भारत अब अपनी स्वदेशी तकनीक से विकसित वंदे भारत ट्रेनों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतारने की तैयारी कर रहा है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने घोषणा की है कि देश का लक्ष्य अगले तीन से चार वर्षों में पूरी वंदे भारत ट्रेनें दूसरे देशों को निर्यात करना शुरू करना है। यह कदम भारतीय रेलवे के लिए एक बड़ी उपलब्धि साबित हो सकता है। इससे न केवल देश की रेल निर्माण क्षमता को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिलेगी, बल्कि भारतीय कंपनियों के लिए विदेशों में कारोबार के नए अवसर भी खुल सकते हैं।
भारतीय रेलवे Indian Railways लगातार वंदे भारत ट्रेन के डिजाइन, सुविधाओं और तकनीक में सुधार कर रहा है। इन बदलावों के लिए पहले से चल रही ट्रेनों के संचालन से मिले अनुभव और यात्रियों की जरूरतों को ध्यान में रखा जा रहा है। सरकार का मानना है कि इस तरह लगातार बेहतर होती तकनीक के साथ भारत वैश्विक रेल बाजार में अपनी जगह मजबूत कर सकता है।
1 नवंबर 2026 को बेंगलुरु-मुंबई वंदे भारत स्लीपर एक्सप्रेस के उद्घाटन समारोह के दौरान रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव Railway Minister Ashwini Vaishnaw ने भारत की निर्यात योजना के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि देश अगले तीन से चार वर्षों में अपनी पूरी ट्रेन इकाइयों को विदेशी बाजारों तक पहुंचाने की दिशा में काम कर रहा है।
मंत्री के अनुसार, वंदे भारत ट्रेन का हर नया संस्करण पिछले मॉडल के अनुभवों से मिली सीख के आधार पर तैयार किया जा रहा है। ट्रेन के संचालन के दौरान सामने आने वाली तकनीकी चुनौतियों, रखरखाव की जरूरतों और यात्रियों के अनुभवों को अगले संस्करण में शामिल किया जाता है। इससे ट्रेन की कार्यक्षमता और विश्वसनीयता बेहतर बनाने में मदद मिलती है।
वैष्णव ने यह भी बताया कि भारत ने रेलवे से जुड़े उपकरणों और कलपुर्जों का निर्यात पहले ही शुरू कर दिया है। भारतीय कंपनियां स्विट्जरलैंड, जर्मनी, फ्रांस, इटली और अमेरिका जैसे देशों को कई तरह के रेल उपकरण उपलब्ध करा रही हैं।
इनमें प्रोपल्शन सिस्टम, बोगी और रेलवे से जुड़े दूसरे तकनीकी उत्पाद शामिल हैं। पूरी वंदे भारत ट्रेन का निर्यात शुरू होने पर भारत केवल कलपुर्जों और उपकरणों का आपूर्तिकर्ता नहीं रहेगा, बल्कि एक संपूर्ण रेल प्रणाली उपलब्ध कराने वाले देश के रूप में भी अपनी पहचान बना सकेगा।
भारत ने पिछले कुछ वर्षों में रेलवे से जुड़े उपकरणों के अंतरराष्ट्रीय कारोबार में अपनी मौजूदगी बढ़ाई है। रेल मंत्रालय की ओर से मार्च 2026 में संसद में साझा की गई जानकारी के अनुसार, वित्त वर्ष 2016-17 से जनवरी 2026 तक भारतीय रेलवे के रोलिंग स्टॉक और उससे जुड़े कलपुर्जों का कुल निर्यात लगभग 26,000 करोड़ रुपये रहा।
रोलिंग स्टॉक का अर्थ उन रेल वाहनों से है जो पटरियों पर चलते हैं। इसमें इंजन, यात्री डिब्बे और अन्य रेल वाहन शामिल होते हैं। भारतीय निर्माता विदेशों की जरूरतों के अनुसार कई प्रकार के उत्पाद तैयार कर रहे हैं।
भारतीय रेलवे निर्माण कंपनियां अंतरराष्ट्रीय बाजार में कई तरह के उत्पाद उपलब्ध करा रही हैं। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:
रेल इंजन और यात्री डिब्बे: यात्रियों और माल ढुलाई के लिए इस्तेमाल होने वाले रेल वाहन।
ट्रैक्शन मोटर: रेलगाड़ियों को चलाने के लिए आवश्यक मोटर।
प्रोपल्शन सिस्टम: ट्रेन की गति और संचालन को नियंत्रित करने वाली तकनीकी व्यवस्था।
बोगी: पहियों और उनसे जुड़े ढांचे की वह इकाई, जिस पर रेल डिब्बे टिके होते हैं।
अन्य रेलवे कलपुर्जे: ट्रेन के संचालन, सुरक्षा और रखरखाव में इस्तेमाल होने वाले उपकरण।
पूरी वंदे भारत ट्रेन का निर्यात शुरू होने से भारतीय कंपनियों को अपने कारोबार का विस्तार करने का अवसर मिलेगा। इससे उन्हें अलग-अलग उपकरण बेचने के बजाय विदेशी ग्राहकों को एक संपूर्ण ट्रेन उपलब्ध कराने की क्षमता विकसित करने में मदद मिल सकती है।
भारत की वंदे भारत ट्रेनों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में पहुंचाने की योजना पर भारतीय रेलवे के साथ सरकारी इंजीनियरिंग और परामर्श कंपनी RITES Ltd भी काम कर रही है।
एक रिपोर्ट के अनुसार, RITES भारतीय रेलवे के साथ मिलकर वंदे भारत ट्रेन का स्टैंडर्ड गेज संस्करण विकसित करने की संभावनाओं पर काम कर रही है। यह बदलाव विदेशी बाजारों की जरूरतों को ध्यान में रखकर महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
भारत में वर्तमान वंदे भारत सेवाएं ब्रॉड गेज यानी बड़ी रेल पटरी पर संचालित होती हैं। लेकिन दुनिया के कई देशों में स्टैंडर्ड गेज रेल नेटवर्क का इस्तेमाल किया जाता है। इसलिए भारतीय ट्रेनों को उन बाजारों के अनुकूल बनाने के लिए तकनीकी बदलाव जरूरी हो सकते हैं।
स्टैंडर्ड गेज संस्करण तैयार होने से वंदे भारत को उन देशों में पेश करना आसान हो सकता है, जहां इसी तरह की पटरी व्यवस्था मौजूद है। इससे ट्रेन को अलग-अलग देशों की रेल प्रणालियों के अनुरूप ढालने में मदद मिलेगी।
वंदे भारत के निर्यात से जुड़ी घोषणा के साथ ही 1 नवंबर को बेंगलुरु-मुंबई वंदे भारत स्लीपर एक्सप्रेस का उद्घाटन भी किया गया। यह ट्रेन लगभग 1,118 किलोमीटर की दूरी करीब 16 घंटे में तय करेगी।
रेल राज्य मंत्री वी. सोमन्ना ने बताया कि इस नई सेवा से मौजूदा रेलगाड़ियों की तुलना में यात्रा का समय लगभग आठ घंटे तक कम हो सकता है। इस ट्रेन को दोनों प्रमुख शहरों के बीच रात में आरामदायक यात्रा का विकल्प उपलब्ध कराने के उद्देश्य से तैयार किया गया है।
पूरी तरह वातानुकूलित इस स्लीपर ट्रेन में कुल 16 कोच हैं। इसमें यात्रियों के लिए तीन श्रेणियों में कुल 823 बर्थ उपलब्ध कराई गई हैं।
इनमें शामिल हैं:
फर्स्ट एसी: अधिक आराम और बेहतर निजी सुविधाओं वाली श्रेणी।
एसी टू-टियर: दो स्तरों पर बर्थ की व्यवस्था वाली वातानुकूलित श्रेणी।
एसी थ्री-टियर: तीन स्तरों पर बर्थ की व्यवस्था वाली वातानुकूलित श्रेणी।
इस ट्रेन में रातभर की यात्रा के लिए स्लीपर सुविधा दी गई है। इससे यात्रियों को लंबी दूरी तय करते समय आराम करने का विकल्प मिलेगा।
नई ट्रेन की नियमित सेवाएं 2 नवंबर से मुंबई और 3 नवंबर से बेंगलुरु की ओर शुरू होने वाली हैं। दोनों दिशाओं में ट्रेन का निर्धारित समय इस प्रकार है:
| मार्ग | प्रस्थान का समय | पहुंचने का समय |
|---|---|---|
| बेंगलुरु से मुंबई | शाम 7:45 बजे | अगले दिन सुबह 11:55 बजे |
| मुंबई से बेंगलुरु | रात 8:10 बजे | अगले दिन दोपहर 12:00 बजे |
बेंगलुरु से चलने वाली ट्रेन सर एम. विश्वेश्वरैया टर्मिनल से रवाना होगी और मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस पहुंचेगी।
दोनों दिशाओं में यह सेवा सप्ताह में छह दिन संचालित होगी। बेंगलुरु-मुंबई ट्रेन सोमवार को नहीं चलेगी, जबकि मुंबई-बेंगलुरु सेवा मंगलवार को उपलब्ध नहीं होगी।
पूरी वंदे भारत ट्रेनों के निर्यात की योजना भारत के रेलवे निर्माण क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। अब तक भारतीय कंपनियां विदेशों में रेलवे उपकरणों और कलपुर्जों की आपूर्ति के माध्यम से अपनी पहचान बना रही थीं। नई योजना इस कारोबार को अगले स्तर पर ले जा सकती है।
भारतीय रेलवे और RITES की ओर से स्टैंडर्ड गेज ट्रेनसेट विकसित करने की कोशिश भी इसी दिशा में महत्वपूर्ण है। इससे भारत की स्वदेशी रेल तकनीक को दूसरे देशों की जरूरतों के अनुसार तैयार करने में मदद मिल सकती है।
अगले तीन से चार वर्ष इस योजना के लिए अहम होंगे। इस दौरान ट्रेन की तकनीक, अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मानकों, निर्माण क्षमता और विदेशी ग्राहकों की जरूरतों को पूरा करने की तैयारी महत्वपूर्ण रहेगी। यदि भारत इस लक्ष्य को हासिल करता है, तो वंदे भारत ट्रेन देश के भीतर आधुनिक रेल यात्रा का प्रतीक होने के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय इंजीनियरिंग और विनिर्माण क्षमता की पहचान भी बन सकती है।