भारत के वस्तु निर्यात में चालू वित्त वर्ष के पहले पांच महीनों में अच्छी बढ़ोतरी देखने को मिली है। केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने बुधवार को बताया कि अप्रैल से अगस्त के बीच भारत का वस्तु निर्यात पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में 15 प्रतिशत से अधिक बढ़ा है।
इस वृद्धि का मतलब है कि भारत का वस्तु निर्यात इस वित्त वर्ष के पहले पांच महीनों में 200 अरब डॉलर के आंकड़े को पार कर चुका है। पिछले वित्त वर्ष की अप्रैल-अगस्त अवधि में भारत का वस्तु निर्यात करीब 183 अरब डॉलर रहा था। ऐसे में इस साल के शुरुआती पांच महीनों में निर्यात प्रदर्शन को भारतीय अर्थव्यवस्था और व्यापार क्षेत्र के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।
पीयूष गोयल ने नई दिल्ली में आयोजित BRICS Women’s Business Alliance Summit में भारत के निर्यात प्रदर्शन की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में दुनिया कई तरह की वैश्विक चुनौतियों और आर्थिक अनिश्चितताओं से गुजर रही है। इसके बावजूद भारत के वस्तु निर्यात में 15 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई है।
केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल Union Commerce Minister Piyush Goyal के अनुसार, वैश्विक स्तर पर व्यापार को प्रभावित करने वाली कई चुनौतियों के बावजूद भारत ने निर्यात के क्षेत्र में अच्छी गति बनाए रखी है।
अप्रैल से जुलाई के बीच उपलब्ध आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, भारत का वस्तु निर्यात सालाना आधार पर 17 प्रतिशत बढ़कर 174 अरब डॉलर हो गया था। अब अगस्त के आंकड़े जुड़ने के बाद अप्रैल-अगस्त की पूरी अवधि में निर्यात वृद्धि 15 प्रतिशत से अधिक रहने की बात सामने आई है।
अगस्त महीने के व्यापार आंकड़ों को वाणिज्य विभाग द्वारा 15 सितंबर को जारी किए जाने की संभावना है। इन आंकड़ों से भारत के निर्यात और आयात की स्थिति की अधिक स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी।
अप्रैल-जुलाई तक निर्यात में मजबूत वृद्धि दर्ज होने के बाद अगस्त का प्रदर्शन भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे यह पता चलेगा कि वैश्विक व्यापार की चुनौतियों के बीच भारतीय निर्यातकों ने किस तरह प्रदर्शन किया है।
भारत ने मौजूदा वित्त वर्ष में कुल निर्यात को 1 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है। इसमें वस्तुओं के साथ-साथ सेवाओं के निर्यात को भी शामिल किया जाता है।
सरकार को उम्मीद है कि पिछले कुछ वर्षों में किए गए व्यापार समझौते इस लक्ष्य को हासिल करने में भारत की मदद कर सकते हैं। इन समझौतों के जरिए भारतीय कंपनियों और निर्यातकों को कई विदेशी बाजारों में अपने उत्पाद और सेवाएं पहुंचाने के लिए बेहतर अवसर मिल सकते हैं।
पीयूष गोयल ने बताया कि पिछले साढ़े चार वर्षों में भारत ने 38 विकसित अर्थव्यवस्थाओं के साथ व्यापार संबंधी व्यवस्थाएं पूरी की हैं। इन समझौतों का उद्देश्य भारतीय वस्तुओं और सेवाओं को संबंधित बाजारों में प्राथमिकता या बेहतर बाजार पहुंच दिलाना है।
वाणिज्य मंत्री के अनुसार, इन व्यापार व्यवस्थाओं के जरिए भारत को वैश्विक व्यापार के करीब दो-तिहाई हिस्से तक पहुंच बनाने का अवसर मिला है।
सरकार की योजना आने वाले डेढ़ साल में इस दायरे को और बढ़ाने की है। पीयूष गोयल ने कहा कि भारत अगले डेढ़ साल में व्यापार संबंधी व्यवस्थाओं को 60 से 75 अर्थव्यवस्थाओं तक विस्तार देने की दिशा में काम करेगा।
इसका उद्देश्य भारतीय निर्यातकों को अधिक विदेशी बाजार उपलब्ध कराना है। ज्यादा बाजार मिलने से भारतीय कंपनियों को अपने उत्पादों की बिक्री बढ़ाने और अलग-अलग देशों में नए कारोबारी अवसर तलाशने में मदद मिल सकती है।
भारत ने पिछले पांच वर्षों में कई देशों और क्षेत्रीय समूहों के साथ व्यापार समझौते किए हैं। इनमें यूनाइटेड किंगडम, यूरोपीय संघ, यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ, न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया जैसे महत्वपूर्ण व्यापारिक साझेदार शामिल हैं।
इन समझौतों का मुख्य उद्देश्य भारतीय उत्पादों और सेवाओं के लिए विदेशी बाजारों में बेहतर अवसर तैयार करना है। इससे भारतीय कंपनियों को निर्यात बढ़ाने और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में अपनी भागीदारी मजबूत करने में मदद मिल सकती है।
चालू वर्ष में भारत ने अब तक ओमान और यूनाइटेड किंगडम के साथ किए गए दो व्यापार समझौतों को लागू किया है। इसके अलावा सरकार को उम्मीद है कि न्यूजीलैंड के साथ एक और व्यापार समझौता मार्च तक लागू किया जा सकता है।
इन समझौतों के लागू होने से भारतीय निर्यातकों के लिए संबंधित देशों के बाजारों में व्यापार करना आसान हो सकता है। शुल्क में कमी और बाजार तक बेहतर पहुंच जैसे प्रावधान भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को बढ़ा सकते हैं।
भारत के निर्यात में यह वृद्धि ऐसे समय में हुई है जब वैश्विक अर्थव्यवस्था कई तरह की चुनौतियों का सामना कर रही है। अलग-अलग देशों की व्यापार नीतियों, शुल्क में बदलाव और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अनिश्चितता का असर वैश्विक व्यापार पर पड़ रहा है।
इसके बावजूद भारत के वस्तु निर्यात में मजबूत वृद्धि यह संकेत देती है कि भारतीय निर्यातकों ने वैश्विक बाजारों में अपनी स्थिति बनाए रखने की कोशिश जारी रखी है।
भारत के लिए अब सबसे बड़ी चुनौती इस वृद्धि को लंबे समय तक बनाए रखना है। इसके लिए उत्पादों की गुणवत्ता बढ़ाने, उत्पादन लागत को प्रतिस्पर्धी रखने, लॉजिस्टिक्स को बेहतर करने और नए बाजारों में पहुंच बढ़ाने पर लगातार ध्यान देना होगा।
भारत द्वारा किए गए व्यापार समझौते आने वाले वर्षों में निर्यात वृद्धि के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। विकसित अर्थव्यवस्थाओं के साथ बेहतर व्यापार व्यवस्था भारतीय कंपनियों को बड़े बाजारों तक पहुंच बनाने का अवसर देती है।
सरकार का लक्ष्य केवल निर्यात बढ़ाना नहीं, बल्कि भारतीय वस्तुओं और सेवाओं को वैश्विक बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी बनाना भी है। यदि नए व्यापार समझौतों को प्रभावी ढंग से लागू किया जाता है और कंपनियां इनसे मिलने वाले अवसरों का लाभ उठाती हैं, तो भारत अपने 1 ट्रिलियन डॉलर के कुल निर्यात लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ सकता है।
आने वाले महीनों में भारत के निर्यात प्रदर्शन पर वैश्विक मांग, व्यापार नीतियां, शुल्क व्यवस्था और प्रमुख बाजारों की आर्थिक स्थिति का असर रहेगा। इसके साथ ही नए व्यापार समझौतों का वास्तविक लाभ भारतीय निर्यातकों तक कितनी तेजी से पहुंचता है, यह भी महत्वपूर्ण होगा।
अप्रैल-अगस्त में 15 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि ने भारत के निर्यात क्षेत्र के लिए सकारात्मक शुरुआत का संकेत दिया है। अब सरकार और उद्योग के सामने इस गति को बनाए रखने और नए बाजारों में भारतीय उत्पादों की पहुंच बढ़ाने की चुनौती है।
अगर भारत अपने व्यापार समझौतों का प्रभावी इस्तेमाल करता है, निर्यातकों को बेहतर सुविधाएं देता है और वैश्विक बाजारों में प्रतिस्पर्धा बढ़ाने के लिए जरूरी कदम उठाता है, तो आने वाले समय में निर्यात भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि का एक और मजबूत आधार बन सकता है।