भारत और फ्रांस ने जलवायु परिवर्तन से निपटने और पर्यावरण संरक्षण के लिए आपसी सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई है। दोनों देशों के बीच जैव विविधता संरक्षण, ऊर्जा बदलाव, जलवायु वित्त और संयुक्त राष्ट्र जलवायु सम्मेलन COP31 की प्राथमिकताओं को लेकर चर्चा हुई। इसके साथ ही दोनों देशों ने अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA) और आपदा-रोधी बुनियादी ढांचे के लिए गठबंधन (CDRI) के माध्यम से अपने सहयोग को और मजबूत बनाने की प्रतिबद्धता दोहराई।
यह बातचीत मंगलवार को नई दिल्ली में केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह और फ्रांस के पारिस्थितिक बदलाव मामलों के मंत्री मैथ्यू लेफेवर के बीच हुई। फ्रांस के मंत्री नौवें अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए भारत आए हैं। यह सम्मेलन भारत रिन्यूएबल एनर्जी समिट 2026 के दौरान भारत मंडपम में आयोजित किया जा रहा है।
इसी बीच, फ्रांस को मंगलवार को अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन का दोबारा सह-अध्यक्ष चुना गया। इस घटनाक्रम को दोनों देशों के बीच स्वच्छ ऊर्जा और जलवायु संरक्षण के क्षेत्र में बढ़ते सहयोग के रूप में देखा जा रहा है।
विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह Minister of State for External Affairs Kirti Vardhan Singh ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर फ्रांस के मंत्री मैथ्यू लेफेवर के साथ हुई मुलाकात की जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि दोनों देशों के बीच कई ऐसे विषयों पर बातचीत हुई, जिनमें आपसी सहयोग बढ़ाने की काफी संभावनाएं हैं।
बैठक में मुख्य रूप से चार महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की गई।
जैव विविधता संरक्षण: प्राकृतिक संसाधनों, वन्यजीवों और विभिन्न प्रकार के जीव-जंतुओं के संरक्षण के लिए सहयोग बढ़ाना।
ऊर्जा बदलाव: जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करके सौर और अन्य स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों को बढ़ावा देना।
जलवायु वित्त: जलवायु परिवर्तन से निपटने और पर्यावरण अनुकूल परियोजनाओं के लिए आवश्यक आर्थिक संसाधन जुटाना।
COP31 की प्राथमिकताएं: आगामी अंतरराष्ट्रीय जलवायु सम्मेलन में दोनों देशों के लिए महत्वपूर्ण मुद्दों और सहयोग के अवसरों पर विचार करना।
कीर्ति वर्धन सिंह ने कहा कि भारत और फ्रांस अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन तथा आपदा-रोधी बुनियादी ढांचे के लिए गठबंधन के माध्यम से अपने सहयोग को और मजबूत बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
भारत और फ्रांस के बीच बढ़ते स्वच्छ ऊर्जा सहयोग के बीच फ्रांस को अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA) का दोबारा सह-अध्यक्ष चुना गया है। यह गठबंधन दुनिया भर में सौर ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देने और स्वच्छ ऊर्जा की उपलब्धता बेहतर बनाने के उद्देश्य से काम करता है।
फ्रांस के मंत्री मैथ्यू लेफेवर ने फ्रांस के दोबारा सह-अध्यक्ष चुने जाने पर खुशी जताई। उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा कि फ्रांस 2018 से अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन को लगातार समर्थन दे रहा है।
उन्होंने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के नेतृत्व और उनके प्रयासों को भी इस दिशा में महत्वपूर्ण बताया। लेफेवर के अनुसार, फ्रांस सौर ऊर्जा के विकास में वैश्विक स्तर पर अपनी भूमिका जारी रखेगा।
यह दोबारा चयन भारत और फ्रांस के बीच स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में लंबे समय से चले आ रहे सहयोग को आगे बढ़ाने का अवसर प्रदान करता है।
नई दिल्ली में आयोजित भारत रिन्यूएबल एनर्जी समिट 2026 और अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन की नौवीं सभा में 120 से अधिक देशों की भागीदारी रही। इस कार्यक्रम का उद्देश्य सौर ऊर्जा के उपयोग को बढ़ाना और दुनिया भर में स्वच्छ ऊर्जा को अधिक सुलभ बनाना है।
भारत में फ्रांस के दूतावास ने सोशल मीडिया पर जानकारी देते हुए बताया कि इस सभा की सह-अध्यक्षता फ्रांस के मंत्री मैथ्यू लेफेवर और केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी कर रहे हैं।
दूतावास ने अपने संदेश में कहा कि 120 से अधिक देश एक साझा उद्देश्य के साथ इस कार्यक्रम में शामिल हुए हैं। इसका उद्देश्य सौर ऊर्जा को किफायती बनाना, इससे जुड़े कौशल विकसित करना और इस क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा देना है।
इस तरह के अंतरराष्ट्रीय आयोजन देशों को अपने अनुभव साझा करने और स्वच्छ ऊर्जा से जुड़ी नई तकनीकों को अपनाने के अवसर देते हैं।
सौर ऊर्जा का विस्तार केवल बड़े उद्योगों और बिजली परियोजनाओं तक सीमित नहीं है। इसे घरों, छोटे कारोबारों, कृषि और दूरदराज के क्षेत्रों तक पहुंचाना भी महत्वपूर्ण है।
इसके लिए किफायती तकनीक, प्रशिक्षित कर्मचारी, निवेश और मजबूत बुनियादी ढांचे की आवश्यकता होती है। अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन के माध्यम से सदस्य देश इन चुनौतियों पर मिलकर काम कर सकते हैं।
मैथ्यू लेफेवर ने सोमवार को भारत रिन्यूएबल एनर्जी समिट में हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी मुलाकात की।
लेफेवर ने इस मुलाकात को अपने लिए सम्मान की बात बताया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों द्वारा स्थापित रणनीतिक साझेदारी के तहत फ्रांस ऊर्जा बदलाव की प्रक्रिया को तेज करने के लिए अपनी प्रतिबद्धता जारी रखेगा।
भारत और फ्रांस के संबंधों में ऊर्जा और पर्यावरण संरक्षण का विशेष महत्व है। दोनों देश स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने, सौर ऊर्जा के विकास और जलवायु परिवर्तन से जुड़ी चुनौतियों का समाधान तलाशने में सहयोग कर रहे हैं।
भारत में फ्रांस के दूतावास ने भी कहा कि अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन के सह-अध्यक्ष के रूप में फ्रांस भारत और गठबंधन के अन्य सदस्य देशों के साथ मिलकर वैश्विक स्तर पर स्वच्छ ऊर्जा बदलाव को बढ़ावा दे रहा है।
COP31 की प्राथमिकताओं पर भारत और फ्रांस के बीच हुई बातचीत अंतरराष्ट्रीय जलवायु सहयोग के लिहाज से महत्वपूर्ण है। जलवायु परिवर्तन का प्रभाव अब कृषि, जल संसाधनों, जैव विविधता, ऊर्जा और आम लोगों के जीवन पर भी दिखाई दे रहा है।
जलवायु वित्त का अर्थ उन आर्थिक संसाधनों से है, जिनका उपयोग जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने और उसके अनुसार जरूरी बदलाव करने के लिए किया जाता है।
विकासशील देशों के लिए जलवायु वित्त विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि उन्हें स्वच्छ ऊर्जा परियोजनाओं, बेहतर तकनीक, आपदा प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण के लिए बड़े निवेश की जरूरत होती है।
भारत और फ्रांस के बीच इस विषय पर चर्चा से जलवायु संबंधी परियोजनाओं में अंतरराष्ट्रीय सहयोग और निवेश की संभावनाओं को बढ़ावा मिल सकता है।
भारत और फ्रांस के बीच हुई यह बातचीत जलवायु परिवर्तन से निपटने और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने के साझा प्रयासों को दर्शाती है। जैव विविधता संरक्षण, ऊर्जा बदलाव, जलवायु वित्त और COP31 की प्राथमिकताओं पर चर्चा के साथ दोनों देशों ने अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन और आपदा-रोधी बुनियादी ढांचे के लिए गठबंधन के माध्यम से सहयोग मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई है।
अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन में फ्रांस का दोबारा सह-अध्यक्ष चुना जाना भी इस साझेदारी को आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण है। आने वाले समय में भारत और फ्रांस का सहयोग सौर ऊर्जा निवेश, कौशल विकास और वैश्विक स्वच्छ ऊर्जा अभियान को नई गति देने में मदद कर सकता है।