Renewable Energy में भारत की ऐतिहासिक उपलब्धि, Non-Fossil Capacity ने पार किया बड़ा आंकड़ा

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12 May 2026
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News Synopsis

भारत स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में एक वैश्विक नेता के रूप में उभरा है, और स्थापित नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता के मामले में दुनिया में तीसरा स्थान हासिल कर लिया है। यह उपलब्धि देश की स्थिरता, ऊर्जा सुरक्षा और जीवाश्म ईंधन आयात पर निर्भरता कम करने की दिशा में तेज़ी से बढ़ती प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

नवीकरणीय ऊर्जा विस्तार में मजबूत गति

पिछले कुछ वर्षों में भारत के नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है, जिसे नीतिगत समर्थन, बढ़ते निवेश और तकनीकी प्रगति ने गति दी है। मॉर्गन स्टेनली की हालिया रिपोर्ट के अनुसार नवीकरणीय ऊर्जा की ओर भारत का संक्रमण न केवल उसके बिजली परिदृश्य को बदल रहा है, बल्कि उसकी दीर्घकालिक आर्थिक मजबूती को भी सुदृढ़ कर रहा है।

रिपोर्ट में बताया गया है, कि विशेष रूप से सौर और पवन ऊर्जा क्षमता के विस्तार पर भारत का ध्यान उसे कई विकसित देशों से आगे ले गया है। यह उपलब्धि जलवायु लक्ष्यों को प्राप्त करने और सतत विकास सुनिश्चित करने की देश की प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है।

सौर विनिर्माण क्षमता में बड़ा उछाल

नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार घरेलू सौर विनिर्माण क्षमता में महत्वपूर्ण वृद्धि दर्ज की गई है। भारत में सौर मॉड्यूल क्षमता एक वर्ष के भीतर लगभग दोगुनी हो गई है, जो मार्च 2024 में 38 गीगावाट से बढ़कर मार्च 2025 तक 74 गीगावाट पहुंच गई।

यह तेज़ विस्तार भारत के मजबूत घरेलू सौर विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने और विदेशी आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भरता कम करने के इरादे को दर्शाता है।

इसके अलावा सौर सेल उत्पादन क्षमता में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जो इसी अवधि में 9 गीगावाट से बढ़कर 25 गीगावाट हो गई। यह वृद्धि विनिर्माण अवसंरचना में जारी निवेश और उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) जैसी सरकारी पहलों को दर्शाती है।

आयात पर निरंतर निर्भरता बनी चुनौती

घरेलू विनिर्माण में प्रभावशाली प्रगति के बावजूद, भारत अभी भी महत्वपूर्ण अपस्ट्रीम घटकों के लिए आयात पर काफी निर्भर है। इनमें सौर वेफर्स, पॉलीसिलिकॉन और कुछ उच्च दक्षता वाले सेल शामिल हैं, जो सौर पैनल उत्पादन के लिए आवश्यक हैं।

मॉर्गन स्टेनली की रिपोर्ट के अनुसार वित्तीय वर्ष 2025 के दौरान भारत ने लगभग 35 मिलियन सौर मॉड्यूल आयात किए, जिनकी कुल कीमत लगभग 1.6 अरब डॉलर थी। इनमें से लगभग 60% से 80% मॉड्यूल चीन से आयात किए गए।

यह निर्भरता भारत को वैश्विक बाजार में आपूर्ति श्रृंखला से जुड़े जोखिमों और मूल्य उतार-चढ़ाव के प्रति संवेदनशील बनाती है। यह सौर विनिर्माण मूल्य श्रृंखला के अपस्ट्रीम क्षेत्रों में गहन स्थानीयकरण की आवश्यकता को भी रेखांकित करती है, जहां वर्तमान में भारत की क्षमता सीमित है।

गैर-जीवाश्म ईंधन क्षमता ने पार किया महत्वपूर्ण पड़ाव

भारत का ऊर्जा संक्रमण एक महत्वपूर्ण कदम पार कर चुका है, जहां गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित क्षमता अब देश की कुल स्थापित बिजली क्षमता का 50% से अधिक हिस्सा बन चुकी है। कुल गैर-जीवाश्म क्षमता लगभग 262.7 गीगावाट तक पहुंच गई है।

यह उपलब्धि अंतरराष्ट्रीय जलवायु समझौतों के तहत भारत की प्रतिबद्धताओं के अनुरूप है, और ऊर्जा मिश्रण में विविधता लाने के लगातार प्रयासों को दर्शाती है। इससे भारत वैश्विक जलवायु परिवर्तन के खिलाफ लड़ाई में एक प्रमुख खिलाड़ी के रूप में उभर रहा है।

सौर और पवन ऊर्जा नवीकरणीय ऊर्जा पोर्टफोलियो में प्रमुख भूमिका निभा रहे हैं, और हालिया क्षमता वृद्धि में इनका सबसे बड़ा योगदान रहा है। बड़े पैमाने के सौर पार्क, रूफटॉप इंस्टॉलेशन और पवन ऊर्जा कॉरिडोर ने कुल उत्पादन क्षमता को काफी बढ़ाया है।

ऊर्जा परिवर्तन में सौर और पवन ऊर्जा की अग्रणी भूमिका

नवीकरणीय स्रोतों में सौर ऊर्जा भारत का सबसे तेज़ी से बढ़ने वाला क्षेत्र बनकर उभरा है। देश की भौगोलिक स्थिति और घटती तकनीकी लागतों ने सौर ऊर्जा को पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों की तुलना में अधिक प्रतिस्पर्धी बना दिया है।

पवन ऊर्जा भी विशेष रूप से तमिलनाडु, गुजरात और महाराष्ट्र जैसे अनुकूल पवन परिस्थितियों वाले राज्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। सौर और पवन ऊर्जा मिलकर भारत की नवीकरणीय ऊर्जा रणनीति की रीढ़ बन चुके हैं।

सरकार का हाइब्रिड परियोजनाओं, ऊर्जा भंडारण समाधान और ग्रिड आधुनिकीकरण पर निरंतर ध्यान भविष्य में नवीकरणीय ऊर्जा की दक्षता और विश्वसनीयता को और बेहतर बनाने की उम्मीद पैदा करता है।

दीर्घकालिक सफलता के लिए स्थानीयकरण महत्वपूर्ण

हालांकि नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता में भारत की प्रगति सराहनीय है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है, कि विकास का अगला चरण बड़े पैमाने पर स्थानीयकरण प्रयासों पर निर्भर करेगा। सौर वेफर्स, पॉलीसिलिकॉन और उन्नत बैटरी भंडारण तकनीकों में घरेलू क्षमताओं का निर्माण अत्यंत महत्वपूर्ण होगा।

आयात पर निर्भरता कम करने से न केवल आपूर्ति श्रृंखला की मजबूती बढ़ेगी, बल्कि रोजगार सृजन और घरेलू विनिर्माण क्षेत्र को भी बढ़ावा मिलेगा। इससे भारत वैश्विक स्वच्छ ऊर्जा बाजार में अधिक प्रभावी ढंग से प्रतिस्पर्धा कर सकेगा।

मॉर्गन स्टेनली की रिपोर्ट इस बात पर जोर देती है, कि नीतिगत स्थिरता, वित्तीय प्रोत्साहन और अवसंरचना विकास इन लक्ष्यों को हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता को मजबूती

भारत का नवीकरणीय ऊर्जा की ओर संक्रमण केवल पर्यावरणीय आवश्यकता नहीं है, बल्कि ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने की एक रणनीतिक पहल भी है। आयातित जीवाश्म ईंधन और महत्वपूर्ण घटकों पर निर्भरता कम करके देश वैश्विक मूल्य झटकों और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं से खुद को सुरक्षित कर सकता है।

इसके अलावा नवीकरणीय ऊर्जा अवसंरचना का विस्तार बड़े निवेश आकर्षित करने, नवाचार को बढ़ावा देने और नए आर्थिक अवसर पैदा करने की उम्मीद जगाता है।

भारत के स्वच्छ ऊर्जा भविष्य की राह

आगे देखते हुए, भारत वैश्विक ऊर्जा परिवर्तन में केंद्रीय भूमिका निभाने के लिए तैयार है। 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म ईंधन क्षमता हासिल करने जैसे महत्वाकांक्षी लक्ष्यों के साथ देश एक नवीकरणीय ऊर्जा महाशक्ति बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

हालांकि इन लक्ष्यों को हासिल करने के लिए नीतियों के प्रभावी क्रियान्वयन, तकनीकी नवाचार और अंतरराष्ट्रीय सहयोग में निरंतर प्रयासों की आवश्यकता होगी। विशेष रूप से विनिर्माण और आपूर्ति श्रृंखला से जुड़ी मौजूदा चुनौतियों का समाधान विकास की गति बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण होगा।

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