भारत अंतरराष्ट्रीय व्यापार में महिला-नेतृत्व वाले उद्यमों की भागीदारी बढ़ाने की दिशा में काम कर रहा है। इसके लिए भारत BRICS के सदस्य और साझेदार देशों के साथ मिलकर महिला उद्यमियों के लिए नए व्यापारिक अवसर विकसित करने की योजना बना रहा है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि महिलाओं के नेतृत्व वाले कारोबार को वैश्विक बाजार तक पहुंचाने के लिए वित्त, अंतरराष्ट्रीय खरीदारों और व्यापार से जुड़े नियमों को अधिक आसान और स्पष्ट बनाना जरूरी है।
नई दिल्ली में आयोजित BRICS Women’s Business Alliance (WBA) Women-Led Development Conference में बोलते हुए गोयल ने कहा कि महिला उद्यमियों को सशक्त बनाना भारत की वैश्विक व्यापार में भागीदारी बढ़ाने और लंबे समय में आर्थिक विकास को मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि BRICS देशों के बीच बेहतर सहयोग से महिला स्वामित्व वाले कारोबार नए बाजारों में पहुंच सकते हैं और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं का हिस्सा बन सकते हैं।
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल Union Minister of Commerce and Industry Piyush Goyal के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कारोबार का विस्तार करने वाली कंपनियों के सामने मुख्य रूप से तीन बड़ी चुनौतियां होती हैं। इनमें वित्त तक पहुंच, खरीदारों और बाजारों तक पहुंच तथा व्यापार नियमों में स्थिरता और स्पष्टता शामिल हैं।
कई छोटे और महिला-नेतृत्व वाले कारोबारों के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहुंच बनाना आसान नहीं होता। उन्हें पर्याप्त वित्तीय सहायता, नए खरीदारों की जानकारी और अलग-अलग देशों में लागू नियमों को समझने में कठिनाई हो सकती है।
गोयल ने कहा कि भारत महिला उद्यमियों को आगे बढ़ाने के अपने अनुभव BRICS Women’s Business Alliance और व्यापक BRICS व्यापारिक समुदाय के साथ साझा करने के लिए तैयार है। देशों के बीच सहयोग बढ़ने से महिला कारोबारियों को नए ग्राहक खोजने, अंतरराष्ट्रीय संपर्क बनाने और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में शामिल होने का अवसर मिल सकता है।
भारत में महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए पिछले कुछ वर्षों में वित्तीय समावेशन पर काफी जोर दिया गया है। गोयल ने इस दिशा में भारत की प्रगति का उल्लेख करते हुए कहा कि महिलाओं के नाम पर करीब 30 करोड़ बैंक खाते पिछले 12 वर्षों में खोले गए हैं।
सरकार ने कारोबार शुरू करने और आजीविका के अवसर पैदा करने की इच्छुक महिलाओं को बिना जमानत ऋण उपलब्ध कराने की दिशा में भी कदम उठाए हैं। इसका लाभ उन महिलाओं को भी मिल सकता है, जिनका पहले से कोई मजबूत ऋण इतिहास नहीं है।
गोयल ने बताया कि करीब 10 करोड़ ग्रामीण महिलाएं लगभग 90 लाख स्वयं सहायता समूहों, सहकारी संस्थाओं और अन्य सामूहिक संगठनों से जुड़ी हुई हैं। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं के लिए आय और कारोबार के नए अवसर तैयार हो रहे हैं।
केंद्रीय मंत्री ने लखपति दीदी पहल का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार, ऐसी महिलाओं की संख्या 3 करोड़ से अधिक हो गई है, जिनकी व्यक्तिगत वार्षिक आय ₹1 लाख से ज्यादा है।
उन्होंने यह भी बताया कि छोटे कारोबारियों के लिए लगभग 56 करोड़ ऋण दिए गए हैं, जिनमें 68 प्रतिशत से अधिक का लाभ महिलाओं को मिलने की बात कही गई है। इन प्रयासों का उद्देश्य महिलाओं की आर्थिक स्वतंत्रता बढ़ाना और देश के विकास में उनकी भागीदारी को मजबूत करना है।
जयपुर में हुई BRICS वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रियों की बैठक का उल्लेख करते हुए गोयल ने कहा कि वहां छोटे निर्यातकों के मूल्यांकन के लिए स्वैच्छिक सिद्धांतों पर सहमति बनी है।
गोयल के अनुसार, किसी छोटे कारोबारी का मूल्यांकन केवल चालान और भुगतान रिकॉर्ड के आधार पर नहीं होना चाहिए। उद्यमी की क्षमता, कारोबार की प्रगति और समय के साथ उसके विकास को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।
जयपुर सहमति के तहत BRICS देशों ने एक साझा अंतरराष्ट्रीय व्यापार मंच की संभावनाओं पर काम करने पर भी सहमति जताई है। ऐसा मंच BRICS देशों के कारोबारियों को दूसरे देशों के खरीदारों से जोड़ने और उत्पादों की मांग तथा व्यापार के अवसरों की जानकारी उपलब्ध कराने में मदद कर सकता है।
प्रस्तावित मंच पर वित्तीय संस्थाएं और अन्य मध्यस्थ भी भाग ले सकते हैं। इससे छोटे कारोबार और विशेष रूप से महिला उद्यमियों को वित्तीय सहायता मिलने की संभावना बढ़ सकती है।
गोयल ने प्रस्तावित Women’s Advancement Fund को केवल चर्चा तक सीमित न रखकर उसे लागू करने की दिशा में आगे बढ़ने की अपील की। उन्होंने BRICS Women’s Business Alliance और BRICS Business Council से महिला निर्यातकों की वास्तविक वित्तीय जरूरतों को ध्यान में रखते हुए चालान-आधारित वित्त सुविधा पर काम करने को कहा।
गोयल ने अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनियों, सम्मेलनों, सेमिनारों, व्यापार मंचों और खरीदार-विक्रेता बैठकों में महिला-स्वामित्व वाले कारोबारों की भागीदारी बढ़ाने की जरूरत बताई।
उन्होंने कपड़ा जैसे क्षेत्रों में विशेष रूप से महिला-नेतृत्व वाले व्यापार प्रतिनिधिमंडल भेजने का सुझाव दिया। ऐसे प्रतिनिधिमंडल महिलाओं को विदेशी कारोबारियों से संपर्क बनाने, नए बाजार तलाशने और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में प्रवेश करने में मदद कर सकते हैं।
यह अवसर केवल BRICS देशों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। महिला उद्यमियों को अन्य अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी अपने उत्पाद और सेवाएं पहुंचाने के अवसर दिए जाने की जरूरत है।
अंतरराष्ट्रीय व्यापार को आसान बनाने के लिए गोयल ने नियमों को स्पष्ट और प्रक्रियाओं को सरल बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
उन्होंने BRICS देशों में इलेक्ट्रॉनिक व्यापार दस्तावेज, ई-चालान, इलेक्ट्रॉनिक बिल ऑफ लाडिंग और ई-कस्टम घोषणा को व्यापक रूप से अपनाने की वकालत की।
उन्होंने ऑनलाइन सीमा-पार सेवाओं को आसान बनाने के लिए स्वैच्छिक सिद्धांतों का भी समर्थन किया, ताकि डिजिटल व्यापार बढ़े और साथ ही प्रत्येक देश के घरेलू कानूनों का सम्मान भी बना रहे।
गोयल ने कहा कि BRICS देशों के बीच सेवाओं के व्यापार में अभी काफी संभावनाएं मौजूद हैं। वैश्विक सेवा बाजार का आकार करीब 10 ट्रिलियन डॉलर होने के बावजूद BRICS अर्थव्यवस्थाओं के बीच इस क्षेत्र की पूरी क्षमता का इस्तेमाल नहीं हो पाया है।
आवागमन और डिजिटल सेवाओं जैसे क्षेत्र महिला उद्यमियों तथा सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों के लिए नए अवसर पैदा कर सकते हैं। देशों के बीच सहयोग बढ़ने से छोटे कारोबार डिजिटल अर्थव्यवस्था में अपनी पहुंच बढ़ा सकते हैं और सीमा-पार सेवाएं उपलब्ध करा सकते हैं।
गोयल ने भारत की One District, One Product (ODOP) पहल का भी उल्लेख किया। इसका उद्देश्य प्रत्येक जिले के विशिष्ट उत्पादों की पहचान कर उन्हें बढ़ावा देना और स्थानीय क्षेत्रों को निर्यात केंद्र के रूप में विकसित करना है।
यह पहल अब सेवाओं और स्थानीय व्यंजनों तक भी विस्तार कर रही है। इससे छोटे कारोबारी और महिला उद्यमी स्थानीय उत्पादों, खाद्य सामग्री और पारंपरिक कौशल को अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचा सकते हैं।
गोयल ने खाड़ी देशों में भारतीय फलों और सब्जियों की बढ़ती मांग का उदाहरण दिया। वहां बड़ी संख्या में भारतीय समुदाय होने के कारण इन उत्पादों के लिए बाजार की अच्छी संभावनाएं हैं। इससे छोटे किसानों और खाद्य प्रसंस्करण, पैकेजिंग तथा खाद्य उत्पादों से जुड़े महिला उद्यमियों को लाभ मिल सकता है।
गोयल ने कहा कि वैश्विक व्यापार में अनिश्चितताओं के बावजूद अप्रैल से अगस्त के बीच भारत के वस्तु निर्यात में 15 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई है। उन्होंने अप्रैल-जून तिमाही में भारत की 7.8 प्रतिशत आर्थिक वृद्धि का भी उल्लेख किया और इसे प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में सबसे अधिक बताया।
उन्होंने कहा कि भारत वैश्विक अर्थव्यवस्था के साथ बढ़ते आत्मविश्वास के साथ जुड़ रहा है और भू-राजनीतिक तथा आर्थिक चुनौतियों के बावजूद व्यापार विस्तार पर लगातार काम कर रहा है।
भारत ने 2047 तक 30 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है। इस लक्ष्य को हासिल करने में महिला-नेतृत्व वाला विकास महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
BRICS के माध्यम से महिला-नेतृत्व वाले कारोबारों को वित्त, बाजार और डिजिटल व्यापार से जोड़ने की भारत की पहल से उद्यमियों के लिए नए अवसर पैदा हो सकते हैं। आसान व्यापार नियम, अंतरराष्ट्रीय खरीदारों तक पहुंच, वित्तीय सहायता और वैश्विक व्यापार मंचों में अधिक भागीदारी महिलाओं को अपने कारोबार का विस्तार करने में मदद कर सकती है।
अगर BRICS देश साझा व्यापार मंच, महिला वित्तीय सहायता और डिजिटल व्यापार व्यवस्था जैसे प्रस्तावों को आगे बढ़ाते हैं, तो इससे महिला उद्यमियों की अंतरराष्ट्रीय व्यापार में भागीदारी और मजबूत हो सकती है। यह न केवल महिलाओं की आर्थिक स्वतंत्रता बढ़ाएगा, बल्कि भारत के दीर्घकालिक आर्थिक विकास और वैश्विक व्यापार में उसकी भूमिका को भी मजबूती दे सकता है।