देश में महंगाई और जरूरी चीजों की उपलब्धता को लेकर चिंता के बीच अब सोना और चांदी को लेकर भी बड़ी खबर सामने आई है। जिस तरह हाल के दिनों में LPG को लेकर चर्चाएं तेज हुई थीं, उसी तरह अब कीमती धातुओं की सप्लाई पर भी संकट के बादल मंडराने लगे हैं। भारतीय बैंकों ने फिलहाल विदेशी सप्लायर्स से सोने और चांदी के आयात ऑर्डर रोक दिए हैं, जिससे बाजार में हलचल बढ़ गई है।
रिपोर्ट्स के अनुसार कई टन सोना और चांदी इस समय कस्टम्स में फंसा हुआ है। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है, कि इनकी क्लियरेंस के लिए जरूरी सरकारी मंजूरी अभी तक जारी नहीं हुई है। हर साल की तरह इस बार भी बैंक और ट्रेडर्स को उम्मीद थी, कि अप्रैल की शुरुआत में ही नया आदेश जारी हो जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हो सका।
सोना और चांदी जैसे कीमती धातुओं का आयात सीधे तौर पर नियंत्रित होता है। इसके लिए Directorate General of Foreign Trade यानी DGFT की ओर से हर वित्त वर्ष की शुरुआत में एक आदेश जारी किया जाता है। इस आदेश में यह तय किया जाता है, कि किन बैंकों को इन धातुओं के आयात की अनुमति होगी।
पिछला आदेश मार्च 2026 तक ही मान्य था। इसके बाद नया आदेश अब तक जारी नहीं हुआ है। यही वजह है, कि बैंक नई डील नहीं कर पा रहे हैं, और पुराने ऑर्डर भी अटक गए हैं। अनिश्चितता के कारण बैंकों ने विदेशी सप्लायर्स से नए आयात ऑर्डर रोक दिए हैं।
सूत्रों के मुताबिक 5 टन से ज्यादा सोना और करीब 8 टन चांदी इस समय कस्टम्स में फंसी हुई है। जब तक DGFT की मंजूरी नहीं मिलती, तब तक इनकी क्लियरेंस संभव नहीं है। इसका सीधा असर बाजार की सप्लाई चेन पर पड़ रहा है।
अगर यह स्थिति लंबी चलती है, तो ज्वेलरी कारोबारियों को स्टॉक की कमी का सामना करना पड़ सकता है। खासकर शादी-ब्याह और त्योहारों के सीजन में इसकी मांग और ज्यादा बढ़ जाती है, जिससे कीमतों में उछाल देखने को मिल सकता है।
भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सोना उपभोक्ता देश है, और चांदी का सबसे बड़ा खरीदार भी। देश में सोना-चांदी का उत्पादन बहुत कम होता है, इसलिए यहां की जरूरतों को पूरा करने के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर रहना पड़ता है।
ऐसे में आयात रुकने का मतलब है, कि घरेलू बाजार में सप्लाई सीमित हो जाएगी। इससे न सिर्फ कीमतों पर असर पड़ेगा, बल्कि निवेशकों और आम खरीदारों दोनों की रणनीति भी बदल सकती है।
अगर आने वाले दिनों में आयात जल्द शुरू नहीं होता है, तो सोना और चांदी दोनों की कीमतों में तेजी आ सकती है। मांग बनी रहेगी, लेकिन सप्लाई कम होने से बाजार में असंतुलन पैदा होगा।
हालांकि इसका एक दूसरा पहलू भी है। आयात कम होने से देश का व्यापार घाटा थोड़ा कम हो सकता है, और भारतीय रुपये को मजबूती मिल सकती है। लेकिन आम उपभोक्ता के लिए यह राहत नहीं, बल्कि महंगाई का संकेत है।
World Gold Council की रिपोर्ट के अनुसार साल 2025 में भारत की गोल्ड डिमांड घटकर 710.9 मीट्रिक टन रह गई, जो पिछले पांच सालों में सबसे कम है। ऐसे में अगर सप्लाई भी प्रभावित होती है, तो बाजार में संतुलन और बिगड़ सकता है।
फिलहाल पूरा बाजार DGFT के नए आदेश का इंतजार कर रहा है। जैसे ही यह आदेश जारी होगा, बैंकों को आयात शुरू करने की अनुमति मिल जाएगी और कस्टम्स में फंसा माल भी बाजार में आ सकेगा।
लेकिन जब तक यह स्थिति स्पष्ट नहीं होती, तब तक ज्वेलरी कारोबारियों, निवेशकों और आम खरीदारों को सतर्क रहने की जरूरत है। आने वाले समय में सोना-चांदी खरीदना पहले से महंगा हो सकता है, और बाजार में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।