इंस्टाग्राम का नया 80s ट्रेंड और AI की पर्यावरणीय कीमत, जानिए कैसे बढ़ रहा है असर

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11 Sep 2026
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News Synopsis

सोशल मीडिया पर समय-समय पर ऐसे नए चलन सामने आते रहते हैं, जो कुछ ही दिनों में लाखों लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लेते हैं। हाल के वर्षों में AI की मदद से तस्वीरों को अलग-अलग अंदाज में बदलने वाले ऐसे चलन तेजी से लोकप्रिय हुए हैं। पहले Studio Ghibli शैली में AI तस्वीरें बनाने का चलन इंटरनेट पर छाया और अब Instagram का ‘80s Trend’ लोगों को अपनी तस्वीरों को पुराने दौर की याद दिलाने वाली रेट्रो शैली में बदलने का मौका दे रहा है।

लोग अपनी तस्वीरों को 1980 के दशक के रंग, कपड़ों, हेयरस्टाइल और पुराने कैमरे जैसी दृश्य शैली में बदलकर सोशल मीडिया पर साझा कर रहे हैं। यह चलन लोगों को मनोरंजन के साथ पुरानी यादों से जोड़ रहा है। हालांकि, इस मजेदार और आकर्षक चलन का एक दूसरा पहलू भी है, जो सीधे पर्यावरण से जुड़ा है।

जब लाखों लोग एक साथ कई AI तस्वीरें बनाते हैं, तो इसके पीछे बड़ी मात्रा में कंप्यूटिंग शक्ति, बिजली, पानी और हार्डवेयर की जरूरत होती है। यही कारण है कि बड़े पैमाने पर AI तस्वीरें तैयार करने की बढ़ती मांग को लेकर पर्यावरण विशेषज्ञों के बीच चिंता बढ़ रही है।

AI तस्वीरें बनाने में बहुत बिजली खर्च होती है AI Image Generation Requires Significant Electricity

AI से तस्वीर बनाना देखने में भले ही कुछ सेकंड का काम लगता हो, लेकिन इसके पीछे काफी शक्तिशाली कंप्यूटर प्रणालियां काम करती हैं। किसी AI मॉडल को तस्वीर तैयार करने के लिए बड़ी मात्रा में गणना करनी पड़ती है। यह काम सामान्य मोबाइल या घरेलू कंप्यूटर पर नहीं, बल्कि विशेष कंप्यूटिंग ढांचे में होता है।

कार्नेगी मेलन यूनिवर्सिटी Carnegie Mellon University और हगिंग फेस Hugging Face के शोध के अनुसार, एक AI से बनाई गई तस्वीर के लिए लगभग 0.01 से 0.29 किलोवाट-घंटे (kWh) तक बिजली खर्च हो सकती है। यह मात्रा मॉडल, उपकरण और काम की परिस्थितियों के आधार पर अलग-अलग हो सकती है।

वायरल चलन से बढ़ सकता है कुल बिजली खर्च Viral Trends Can Multiply Energy Consumption

एक तस्वीर के लिए बिजली की यह मात्रा बहुत बड़ी नहीं लग सकती। लेकिन समस्या तब बढ़ जाती है, जब लाखों लोग एक ही वायरल चलन में शामिल होकर कई-कई तस्वीरें बनाते हैं।

मान लीजिए कोई व्यक्ति केवल एक तस्वीर बनाने के बजाय कई तस्वीरों के अलग-अलग रूप तैयार करता है। ऐसे में कुल ऊर्जा की मांग तेजी से बढ़ सकती है। यदि यही काम लाखों उपयोगकर्ता करते हैं, तो व्यक्तिगत स्तर पर छोटी दिखाई देने वाली ऊर्जा खपत सामूहिक स्तर पर काफी बड़ी हो सकती है।

AI के पीछे लगातार चलने वाले डेटा सेंटर Data Centres Power AI Image Generation

AI तस्वीरों के पीछे मुख्य भूमिका डेटा सेंटर की होती है। ये बड़े केंद्र शक्तिशाली सर्वर और GPU से लैस होते हैं, जिनका इस्तेमाल AI मॉडल को चलाने और बड़ी संख्या में अनुरोधों को पूरा करने के लिए किया जाता है।

इन केंद्रों को लगातार काम करने के लिए भारी मात्रा में बिजली की आवश्यकता होती है। AI सेवाओं की मांग बढ़ने के साथ इन डेटा सेंटरों पर भी काम का दबाव बढ़ता है।

इसलिए किसी AI तस्वीर के पर्यावरणीय प्रभाव को केवल उस कुछ सेकंड के समय से नहीं समझा जा सकता, जब उपयोगकर्ता स्क्रीन पर तस्वीर तैयार होते हुए देखता है। इसके पीछे पूरा कंप्यूटिंग ढांचा लगातार काम कर रहा होता है।

AI का पर्यावरण पर पानी के इस्तेमाल के रूप में भी असर AI Also Has a Water Footprint

AI की पर्यावरणीय कीमत केवल बिजली तक सीमित नहीं है। इसके साथ पानी का इस्तेमाल भी जुड़ा हुआ है।

डेटा सेंटरों में हजारों शक्तिशाली सर्वर और GPU लगातार काम करते हैं। इनके काम करने के दौरान काफी गर्मी पैदा होती है। इन उपकरणों को सुरक्षित तापमान पर बनाए रखने के लिए अलग-अलग प्रकार की कूलिंग यानी शीतलन प्रणालियों का इस्तेमाल किया जाता है। इनमें कुछ प्रणालियां पानी का भी उपयोग करती हैं।

AI बातचीत में भी पानी की खपत AI Queries Also Have a Water Footprint

शोधकर्ताओं के अनुमान के अनुसार, ChatGPT के लगभग 20 से 50 सवाल-जवाब करीब 500 मिलीलीटर पानी के इस्तेमाल के बराबर हो सकते हैं। हालांकि यह एक निश्चित आंकड़ा नहीं है।

पानी की वास्तविक खपत डेटा सेंटर की जगह, वहां इस्तेमाल होने वाली कूलिंग तकनीक, मौसम, बिजली व्यवस्था और AI पर पड़ने वाले काम के बोझ जैसे कई कारकों पर निर्भर करती है।

इसलिए AI की हर तस्वीर या हर सवाल के लिए पानी की एक समान मात्रा बताना सही नहीं होगा। फिर भी यह आंकड़ा इस बात की ओर ध्यान दिलाता है कि डिजिटल सेवाओं का भी एक वास्तविक जल पदचिह्न होता है।

AI का छिपा हुआ हार्डवेयर खर्च The Hidden Hardware Cost of AI

AI के पर्यावरणीय प्रभाव का एक और महत्वपूर्ण हिस्सा उसका हार्डवेयर है। AI मॉडल चलाने के लिए डेटा सेंटरों में विशेष GPU, सर्वर और अन्य कंप्यूटिंग उपकरण लगाए जाते हैं।

इन उपकरणों को बनाने के लिए कई प्रकार के खनिज, धातु और दुर्लभ पृथ्वी तत्वों की जरूरत होती है। इन कच्चे पदार्थों को जमीन से निकालने के लिए खनन किया जाता है।

खनन से लेकर डेटा सेंटर तक लंबी श्रृंखला From Mining to Data Centres

खनिजों को निकालने, उन्हें संसाधित करने, अर्धचालक बनाने, GPU तैयार करने और फिर इन उपकरणों को डेटा सेंटर तक पहुंचाने की पूरी प्रक्रिया में ऊर्जा और संसाधनों की खपत होती है।

इसका अर्थ है कि AI से एक तस्वीर बनाना केवल इंटरनेट पर एक डिजिटल गतिविधि नहीं है। इसके पीछे एक लंबी भौतिक श्रृंखला मौजूद है।

खनन → खनिजों का प्रसंस्करण → अर्धचालक निर्माण → GPU और सर्वर → डेटा सेंटर → बिजली → कूलिंग व्यवस्था → AI तस्वीर

इस पूरी श्रृंखला का पर्यावरण पर अलग-अलग स्तर पर प्रभाव पड़ता है। इसलिए AI के पर्यावरणीय असर को केवल बिजली की खपत के आधार पर देखना पर्याप्त नहीं है।

AI का इस्तेमाल बंद करना समाधान नहीं Stopping AI Use Is Not the Solution

AI तकनीक लोगों के लिए कई उपयोगी अवसर भी लेकर आई है। तस्वीरें बनाना, लिखने में मदद लेना, जानकारी समझना और रचनात्मक काम करना अब पहले की तुलना में आसान हो गया है। इसलिए केवल पर्यावरणीय चिंता के कारण AI का इस्तेमाल पूरी तरह बंद करना व्यावहारिक समाधान नहीं माना जा सकता।

जरूरत इस बात की है कि AI के इस्तेमाल और उसके संसाधन प्रभाव के बीच संतुलन बनाया जाए। उपयोगकर्ताओं को यह समझना जरूरी है कि हर डिजिटल गतिविधि के पीछे वास्तविक ऊर्जा और संसाधन खर्च होते हैं।

आज का 80s Trend खत्म होगा, लेकिन AI का चलन जारी रहेगा The 80s Trend May Fade, but Mass AI Generation Will Continue

Instagram का ‘80s Trend’ कुछ समय बाद दूसरे वायरल चलनों की तरह धीमा पड़ सकता है। लेकिन इसके बाद कोई नया AI फोटो ट्रेंड लोगों को आकर्षित कर सकता है। यही लगातार चलने वाला चक्र AI से बड़े पैमाने पर सामग्री बनाने की मांग को बढ़ाता रहेगा।

इसलिए असली सवाल केवल यह नहीं है कि कोई एक Instagram Trend पर्यावरण को कितना नुकसान पहुंचाता है। बड़ा सवाल यह है कि जैसे-जैसे AI तस्वीरों, वीडियो और अन्य सामग्री का इस्तेमाल सामान्य होता जाएगा, वैसे-वैसे दुनिया को इसके लिए कितनी बिजली, पानी और प्राकृतिक संसाधनों की जरूरत पड़ेगी।

निष्कर्ष Conclusion

Instagram का ‘80s Trend’ लोगों के लिए पुरानी यादों को नए डिजिटल अंदाज में जीने का मनोरंजक तरीका है। लेकिन इसके पीछे AI प्रणाली को चलाने के लिए बिजली, पानी और विशेष हार्डवेयर की जरूरत होती है। एक AI तस्वीर का प्रभाव छोटा लग सकता है, लेकिन लाखों लोगों द्वारा बड़ी संख्या में तस्वीरें बनाने पर इसका सामूहिक प्रभाव महत्वपूर्ण हो सकता है।

इसलिए AI के बढ़ते इस्तेमाल के साथ यह जरूरी है कि तकनीक को अधिक ऊर्जा-कुशल और संसाधन-कुशल बनाया जाए। भविष्य में AI की सफलता केवल इस बात से नहीं मापी जाएगी कि वह कितनी तेजी से तस्वीर या सामग्री बना सकता है, बल्कि इस बात से भी होगी कि वह ऐसा कितने कम संसाधनों में और पर्यावरण पर कितने कम दबाव के साथ कर सकता है।

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