भारत में ब्रॉडबैंड ग्राहकों की संख्या 110.76 करोड़ पहुंची, TRAI ने जारी किए सितंबर 2026 के आंकड़े

39
31 Oct 2026
7 min read

News Synopsis

भारत में डिजिटल कनेक्टिविटी का दायरा लगातार बढ़ रहा है। इंटरनेट और दूरसंचार सेवाओं का विस्तार अब केवल शहरों तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के अलग-अलग क्षेत्रों में लोग शिक्षा, व्यापार, मनोरंजन, संचार और सरकारी सेवाओं के लिए डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल कर रहे हैं। मार्च 2026 तक भारत में इंटरनेट ग्राहकों की संख्या लगभग 110 करोड़ पहुंच गई थी। यह बढ़ोतरी देश में डिजिटल सेवाओं की बढ़ती स्वीकार्यता को दर्शाती है।

भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) Telecom Regulatory Authority of India (TRAI) के सितंबर 2026 के आंकड़ों के अनुसार, देश में ब्रॉडबैंड ग्राहकों की संख्या बढ़कर 1,107.68 मिलियन यानी लगभग 110.76 करोड़ हो गई है। वहीं, औसत मासिक वायरलेस डेटा खपत प्रति ग्राहक 25.51 गीगाबाइट (GB) तक पहुंच गई। वित्त वर्ष 2025-26 में कुल वायरलेस डेटा उपयोग 2,85,376 पेटाबाइट दर्ज किया गया।

इंटरनेट के बढ़ते इस्तेमाल से डिजिटल भुगतान, ऑनलाइन सरकारी सेवाओं, क्लाउड कंप्यूटिंग और अन्य इंटरनेट आधारित सुविधाओं की मांग भी बढ़ रही है। ऐसे में मजबूत दूरसंचार नेटवर्क और डिजिटल बुनियादी ढांचे की भूमिका पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।

डेटा की बढ़ती खपत से डिजिटल बुनियादी ढांचे की मांग में इजाफा (Rising Data Consumption Increases Demand for Digital Infrastructure)

भारत में इंटरनेट का इस्तेमाल बढ़ने के साथ ही नेटवर्क पर डेटा का दबाव भी लगातार बढ़ रहा है। लोग अब केवल संदेश भेजने या वेबसाइट देखने के लिए इंटरनेट का उपयोग नहीं करते, बल्कि ऑनलाइन भुगतान, वीडियो स्ट्रीमिंग, डिजिटल शिक्षा, सरकारी सेवाओं और व्यावसायिक गतिविधियों के लिए भी इस पर निर्भर हैं।

औसत मासिक वायरलेस डेटा खपत का प्रति ग्राहक 25.51 GB तक पहुंचना इस बदलाव को दर्शाता है। इसके अलावा, वित्त वर्ष 2025-26 में देश में कुल वायरलेस डेटा उपयोग 2,85,376 पेटाबाइट रहा। इतनी बड़ी मात्रा में डेटा का आदान-प्रदान करने के लिए तेज और भरोसेमंद नेटवर्क की आवश्यकता होती है।

क्लाउड कंप्यूटिंग की बढ़ती भूमिका (Growing Role of Cloud Computing)

डिजिटल सेवाओं के विस्तार के साथ क्लाउड कंप्यूटिंग की मांग भी बढ़ रही है। यह तकनीक इंटरनेट के माध्यम से उपयोगकर्ताओं और कंपनियों को डेटा स्टोरेज, सर्वर, सॉफ्टवेयर और कंप्यूटिंग संसाधनों तक जरूरत के अनुसार पहुंच उपलब्ध कराती है।

क्लाउड सेवाओं की मदद से कंपनियां अपने डेटा को सुरक्षित तरीके से संग्रहित कर सकती हैं, सूचनाओं का विश्लेषण कर सकती हैं और अपने डिजिटल कारोबार का विस्तार कर सकती हैं। इसके लिए उन्हें हर तरह की कंप्यूटिंग सुविधा अपने कार्यालय या परिसर में स्थापित करने की आवश्यकता नहीं होती।

बैंकिंग, ई-कॉमर्स, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और सरकारी विभागों में क्लाउड तकनीक का उपयोग बढ़ने से मजबूत इंटरनेट कनेक्टिविटी की जरूरत भी बढ़ रही है। इसलिए ब्रॉडबैंड नेटवर्क का विस्तार देश के डिजिटल विकास के लिए महत्वपूर्ण है।

भारत में ब्रॉडबैंड ग्राहकों की संख्या बढ़कर 1,107.68 मिलियन हुई (Broadband Subscriber Base Rises to 1,107.68 Million)

भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (Telecom Regulatory Authority of India-TRAI) की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार, भारत में ब्रॉडबैंड ग्राहकों की संख्या अगस्त 2026 के अंत में 1,101.21 मिलियन थी। सितंबर 2026 के अंत तक यह बढ़कर 1,107.68 मिलियन हो गई।

इस तरह एक महीने के दौरान ब्रॉडबैंड ग्राहकों की संख्या में 0.59 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। यह आंकड़ा बताता है कि देश में इंटरनेट कनेक्शन की मांग लगातार बनी हुई है।

ब्रॉडबैंड सेवाएं आज घरों, कार्यालयों, शैक्षणिक संस्थानों और सरकारी संगठनों के लिए महत्वपूर्ण बन चुकी हैं। इनके माध्यम से लोग ऑनलाइन पढ़ाई, वीडियो कॉल, डिजिटल मनोरंजन, इंटरनेट बैंकिंग और विभिन्न सरकारी सुविधाओं का इस्तेमाल कर पाते हैं।

ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी का विस्तार छोटे कारोबारों और उद्यमियों के लिए भी उपयोगी है। इंटरनेट के माध्यम से वे अपने उत्पादों और सेवाओं को अधिक ग्राहकों तक पहुंचा सकते हैं। इससे डिजिटल कारोबार और ऑनलाइन बाजार को भी बढ़ावा मिलता है।

भारत में कुल टेलीफोन ग्राहकों की संख्या 1,367.93 मिलियन पहुंची (Total Telephone Subscribers Reach 1,367.93 Million)

TRAI के सितंबर 2026 के आंकड़ों के अनुसार, भारत में कुल टेलीफोन ग्राहकों की संख्या बढ़कर 1,367.93 मिलियन यानी लगभग 136.79 करोड़ हो गई। इसमें मोबाइल और अन्य टेलीफोन कनेक्शन शामिल हैं।

देश की टेली-डेंसिटी (Tele-density) भी बढ़कर 95.52 प्रतिशत दर्ज की गई। टेली-डेंसिटी से पता चलता है कि किसी देश की आबादी की तुलना में वहां कितने टेलीफोन कनेक्शन उपलब्ध हैं। यह दूरसंचार सेवाओं की पहुंच और विस्तार को समझने का एक महत्वपूर्ण पैमाना है।

वायरलेस कनेक्शन की बाजार में बड़ी हिस्सेदारी (Wireless Connections Hold a Major Share)

भारत के दूरसंचार बाजार में वायरलेस यानी मोबाइल कनेक्शन की हिस्सेदारी सबसे अधिक बनी हुई है। सितंबर 2026 में वायरलेस ग्राहकों की संख्या 1,319.19 मिलियन तक पहुंच गई।

इनमें से 1,212.80 मिलियन मोबाइल ग्राहक पीक विजिटर लोकेशन रजिस्टर (Visitor Location Register-VLR) के आधार पर सक्रिय पाए गए। VLR के आंकड़े यह समझने में मदद करते हैं कि किसी निर्धारित अवधि में कितने मोबाइल ग्राहक नेटवर्क का सक्रिय रूप से इस्तेमाल कर रहे थे।

सक्रिय ग्राहकों की संख्या दूरसंचार कंपनियों के लिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे नेटवर्क के वास्तविक उपयोग और सेवाओं की मांग का अंदाजा लगाया जा सकता है।

5G फिक्स्ड वायरलेस एक्सेस और M2M कनेक्शन का विस्तार (5G Fixed Wireless Access and M2M Connections Expand)

भारत में नई कनेक्टिविटी तकनीकों का इस्तेमाल भी तेजी से बढ़ रहा है। TRAI के आंकड़ों के अनुसार, सितंबर 2026 में 5G फिक्स्ड वायरलेस एक्सेस (Fixed Wireless Access-FWA) ग्राहकों की संख्या बढ़कर 13.61 मिलियन हो गई।

5G FWA तकनीक वायरलेस नेटवर्क के माध्यम से घरों और कार्यालयों तक ब्रॉडबैंड इंटरनेट पहुंचाती है। यह उन क्षेत्रों में पारंपरिक तार आधारित इंटरनेट कनेक्शन का विकल्प बन सकती है, जहां फाइबर नेटवर्क बिछाना आसान या किफायती नहीं है।

M2M कनेक्शन से उपकरणों के बीच संचार को बढ़ावा (M2M Connections Enable Communication Between Devices)

मशीन-टू-मशीन (Machine-to-Machine-M2M) सेलुलर मोबाइल कनेक्शन की संख्या भी बढ़कर 144.85 मिलियन पहुंच गई।

M2M तकनीक के जरिए अलग-अलग मशीनें और उपकरण मोबाइल नेटवर्क के माध्यम से एक-दूसरे को जानकारी भेज सकते हैं। इस प्रक्रिया में हर बार किसी व्यक्ति के सीधे हस्तक्षेप की जरूरत नहीं होती।

इसका इस्तेमाल स्मार्ट मीटर, जुड़े हुए उपकरणों, औद्योगिक मशीनों, वाहन निगरानी और स्वचालित प्रणालियों में किया जा सकता है। उदाहरण के लिए, स्मार्ट मीटर बिजली की खपत से जुड़ी जानकारी अपने आप संबंधित प्रणाली तक पहुंचा सकता है। इसी तरह, कंपनियां अपने वाहनों और मशीनों की स्थिति पर दूर से नजर रख सकती हैं।

M2M कनेक्टिविटी का विस्तार भारत में इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) और स्मार्ट तकनीकों के विकास को भी बढ़ावा दे सकता है।

ब्रॉडबैंड बाजार में Jio और Airtel की मजबूत स्थिति (Jio and Airtel Lead the Broadband Subscriber Market)

सितंबर 2026 में भारत के ब्रॉडबैंड बाजार में रिलायंस जियो इन्फोकॉम लिमिटेड और भारती एयरटेल लिमिटेड प्रमुख कंपनियों के रूप में बनी रहीं।

TRAI के आंकड़ों के अनुसार, रिलायंस जियो के ब्रॉडबैंड ग्राहकों की संख्या 541.17 मिलियन रही। वहीं, भारती एयरटेल के ग्राहकों की संख्या 388.86 मिलियन दर्ज की गई।

ये आंकड़े भारत में इंटरनेट सेवाओं के विस्तार में बड़ी दूरसंचार कंपनियों की महत्वपूर्ण भूमिका को दर्शाते हैं। जियो और एयरटेल जैसे सेवा प्रदाता मोबाइल ब्रॉडबैंड और अन्य इंटरनेट सेवाओं के माध्यम से बड़ी संख्या में ग्राहकों को डिजिटल नेटवर्क से जोड़ रहे हैं।

ब्रॉडबैंड बाजार में इन कंपनियों की मजबूत मौजूदगी के साथ-साथ ग्राहकों की बढ़ती संख्या यह भी दिखाती है कि भारत में तेज और बेहतर इंटरनेट सेवाओं की मांग लगातार बढ़ रही है।

दूरसंचार क्षेत्र की वृद्धि से भारत के डिजिटल बदलाव को मजबूती (India’s Telecom Growth Strengthens Digital Transformation)

TRAI के सितंबर 2026 के आंकड़े बताते हैं कि भारत का इंटरनेट और दूरसंचार क्षेत्र लगातार विस्तार कर रहा है। ब्रॉडबैंड ग्राहकों की बढ़ती संख्या, वायरलेस डेटा की अधिक खपत और 5G FWA तथा M2M कनेक्शन का विस्तार देश में डिजिटल सेवाओं की बढ़ती जरूरत को दर्शाता है।

आने वाले समय में डिजिटल भुगतान, ऑनलाइन कारोबार, क्लाउड सेवाओं, स्मार्ट उपकरणों और सरकारी डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल और बढ़ सकता है। ऐसे में दूरसंचार कंपनियों को नेटवर्क की क्षमता, इंटरनेट की गति और सेवा की विश्वसनीयता बेहतर बनाने के लिए निवेश जारी रखना होगा।

इसके साथ ही डेटा केंद्रों, क्लाउड कंप्यूटिंग और अन्य डिजिटल बुनियादी सुविधाओं का विकास भी जरूरी होगा। मजबूत कनेक्टिविटी से उद्योगों, छोटे कारोबारों, शैक्षणिक संस्थानों और आम नागरिकों को डिजिटल सेवाओं का अधिक लाभ मिल सकता है।

कुल मिलाकर, सितंबर 2026 के TRAI आंकड़े भारत में डिजिटल कनेक्टिविटी के लगातार बढ़ते दायरे को दिखाते हैं। इंटरनेट की पहुंच और उपयोग में वृद्धि देश की डिजिटल अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

Podcast

TWN Exclusive