भारत, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका ने वैश्विक शासन व्यवस्था में व्यापक सुधार की जरूरत पर जोर दिया है। तीनों देशों ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में सुधार के साथ-साथ विकासशील देशों की वैश्विक निर्णय प्रक्रिया में अधिक भागीदारी की मांग की। यह चर्चा न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र के दौरान आयोजित 14वीं IBSA त्रिपक्षीय मंत्रिस्तरीय आयोग बैठक में हुई। बैठक में भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर, दक्षिण अफ्रीका के अंतरराष्ट्रीय संबंध एवं सहयोग मंत्री रोनाल्ड लामोला और ब्राजील के विदेश मंत्री माउरो विएरा शामिल हुए।
IBSA यानी India-Brazil-South Africa Dialogue Forum भारत, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका को एक साथ लाने वाला मंच है। इसे 2003 में औपचारिक रूप दिया गया था। तीनों देश एशिया, दक्षिण अमेरिका और अफ्रीका का प्रतिनिधित्व करते हैं और वैश्विक तथा क्षेत्रीय मुद्दों पर आपसी सहयोग और समन्वय करते हैं। विदेश मंत्रालय के अनुसार IBSA का सहयोग राजनीतिक विचार-विमर्श, व्यावहारिक त्रिपक्षीय सहयोग और अन्य विकासशील देशों के लिए विकास परियोजनाओं के समर्थन पर आधारित है।
बैठक में IBSA Fund for Poverty and Hunger Alleviation के महत्व को भी दोहराया गया। यह कोष विकासशील देशों में गरीबी, भूख और असमानता जैसी समस्याओं से निपटने वाली परियोजनाओं का समर्थन करता है। जलवायु परिवर्तन के बीच टिकाऊ और जलवायु-अनुकूल कृषि जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर भी जोर दिया गया।
बैठक का प्रमुख विषय संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) United Nations Security Council (UNSC) में सुधार रहा। तीनों देशों ने मौजूदा अंतर-सरकारी वार्ताओं में सीमित प्रगति पर चिंता जताई और औपचारिक तथा Text-Based Negotiations जल्द शुरू करने की मांग की। उनका कहना है कि सुधार प्रक्रिया को एक निश्चित समयसीमा में ठोस परिणाम की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।
IBSA देशों ने सुरक्षा परिषद की स्थायी और अस्थायी दोनों श्रेणियों में सदस्यता बढ़ाने का समर्थन किया। उन्होंने अफ्रीकी देशों की स्थायी प्रतिनिधित्व की मांग का भी समर्थन किया। भारत और ब्राजील ने सुरक्षा परिषद में स्थायी सीट हासिल करने की अपनी आकांक्षा दोहराई।
तीनों देशों ने संयुक्त राष्ट्र महासभा की भूमिका को मजबूत करने की जरूरत पर भी जोर दिया, ताकि वैश्विक निर्णय प्रक्रिया अधिक प्रतिनिधित्वपूर्ण और समावेशी हो सके।
मंत्रियों ने पश्चिम एशिया में जारी तनाव और उसके व्यापक प्रभावों पर भी चर्चा की। उन्होंने कूटनीति, संवाद और अंतरराष्ट्रीय कानून के पालन पर जोर दिया। बैठक में नागरिकों की सुरक्षा, संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के सम्मान की बात कही गई।
Gaza के संदर्भ में मानवीय सहायता की निर्बाध पहुंच, संबंधित संयुक्त राष्ट्र प्रस्तावों के कार्यान्वयन और युद्धविराम के पालन का समर्थन किया गया। तीनों देशों ने Two-State Solution के प्रति अपना समर्थन दोहराया, जिसमें इजरायल के साथ एक स्वतंत्र फिलिस्तीनी राज्य की स्थापना शामिल है।
मंत्रियों ने कहा कि क्षेत्रीय संघर्षों का असर केवल संबंधित देशों तक सीमित नहीं रहता। ऊर्जा और खाद्य आपूर्ति में बाधा, महंगाई तथा सार्वजनिक वित्त पर दबाव जैसे प्रभाव विकासशील देशों के लिए अतिरिक्त चुनौतियां पैदा कर सकते हैं।
IBSA देशों ने अप्रैल 2025 में पहलगाम, जम्मू-कश्मीर में हुए आतंकवादी हमले में नागरिकों की हत्या की कड़ी निंदा की। तीनों देशों ने आतंकवाद के सभी रूपों और अभिव्यक्तियों को अस्वीकार करते हुए इसके खिलाफ अंतरराष्ट्रीय सहयोग मजबूत करने की जरूरत बताई।
मंत्रियों ने आतंकवादी संगठनों की वित्तीय मदद रोकने और वित्तीय खुफिया जानकारी के वैध आदान-प्रदान को मजबूत करने पर जोर दिया। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र के तहत Comprehensive Convention on International Terrorism को जल्द अपनाने की जरूरत भी दोहराई। आतंकवादी प्रचार और भर्ती के लिए डिजिटल मंचों के इस्तेमाल से जुड़े जोखिमों पर भी चर्चा हुई।
IBSA देशों ने Bretton Woods Institutions, यानी IMF और World Bank जैसी वैश्विक वित्तीय संस्थाओं में सुधार का समर्थन किया। उनका जोर विकासशील और उभरती अर्थव्यवस्थाओं की आवाज तथा प्रतिनिधित्व बढ़ाने पर रहा।
मंत्रियों ने Multilateral Development Banks की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया। इन संस्थाओं के जरिए विकास परियोजनाओं के लिए वित्त उपलब्ध कराने, निजी निवेश जुटाने और गरीबी कम करने के प्रयासों को आगे बढ़ाने की बात कही गई।
तीनों देशों ने World Trade Organization (WTO) को केंद्र में रखते हुए पारदर्शी और नियम-आधारित वैश्विक व्यापार व्यवस्था के समर्थन की पुष्टि की। उन्होंने WTO की विवाद निपटारा व्यवस्था को पूरी तरह कार्यशील बनाने और विकासशील देशों के लिए विशेष एवं अलग व्यवहार की व्यवस्था बनाए रखने की जरूरत बताई।
मंत्रियों ने एकतरफा शुल्क और संरक्षणवादी नीतियों पर भी चिंता व्यक्त की और कहा कि ऐसी नीतियां वैश्विक व्यापार में अस्थिरता और विभाजन बढ़ा सकती हैं।
बैठक में Digital Public Infrastructure (DPI) और Digital Public Goods पर भी चर्चा हुई। तीनों देशों ने सुरक्षित, समावेशी और आपस में जुड़ी डिजिटल व्यवस्था तक व्यापक पहुंच का समर्थन किया।
मंत्रियों ने Artificial Intelligence (AI) को आर्थिक विकास और टिकाऊ विकास के लिए महत्वपूर्ण तकनीक बताया। साथ ही उन्होंने ऐसी AI व्यवस्था के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग की जरूरत बताई, जो सुरक्षित, विश्वसनीय, समावेशी और जिम्मेदार हो।
बैठक में गलत सूचना, भ्रामक सूचना और ऑनलाइन नुकसान से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा हुई। तीनों देशों ने डिजिटल मंचों पर अधिक पारदर्शिता और जिम्मेदारी की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने भारत में आयोजित AI Impact Summit 2026 का भी उल्लेख किया।
जलवायु परिवर्तन और ऊर्जा बदलाव भी बैठक के महत्वपूर्ण मुद्दे रहे। भारत, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका ने जलवायु वित्त, अनुकूलन, उत्सर्जन में कमी, तकनीकी हस्तांतरण और न्यायपूर्ण ऊर्जा बदलाव से जुड़े सहयोग को आगे बढ़ाने पर जोर दिया।
तीनों देशों ने नवीकरणीय ऊर्जा के विस्तार, ऊर्जा दक्षता में सुधार और टिकाऊ ईंधनों को बढ़ावा देने का समर्थन किया। विकासशील देशों के लिए रियायती वित्त और तकनीकी सहायता की जरूरत भी रेखांकित की गई।
बैठक में Critical Minerals के बढ़ते महत्व को भी स्वीकार किया गया। इन खनिजों की जरूरत स्वच्छ ऊर्जा तकनीक, डिजिटल उद्योग और आधुनिक विनिर्माण के लिए बढ़ रही है।
तीनों देशों ने खनिज आपूर्ति श्रृंखलाओं में विविधता लाने और संसाधन संपन्न विकासशील देशों में खनिजों के प्रसंस्करण तथा मूल्यवर्धन को बढ़ाने का समर्थन किया। भारत की Critical Minerals Circularity Initiative को भी समर्थन मिला। इसमें Recycling, Urban Mining और Second-Life Batteries जैसे क्षेत्रों पर ध्यान दिया जाता है।
मंत्रियों ने जैव विविधता संरक्षण, प्राकृतिक संसाधनों के टिकाऊ इस्तेमाल और उनके लाभों के न्यायपूर्ण बंटवारे की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
तीनों देशों ने बढ़ती प्राकृतिक आपदाओं और चरम मौसम की घटनाओं से विकासशील अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ने वाले प्रभावों पर चिंता जताई। बेहतर Early Warning Systems, आपदा तैयारी और मजबूत बुनियादी ढांचे की जरूरत पर जोर दिया गया।
इसके अलावा शिक्षा, बुनियादी सीखने, महिलाओं और लड़कियों के सशक्तिकरण, लैंगिक समानता, पर्यावरणीय अपराध और अफ्रीकी व्यापार एकीकरण जैसे विषय भी चर्चा में रहे।
14वीं IBSA त्रिपक्षीय मंत्रिस्तरीय आयोग बैठक में भारत, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका ने संयुक्त राष्ट्र सुधार, वैश्विक आर्थिक व्यवस्था, व्यापार, आतंकवाद, AI, डिजिटल बुनियादी ढांचे, जलवायु परिवर्तन और Critical Minerals जैसे कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर अपने रुख को समन्वित किया।
UNSC Reform के मामले में तीनों देशों ने औपचारिक Text-Based Negotiations शुरू करने और निश्चित समयसीमा में ठोस परिणाम हासिल करने पर जोर दिया। साथ ही, उन्होंने Global South की भागीदारी को वैश्विक संस्थाओं में बढ़ाने की जरूरत दोहराई।
IBSA के आधिकारिक विवरण के अनुसार, यह मंच केवल राजनीतिक समन्वय तक सीमित नहीं है, बल्कि विकासशील देशों के बीच सहयोग और विकास परियोजनाओं को आगे बढ़ाने के लिए भी काम करता है। ऐसे में 2026 की बैठक में उठाए गए मुद्दे वैश्विक शासन, विकास और दक्षिण-दक्षिण सहयोग से जुड़े व्यापक विमर्श का हिस्सा हैं।