आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) एशिया के रोजगार बाजार में तेजी से बदलाव ला रहा है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की अक्टूबर 2026 में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, AI से अधिक प्रभावित होने वाले पेशों में भर्ती की मांग, कम प्रभावित होने वाले पेशों की तुलना में करीब 10 प्रतिशत घट गई। हालांकि, AI तकनीक लगातार बेहतर होने के बावजूद भर्ती में आई यह गिरावट बाद में स्थिर हो गई।
आईएमएफ की रिपोर्ट क्षेत्रीय आर्थिक परिदृश्य: एशिया और प्रशांत Regional Economic Outlook: Asia and Pacific में एशियाई अर्थव्यवस्थाओं में AI के कारण रोजगार की मांग, कामकाज के लिए जरूरी कौशल और भविष्य में नौकरी के अवसरों पर पड़ने वाले प्रभाव का विश्लेषण किया गया है। इस अध्ययन के लिए एशिया की 19 अर्थव्यवस्थाओं में प्रकाशित लगभग 4 करोड़ ऑनलाइन नौकरी विज्ञापनों का विश्लेषण किया गया।
रिपोर्ट के निष्कर्ष बताते हैं कि AI का प्रभाव केवल नौकरियां खत्म होने तक सीमित नहीं है। यह कंपनियों की भर्ती की जरूरतों, कर्मचारियों की जिम्मेदारियों और काम करने के तरीकों को भी बदल रहा है। जहां कुछ कामों के लिए कम कर्मचारियों की जरूरत पड़ सकती है, वहीं AI तकनीक को समझने और उसका इस्तेमाल करने वाले लोगों के लिए नए अवसर भी बन रहे हैं।
IMF के अनुसार, वर्ष 2022 में ChatGPT के लॉन्च होने के बाद AI से अधिक प्रभावित होने वाले पेशों में नई भर्ती की मांग कमजोर पड़ने लगी। जैसे-जैसे AI सिस्टम ऐसे काम करने में सक्षम हुए, जिनमें पहले इंसानों का काफी समय और विशेषज्ञता लगती थी, कंपनियों ने अपनी भर्ती योजनाओं में बदलाव करना शुरू किया।
AI की क्षमता बढ़ने के साथ अधिक प्रभावित और कम प्रभावित पेशों के बीच भर्ती की मांग का अंतर स्पष्ट होने लगा। उदाहरण के लिए, रिपोर्ट में एक छोटी सॉफ्टवेयर लाइब्रेरी में मौजूद तकनीकी त्रुटियों यानी बग की पहचान करने और उन्हें ठीक करने की क्षमता का उल्लेख किया गया। इस काम को पूरा करने में किसी इंसानी कर्मचारी को लगभग एक घंटा लग सकता है।
जब AI इस तरह का काम करने में सक्षम हुआ, तब AI से अधिक प्रभावित पेशों में भर्ती की मांग, कम प्रभावित पेशों के मुकाबले करीब 10 प्रतिशत कम हो गई थी।
हालांकि, इसके बाद यह गिरावट स्थिर हो गई। ऐसा उस समय भी हुआ, जब AI सिस्टम ऐसे काम करने लगे जिन्हें पूरा करने में इंसानों को कई घंटे लग सकते हैं। इससे संकेत मिलता है कि AI की क्षमता में लगातार सुधार होने का अर्थ यह नहीं है कि भर्ती की मांग भी उसी गति से लगातार घटती रहेगी।
IMF ने स्पष्ट किया कि ऑनलाइन नौकरी विज्ञापनों में कमी को कुल रोजगार में उतनी ही गिरावट का प्रमाण नहीं माना जाना चाहिए। नौकरी के विज्ञापन मुख्य रूप से यह दिखाते हैं कि कंपनियां नए कर्मचारियों को नियुक्त करने में कितनी रुचि रखती हैं। वे यह पूरी जानकारी नहीं देते कि वास्तव में कितने लोगों को नौकरी मिली या मौजूदा कर्मचारियों की जिम्मेदारियों में क्या बदलाव आया।
AI अपनाने के बाद कंपनियां अपने कर्मचारियों से अलग तरह के काम करा सकती हैं, कुछ पदों की जिम्मेदारियां बदल सकती हैं या नई नियुक्तियों की योजना टाल सकती हैं। इसके अलावा, सभी कंपनियां भर्ती के लिए ऑनलाइन नौकरी पोर्टलों का इस्तेमाल नहीं करतीं। इसलिए केवल ऑनलाइन विज्ञापनों के आधार पर रोजगार पर AI के कुल प्रभाव का आकलन करना मुश्किल है।
रिपोर्ट के अनुसार, इस प्रभाव को बेहतर तरीके से समझने के लिए रोजगार के वास्तविक आंकड़ों, वेतन और काम के घंटों का भी अध्ययन करना जरूरी है। फिर भी उपलब्ध आंकड़े यह संकेत देते हैं कि AI से अधिक प्रभावित पेशों में नई भर्ती की मांग घटना, रोजगार बाजार पर तकनीक के प्रमुख प्रभावों में से एक है।
कुछ पेशों में भर्ती की मांग कमजोर होने के बावजूद, कंपनियां अब ऐसे कर्मचारियों की तलाश कर रही हैं जो AI टूल्स का इस्तेमाल कर सकें, AI आधारित एप्लिकेशन बना सकें और इस तकनीक को कारोबारी कामकाज में शामिल कर सकें।
IMF की रिपोर्ट में वर्ष 2023 के बाद प्रमुखता से उभरे कई कौशलों का उल्लेख किया गया है।
इसमें AI सिस्टम से उपयोगी और सटीक जवाब पाने के लिए प्रभावी निर्देश तैयार करना शामिल है। सही तरीके से सवाल पूछना और स्पष्ट निर्देश देना AI से बेहतर परिणाम प्राप्त करने में मदद करता है।
इस तकनीक के जरिए AI मॉडल को बाहरी जानकारी के स्रोतों से जोड़ा जाता है। इससे मॉडल को संबंधित जानकारी उपलब्ध कराने और जवाबों की उपयोगिता तथा सटीकता बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।
इसमें ऐसे सिस्टम तैयार करना शामिल है जो अलग-अलग काम कर सकें और कई चरणों वाली प्रक्रियाओं को कुछ हद तक स्वतंत्र रूप से पूरा कर सकें। कारोबारी कामों को व्यवस्थित करने में ऐसे सिस्टम की भूमिका बढ़ रही है।
इस कौशल के तहत AI तकनीक का इस्तेमाल करके सॉफ्टवेयर, डिजिटल सेवाएं और कारोबार से जुड़ी समस्याओं के समाधान तैयार किए जाते हैं।
इसमें AI टूल्स को किसी कंपनी की मौजूदा कार्यप्रणाली, सॉफ्टवेयर और जानकारी से जुड़ी प्रणालियों के साथ जोड़ना शामिल है, ताकि काम अधिक प्रभावी तरीके से किया जा सके।
रिपोर्ट के अनुसार, AI का सही इस्तेमाल करने वाले कर्मचारियों को नए अवसर मिल सकते हैं। वहीं, जिन कामों को AI तेजी से और आसानी से कर सकता है, उनसे जुड़ी कुछ भूमिकाओं में भर्ती की मांग कमजोर रह सकती है।
IMF की रिपोर्ट के मुताबिक, एशिया में लगभग 6 प्रतिशत कंपनियां अपने ऑनलाइन नौकरी विज्ञापनों में AI से जुड़े कौशलों का उल्लेख करती हैं। रिपोर्ट में यह भी पाया गया कि AI स्किल्स की मांग करने वाली कंपनियों में भर्ती की मांग उन कंपनियों की तुलना में तेजी से बढ़ रही है, जो इन कौशलों का उल्लेख नहीं करतीं। यह रुझान उन पेशों में भी देखा गया है जो AI से अधिक प्रभावित हैं।
इससे रोजगार बाजार में दो बदलाव एक साथ दिखाई देते हैं। एक ओर, कंपनियां उन कामों के लिए कम लोगों की भर्ती कर सकती हैं जिन्हें AI स्वचालित कर सकता है या आसान बना सकता है। दूसरी ओर, AI सिस्टम चलाने, विकसित करने और उन्हें कारोबारी कामकाज से जोड़ने वाले कर्मचारियों की मांग बढ़ सकती है।
हालांकि, रिपोर्ट यह भी बताती है कि AI कौशलों की बढ़ती मांग ने अब तक AI से अधिक प्रभावित पेशों में भर्ती की कुल गिरावट की पूरी भरपाई नहीं की है। इसलिए कर्मचारियों के लिए लगातार सीखना और अपने कौशलों को बेहतर बनाना पहले से अधिक जरूरी हो गया है।
IMF ने भारत, इंडोनेशिया और फिलीपींस जैसे देशों के लिए संभावित चुनौतियों की ओर ध्यान दिलाया है। इन देशों में युवाओं की बड़ी आबादी है और हर साल बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने की जरूरत होती है।
AI को अपनाने से इन देशों के लिए कम उत्पादकता वाले कामों से कर्मचारियों को अधिक उत्पादकता वाले विनिर्माण और सेवा क्षेत्रों में पहुंचाने की प्रक्रिया चुनौतीपूर्ण हो सकती है। उदाहरण के लिए, कृषि क्षेत्र के कुछ काम AI से अपेक्षाकृत कम प्रभावित हो सकते हैं, लेकिन उद्योगों और सेवाओं में तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल से रोजगार पैदा करने के पारंपरिक तरीकों में बदलाव आ सकता है।
ऐसे में यह सुनिश्चित करना जरूरी होगा कि कर्मचारियों के पास नए अवसरों का लाभ उठाने के लिए जरूरी कौशल हों। तेजी से बढ़ती कामकाजी उम्र की आबादी वाले देशों के लिए यह बदलाव खास तौर पर महत्वपूर्ण है, क्योंकि रोजगार सृजन आर्थिक विकास और लोगों के जीवन स्तर में सुधार का अहम आधार है।
IMF की रिपोर्ट बताती है कि AI के दौर में कर्मचारियों को बदलती जरूरतों के अनुसार तैयार करना जरूरी है। जैसे-जैसे AI अधिक सक्षम होगा, कंपनियां ऐसे कौशलों को ज्यादा महत्व दे सकती हैं जो इस तकनीक के साथ मिलकर काम करने में मदद करते हैं।
इसके लिए शिक्षा, व्यावसायिक प्रशिक्षण और AI से संबंधित कौशलों में निवेश करना उपयोगी हो सकता है। कंपनियों और नीति निर्माताओं को उन कर्मचारियों की मदद के लिए भी कदम उठाने पड़ सकते हैं, जिनके काम स्वचालन से प्रभावित हो रहे हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, AI का असर सभी देशों और पेशों पर एक जैसा नहीं होगा। इसका परिणाम इस बात पर निर्भर करेगा कि किस तरह का काम किया जा रहा है, कंपनियां AI को कितनी तेजी से अपना रही हैं और कर्मचारी नए कौशल कितनी आसानी से सीख पा रहे हैं।
इसलिए सरकारों, शैक्षणिक संस्थानों और कंपनियों के लिए जरूरी है कि वे प्रशिक्षण और कौशल विकास के अवसर बढ़ाएं, ताकि कर्मचारी बदलती जरूरतों के अनुरूप खुद को तैयार कर सकें।
IMF की अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, एशिया में AI से अधिक प्रभावित पेशों में भर्ती की मांग कम प्रभावित पेशों की तुलना में करीब 10 प्रतिशत घटी है। हालांकि, यह गिरावट बाद में स्थिर हो गई। साथ ही, AI से जुड़े कौशलों की मांग बढ़ रही है, जिससे तकनीक का इस्तेमाल करने, उसे विकसित करने और कारोबारी प्रक्रियाओं में शामिल करने वाले लोगों के लिए नए अवसर बन रहे हैं।
भारत जैसे देशों के लिए चुनौती यह है कि वे बढ़ती युवा आबादी को बदलते रोजगार बाजार के लिए तैयार करें। लगातार सीखना, तकनीकी कौशल विकसित करना और AI के साथ प्रभावी ढंग से काम करना भविष्य के रोजगार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।