भारत ने वित्त वर्ष 2025-26 में एक बड़ा आर्थिक मील का पत्थर हासिल किया है, जहां कुल निर्यात 860 अरब डॉलर से अधिक हो गया है। यह जानकारी केंद्रीय मंत्री Piyush Goyal ने साझा की। यह उपलब्धि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत की मजबूत व्यापार क्षमता और बढ़ती वैश्विक उपस्थिति को दर्शाती है।
यह वृद्धि इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स और फार्मास्यूटिकल्स जैसे प्रमुख क्षेत्रों की मजबूती के साथ-साथ नीतिगत सुधारों का परिणाम है। भारत अब खुद को एक विश्वसनीय वैश्विक सप्लाई चेन पार्टनर के रूप में स्थापित कर रहा है।
भारत का कुल निर्यात (माल और सेवाएं मिलाकर) लगभग ₹81.28 लाख करोड़ यानी 860 अरब डॉलर से अधिक रहा। यह देश के इतिहास में सबसे ऊंचे स्तरों में से एक है।
यह वृद्धि दर्शाती है कि भारत अब वैश्विक वैल्यू चेन में तेजी से शामिल हो रहा है। पहले जहां निर्यात कुछ सीमित क्षेत्रों तक था, अब यह कई सेक्टरों में फैला हुआ है।
इंजीनियरिंग उत्पाद
इलेक्ट्रॉनिक्स
फार्मास्यूटिकल्स
केमिकल्स
जेम्स और ज्वेलरी
कृषि और खाद्य उत्पाद
यह विविधता भारत को वैश्विक मांग में उतार-चढ़ाव से बचाने में मदद करती है।
2015–2018: मध्यम वृद्धि
2019–2020: वैश्विक तनाव के कारण मंदी
2020–2021: कोविड-19 का प्रभाव
2022–2024: मजबूत रिकवरी
2025–2026: रिकॉर्ड स्तर, 860 अरब डॉलर पार
सरकार की नीतियों ने इस वृद्धि में अहम भूमिका निभाई है।
Ministry of Commerce and Industry के अनुसार भारत ने कई देशों के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) किए हैं, जिससे निर्यातकों को बेहतर बाजार पहुंच मिली है।
Make in India
PLI (Production Linked Incentive)
लॉजिस्टिक्स सुधार
World Trade Organization के विशेषज्ञों का मानना है, कि विविधता और सप्लाई चेन इंटीग्रेशन से निर्यात वृद्धि टिकाऊ बनती है।
भारत इसी रणनीति पर काम कर रहा है, जिससे इसकी स्थिति और मजबूत हो रही है।
उद्योग जगत ने इस उपलब्धि का स्वागत किया है।
इंजीनियरिंग और इलेक्ट्रॉनिक्स में तेज मांग
फार्मा सेक्टर की वैश्विक भूमिका मजबूत
कृषि निर्यात में वृद्धि
World Bank की रिपोर्ट के अनुसार उभरती अर्थव्यवस्थाएं वैश्विक व्यापार में बड़ी भूमिका निभा रही हैं।
भारत अब एक वैकल्पिक मैन्युफैक्चरिंग हब बन रहा है।
GDP में वृद्धि
विदेशी मुद्रा भंडार मजबूत
रोजगार के नए अवसर
टेक्सटाइल, जेम्स-ज्वेलरी और कृषि जैसे सेक्टरों को सबसे अधिक लाभ मिल रहा है।
वैश्विक स्तर पर जहां कई देश धीमी वृद्धि का सामना कर रहे हैं, वहीं भारत तेजी से उभर रहा है।
यह भारत को एक विश्वसनीय व्यापारिक साझेदार के रूप में स्थापित करता है।
सरकार ने 2030 तक 2 ट्रिलियन डॉलर निर्यात का लक्ष्य रखा है।
नए व्यापार समझौते
गुणवत्ता सुधार
इंफ्रास्ट्रक्चर विकास
टेक्नोलॉजी अपनाना
निष्कर्ष
भारत का 860 अरब डॉलर निर्यात पार करना एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। यह देश की आर्थिक मजबूती, नीतिगत सुधार और वैश्विक मांग का परिणाम है। आने वाले वर्षों में सही रणनीति और सहयोग के साथ भारत वैश्विक व्यापार में और बड़ी भूमिका निभा सकता है।