त्योहारी सीजन नजदीक आते ही ऑनलाइन खरीदारी करने वाले ग्राहकों को लुभाने के लिए ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म बड़ी सेल, विशेष ऑफर और आकर्षक छूट पेश करते हैं। कपड़ों, इलेक्ट्रॉनिक्स और घरेलू सामान से लेकर त्योहारों में इस्तेमाल होने वाले उत्पादों तक, कई चीजें कम कीमत पर खरीदने का मौका मिलता है। हालांकि, इस बढ़ती मांग का फायदा साइबर अपराधी भी उठा रहे हैं। वे फर्जी ऑफर और नकली वेबसाइटों के जरिए लोगों को ठगी का शिकार बना सकते हैं।
ठग नकली खरीदारी पोर्टल, सोशल मीडिया पर भ्रामक विज्ञापन, असली वेबसाइट से मिलते-जुलते वेब पते और बेहद कम कीमतों का इस्तेमाल करके ग्राहकों को आकर्षित करते हैं। ऐसे मामलों में ग्राहकों को पैसे गंवाने, निजी जानकारी चोरी होने या भुगतान करने के बावजूद सामान नहीं मिलने जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।
यह धोखाधड़ी केवल कपड़ों, इलेक्ट्रॉनिक्स और घरेलू उत्पादों तक सीमित नहीं है। होटल बुकिंग, ट्रेन और हवाई टिकट, किराये की गाड़ियां, सूखे मेवे और त्योहारों में इस्तेमाल होने वाले पटाखे भी ठगी का निशाना बन रहे हैं। इसलिए किसी भी आकर्षक ऑफर पर भरोसा करने या भुगतान करने से पहले उसकी अच्छी तरह जांच करना जरूरी है।
फिशिंग यानी धोखाधड़ी के जरिए निजी जानकारी चुराना, साइबर अपराधियों का एक आम तरीका है। इसमें ठग लोकप्रिय ऑनलाइन खरीदारी प्लेटफॉर्म जैसी दिखने वाली नकली वेबसाइट बनाते हैं और फेसबुक तथा इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया मंचों पर उनके विज्ञापन चलाते हैं।
इन विज्ञापनों में भारी छूट और कम कीमतों का लालच दिया जाता है, ताकि ग्राहक बिना ज्यादा जांच-पड़ताल किए जल्दी खरीदारी कर लें। भुगतान के बाद सामान नहीं पहुंचता और कई बार ग्राहकों की बैंकिंग जानकारी या दूसरी निजी जानकारियां भी खतरे में पड़ जाती हैं।
साइबर अलर्ट की एक जांच में फ्लिपकार्ट जैसी दिखने वाली एक संदिग्ध वेबसाइट की पहचान की गई। इसका वेब पता big-deals-4.netify.app/sale/ बताया गया। इसी तरह, कुछ विज्ञापनों में मीशो के लोगो का कथित तौर पर गलत इस्तेमाल करके बेहद सस्ते कपड़ों के पैकेज बेचे जाने का दावा किया गया। इनमें ₹149 में तीन सूट और ₹199 में तीन कुर्ता सेट देने जैसे ऑफर शामिल थे।
कुछ शिकायतकर्ताओं के अनुसार, भुगतान की रकम मीशो के बजाय ऐसे खातों में भेजी गई, जिनके नाम असंबंधित व्यक्तियों या जनरल स्टोर जैसे कारोबारों से जुड़े थे। ऐसे संकेत बताते हैं कि किसी भी ऑफर पर भुगतान करने से पहले यह सुनिश्चित करना चाहिए कि वह अधिकृत विक्रेता की ओर से दिया गया है।
साइबर ठग त्योहारों के दौरान सूखे मेवों, पटाखों और अन्य जरूरी सामान की बढ़ती मांग का भी फायदा उठाते हैं। इस दौरान कम कीमत में अधिक सामान देने वाले विज्ञापनों के जरिए ग्राहकों को जल्दबाजी में खरीदारी करने के लिए उकसाया जाता है।
एक रिपोर्ट में चार किलोग्राम सूखे मेवे केवल ₹239 में देने वाले ऑफर का उल्लेख किया गया। इतनी कम कीमत देखकर ग्राहक बिना विक्रेता की विश्वसनीयता जांचे भुगतान कर सकते हैं।
बताई गई जानकारी के अनुसार, मेटा की विज्ञापन लाइब्रेरी में एक कथित फर्जी ऑफर अभियान से जुड़े लगभग 240 विज्ञापन सूचीबद्ध थे। आरोप है कि इन विज्ञापनों के जरिए लोगों को गुमराह किया गया और उन्हें आर्थिक नुकसान हुआ।
ग्राहकों को ऐसे विज्ञापनों से विशेष रूप से सावधान रहना चाहिए, जिनमें महंगे उत्पाद असामान्य रूप से कम कीमत पर देने का दावा किया जाता है। केवल इसलिए किसी विज्ञापन पर भरोसा न करें कि वह किसी लोकप्रिय सोशल मीडिया मंच पर दिखाई दे रहा है। अनजान बैंक खातों में पैसे भेजने से पहले विक्रेता और ऑफर की प्रामाणिकता की पुष्टि जरूर करें।
ऑनलाइन ठगी केवल सोशल मीडिया तक सीमित नहीं है। कभी-कभी सर्च इंजन पर दिखाई देने वाले परिणाम भी उपयोगकर्ताओं को संदिग्ध वेबसाइटों या फर्जी ग्राहक सेवा नंबरों तक पहुंचा सकते हैं।
होटल, धर्मशाला या छुट्टियों में ठहरने की जगह खोजते समय ग्राहकों को आधिकारिक वेबसाइट या सत्यापित बुकिंग मंच से संपर्क विवरण लेना चाहिए। ठग असली होटल या अन्य प्रतिष्ठानों से मिलते-जुलते नामों वाली वेबसाइट बनाकर अग्रिम भुगतान मांग सकते हैं।
पुरी के होटल सोनार बांग्ला जैसी दिखने वाली संदिग्ध वेबसाइटों के जरिए यात्रियों को गुमराह किए जाने की खबरें सामने आई हैं। ऐसे मामलों में ग्राहक पैसे भेजने के बाद पता लगा सकते हैं कि उनके नाम पर कोई बुकिंग हुई ही नहीं थी।
ट्रेन टिकट के लिए यात्रियों को भारतीय रेलवे खानपान एवं पर्यटन निगम यानी IRCTC की आधिकारिक वेबसाइट या ऐप का इस्तेमाल करना चाहिए। हवाई टिकट, किराये की गाड़ी और होटल बुकिंग के दौरान भी अनजान लिंक से भुगतान करने से बचना जरूरी है। अग्रिम राशि भेजने से पहले प्रतिष्ठान, बुकिंग की पुष्टि और भुगतान पाने वाले व्यक्ति या खाते की स्वतंत्र रूप से जांच करें।
दी गई रिपोर्ट के अनुसार, उपभोक्ता संरक्षण (ई-कॉमर्स) संशोधन नियम, 2026 Consumer Protection (E-Commerce) Amendment Rules, 2026, 1 जनवरी 2027 से लागू होने वाले हैं। इनका उद्देश्य ऑनलाइन खरीदारी के दौरान पारदर्शिता बढ़ाना और ई-कॉमर्स कंपनियों की जवाबदेही मजबूत करना बताया गया है।
रिपोर्ट में बताए गए प्रमुख प्रावधानों में शामिल हैं:
छूट देने से पहले की कीमत और प्रचार संबंधी दावों की स्पष्ट जानकारी देना।
प्रायोजित विज्ञापनों और खोज परिणामों में उत्पादों की रैंकिंग के बारे में अधिक पारदर्शिता रखना।
विक्रेता, उत्पाद और आयातक से जुड़ी जानकारी आसानी से उपलब्ध कराना।
भ्रामक वेबसाइट डिजाइन और खरीदारी के लिए दबाव बनाने वाली तकनीकों, जिन्हें डार्क पैटर्न कहा जाता है, पर रोक लगाने के उपाय।
उपभोक्ताओं के डेटा की सुरक्षा और शिकायतों के समाधान पर अधिक ध्यान देना।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि शिकायत मिलने के 48 घंटे के भीतर उसकी प्राप्ति की पुष्टि करनी होगी और एक महीने के भीतर उसका समाधान करना होगा।
उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के मुताबिक, राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन National Consumer Helpline को वर्ष 2025 में कुल 17,71,622 शिकायतें मिलीं। इनमें से 5,11,196 शिकायतें ई-कॉमर्स से संबंधित थीं, जो कुल शिकायतों का लगभग 29 प्रतिशत है।
ये आंकड़े ऑनलाइन खरीदारी में उपभोक्ता सुरक्षा और शिकायतों के प्रभावी समाधान की जरूरत को दर्शाते हैं। हालांकि, नियमों के सटीक दायरे और लागू होने की तारीख की पुष्टि के लिए उपभोक्ताओं को संबंधित सरकारी अधिसूचनाएं देखनी चाहिए।
त्योहारों के दौरान कुछ सावधानियां अपनाकर साइबर ठगी का खतरा कम किया जा सकता है।
पासवर्ड, बैंकिंग विवरण या निजी जानकारी दर्ज करने से पहले वेबसाइट का पता ध्यान से देखें। विज्ञापनों या अनजान संदेशों में मिले लिंक के बजाय आधिकारिक वेबसाइट और सत्यापित ऐप का इस्तेमाल करें।
किसी अनजान व्यक्ति या व्यवसाय के बैंक खाते में पैसे भेजने से पहले उसकी पहचान की पुष्टि करें। भुगतान के लिए विश्वसनीय मंचों और सुरक्षित तरीकों को प्राथमिकता दें।
सामान खरीदने से पहले विक्रेता की जानकारी, सामान लौटाने की नीति और ग्राहकों की समीक्षाएं पढ़ें। किसी अनजान वेबसाइट पर दिखाई गई प्रशंसात्मक टिप्पणियों को ही उसकी विश्वसनीयता का प्रमाण न मानें।
व्हाट्सऐप या अन्य संदेश सेवाओं के जरिए मिले अनजान लिंक और APK फाइलों से ऐप इंस्टॉल न करें। ऐप केवल भरोसेमंद स्रोतों से डाउनलोड करें और उसके प्रकाशक की जानकारी जांचें।
अपने बैंक खाते, कार्ड से किए गए भुगतान और लेनदेन संबंधी सूचनाओं की नियमित जांच करें। कोई अनधिकृत लेनदेन दिखाई देने पर तुरंत बैंक से संपर्क करें। साइबर ठगी की शिकायत भारत के साइबर अपराध रिपोर्टिंग माध्यमों के जरिए भी की जा सकती है। इसके लिए राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क करें।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से ठग अब अधिक विश्वसनीय दिखने वाले विज्ञापन तैयार कर सकते हैं, मशहूर ब्रांड की पहचान की नकल कर सकते हैं और असली जैसी तस्वीरें या वीडियो बना सकते हैं। इसलिए किसी विज्ञापन का पेशेवर दिखना या उस पर किसी प्रसिद्ध कंपनी का लोगो होना उसकी प्रामाणिकता की गारंटी नहीं है।
ग्राहकों को केवल आकर्षक तस्वीरों, सीमित समय की छूट या लोकप्रिय ब्रांड के नाम पर भरोसा नहीं करना चाहिए। किसी भी ऑफर की जानकारी संबंधित कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट या ऐप पर जाकर स्वतंत्र रूप से जांचनी चाहिए।
त्योहारी सीजन में ऑनलाइन खरीदारी सुविधाजनक और किफायती हो सकती है, लेकिन आकर्षक छूट के लालच में सावधानी को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। फर्जी वेबसाइट, नकली विज्ञापन और संदिग्ध भुगतान अनुरोध ग्राहकों को आर्थिक नुकसान पहुंचा सकते हैं। वेबसाइट और विक्रेता की पुष्टि करने, सुरक्षित भुगतान माध्यम अपनाने तथा बैंक लेनदेन पर नजर रखने से इस जोखिम को कम किया जा सकता है। खरीदारी करने से पहले कुछ मिनट की जांच आपके पैसे और निजी जानकारी को सुरक्षित रखने में मदद कर सकती है।