आपने सुना, दुनिया की पहली ऐसी सर्जरी के बारे में ?

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24 Jul 2021
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News Synopsis

दो घूँट भी काफी हैं ज़िंदा रहने के लिए,

हर किसी को समंदर की प्यास नहीं होती...

जो अपाहिज होकर भी जीने का हुनर रखते हैं,

उनकी ज़िन्दगी कभी ज़िंदा लाश नहीं होती...

आपको बता दें कि इंसान अपाहिज अंगों से नहीं होता, अपने दिमाग से होता है। क्यों कि आपकी इच्छा शक्ति ही आपके लिये जीवनदान हो सकती है। ऐसी ही इच्छा शक्ति की मिसाल बना यह शख्स जिसने एक हादसे में अपने दोनों हाथ तो खो दिए मगर जीने की इच्छा नहीं खोयी। और इसी जूनून में उसने ऐसा कर दिखाया जो हम सब के लिए महज़ एक कल्पना है। किसी हादसे में हाथ से हाथ धो बैठना, सुनने में ही कितना दर्दनाक है। फेलिक्स नाम के इस शख्स के बिजली का काम करते वक़्त करंट लगने से दोनों हाथ जल गए थे । डॉक्टरों के अथक प्रयासों द्वारा  54 ऑपरेशन के बाद उसके दोनों हाथ अलग किये गए। 3 महीने कोमा में रहने के बाद जब उसे होश आया और अपने हाथों को नहीं पाया तो वो निराश नहीं हुआ। फेलिक्स ने अपने हाथों को ट्रांसप्लांट के ज़रिये वापस पाने की, जो सोच उसने देखी उस सोच को  Dr Jean-Michel Dubernard और उनकी टीम ने 15 घंटे की सर्जरी के बाद हक़ीक़त में बदल दिया। यह दुनिया का पहला ऐसा कारनामा साबित हुआ जहाँ पहली बार ट्रांसप्लांट के ज़रिये एक इंसान को दोनों हाथ लगाए गए। इसलिए यह कहना गलत नहीं होगा कि अपने पैरों पर खड़े होने के लिए पैरों की ज़रूरत नहीं अपनी सोच को बुलंद करने की आवश्यकता है। इस लेख के ज़रिये TWN आपकी सोच को विस्तृत करने की उम्मीद करता है। आपके बेहतर जीवन की कामना करता है।

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