प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को इंडियन मोबाइल कांग्रेस (IMC) के 10वें संस्करण का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि भारत के डिजिटल इकोसिस्टम ने दिखाया है कि किस तरह बिना सीमाओं के बड़े स्तर पर विकास किया जा सकता है। उन्होंने देश में दूरसंचार सेवाओं के विस्तार, डिजिटल शासन और ऑनलाइन शिक्षा की प्रगति को भी रेखांकित किया।
सम्मेलन की विषयवस्तु का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि वर्षों के दौरान यह मंच भारत की प्रगति और देश के सपनों को सामने रखने का महत्वपूर्ण माध्यम बन गया है।
PM मोदी ने इंडियन मोबाइल कांग्रेस (IMC) India Mobile Congress के 10वें संस्करण में कहा कि भारत में दूरसंचार का अर्थ अब केवल नेटवर्क, स्पेक्ट्रम, टावर और इंटरनेट की गति तक सीमित नहीं है। पिछले 10 से 12 वर्षों में मोबाइल फोन आधुनिक संचार का साधन होने के साथ-साथ सुशासन का भी जरूरी माध्यम बन गया है। उन्होंने कहा कि यही सोच सरकार के डिजिटल इंडिया अभियान के केंद्र में रही है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी Prime Minister Narendra Modi ने कहा कि लगभग एक दशक पहले भारत में डिजिटल खाई एक बड़ी चुनौती थी। आधुनिक तकनीक का लाभ मुख्य रूप से उन्हीं लोगों को मिल पाता था, जिनके पास पर्याप्त संसाधन थे।
उन्होंने कहा कि डिजिटल इंडिया मिशन के माध्यम से इस स्थिति को बदलने का संकल्प लिया गया और मोबाइल फोन को इस बदलाव के केंद्र में रखा गया।
PM मोदी ने इसे तकनीक को आम लोगों तक पहुँचाने की दिशा में बड़ा कदम बताया। उनके अनुसार, दूरसंचार क्षेत्र में सुधार किए गए और डिजिटल बुनियादी ढाँचे का तेजी से विस्तार हुआ। इसी दौरान देश में स्मार्टफोन के स्थानीय निर्माण में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई।
प्रधानमंत्री ने कहा कि इन प्रयासों के कारण आम भारतीय नागरिक के लिए मोबाइल फोन और इंटरनेट डेटा तक पहुँच पहले से काफी आसान हो गई।
उन्होंने बताया कि भारत के डिजिटल इकोसिस्टम की ताकत कोविड-19 महामारी के दौरान विशेष रूप से दिखाई दी। जब दुनिया के कई हिस्सों में कार्यालयों और शिक्षा व्यवस्था को गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ा, तब भारत में कार्यालयों का काम जारी रहा और पढ़ाई भी नहीं रुकी। PM मोदी के अनुसार, यह देश के डिजिटल इकोसिस्टम के कारण संभव हो पाया।
डिजिटल शिक्षा के विस्तार का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने DIKSHA प्लेटफॉर्म का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि महामारी के दौरान, जुलाई 2022 तक, इस मंच पर 5 अरब से अधिक शिक्षण सत्र दर्ज किए गए और सीखने में बिताया गया कुल समय लगभग 6,000 करोड़ मिनट तक पहुँच गया।
उन्होंने बताया कि डिजिटल और ऑनलाइन शिक्षा के विभिन्न माध्यमों के जरिए लगभग 25 करोड़ विद्यार्थियों को जोड़ने का लक्ष्य रखा गया था। प्रधानमंत्री के अनुसार, दूरसंचार क्रांति का लाभ भारत के नागरिकों तक सीधे पहुँचा है। कोविड-19 महामारी ने भी डिजिटल माध्यमों से शिक्षा को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत का डिजिटल इकोसिस्टम केवल संचार और शिक्षा तक सीमित नहीं है। इससे सामग्री निर्माण और गेमिंग जैसे क्षेत्रों में भी नए आर्थिक अवसर पैदा हुए हैं।
उन्होंने गेमिंग क्षेत्र का उदाहरण देते हुए कहा कि आज भारत में 50 करोड़ से अधिक लोग किसी न किसी रूप में गेमिंग इकोसिस्टम से जुड़े हुए हैं।
PM मोदी ने कहा कि भारत में मोबाइल फोन अब सिर्फ गेम खेलने का साधन नहीं रह गया है, बल्कि यह सामग्री बनाने का एक छोटा स्टूडियो भी बन गया है।
उनके अनुसार, मोबाइल फोन ने देश में क्रिएटर इकॉनमी को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इससे आम लोगों के लिए वीडियो, डिजिटल सामग्री और दूसरे रचनात्मक काम तैयार करना आसान हुआ है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि मोबाइल फोन ने भारत में सामग्री निर्माण को अधिक लोकतांत्रिक बनाया है। इसका अर्थ है कि अब रचनात्मक काम करने के लिए हर व्यक्ति को महँगे उपकरणों या बड़े स्टूडियो की जरूरत नहीं होती। डिजिटल तकनीक के विस्तार ने अधिक लोगों को अपनी प्रतिभा दिखाने और नए अवसर तलाशने का रास्ता दिया है।
डिजिटल सेवाओं के बढ़ते इस्तेमाल के साथ साइबर अपराध और ऑनलाइन धोखाधड़ी भी बड़ी चुनौती बन गए हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि आम नागरिक के लिए यह गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सामान्य व्यक्ति तकनीकी नियमों या डिजिटल प्रणालियों की जटिल बनावट के बारे में नहीं सोचता। उसके लिए सबसे महत्वपूर्ण चीज भरोसा है।
PM मोदी ने साइबर अपराध से निपटने के लिए वैश्विक ढाँचा बनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि साइबर धोखाधड़ी और अपराध किसी देश की सीमाओं तक सीमित नहीं रहते, बल्कि पहले ही अंतरराष्ट्रीय सीमाएँ पार कर चुके हैं।
इसलिए समस्या से निपटने के लिए ऐसी वैश्विक व्यवस्था जरूरी है, जिसमें सरकारें, तकनीकी कंपनियाँ, दूरसंचार संचालक और वित्तीय संस्थान सभी भागीदार बनें।
प्रधानमंत्री ने कहा कि अलग-अलग देशों और संस्थानों के बीच सहयोग से साइबर अपराध की रोकथाम को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है। इससे ऑनलाइन सेवाओं पर लोगों का भरोसा बनाए रखने में भी मदद मिलेगी।
PM मोदी ने GSMA और दुनिया भर के दूरसंचार संचालकों से भी साथ मिलकर काम करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि ऐसी वैश्विक व्यवस्था तैयार की जानी चाहिए, जो स्पैम संदेशों, फर्जी संपर्कों और धोखाधड़ी के प्रयासों को लोगों तक पहुँचने से पहले रोक सके।
प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि भारत ने इस दिशा में अपने अनुभवों से काफी कुछ सीखा है और वह अपने अनुभव दुनिया के साथ साझा करने के लिए हमेशा तैयार है।
इंडियन मोबाइल कांग्रेस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत के डिजिटल विकास, दूरसंचार विस्तार, ऑनलाइन शिक्षा और गेमिंग क्षेत्र में उभरते अवसरों को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि मोबाइल फोन अब संचार के साथ-साथ सुशासन, शिक्षा और रचनात्मकता का भी महत्वपूर्ण साधन बन चुका है।
साथ ही, उन्होंने चेतावनी दी कि डिजिटल विकास के साथ साइबर अपराध से जुड़ी चुनौतियों पर भी ध्यान देना जरूरी है। उनके अनुसार, साइबर धोखाधड़ी से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए वैश्विक सहयोग और साझा ढाँचे की आवश्यकता है।