HCLTech करेगी Sarvam AI में 150 मिलियन डॉलर का बड़ा निवेश

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16 May 2026
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News Synopsis

भारत का सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र तेजी से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की ओर बढ़ रहा है। इसी बीच HCLTech बेंगलुरु स्थित AI स्टार्टअप Sarvam AI में 150 मिलियन डॉलर के बड़े निवेश की तैयारी कर रही है। प्रस्तावित निवेश के बाद कंपनी का वैल्यूएशन लगभग 1.5 बिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है, जिससे यह भारतीय AI स्टार्टअप्स के लिए अब तक के सबसे बड़े फंडिंग राउंड्स में से एक बन जाएगा।

यह कदम दिखाता है, कि पारंपरिक IT सर्विस कंपनियां अब तेजी से विकसित हो रहे जनरेटिव AI सेक्टर पर बड़ा दांव लगा रही हैं। उद्योग विशेषज्ञों का मानना है, कि यह निवेश भारत के AI इकोसिस्टम के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है, खासकर ऐसे समय में जब दुनियाभर की कंपनियां sovereign AI मॉडल और उन्नत AI इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने की दौड़ में शामिल हैं।

HCLTech ने बढ़ाया आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर फोकस

यह प्रस्तावित निवेश HCLTech की अगली पीढ़ी की AI तकनीकों में बढ़ती रुचि और तेजी से बदलते टेक्नोलॉजी सेक्टर में प्रतिस्पर्धी बने रहने की रणनीति को दर्शाता है।

भारत का लगभग 250 बिलियन डॉलर का IT सर्विस उद्योग AI-आधारित कंपनियों और ऑटोमेशन टूल्स के तेजी से बढ़ते प्रभाव के कारण दबाव में है। OpenAI और Anthropic जैसी वैश्विक AI कंपनियों द्वारा एंटरप्राइज AI सेवाओं और कंसल्टिंग क्षमताओं के विस्तार ने निवेशकों के बीच पारंपरिक IT आउटसोर्सिंग मॉडल के भविष्य को लेकर चिंता बढ़ा दी है।

पिछले एक वर्ष में वैश्विक AI कंपनियों ने एंटरप्राइज ऑफरिंग्स, AI डिप्लॉयमेंट और कंसल्टिंग सेवाओं का तेजी से विस्तार किया है। इससे यह आशंका बढ़ी है, कि पारंपरिक IT कंपनियों को AI-आधारित प्लेटफॉर्म्स से कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ सकता है, जो कम लागत और तेज गति से सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट, कस्टमर सपोर्ट और ऑटोमेशन सेवाएं प्रदान कर सकते हैं।

इसी कारण भारतीय IT कंपनियां अब AI रिसर्च, क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर, कंप्यूटिंग और फाउंडेशनल AI तकनीकों में तेजी से निवेश बढ़ा रही हैं।

भारत के Sovereign AI क्षेत्र में उभरता बड़ा नाम बना Sarvam AI

2023 में विवेक राघवन और प्रत्युष कुमार द्वारा स्थापित Sarvam AI तेजी से भारत के सबसे चर्चित AI स्टार्टअप्स में शामिल हो गया है।

कंपनी खुद को एक फुल-स्टैक sovereign AI प्लेटफॉर्म के रूप में पेश करती है, जिसका लक्ष्य भारत की भाषाई, सांस्कृतिक और एंटरप्राइज जरूरतों के अनुरूप फाउंडेशनल AI मॉडल तैयार करना है। कई अन्य स्टार्टअप्स के विपरीत, जो विदेशी AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर निर्भर हैं, Sarvam AI स्थानीय जरूरतों के हिसाब से AI तकनीक विकसित करने पर काम कर रही है।

स्टार्टअप ने भारतीय भाषाओं पर आधारित AI सिस्टम और वॉइस-इनेबल्ड एप्लिकेशंस के कारण काफी पहचान बनाई है, जिन्हें भारतीय उपभोक्ताओं, व्यवसायों और सरकारी उपयोग के लिए तैयार किया जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है, कि भारतीय भाषाओं के लिए विशेष रूप से विकसित AI सिस्टम भविष्य में कंपनी को बड़ी प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त दे सकते हैं।

Sarvam AI ने पेश किए नए AI मॉडल

इस वर्ष IndiaAI Impact Summit के दौरान Sarvam AI ने अपने नवीनतम AI मॉडल्स और तकनीकों का प्रदर्शन किया।

कंपनी ने दो नए ओपन-वेट बड़े भाषा मॉडल (Large Language Models) लॉन्च किए, जिससे उसके AI पोर्टफोलियो का विस्तार हुआ। इससे पहले कंपनी पांच फाउंडेशनल AI मॉडल्स भी खुद विकसित कर चुकी है।

ये मॉडल conversational AI, एंटरप्राइज ऑटोमेशन, मल्टीलिंगुअल कंटेंट जनरेशन और वॉइस-आधारित सेवाओं जैसे कई उपयोगों के लिए तैयार किए गए हैं।

कंपनी का ओपन-वेट मॉडल्स पर फोकस रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इससे डेवलपर्स, रिसर्चर्स और एंटरप्राइज ग्राहकों को AI सिस्टम को अपनी जरूरत के अनुसार कस्टमाइज करने में अधिक सुविधा मिलती है।

विश्लेषकों का मानना है, कि यह रणनीति भारत को विदेशी AI प्लेटफॉर्म्स पर निर्भरता कम करने में मदद कर सकती है।

AI हार्डवेयर और वियरेबल टेक्नोलॉजी में भी एंट्री की तैयारी

सॉफ्टवेयर आधारित AI मॉडल्स के अलावा Sarvam AI उभरते AI हार्डवेयर और वियरेबल टेक्नोलॉजी सेक्टर में भी कदम बढ़ा रही है।

IndiaAI Impact Summit में कंपनी ने AI-पावर्ड स्मार्ट ग्लासेस भी प्रदर्शित किए, जो एडवांस AI असिस्टेंस के साथ काम करते हैं। इससे संकेत मिला कि कंपनी केवल भाषा मॉडल तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि भविष्य के AI-आधारित कंज्यूमर प्रोडक्ट्स पर भी काम कर रही है।

दुनियाभर में वियरेबल टेक्नोलॉजी तेजी से लोकप्रिय हो रही है, क्योंकि कंपनियां AI को स्मार्ट डिवाइसेज, ऑगमेंटेड रियलिटी और वॉइस-इनेबल्ड हार्डवेयर के जरिए दैनिक जीवन में शामिल करने की दिशा में काम कर रही हैं।

यदि Sarvam AI इस क्षेत्र में सफल होती है, तो यह केवल सॉफ्टवेयर स्टार्टअप नहीं बल्कि एक व्यापक AI टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म के रूप में उभर सकती है।

पहले भी मिल चुका है, मजबूत निवेश समर्थन

नए निवेश से पहले भी Sarvam AI को कई बड़े वैश्विक निवेशकों का समर्थन मिल चुका है।

2023 में कंपनी ने Lightspeed के नेतृत्व में Series A फंडिंग राउंड में 41 मिलियन डॉलर जुटाए थे। इस राउंड में Peak XV Partners और Khosla Ventures ने भी भाग लिया था।

इस निवेश की मदद से कंपनी ने रिसर्च क्षमताएं बढ़ाईं, AI टैलेंट की भर्ती की, कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत किया और भारतीय उपयोग मामलों पर आधारित AI मॉडल्स के विकास में तेजी लाई।

यदि 150 मिलियन डॉलर का नया निवेश पूरा होता है, तो कंपनी का वैल्यूएशन काफी बढ़ जाएगा और उसे वैश्विक AI बाजार में प्रतिस्पर्धा के लिए अतिरिक्त संसाधन मिलेंगे।

भारत का AI स्टार्टअप इकोसिस्टम तेजी से बढ़ रहा

यह नया निवेश भारत के तेजी से बढ़ते AI स्टार्टअप इकोसिस्टम में निवेशकों की बढ़ती रुचि को भी दर्शाता है।

पिछले एक वर्ष में AI-केंद्रित स्टार्टअप्स में वेंचर कैपिटल निवेश तेजी से बढ़ा है, क्योंकि विभिन्न उद्योग AI और ऑटोमेशन आधारित तकनीकों को अपनाने लगे हैं।

भारत में कई स्टार्टअप्स अब AI इंफ्रास्ट्रक्चर, कोडिंग असिस्टेंट्स, एंटरप्राइज ऑटोमेशन, हेल्थकेयर AI और मल्टीलिंगुअल तकनीकों पर काम कर रहे हैं।

हाल ही में vibe-coding स्टार्टअप Emergent ने अपनी पिछली फंडिंग के कुछ महीनों बाद ही 70 मिलियन डॉलर जुटाए, जो भारतीय AI सेक्टर में बढ़ते निवेश का संकेत है।

विशेषज्ञों का मानना है, कि भारत का विशाल डेवलपर इकोसिस्टम, बढ़ता इंटरनेट उपयोग और बहुभाषी डिजिटल बाजार AI स्टार्टअप्स को तेजी से विस्तार करने का मजबूत अवसर देता है।

पारंपरिक IT कंपनियों के सामने बड़ा बदलाव

जनरेटिव AI की बढ़ती लोकप्रियता भारतीय IT कंपनियों को अपने पारंपरिक बिजनेस मॉडल पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर कर रही है।

कई दशकों तक भारतीय IT कंपनियों की वृद्धि आउटसोर्सिंग, सॉफ्टवेयर मेंटेनेंस, कस्टमर सपोर्ट और एंटरप्राइज टेक्नोलॉजी सेवाओं पर आधारित रही। लेकिन अब एडवांस AI सिस्टम कई दोहराए जाने वाले कोडिंग, डॉक्यूमेंटेशन और एनालिटिक्स कार्यों को स्वचालित करने में सक्षम हो गए हैं।

इसी कारण बड़ी भारतीय टेक कंपनियां AI इंफ्रास्ट्रक्चर, डेटा सेंटर, साझेदारियों और AI समाधानों में तेजी से निवेश कर रही हैं।

उदाहरण के लिए Tata Consultancy Services (TCS) भी AI डेटा सेंटर क्षेत्र में अपनी मौजूदगी बढ़ा रही है, क्योंकि वैश्विक स्तर पर कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की मांग तेजी से बढ़ रही है।

HCLTech का Sarvam AI में संभावित निवेश केवल वित्तीय सौदा नहीं बल्कि पारंपरिक IT कंपनियों और नई AI स्टार्टअप्स के बीच गहरे सहयोग की शुरुआत भी साबित हो सकता है।

भारत की AI महत्वाकांक्षाओं को मिलेगा नया बल

यह प्रस्तावित फंडिंग राउंड वैश्विक AI उद्योग में भारत की बढ़ती महत्वाकांक्षाओं को भी दर्शाता है।

दुनियाभर की सरकारें और कंपनियां sovereign AI क्षमताओं पर जोर दे रही हैं, और भारत भी स्थानीय AI मॉडल्स, कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और क्षेत्रीय AI समाधानों के विकास पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।

Sarvam AI की तेज प्रगति यह दिखाती है, कि भारतीय स्टार्टअप्स अब केवल विदेशी AI सिस्टम पर निर्भर रहने के बजाय खुद की फाउंडेशनल तकनीक विकसित करने की कोशिश कर रहे हैं।

यदि यह निवेश सफलतापूर्वक पूरा होता है, तो यह भारत की वैश्विक AI रेस में स्थिति को और मजबूत कर सकता है तथा देश के उभरते AI इकोसिस्टम में नए निवेश को आकर्षित कर सकता है।

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