भारत ने अपने सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण उद्योग को मजबूत बनाने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया है। केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी, रेलवे तथा सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने सेमीकॉन इंडिया कार्यक्रम के दूसरे चरण के लिए Semicon 2.0 वेब पोर्टल लॉन्च किया है। इसी अवसर पर उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (ECMS) के तहत 12 नई परियोजनाओं को मंजूरी देने की भी घोषणा की। इन परियोजनाओं में कुल 7,503 करोड़ रुपये के निवेश का अनुमान है।
इन नई परियोजनाओं से लगभग 39,045 करोड़ रुपये के उत्पादन और 7,127 प्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य देश में इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर से जुड़े उत्पादों का निर्माण बढ़ाना, आयात पर निर्भरता कम करना और वैश्विक बाजार में भारत की स्थिति मजबूत करना है।
नया Semicon 2.0 पोर्टल भारत के सेमीकंडक्टर विकास कार्यक्रम के दूसरे चरण की शुरुआत को दर्शाता है। इसके लॉन्च के साथ ही कार्यक्रम के छह रणनीतिक स्तंभों में से तीन के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
इन तीन स्तंभों में शामिल हैं:
स्तंभ 2 – मशीनें और सामग्री (Machines and Materials): सेमीकंडक्टर निर्माण में इस्तेमाल होने वाली मशीनों, उपकरणों और जरूरी सामग्रियों का देश में उत्पादन बढ़ाना।
स्तंभ 3 – अतिरिक्त फैब्रिकेशन सुविधाएं (Additional Fabrication Facilities): भारत में नई सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन इकाइयां स्थापित करने को प्रोत्साहन देना।
स्तंभ 4 – ATMP और OSAT उद्योग: चिप असेंबली, टेस्टिंग, मार्किंग और पैकेजिंग के साथ आउटसोर्स्ड सेमीकंडक्टर असेंबली एवं टेस्टिंग सुविधाओं का विस्तार करना।
इस पहल का उद्देश्य सेमीकंडक्टर निर्माण की अलग-अलग प्रक्रियाओं को देश के भीतर विकसित करके एक मजबूत घरेलू उद्योग तैयार करना है।
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने India Semiconductor Mission (ISM) के तहत Semicon 2.0 कार्यक्रम के लिए 1,27,500 करोड़ रुपये के वित्तीय बजट को मंजूरी दी है। यह कार्यक्रम भारत को सेमीकंडक्टर निर्माण के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में अगला बड़ा कदम है।
इस योजना के छह रणनीतिक स्तंभों में चिप डिजाइन, मशीनें एवं सामग्री, अतिरिक्त फैब्रिकेशन इकाइयां, ATMP और OSAT उद्योग का विस्तार, अनुसंधान एवं विकास तथा कुशल प्रतिभाओं का विकास शामिल है।
कार्यक्रम को लॉन्च करते हुए अश्विनी वैष्णव Ashwini Vaishnaw ने कहा कि भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण उद्योग अब केवल असेंबली तक सीमित नहीं है। देश धीरे-धीरे एक ऐसी घरेलू उत्पादन व्यवस्था तैयार कर रहा है, जिसमें मॉड्यूल, कंपोनेंट्स, कच्चा माल और आधुनिक तकनीकों का निर्माण भी भारत में हो सके।
मंत्री ने बताया कि भारत ने बैटरी सेल, कॉपर फॉयल, कॉपर क्लैड लैमिनेट और आधुनिक प्रिंटेड सर्किट बोर्ड (PCB) के निर्माण में अपनी क्षमताओं को बढ़ाया है।
उन्होंने सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) की भूमिका पर भी जोर दिया। ECMS के तहत मंजूर की गई लगभग 50 प्रतिशत इकाइयां MSME श्रेणी से संबंधित हैं। इससे पता चलता है कि छोटे और मध्यम व्यवसाय भी देश की इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण व्यवस्था को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।
Semicon 2.0 के तहत मशीनों, उपकरणों, सामग्रियों, रसायनों और गैसों के निर्माण पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। सरकार का लक्ष्य कम से कम तीन बड़े उपकरण निर्माताओं और रसायन एवं गैस क्षेत्र की पांच कंपनियों को भारत में निवेश के लिए आकर्षित करना है।
अश्विनी वैष्णव ने यह भी कहा कि सेमीकंडक्टर उद्योग में गुणवत्ता, तकनीकी क्षमता, अनुसंधान और विकास तथा वैश्विक प्रतिस्पर्धा को प्राथमिकता देनी होगी। उन्होंने उद्योग जगत से मिलकर काम करने, तकनीकी जानकारी साझा करने और लगातार सुधार करने की अपील की।
सरकार ने इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (ECMS) के तहत 12 नई परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इससे पहले इस योजना के अंतर्गत 69,548 करोड़ रुपये के निवेश वाली 106 परियोजनाओं की घोषणा की गई थी।
नई मंजूरियों के बाद ECMS के तहत स्वीकृत कुल आवेदनों की संख्या बढ़कर 118 हो गई है। ये परियोजनाएं 16 राज्यों में 34 अलग-अलग उत्पादों के निर्माण से जुड़ी हैं।
नई परियोजनाओं को मुख्य रूप से तीन श्रेणियों में बांटा गया है।
इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और औद्योगिक मशीनों के निर्माण में इस्तेमाल होने वाले चार प्रमुख उत्पादों को मंजूरी मिली है।
मल्टी-लेयर PCB: NeST ICELR Private Limited
रिले (Relays): TDConnex (Chennai) Private Limited
हीट सिंक (Heat Sinks): Modern Automotives Limited
विशेष सिरेमिक (Specialty Ceramics): Voltix Semicon Private Limited
ये सभी उत्पाद इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों, औद्योगिक मशीनों और आधुनिक निर्माण प्रणालियों के लिए महत्वपूर्ण हैं। इनके घरेलू उत्पादन से भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण से जुड़ी आपूर्ति व्यवस्था मजबूत हो सकती है।
देश में जरूरी कच्चे माल और बैटरी से जुड़े उत्पादों का निर्माण बढ़ाने के लिए पांच अन्य उत्पादों को मंजूरी दी गई है।
कॉपर फॉयल (Copper Foil): Indo Asia Copper Limited इसका निर्माण करेगी। इसका इस्तेमाल PCB में उपयोग होने वाले कॉपर क्लैड लैमिनेट और लिथियम-आयन बैटरी सेल में होता है।
एनोड सामग्री (Anode Material): TACC Limited को लिथियम-आयन बैटरी के लिए एनोड सामग्री बनाने की मंजूरी मिली है।
कैथोड एक्टिव मटेरियल (Cathode Active Material): Vidyuta Materials Private Limited इस महत्वपूर्ण बैटरी सामग्री का उत्पादन करेगी।
पॉलीप्रोपाइलीन फिल्म (Polypropylene Film): Enerfolie LLP कैपेसिटर में इस्तेमाल होने वाली विशेष इंसुलेटिंग फिल्म बनाएगी।
कैमरा रिम (Camera Rims): Surface Modification Technologies Pvt. Ltd. इसका निर्माण करेगी।
इन मंजूरियों में कॉपर फॉयल और कैथोड एक्टिव मटेरियल के लिए ECMS के तहत पहली बार परियोजनाओं को स्वीकृति दी गई है। इससे भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स और बैटरी निर्माण के लिए जरूरी शुरुआती स्तर की सामग्रियों का घरेलू उत्पादन बढ़ाने में मदद मिलेगी।
नई मंजूरियों में आधुनिक मशीनों, उपकरणों और फैक्ट्री ऑटोमेशन से जुड़ी तकनीकों को भी शामिल किया गया है।
इन कंपनियों को मिली मंजूरी:
TDConnex (Chennai) Private Limited: सटीक सांचे और उपकरण (Precision Moulds and Tooling) बनाएगी।
Rockwell Automation India Private Limited: पूंजीगत उपकरणों के लिए पावर और कंट्रोल सिस्टम तैयार करेगी।
Wipro Pari Robotics Private Limited: फैक्ट्री ऑटोमेशन और सिस्टम इंटीग्रेशन के लिए आधुनिक उपकरणों का निर्माण करेगी।
इन परियोजनाओं से भारत में आधुनिक औद्योगिक मशीनों और निर्माण उपकरणों की उपलब्धता बढ़ने की उम्मीद है। इससे विदेशों से आयात पर निर्भरता कम करने में भी मदद मिल सकती है।
ECMS के तहत अब तक मंजूर किए गए 118 आवेदनों से बड़े स्तर पर निवेश, उत्पादन और रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है।
सरकार के अनुसार, इन सभी परियोजनाओं से जुड़े प्रमुख अनुमान इस प्रकार हैं:
कुल प्रस्तावित निवेश: 77,051 करोड़ रुपये
अनुमानित उत्पादन: 5,73,146 करोड़ रुपये
प्रत्यक्ष रोजगार: 81,755 लोगों के लिए अवसर
सरकार को उम्मीद है कि इन परियोजनाओं से घरेलू आपूर्ति श्रृंखला मजबूत होगी, देश में स्थानीय स्तर पर उत्पादन बढ़ेगा और आयात पर निर्भरता कम होगी।
इसके अलावा, इन निवेशों से छोटे उद्योगों, तकनीकी कंपनियों, कच्चे माल के आपूर्तिकर्ताओं और अन्य विनिर्माण व्यवसायों के लिए नए अवसर पैदा हो सकते हैं।
India Semiconductor Mission ने पिछले कुछ वर्षों में भारत के सेमीकंडक्टर उद्योग के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
सेमीकॉन इंडिया कार्यक्रम के पहले चरण के तहत सरकार ने छह राज्यों में 12 परियोजनाओं को मंजूरी दी थी। इन परियोजनाओं में कुल 1.64 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश का प्रस्ताव था। अक्टूबर 2026 तक इनमें से पांच परियोजनाओं में व्यावसायिक उत्पादन शुरू हो चुका था।
सरकार ने सेमीकंडक्टर डिजाइन के क्षेत्र में भी नई कंपनियों और स्टार्टअप को प्रोत्साहित किया है।
सरकार की विभिन्न पहलों के तहत अब तक निम्नलिखित प्रगति हुई है:
105 स्टार्टअप को इलेक्ट्रॉनिक डिजाइन ऑटोमेशन (EDA) टूल्स का उपयोग करने की सुविधा दी गई है।
24 स्टार्टअप को वित्तीय सहायता मिली है।
15 स्टार्टअप ने वेंचर कैपिटल के माध्यम से निवेश प्राप्त किया है।
Chips to Startup (C2S) Programme के तहत 332 संस्थानों को EDA टूल्स उपलब्ध कराए गए हैं।
लगभग 70,000 विद्यार्थियों को इस कार्यक्रम के तहत प्रशिक्षण दिया गया है।
इन प्रयासों का उद्देश्य देश में कुशल प्रतिभाओं को तैयार करना, तकनीकी नवाचार को बढ़ावा देना और भविष्य में सेमीकंडक्टर उद्योग की जरूरतों के अनुसार युवाओं को प्रशिक्षित करना है।
मीडिया से बातचीत के दौरान अश्विनी वैष्णव ने कहा कि पिछले एक दशक में भारत में बड़े बदलाव हुए हैं, लेकिन सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण उद्योग के विकास की यात्रा अभी शुरुआती चरण में है।
उन्होंने आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को पूरा करने के लिए सरकार और निजी कंपनियों के बीच बेहतर तालमेल की आवश्यकता पर जोर दिया। उनके अनुसार, दोनों क्षेत्रों के संयुक्त प्रयासों से देश में मजबूत और आधुनिक निर्माण व्यवस्था विकसित की जा सकती है।
सरकार कंप्यूटर और उनसे जुड़े पुर्जों का घरेलू निर्माण बढ़ाने पर भी ध्यान दे रही है। इसका उद्देश्य आयात पर निर्भरता कम करना और भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादों की पूरी आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत बनाना है।
कुल मिलाकर, Semicon 2.0 पोर्टल की शुरुआत और ECMS के तहत 12 नई परियोजनाओं को मिली मंजूरी भारत के सेमीकंडक्टर उद्योग के लिए महत्वपूर्ण कदम हैं। मशीनों, कच्चे माल, आधुनिक तकनीक, अनुसंधान और कौशल विकास में निवेश बढ़ाकर भारत वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स बाजार में अपनी भागीदारी मजबूत करना चाहता है।