भारत में मोबाइल सेवाओं की कीमतों में बढ़ोतरी के बावजूद वायरलेस ग्राहकों की संख्या में मजबूत वृद्धि दर्ज की गई है। भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण यानी ट्राई की वर्ष 2025-26 की रिपोर्ट के अनुसार, देश में मोबाइल ग्राहकों की संख्या में सालाना आधार पर 9.40 प्रतिशत की वृद्धि हुई। इससे पता चलता है कि मोबाइल और दूरसंचार सेवाएं भारतीय उपभोक्ताओं की रोजमर्रा की जरूरत का महत्वपूर्ण हिस्सा बनी हुई हैं।
ट्राई की The Indian Telecom Services – Yearly Performance Indicators 2025-26 रिपोर्ट के मुताबिक, मार्च 2025 के अंत में देश में वायरलेस ग्राहकों की संख्या 115.699 करोड़ थी। मार्च 2026 के अंत तक यह संख्या बढ़कर 126.573 करोड़ हो गई। इस दौरान कुल 10.874 करोड़ नए वायरलेस ग्राहक जुड़े।
मोबाइल सेवाओं के शुल्क में बढ़ोतरी के बावजूद ग्राहकों की संख्या में यह वृद्धि दूरसंचार क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इसके साथ ही प्रति ग्राहक औसत मासिक आय यानी ARPU में भी बढ़ोतरी हुई है।
वर्ष 2025-26 के दौरान देश के वायरलेस ग्राहक आधार में बड़ी वृद्धि दर्ज की गई। मार्च 2025 में 115.699 करोड़ से बढ़कर मार्च 2026 में मोबाइल ग्राहकों की संख्या 126.573 करोड़ हो गई।
इस तरह एक साल में 10.874 करोड़ वायरलेस ग्राहक जुड़े। ग्राहक आधार में यह वृद्धि ऐसे समय हुई जब मोबाइल सेवा प्रदाताओं ने अपनी टैरिफ दरों में बढ़ोतरी की थी।
मोबाइल सेवाओं की कीमतों में बदलाव के बावजूद ग्राहकों की संख्या बढ़ना बताता है कि देश में मोबाइल कनेक्टिविटी की मांग लगातार बनी हुई है। मोबाइल फोन अब केवल बातचीत के लिए इस्तेमाल होने वाला साधन नहीं है। इंटरनेट, डिजिटल भुगतान, ऑनलाइन शिक्षा, मनोरंजन और विभिन्न डिजिटल सेवाओं के बढ़ते इस्तेमाल ने मोबाइल कनेक्टिविटी को और महत्वपूर्ण बना दिया है।
मोबाइल ग्राहकों की संख्या बढ़ने के साथ दूरसंचार कंपनियों की प्रति ग्राहक औसत मासिक आय में भी वृद्धि हुई। वर्ष 2024-25 में मोबाइल सेवाओं का औसत मासिक ARPU ₹174.46 था, जो वर्ष 2025-26 में बढ़कर ₹180.73 हो गया।
इस तरह ARPU में सालाना आधार पर 3.59 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। यह आंकड़ा बताता है कि दूरसंचार कंपनियों की प्रति ग्राहक कमाई में भी सुधार हुआ है।
TRAI के आंकड़ों के अनुसार, 2025-26 में प्रीपेड सेवाओं का औसत मासिक ARPU ₹190.66 रहा। वहीं, पोस्टपेड सेवाओं का ARPU ₹119.76 दर्ज किया गया।
इससे पता चलता है कि दोनों तरह की सेवाओं से कंपनियों को होने वाली औसत मासिक आय में अंतर बना हुआ है। भारत में बड़ी संख्या में मोबाइल उपभोक्ता प्रीपेड सेवाओं का इस्तेमाल करते हैं, जिससे इस श्रेणी का ARPU भी महत्वपूर्ण बना हुआ है।
मोबाइल ग्राहकों की संख्या और ARPU में वृद्धि के साथ दूरसंचार क्षेत्र की कुल आय में भी मजबूत बढ़ोतरी हुई। TRAI के अनुसार, वर्ष 2024-25 में दूरसंचार क्षेत्र का सकल राजस्व (GR) ₹3,72,097 करोड़ था। यह बढ़कर 2025-26 में ₹4,04,067 करोड़ हो गया।
इस तरह सकल राजस्व में सालाना आधार पर 8.59 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
दूरसंचार क्षेत्र का लागू सकल राजस्व (ApGR) भी बढ़ा। वर्ष 2024-25 में यह ₹3,56,283 करोड़ था, जो 2025-26 में बढ़कर ₹3,81,645 करोड़ हो गया। इसमें सालाना आधार पर 7.12 प्रतिशत की वृद्धि हुई।
वहीं, समायोजित सकल राजस्व (AGR) में इससे भी तेज वृद्धि देखने को मिली। AGR वर्ष 2024-25 के ₹3,03,025 करोड़ से बढ़कर 2025-26 में ₹3,34,659 करोड़ हो गया। इसमें 10.44 प्रतिशत की सालाना वृद्धि दर्ज की गई।
दूरसंचार क्षेत्र की गतिविधियों में बढ़ोतरी के साथ सरकार से जुड़े कुछ शुल्कों में भी वृद्धि हुई। वर्ष 2025-26 में स्पेक्ट्रम उपयोग शुल्क (SUC) में 6.12 प्रतिशत की वृद्धि हुई।
2024-25 में स्पेक्ट्रम उपयोग शुल्क ₹3,807 करोड़ था, जो 2025-26 में बढ़कर ₹4,040 करोड़ हो गया।
इसी अवधि में लाइसेंस शुल्क में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई। यह 2024-25 के ₹24,242 करोड़ से बढ़कर 2025-26 में ₹26,763 करोड़ हो गया। यानी लाइसेंस शुल्क में सालाना आधार पर 10.40 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
देश में मोबाइल ग्राहकों की संख्या बढ़ने के साथ मोबाइल सेवाओं के इस्तेमाल का स्तर भी मजबूत बना रहा। वर्ष 2025-26 में एक ग्राहक द्वारा हर महीने मोबाइल पर बातचीत और अन्य संबंधित सेवाओं के लिए इस्तेमाल किए गए औसत कुल मिनट यानी MOUs 950 मिनट प्रति माह रहे।
इसका मतलब है कि औसतन एक मोबाइल ग्राहक हर महीने करीब 950 मिनट की मोबाइल उपयोग गतिविधि से जुड़ा रहा।
प्रीपेड और पोस्टपेड ग्राहकों के इस्तेमाल में भी बड़ा अंतर दिखाई दिया। वर्ष 2025-26 में पोस्टपेड ग्राहकों के मासिक MOUs 305 मिनट रहे। इसके मुकाबले प्रीपेड ग्राहकों के मासिक MOUs 1,055 मिनट दर्ज किए गए।
इससे पता चलता है कि प्रीपेड ग्राहक औसतन पोस्टपेड ग्राहकों की तुलना में मोबाइल सेवाओं का अधिक इस्तेमाल कर रहे हैं।
मोबाइल इंटरनेट और डेटा सेवाओं का विस्तार भी लगातार जारी रहा। TRAI के अनुसार, मार्च 2025 के अंत में देश में वायरलेस डेटा ग्राहकों की संख्या 93.951 करोड़ थी। मार्च 2026 तक यह बढ़कर 102.675 करोड़ हो गई।
इस तरह वायरलेस डेटा ग्राहकों की संख्या में एक साल के दौरान 8.724 करोड़ की वृद्धि हुई और सालाना वृद्धि दर 9.29 प्रतिशत रही।
वायरलेस डेटा ग्राहकों की संख्या में करीब 9.29 प्रतिशत की वृद्धि यह दिखाती है कि मोबाइल इंटरनेट भारतीय दूरसंचार बाजार का प्रमुख हिस्सा बन चुका है। स्मार्टफोन के बढ़ते इस्तेमाल और डिजिटल सेवाओं के विस्तार के साथ डेटा की जरूरत भी लगातार बढ़ रही है।
TRAI के 2025-26 के आंकड़े भारतीय दूरसंचार क्षेत्र में लगातार हो रहे विस्तार की तस्वीर पेश करते हैं। टैरिफ बढ़ोतरी के बावजूद वायरलेस ग्राहकों की संख्या में 9.40 प्रतिशत की वृद्धि हुई। इसी अवधि में ARPU, सकल राजस्व और समायोजित सकल राजस्व में भी बढ़ोतरी हुई।
मोबाइल ग्राहकों की बढ़ती संख्या और डेटा सेवाओं के विस्तार से साफ है कि देश में दूरसंचार सेवाओं की मांग मजबूत बनी हुई है। 126.573 करोड़ वायरलेस ग्राहक, 102.675 करोड़ वायरलेस डेटा ग्राहक और बढ़ता ARPU इस क्षेत्र की निरंतर वृद्धि को दर्शाते हैं। आने वाले समय में डिजिटल सेवाओं, मोबाइल इंटरनेट और ऑनलाइन गतिविधियों के विस्तार के साथ दूरसंचार क्षेत्र की भूमिका और महत्वपूर्ण हो सकती है।