के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए, यह सम्मेलन इसी बड़े सवाल पर ध्यान केंद्रित कर सकता है।