भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कॉमनवेल्थ देशों के प्रमुखों की बैठक (CHOGM) 2026 में भारत के डिजिटल सार्वजनिक ढांचे (Digital Public Infrastructure-DPI) की उपलब्धियों और वैश्विक व्यापार में इसकी भूमिका को प्रमुखता से सामने रखा। एंटीगुआ और बारबुडा में आयोजित इस महत्वपूर्ण बैठक के दौरान उन्होंने बताया कि किस तरह भारत की डिजिटल व्यवस्था सुशासन, वित्तीय जिम्मेदारी और आर्थिक अवसरों को बढ़ावा देने में मदद कर रही है। उनके अनुसार, भारत का डिजिटल मॉडल तकनीक के माध्यम से आम लोगों तक सुविधाएं पहुंचाने और अर्थव्यवस्था को अधिक समावेशी बनाने का एक उपयोगी उदाहरण है।
जयशंकर ने अपने संबोधन में भारत के हालिया मुक्त व्यापार समझौतों (Free Trade Agreements-FTAs) और दूसरे देशों के साथ चल रही व्यापार वार्ताओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि ऐसे समझौते वैश्विक व्यापार को अधिक भरोसेमंद बनाने, कारोबार के लिए स्थिर परिस्थितियां तैयार करने और आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। इस बैठक में भारत ने डिजिटल विकास, आर्थिक सहयोग और अंतरराष्ट्रीय साझेदारी से जुड़े अपने विचारों को साझा किया।
बुधवार को कॉमनवेल्थ देशों के शासनाध्यक्षों के कार्यकारी सत्र (Commonwealth Heads of Government Executive Session) को संबोधित करते हुए एस. जयशंकर ने भारत के डिजिटल सार्वजनिक ढांचे के अनुभवों को साझा किया। उन्होंने बताया कि डिजिटल तकनीक केवल सरकारी सेवाओं को आसान बनाने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह आर्थिक गतिविधियों में अधिक से अधिक लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करने में भी मदद करती है।
विदेश मंत्री ने कहा कि भारत में डिजिटल सार्वजनिक ढांचे ने सुशासन और वित्तीय जिम्मेदारी को मजबूत करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। इसके माध्यम से लोगों को विभिन्न सेवाओं तक पहुंचने, डिजिटल भुगतान करने और आर्थिक गतिविधियों में शामिल होने के अधिक अवसर मिले हैं।
जयशंकर ने सोशल मीडिया मंच एक्स (X) पर अपने संबोधन के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि भारत का अनुभव दिखाता है कि डिजिटल सार्वजनिक व्यवस्था किस तरह अर्थव्यवस्था को अधिक लोकतांत्रिक बना सकती है। इसका अर्थ है कि तकनीक और डिजिटल सुविधाओं का लाभ केवल कुछ लोगों तक सीमित न रहकर समाज के बड़े हिस्से तक पहुंच सकता है।
भारत ने पिछले कुछ वर्षों में डिजिटल सार्वजनिक ढांचे के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण पहल की हैं। आधार, यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI), डिजिटल पहचान और सरकारी सेवाओं के ऑनलाइन माध्यम जैसे प्रयासों ने देश में डिजिटल लेनदेन और सेवा वितरण को बढ़ावा दिया है।
इन पहलों की मदद से बैंकिंग और भुगतान सेवाओं तक पहुंच आसान हुई है। साथ ही, सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे पात्र लोगों तक पहुंचाने में भी डिजिटल व्यवस्था उपयोगी साबित हुई है।
जयशंकर ने अपने संबोधन में इसी अनुभव को दूसरे देशों के साथ साझा करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उनका संदेश था कि डिजिटल तकनीक का सही उपयोग आर्थिक अवसरों को बढ़ाने और समाज के विभिन्न वर्गों के बीच सुविधाओं की पहुंच में अंतर कम करने में मदद कर सकता है।
डिजिटल सार्वजनिक ढांचे के अलावा जयशंकर ने अपने संबोधन में भारत के हालिया मुक्त व्यापार समझौतों और विभिन्न देशों के साथ चल रही व्यापार वार्ताओं पर भी चर्चा की।
उन्होंने कहा कि भारत व्यापारिक संबंधों को मजबूत करने के लिए लगातार दूसरे देशों के साथ आर्थिक सहयोग बढ़ा रहा है। मुक्त व्यापार समझौतों का मुख्य उद्देश्य दो या दो से अधिक देशों के बीच व्यापार को आसान बनाना, वस्तुओं और सेवाओं के लिए बाजार तक पहुंच बढ़ाना और व्यापार से जुड़ी बाधाओं को कम करना है।
ऐसे समझौतों से कारोबारियों, उद्योगों और निवेशकों को नए अवसर मिल सकते हैं। इसके अलावा, देशों के बीच व्यापारिक नियमों और प्रक्रियाओं में स्पष्टता आने से कंपनियों को दीर्घकालिक योजनाएं बनाने में भी मदद मिलती है।
जयशंकर ने कहा कि भारत के व्यापार समझौते वैश्विक व्यापार में स्थिरता और भरोसे को बढ़ावा देने में सहायक हो सकते हैं। उन्होंने विशेष रूप से भरोसेमंद व्यापारिक परिस्थितियों और मजबूत आपूर्ति श्रृंखलाओं (Supply Chains) के महत्व को रेखांकित किया।
आपूर्ति श्रृंखला का अर्थ किसी उत्पाद के निर्माण से लेकर उसे उपभोक्ता तक पहुंचाने की पूरी प्रक्रिया से है। इसमें कच्चे माल की उपलब्धता, उत्पादन, परिवहन, भंडारण और वितरण शामिल होते हैं।
वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में आपूर्ति श्रृंखलाओं में आने वाली रुकावटें कई देशों की अर्थव्यवस्था और उद्योगों को प्रभावित कर सकती हैं। ऐसे में व्यापारिक साझेदारियों को मजबूत बनाना और विभिन्न देशों के बीच सहयोग बढ़ाना महत्वपूर्ण हो गया है।
CHOGM 2026 में भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए एस. जयशंकर एंटीगुआ और बारबुडा पहुंचे। हवाई अड्डे पर उनका स्वागत देश के विदेश मंत्री एवरली चेट ग्रीन (Everly Chet Greene) और पर्यटन एवं नागरिक उड्डयन मंत्री चार्ल्स फर्नांडिस (Charles Fernandes) ने किया।
जयशंकर ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक अलग पोस्ट में इस स्वागत के लिए दोनों मंत्रियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि एंटीगुआ और बारबुडा पहुंचकर उन्हें खुशी हुई और वह यहां होने वाली विभिन्न बैठकों तथा चर्चाओं में भाग लेने के लिए उत्सुक हैं।
उनकी यह यात्रा भारत और कॉमनवेल्थ देशों के बीच राजनीतिक, आर्थिक और कूटनीतिक संबंधों को मजबूत करने के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
कॉमनवेल्थ देशों के शासनाध्यक्षों की बैठक 2026 का आयोजन 1 से 4 नवंबर तक एंटीगुआ और बारबुडा की राजधानी सेंट जॉन्स (St. John's) में किया जा रहा है।
इस वर्ष की बैठक की मुख्य विषयवस्तु (Theme) है- 'समृद्ध कॉमनवेल्थ के लिए साझेदारी और निवेश को गति देना' (Accelerating Partnerships and Investment for a Prosperous Commonwealth)।
इस उच्चस्तरीय सम्मेलन में कॉमनवेल्थ के सदस्य देशों के नेता और प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं। बैठक में आर्थिक विकास, अंतरराष्ट्रीय व्यापार, जलवायु परिवर्तन, निवेश और वैश्विक सहयोग जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर विचार-विमर्श किया जा रहा है।
कॉमनवेल्थ देशों के लिए यह सम्मेलन आपसी संबंधों को मजबूत करने और साझा चुनौतियों से निपटने के लिए नई रणनीतियां तैयार करने का अवसर प्रदान करता है।
मुख्य सम्मेलन से पहले मंगलवार को विदेश मंत्रालय (MEA) ने जानकारी दी कि मंत्रालय में सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज (Sibi George) ने सेंट जॉन्स में आयोजित कॉमनवेल्थ विदेश मंत्रियों की पूर्व बैठक (Pre-CHOGM Commonwealth Foreign Ministers Meeting) को संबोधित किया।
इस बैठक में उन्होंने ऐसे ठोस परिणामों पर ध्यान देने की जरूरत बताई, जिनका सीधा लाभ आम लोगों तक पहुंचे। उन्होंने विकास के लिए तकनीक को अधिक लोगों तक पहुंचाने, जलवायु परिवर्तन से निपटने के प्रयासों को मजबूत करने और आपदाओं से बचाव की क्षमता बढ़ाने जैसे मुद्दों को प्रमुखता दी।
इसके साथ ही उन्होंने अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं और बहुपक्षीय व्यवस्था में सुधार (Reformed Multilateralism) की आवश्यकता पर भी जोर दिया। इसका उद्देश्य वैश्विक संस्थाओं को अधिक प्रभावी और वर्तमान समय की चुनौतियों के अनुरूप बनाना है, ताकि कॉमनवेल्थ देशों के साझा हितों और मूल्यों को आगे बढ़ाया जा सके।
जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक आपदाएं आज दुनिया के कई देशों के सामने बड़ी चुनौतियां हैं। विशेष रूप से छोटे द्वीपीय देशों के लिए समुद्र के बढ़ते जलस्तर, चक्रवात और बदलते मौसम का प्रभाव गंभीर हो सकता है।
ऐसे में कॉमनवेल्थ देशों के बीच तकनीकी सहयोग, संसाधनों का साझा उपयोग और आपदा प्रबंधन की बेहतर व्यवस्था विकसित करना जरूरी है। भारत ने भी अपने विचारों में जलवायु कार्रवाई और आपदा से निपटने की तैयारियों को महत्वपूर्ण स्थान दिया है।
CHOGM 2026 में जयशंकर का संबोधन भारत की व्यापक आर्थिक और डिजिटल कूटनीति को दर्शाता है। भारत लगातार अपने डिजिटल सार्वजनिक ढांचे के अनुभव को दूसरे देशों के साथ साझा कर रहा है। इसका उद्देश्य डिजिटल सेवाओं की पहुंच बढ़ाना, वित्तीय समावेशन को मजबूत करना और आर्थिक विकास में अधिक लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करना है।
दूसरी ओर, मुक्त व्यापार समझौतों और विभिन्न देशों के साथ बातचीत के माध्यम से भारत अपने व्यापारिक संबंधों का विस्तार करने की दिशा में काम कर रहा है। इससे भारतीय उद्योगों को नए बाजारों तक पहुंच बनाने और अंतरराष्ट्रीय व्यापार में अपनी भागीदारी बढ़ाने के अवसर मिल सकते हैं।
CHOGM 2026 में भाग लेने से पहले विदेश मंत्री एस. जयशंकर अमेरिका की यात्रा पर थे। इस दौरान उन्होंने 30 और 31 अक्टूबर को अटलांटा में आयोजित G20 विदेश मंत्रियों की बैठक में हिस्सा लिया।
अमेरिका यात्रा के दौरान उन्होंने क्वाड (Quad) विदेश मंत्रियों की बैठक में भी भाग लिया और अपने समकक्ष मंत्रियों के साथ द्विपक्षीय बातचीत की।
इन बैठकों में उनकी भागीदारी भारत की सक्रिय विदेश नीति और विभिन्न देशों के साथ संबंधों को मजबूत करने के प्रयासों को दर्शाती है।
CHOGM 2026 में भारत की भागीदारी भी इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। डिजिटल सार्वजनिक ढांचे, मुक्त व्यापार समझौतों, जलवायु कार्रवाई और अंतरराष्ट्रीय सहयोग जैसे मुद्दों को उठाकर भारत ने वैश्विक विकास में अपनी भूमिका और प्राथमिकताओं को सामने रखा है।