संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार चाहता है भारत, वीटो पर कही बड़ी बात

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27 Oct 2026
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News Synopsis

भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में व्यापक सुधार करने की अपनी मांग एक बार फिर दोहराई है। भारत ने कहा है कि सुरक्षा परिषद के पांच स्थायी सदस्यों को मिले वीटो अधिकार का इस्तेमाल जिम्मेदारी और संयम के साथ किया जाना चाहिए। इस अधिकार का उपयोग किसी देश के सीमित राजनीतिक हितों को पूरा करने के लिए नहीं होना चाहिए, बल्कि इसका उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा को बनाए रखना होना चाहिए।

न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में भारत का पक्ष रखते हुए संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि परवथनेनी हरीश ने कहा कि वीटो अधिकार के साथ बड़ी जिम्मेदारी भी जुड़ी हुई है। खासकर उन मामलों में, जिनका असर दुनिया में शांति, सुरक्षा और देशों के आपसी संबंधों पर पड़ता है, इस अधिकार का इस्तेमाल सोच-समझकर किया जाना चाहिए।

भारत लंबे समय से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद United Nations Security Council (UNSC) की मौजूदा व्यवस्था में बदलाव की मांग करता रहा है। भारत का मानना है कि आज की वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए सुरक्षा परिषद को अधिक प्रतिनिधित्व वाला, निष्पक्ष और प्रभावी बनाया जाना जरूरी है। मौजूदा व्यवस्था में वीटो का अधिकार केवल पांच स्थायी सदस्यों- चीन, फ्रांस, रूस, ब्रिटेन और अमेरिका- के पास है।

भारत का कहना है कि इस विशेष अधिकार का जिम्मेदारी से इस्तेमाल होना चाहिए, ताकि सुरक्षा परिषद की विश्वसनीयता बनी रहे और अंतरराष्ट्रीय समस्याओं पर प्रभावी फैसले लिए जा सकें।

वीटो अधिकार के इस्तेमाल पर भारत ने जताई चिंता। (India Raises Concerns Over the Use of Veto Power)

हरीश ने संयुक्त राष्ट्र के इतिहास में वीटो अधिकार के इस्तेमाल का उल्लेख करते हुए कहा कि अब तक करीब 200 प्रस्तावों पर इस अधिकार का 331 बार इस्तेमाल किया जा चुका है। उनके अनुसार, कुछ स्थायी सदस्यों द्वारा वीटो का बार-बार इस्तेमाल किए जाने से सुरक्षा परिषद की निष्पक्षता और विश्वसनीयता को लेकर सवाल उठे हैं।

वीटो अधिकार के तहत सुरक्षा परिषद के किसी स्थायी सदस्य को किसी प्रस्ताव को पारित होने से रोकने की शक्ति मिलती है। इसका मतलब है कि किसी प्रस्ताव को व्यापक समर्थन मिलने के बावजूद, स्थायी सदस्यों में से कोई एक सदस्य वीटो का इस्तेमाल करके उसे रोक सकता है। इस व्यवस्था का उद्देश्य बड़े देशों के बीच सहमति बनाए रखना था, लेकिन कई बार इसके इस्तेमाल से महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर फैसला लेना कठिन हो जाता है।

भारत का मानना है कि जब इस अधिकार का इस्तेमाल सीमित राजनीतिक उद्देश्यों के लिए किया जाता है, तो इससे सुरक्षा परिषद की कार्यक्षमता प्रभावित हो सकती है। ऐसे में जरूरी है कि वीटो का इस्तेमाल अंतरराष्ट्रीय समुदाय के व्यापक हितों और वैश्विक शांति को ध्यान में रखकर किया जाए।

संयुक्त राष्ट्र महासभा के प्रस्ताव के बावजूद वीटो का इस्तेमाल जारी। (Veto Use Continues Despite a UN General Assembly Resolution)

भारत ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के वर्ष 2022 में अपनाए गए प्रस्ताव 76/262 का भी जिक्र किया। इस प्रस्ताव के तहत, जब सुरक्षा परिषद का कोई स्थायी सदस्य वीटो का इस्तेमाल करता है, तो संयुक्त राष्ट्र महासभा में इस फैसले पर चर्चा कराई जा सकती है। इसका उद्देश्य वीटो के इस्तेमाल को लेकर जवाबदेही बढ़ाना और सदस्य देशों को अपनी चिंताएं सामने रखने का अवसर देना है।

हालांकि, हरीश ने कहा कि इस व्यवस्था के बावजूद वीटो का इस्तेमाल जारी है। इससे पता चलता है कि केवल चर्चा की व्यवस्था शुरू करने से वीटो के इस्तेमाल के तरीके में अपेक्षित बदलाव नहीं आया है।

भारत के अनुसार, वीटो के इस्तेमाल पर पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाना जरूरी है, लेकिन इसके साथ सुरक्षा परिषद की पूरी संरचना में सुधार भी होना चाहिए। केवल वीटो के इस्तेमाल पर कुछ सीमाएं लगाने से परिषद के कामकाज से जुड़ी सभी समस्याओं का समाधान नहीं होगा।

भारत ने सुरक्षा परिषद में सभी प्रमुख सुधारों को एक साथ आगे बढ़ाने की मांग की। (India Seeks Simultaneous Progress on All Major Reform Areas)

हरीश ने स्पष्ट किया कि वीटो अधिकार में सुधार को सुरक्षा परिषद में सुधार के दूसरे महत्वपूर्ण मुद्दों से अलग करके नहीं देखा जाना चाहिए। भारत चाहता है कि परिषद की सदस्यता, क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व, सदस्यों की संख्या और काम करने के तरीकों में बदलाव के साथ वीटो से जुड़े सवालों पर भी विचार किया जाए।

भारत ने सुधार प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए स्पष्ट समय-सीमा और लक्ष्य तय करते हुए लिखित प्रस्तावों के आधार पर बातचीत जल्द शुरू करने की मांग की। इस प्रक्रिया में सदस्य देशों को ऐसे ठोस सुझावों पर चर्चा करनी चाहिए, जिनके आधार पर सुधारों की दिशा और उनके क्रियान्वयन की योजना तय हो सके।

भारत का कहना है कि केवल वीटो के इस्तेमाल को सीमित करने से स्थायी सदस्यों के बीच फैसले लेने की मौजूदा व्यवस्था में बुनियादी बदलाव नहीं आएगा। इसके लिए सुरक्षा परिषद की संरचना और निर्णय लेने की प्रक्रिया में व्यापक सुधार जरूरी हैं।

क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व और सदस्यता में बदलाव क्यों जरूरी है। (Why Changes in Membership and Regional Representation Matter)

भारत लंबे समय से इस बात पर जोर देता रहा है कि सुरक्षा परिषद में आज की दुनिया की वास्तविकताओं को उचित स्थान मिलना चाहिए। मौजूदा वैश्विक व्यवस्था में कई देश और क्षेत्र महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, लेकिन उन्हें परिषद की संरचना में पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं मिला है।

भारत के अनुसार, सुरक्षा परिषद को अधिक समावेशी बनाने के लिए सदस्यता की श्रेणियों और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व पर नए सिरे से विचार करना चाहिए। इससे अलग-अलग क्षेत्रों के देशों को वैश्विक शांति और सुरक्षा से जुड़े फैसलों में अधिक प्रभावी भूमिका मिल सकती है।

अनौपचारिक वीटो से भी प्रभावित होते हैं सुरक्षा परिषद के फैसले। (Informal Veto Mechanisms Also Affect Security Council Decisions)

भारत ने सुरक्षा परिषद की कार्यप्रणाली में मौजूद उन व्यवस्थाओं पर भी चिंता जताई, जिनके कारण किसी सदस्य को प्रस्ताव रोकने की शक्ति मिल सकती है। हरीश ने इसे प्रभावी या वास्तविक वीटो यानी डी फैक्टो वीटो बताया।

उन्होंने कहा कि परिषद में अध्यक्षीय वक्तव्यों, प्रेस वक्तव्यों और प्रतिबंध समितियों से जुड़े कुछ फैसलों के लिए सहमति की आवश्यकता होती है। ऐसी स्थिति में कोई एक सदस्य किसी प्रस्ताव को रोक सकता है, भले ही वह अपने विरोध का स्पष्ट कारण न बताए।

भारत का मानना है कि सुधारों पर चर्चा करते समय इन अनौपचारिक बाधाओं को भी ध्यान में रखना चाहिए। सुरक्षा परिषद की निर्णय प्रक्रिया ऐसी होनी चाहिए, जिसमें जरूरी मुद्दों पर चर्चा और कार्रवाई केवल किसी एक सदस्य की असहमति के कारण अनावश्यक रूप से बाधित न हो।

विस्तारित सुरक्षा परिषद में सभी स्थायी सदस्यों को समान अधिकार देने की मांग। (India Seeks Equal Rights for All Permanent Members in an Expanded Council)

भारत ने सुरक्षा परिषद में सुधार को लेकर साझा अफ्रीकी रुख का समर्थन दोहराया। हरीश ने कहा कि यदि सुधार के बाद सुरक्षा परिषद का विस्तार किया जाता है, तो सभी स्थायी सदस्यों को समान अधिकार और जिम्मेदारियां मिलनी चाहिए। जब तक वीटो अधिकार व्यवस्था का हिस्सा बना रहता है, तब तक नए स्थायी सदस्यों को भी समान वीटो अधिकार मिलना चाहिए।

भारत ने स्थायी सदस्यों की अलग-अलग श्रेणियां बनाने का विरोध किया। ऐसी व्यवस्था में कुछ स्थायी सदस्यों के पास वीटो अधिकार हो सकता है, जबकि अन्य को इससे वंचित रखा जा सकता है। भारत के अनुसार, इससे मौजूदा असमानता बनी रह सकती है और सुधारों का उद्देश्य पूरा नहीं होगा।

भारत चाहता है कि सुरक्षा परिषद की नई व्यवस्था में देशों और क्षेत्रों को अधिक न्यायसंगत प्रतिनिधित्व मिले। इससे उन देशों की चिंताओं को भी बेहतर तरीके से सामने लाया जा सकेगा, जिन्हें मौजूदा व्यवस्था में पर्याप्त स्थान नहीं मिला है।

वैश्विक चुनौतियों के बीच सुरक्षा परिषद में सुधार की जरूरत। (Need for Security Council Reform Amid Global Challenges)

भारत की यह मांग ऐसे समय में सामने आई है, जब संयुक्त राष्ट्र में सुरक्षा परिषद की संरचना और कामकाज में बदलाव को लेकर लगातार चर्चा हो रही है। दुनिया की राजनीतिक, आर्थिक और सुरक्षा संबंधी परिस्थितियां बदल चुकी हैं। ऐसे में परिषद की मौजूदा व्यवस्था को अधिक प्रतिनिधित्व वाला और प्रभावी बनाने की जरूरत पर जोर दिया जा रहा है।

भारत का मुख्य संदेश है कि सुरक्षा परिषद में सुधार केवल वीटो अधिकार तक सीमित नहीं होना चाहिए। सदस्यता, क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व, निर्णय लेने की प्रक्रिया और जवाबदेही जैसे सभी मुद्दों पर एक साथ काम करना जरूरी है।

भारत के अनुसार, ऐसी सुरक्षा परिषद ही वैश्विक शांति और सुरक्षा से जुड़े मामलों में अधिक भरोसेमंद भूमिका निभा सकती है, जो अलग-अलग देशों के हितों को उचित महत्व दे और बदलती दुनिया की जरूरतों के अनुरूप काम करे।

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