भारत सरकार ग्रामीण सड़कों की स्थिति की निगरानी और रखरखाव को बेहतर बनाने के लिए AI यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित नई तकनीक का परीक्षण कर रही है। इस व्यवस्था की मदद से Smartphone से बनाए गए वीडियो के जरिए ग्रामीण सड़कों पर मौजूद गड्ढों, दरारों और दूसरी दिखाई देने वाली खराबियों की पहचान करने की कोशिश की जाएगी।
रिपोर्ट के अनुसार, ग्रामीण विकास मंत्रालय ने प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना यानी PMGSY के तहत बनाई गई सड़कों पर AI आधारित सड़क स्थिति आकलन प्रणाली के परीक्षण को सैद्धांतिक मंजूरी दी है। इसके तहत देशभर में एक Field Validation Exercise शुरू की गई है। यह प्रक्रिया 1 सितंबर से शुरू हुई और राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों ने परीक्षण के लिए अपनी Programme Implementation Units यानी PIUs की पहचान की है।
इस AI प्रणाली को सेंटर फ़ॉर डेवलपमेंट ऑफ़ एडवांस्ड कंप्यूटिंग (C-DAC) Centre for Development of Advanced Computing (C-DAC) और नेशनल रूरल इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट एजेंसी (NRIDA) National Rural Infrastructure Development Agency (NRIDA) मिलकर विकसित कर रहे हैं। इसका उद्देश्य सड़क निरीक्षण की मौजूदा व्यवस्था को तकनीक की मदद से अधिक प्रभावी बनाना है।
वर्तमान में PMGSY के तहत ग्रामीण सड़कों की निगरानी मुख्य रूप से अधिकारियों द्वारा किए जाने वाले भौतिक निरीक्षण और सड़क की स्थिति से जुड़ी Geo-tagged Photos के माध्यम से की जाती है। Field Officials अपनी जांच की तस्वीरें eMARG Mobile Application पर अपलोड करते हैं।
नई AI प्रणाली में इस प्रक्रिया को और तकनीकी बनाने की कोशिश की जा रही है। इसके तहत वाहनों से Smartphone के माध्यम से सड़क के वीडियो रिकॉर्ड किए जाएंगे। AI मॉडल इन वीडियो को देखकर सड़क पर दिखाई देने वाली विभिन्न खराबियों की पहचान करने का प्रयास करेगा।
परीक्षण के दौरान AI प्रणाली को ग्रामीण सड़कों पर दिखाई देने वाली सात प्रमुख प्रकार की खराबियों को पहचानने के लिए तैयार किया जा रहा है।
इनमें शामिल हैं:
गड्ढे (Potholes)
लंबी दरारें (Longitudinal Cracks)
आड़ी दरारें (Transverse Cracks)
सड़क के किनारे टूटना (Edge Breaks)
सतह का धंसना (Surface Depressions)
मरम्मत किए गए हिस्से या पैच (Patches)
वनस्पति से जुड़ी रुकावटें (Vegetation-related Obstructions)
इन खराबियों की पहचान होने के बाद AI से तैयार आकलन का इस्तेमाल यह समझने में किया जा सकता है कि किन सड़कों को रखरखाव या मरम्मत की जरूरत है।
परीक्षण के मौजूदा चरण में सड़क की स्थिति के वीडियो रिकॉर्ड करने के लिए ऐसे Mobile Devices का इस्तेमाल किया जा रहा है, जो पहले से ही Programme Implementation Units के पास उपलब्ध वाहनों में लगाए गए हैं।
इसका मतलब यह है कि शुरुआती परीक्षण के लिए अलग से महंगे उपकरण लगाने की जरूरत कम होगी। मौजूदा Smartphone और वाहन व्यवस्था के जरिए वीडियो रिकॉर्ड करके AI प्रणाली को जांचने की कोशिश की जा रही है।
हालांकि, भविष्य में अधिक सटीक और एक समान रिकॉर्डिंग के लिए Dedicated Dashcams के इस्तेमाल पर भी विचार किया जा सकता है। अभी इस बारे में अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है।
सरकार की योजना AI को सड़क की स्थिति का आकलन करने वाले एक Support Tool के रूप में इस्तेमाल करने की है। इसका मतलब है कि AI द्वारा किसी सड़क में खराबी की पहचान किए जाने के बाद उसे अंतिम रूप से सही मानने से पहले Engineers उसकी जांच करेंगे।
Field Engineers सड़क पर जाकर AI के निष्कर्षों की तुलना वास्तविक स्थिति और अपने निरीक्षण से करेंगे। इससे यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि AI प्रणाली कितनी सटीक तरीके से अलग-अलग खराबियों को पहचान पा रही है।
इस व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य यह भी है कि तकनीक के आधार पर मिलने वाले परिणामों और जमीन पर मौजूद वास्तविक स्थिति के बीच अंतर को समझा जा सके।
यदि AI प्रणाली द्वारा किसी सड़क की खराबी का आकलन Engineer की जांच से अलग पाया जाता है, तो Field Validation के दौरान उस अंतर की समीक्षा की जाएगी।
इसके आधार पर एक Verification और Review Protocol तैयार किया जाना प्रस्तावित है। व्यापक स्तर पर AI प्रणाली लागू करने से पहले यह देखा जाएगा कि तकनीक अलग-अलग परिस्थितियों, मौसम और सड़क की स्थिति में कितनी विश्वसनीय है।
सरकार यह भी देख रही है कि भविष्य में तकनीक की मदद से ग्रामीण सड़कों का आकलन हर तिमाही किया जा सकता है या नहीं। हालांकि, सड़क निरीक्षण की अंतिम आवृत्ति अभी तय नहीं हुई है।
AI आधारित निरीक्षण शुरू होने के बावजूद सड़क निर्माण और रखरखाव से जुड़े मौजूदा संविदात्मक प्रावधानों में बदलाव नहीं किया जा रहा है।
इनमें Defects Liability Period यानी दोष दायित्व अवधि भी शामिल है। PMGSY के तहत यह अवधि सड़क के निर्माण के पूरा होने की तारीख से पांच वर्ष की है।
इस दौरान सड़क निर्माण से जुड़े ठेकेदार की जिम्मेदारी रहती है कि वह सामने आने वाली खराबियों को ठीक करे और आवश्यक नियमित रखरखाव करे। AI प्रणाली का इस्तेमाल इस मौजूदा जिम्मेदारी को बदलने के बजाय सड़क की स्थिति की निगरानी को बेहतर बनाने के लिए किया जा रहा है।
AI आधारित सड़क आकलन प्रणाली का शुरुआती परीक्षण इस साल कुछ चुनिंदा क्षेत्रों में किया गया था। प्रारंभिक चरण में Pune, Lucknow district, Assam के Kamrup district और Meghalaya के Ri-Bhoi district में छह सड़कों को परीक्षण में शामिल किया गया।
इसके बाद AI मॉडल के बेहतर संस्करण का परीक्षण Kanpur district और Bhopal के Berasia block की सात सड़कों पर किया गया।
इन परीक्षणों का उद्देश्य यह देखना था कि Smartphone Videos से प्राप्त जानकारी को AI किस तरह पढ़ता है और सड़क की अलग-अलग खराबियों को कितनी सटीकता से पहचान सकता है।
अब देशभर में चल रही Field Validation Exercise के परिणाम इस परियोजना के अगले चरण के लिए महत्वपूर्ण होंगे। व्यापक स्तर पर इसे लागू करने से पहले तकनीकी प्रदर्शन, Field Operations की तैयारी और अधिकारियों की प्रतिक्रिया का आकलन किया जाएगा।
इसके बाद आगे की मंजूरियों और परीक्षण परिणामों के आधार पर यह तय किया जाएगा कि AI प्रणाली को PMGSY की सड़क निगरानी व्यवस्था में किस स्तर तक शामिल किया जाए।
ग्रामीण सड़कों की निगरानी के लिए AI का यह प्रयोग भारत में सड़क प्रबंधन में तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल का एक उदाहरण है। AI के जरिए बड़ी संख्या में सड़कों से जुड़ी जानकारी को व्यवस्थित तरीके से समझने और संभावित खराबियों को जल्दी पहचानने की कोशिश की जा रही है।
हाल ही में Delhi सरकार ने भी South Delhi में 420 किलोमीटर से अधिक सड़कों का AI आधारित Traffic और Safety Audit कराने का प्रस्ताव रखा है। इसका उद्देश्य Traffic Congestion वाले क्षेत्रों, Bottlenecks और दुर्घटना संभावित हिस्सों की पहचान करना है।
इस तरह AI का इस्तेमाल केवल सड़क की खराबी पहचानने तक सीमित नहीं रह गया है। आने वाले समय में सड़क रखरखाव, यातायात प्रबंधन और सड़क सुरक्षा से जुड़े निर्णयों में भी इसका उपयोग बढ़ सकता है।
यदि परीक्षण सफल रहता है और AI प्रणाली पर्याप्त सटीक साबित होती है, तो सड़क विभागों को बड़ी संख्या में सड़कों की स्थिति पर नियमित जानकारी जुटाने में मदद मिल सकती है। Smartphone Videos के माध्यम से सड़क की स्थिति का रिकॉर्ड तैयार होने से संभावित खराबियों को पहचानने की प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित हो सकती है।
हालांकि, AI के आकलन को अंतिम निर्णय का आधार बनाने से पहले Engineers द्वारा भौतिक सत्यापन जारी रहेगा। इससे तकनीक और मानव विशेषज्ञता को एक साथ इस्तेमाल करने का मॉडल तैयार हो सकता है।
कुल मिलाकर, सरकार का यह परीक्षण ग्रामीण सड़कों के रखरखाव में AI और डिजिटल तकनीक के इस्तेमाल की दिशा में एक नया कदम है। इसका वास्तविक प्रभाव राष्ट्रीय स्तर पर Validation पूरी होने और आगे की मंजूरियों के बाद ही स्पष्ट होगा।