भारत के वैज्ञानिकों ने मानव शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को समझने की दिशा में एक महत्वपूर्ण खोज की है। हैदराबाद स्थित वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद–कोशिकीय एवं आणविक जीवविज्ञान केंद्र (CSIR-CCMB) के वैज्ञानिकों ने मानव कोशिकाओं में मौजूद ऐसे तंत्र की पहचान की है, जो वायरल संक्रमण का पता लगाने और शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को सक्रिय करने में अहम भूमिका निभाता है। इस खोज से यह समझने में मदद मिल सकती है कि मानव कोशिकाएं वायरस के हमले को कैसे पहचानती हैं और उससे मुकाबला करने के लिए अपनी सुरक्षा व्यवस्था कैसे शुरू करती हैं।
डॉ. संतोष चौहान के नेतृत्व में किए गए इस अध्ययन में DZIP3 नामक प्रोटीन की महत्वपूर्ण भूमिका सामने आई है। यह प्रोटीन एक तरह के शुरुआती चेतावनी संकेतक की तरह काम करता है। जब यह कोशिका के भीतर वायरस से संबंधित आनुवंशिक सामग्री को पहचानता है, तो अपने आकार में बदलाव करके सक्रिय हो जाता है। इसके बाद यह कोशिका के भीतर मौजूद उन प्रोटीनों को सक्रिय करने में मदद करता है, जो शरीर की प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया शुरू करते हैं।
यह शोध The EMBO Journal में प्रकाशित हुआ है। वैज्ञानिकों के अनुसार, इस तंत्र ने SARS-CoV-2, चिकनगुनिया और जापानी इंसेफेलाइटिस जैसे कई रोग पैदा करने वाले वायरस के खिलाफ सुरक्षा प्रदान करने की क्षमता दिखाई है। अब शोध दल DZIP3 की गतिविधि को बढ़ाने के लिए छोटी अणु-आधारित दवाओं पर काम कर रहा है। भविष्य में इस शोध से कई तरह के वायरस के खिलाफ प्रभावी उपचार विकसित करने की नई संभावनाएं खुल सकती हैं। हालांकि, ऐसी दवाओं की प्रभावशीलता और सुरक्षा की पुष्टि के लिए आगे के शोध और परीक्षण जरूरी होंगे।
जब कोई वायरस मानव शरीर की कोशिका में प्रवेश करता है, तो वह अपनी संख्या बढ़ाने और दूसरी कोशिकाओं तक फैलने की कोशिश करता है। शरीर को संक्रमण रोकने के लिए जल्द से जल्द इस बाहरी खतरे की पहचान करनी होती है। यदि कोशिका समय रहते वायरस को पहचान लेती है, तो वह प्रतिरक्षा प्रणाली को सक्रिय करने वाले संकेत जारी कर सकती है।
यह प्रक्रिया शरीर की प्राकृतिक सुरक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। कोशिकाओं में मौजूद कुछ विशेष प्रोटीन बाहरी या असामान्य आनुवंशिक सामग्री को पहचानने में मदद करते हैं। इसके बाद वे ऐसे संकेत उत्पन्न करते हैं, जिनसे शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली संक्रमण से मुकाबला करने के लिए सक्रिय होती है।
डॉ. संतोष चौहान के शोध समूह ने लगभग सात साल पहले यह अनुमान लगाया था कि मानव शरीर में मौजूद प्रोटीनों का एक विशेष समूह दोहरी भूमिका निभा सकता है। ये प्रोटीन एक ओर वायरस की आनुवंशिक सामग्री को सीधे पहचान सकते हैं, तो दूसरी ओर कोशिका के महत्वपूर्ण प्रोटीनों को सक्रिय करके प्रतिरक्षा संबंधी चेतावनी भी जारी कर सकते हैं।
नए अध्ययन में वैज्ञानिकों ने इसी विचार को आगे बढ़ाते हुए DZIP3 प्रोटीन की भूमिका का पता लगाया है।
शोध में सामने आया कि DZIP3 प्रोटीन वही दोहरी भूमिका निभाता है, जिसकी वैज्ञानिकों ने पहले कल्पना की थी। जब यह कोशिका के भीतर वायरस के RNA यानी राइबोन्यूक्लिक एसिड को पहचानता है, तो इसकी संरचना में बदलाव होता है। इस बदलाव के कारण प्रोटीन सक्रिय हो जाता है और शरीर की सुरक्षा प्रक्रिया शुरू करने में जुट जाता है।
इसके बाद DZIP3 कोशिका के माइटोकॉन्ड्रिया तक पहुंचता है। माइटोकॉन्ड्रिया को कोशिका का ऊर्जा केंद्र कहा जाता है, क्योंकि यह कोशिका के कामकाज के लिए जरूरी ऊर्जा तैयार करता है। हालांकि, इस शोध में इसकी भूमिका केवल ऊर्जा बनाने तक सीमित नहीं है। यह कोशिका की प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया से जुड़ी गतिविधियों में भी महत्वपूर्ण स्थान रखता है।
माइटोकॉन्ड्रिया तक पहुंचने के बाद DZIP3 प्रमुख प्रतिरक्षा प्रोटीनों को चिह्नित करके सक्रिय करता है। इस प्रक्रिया से कोशिका के भीतर एक प्रभावशाली प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया शुरू होती है।
इसके परिणामस्वरूप शरीर में टाइप-I इंटरफेरॉन नामक रक्षात्मक अणु सक्रिय होते हैं। ये अणु वायरस के बढ़ने और अपनी संख्या बढ़ाने की प्रक्रिया को रोकने में मदद करते हैं। इस तरह DZIP3 प्रोटीन वायरस की पहचान करने और कोशिका की प्राकृतिक सुरक्षा व्यवस्था को सक्रिय करने के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी का काम करता है।
शोध दल ने दिखाया कि DZIP3 से जुड़ा यह नया तंत्र कई रोग पैदा करने वाले वायरस के खिलाफ व्यापक सुरक्षा प्रदान करने की क्षमता रखता है। अध्ययन में जिन वायरस का उल्लेख किया गया है, उनमें SARS-CoV-2, चिकनगुनिया और जापानी इंसेफेलाइटिस शामिल हैं।
ये वायरस अलग-अलग प्रकार की बीमारियों का कारण बनते हैं। इसलिए, एक ऐसे प्राकृतिक प्रतिरक्षा तंत्र की पहचान करना महत्वपूर्ण है, जो एक से अधिक वायरस के खिलाफ शरीर की प्रतिक्रिया में योगदान दे सकता हो।
हालांकि, इस खोज का यह अर्थ नहीं है कि DZIP3 हर वायरस से सुरक्षा देता है या इससे जुड़ा कोई उपचार अभी उपलब्ध है। फिलहाल यह शोध मानव कोशिकाओं की प्रतिरक्षा प्रणाली को समझने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इसकी वास्तविक चिकित्सा उपयोगिता जानने के लिए आगे परीक्षण करने होंगे।
इस खोज के आधार पर डॉ. चौहान की टीम अब छोटी अणु-आधारित दवाओं के संभावित विकल्प विकसित करने पर काम कर रही है। इनका उद्देश्य DZIP3 की गतिविधि को लक्ष्य बनाना और उसे बढ़ावा देना है, ताकि शरीर की प्राकृतिक एंटीवायरल प्रतिरक्षा को कृत्रिम रूप से मजबूत किया जा सके।
डॉ. संतोष चौहान, जो CSIR-CCMB Dr. Santosh Chauhan,CSIR-CCMB में वरिष्ठ प्रधान वैज्ञानिक हैं और इस अध्ययन के प्रमुख लेखक हैं, ने कहा कि DZIP3 वायरस के RNA को कैसे पहचानता है और सीधे कोशिका की प्रतिरक्षा प्रणाली को कैसे सक्रिय करता है, यह समझने से मानव प्रतिरक्षा के बारे में हमारी जानकारी और गहरी हुई है।
उन्होंने यह भी कहा कि कोशिकाओं की प्राकृतिक रक्षा प्रणालियों की खोज नई संभावनाएं खोलती है। DZIP3 को छोटी अणु-आधारित दवाओं के जरिए लक्ष्य बनाना भविष्य में उभरते वायरल खतरों के खिलाफ व्यापक प्रभाव वाली एंटीवायरल दवाएं विकसित करने में मदद कर सकता है।
इस अध्ययन के प्रथम लेखक डॉ. रिंकू साहू थे। शोध में भारत और विदेश के विभिन्न संस्थानों के वैज्ञानिकों ने भी सहयोग किया। इस अनुसंधान के लिए वित्तीय सहायता भारत सरकार के जैव प्रौद्योगिकी विभाग (DBT) ने प्रदान की।
CSIR-CCMB के वैज्ञानिकों की DZIP3 प्रोटीन से जुड़ी खोज मानव कोशिकाओं में वायरस की पहचान और प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया शुरू होने की प्रक्रिया को समझने में महत्वपूर्ण योगदान देती है। यह प्रोटीन वायरस के RNA को पहचानकर कोशिका की प्राकृतिक सुरक्षा व्यवस्था को सक्रिय करने में भूमिका निभाता है।
भविष्य में DZIP3 की गतिविधि को बढ़ाने वाली दवाएं विकसित करने से कई प्रकार के वायरल संक्रमणों के उपचार के नए रास्ते खुल सकते हैं। हालांकि, फिलहाल यह शोध का क्षेत्र है और संभावित दवाओं की प्रभावशीलता, सुरक्षा तथा मनुष्यों में उपयोगिता की पुष्टि के लिए आगे वैज्ञानिक परीक्षण जरूरी होंगे।