स्पेसएक्स ने अपने ट्रांसपोर्टर-18 राइडशेयर Transporter-18 rideshare मिशन को सफलतापूर्वक अंतरिक्ष में भेज दिया। Falcon 9 रॉकेट के जरिए यह मिशन कैलिफोर्निया स्थित वैंडेनबर्ग स्पेस फ़ोर्स बेस Vandenberg Space Force Base से लॉन्च किया गया। इस मिशन के तहत कुल 130 व्यावसायिक और सरकारी पेलोड को निम्न-पृथ्वी कक्षा यानी Low-Earth Orbit (LEO) में स्थापित किया गया।
इस मिशन की सबसे खास बात यह रही कि इसमें Google का Project Suncatcher भी शामिल था। यह Google का एक प्रयोगात्मक उपग्रह प्रोजेक्ट है, जिसका उद्देश्य यह पता लगाना है कि कंपनी के AI हार्डवेयर को अंतरिक्ष के कठिन वातावरण में किस तरह संचालित किया जा सकता है। इस प्रयोग के जरिए Google यह समझने की कोशिश कर रहा है कि भविष्य में अंतरिक्ष में AI कंप्यूटिंग से जुड़ी तकनीकों का इस्तेमाल कितना व्यावहारिक हो सकता है।
Transporter-18 मिशन में शामिल सबसे महत्वपूर्ण पेलोड में Google का Project Suncatcher रहा। यह एक प्रोटोटाइप उपग्रह है, जिसे अंतरिक्ष में AI कंप्यूटिंग की संभावनाओं का अध्ययन करने के लिए तैयार किया गया है।
इस परियोजना में Google की Tensor Processing Units यानी TPUs का इस्तेमाल किया गया है। TPUs विशेष प्रकार के प्रोसेसर हैं, जिन्हें मशीन लर्निंग और AI से जुड़े कार्यों के लिए डिजाइन किया गया है। शुरुआती मिशन का मुख्य उद्देश्य यह जांचना है कि ये AI चिप्स अंतरिक्ष के चुनौतीपूर्ण वातावरण में किस तरह काम करते हैं।
Google के CEO Sundar Pichai ने 25 सितंबर को Project Suncatcher की घोषणा की थी। उन्होंने बताया था कि इस प्रोटोटाइप उपग्रह को Planet के साथ साझेदारी में अंतरिक्ष में भेजा जा रहा है।
प्रोजेक्ट सनकैचर गूगल के उस दीर्घकालिक शोध का हिस्सा है, जिसमें यह पता लगाया जा रहा है कि क्या भविष्य में अंतरिक्ष में बड़े स्तर पर AI कंप्यूटिंग ढांचा विकसित किया जा सकता है।
कंपनी खास तौर पर यह समझने की कोशिश कर रही है कि AI हार्डवेयर को Low-Earth Orbit में स्थापित करने से क्या संभावित फायदे मिल सकते हैं। Google के अनुसार, अंतरिक्ष में लगे सौर पैनल पृथ्वी पर मौजूद सौर ऊर्जा प्रणालियों की तुलना में अधिक लंबे समय तक सूर्य के प्रकाश का उपयोग कर सकते हैं। इससे भविष्य में अधिक मात्रा में सौर ऊर्जा उपलब्ध होने की संभावना हो सकती है।
हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि अंतरिक्ष में बड़े AI डेटा सेंटर तुरंत बनाए जा सकते हैं। इसके लिए कई तकनीकी चुनौतियों का समाधान करना होगा। बिजली की उपलब्धता, उपकरणों को ठंडा रखना, संचार व्यवस्था और अंतरिक्ष में हार्डवेयर की विश्वसनीयता जैसे कई पहलुओं का परीक्षण जरूरी होगा।
Google यह भी अध्ययन कर रहा है कि क्या भविष्य में कई उपग्रहों को आपस में जोड़कर एक distributed computing system बनाया जा सकता है।
ऐसी व्यवस्था में अलग-अलग उपग्रह आपस में संपर्क कर सकते हैं और मिलकर बड़े AI workloads को प्रोसेस कर सकते हैं। इससे अंतरिक्ष में मौजूद कई उपग्रह एक साझा कंप्यूटिंग नेटवर्क की तरह काम कर सकते हैं।
हालांकि, Project Suncatcher का पहला मिशन मुख्य रूप से बुनियादी तकनीक की जांच पर केंद्रित है। इसका उद्देश्य यह देखना है कि AI हार्डवेयर पृथ्वी के वायुमंडल से बाहर किस तरह काम करता है।
इस प्रयोग से वैज्ञानिकों और इंजीनियरों को यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि कौन-सी तकनीक अपेक्षा के अनुसार काम करती है, किन हिस्सों में समस्या आ सकती है और भविष्य के मिशनों के लिए किन क्षेत्रों में सुधार की जरूरत होगी।
Transporter-18 मिशन के दौरान Falcon 9 का पहला चरण सफलतापूर्वक पृथ्वी पर वापस लौटा। स्टेज से अलग होने के बाद बूस्टर ने Vandenberg Space Force Base के Landing Zone 4 पर सफल लैंडिंग की।
यह बूस्टर Transporter-18 से पहले ही 24 उड़ानें पूरी कर चुका था। इस मिशन के साथ इसकी कुल उड़ानों की संख्या 25 हो गई।
इस बूस्टर की पिछली उड़ानों में USSF-62, NROL-145, OneWeb Launch 20 और कई Starlink मिशन शामिल रहे हैं।
एक ही बूस्टर का बार-बार इस्तेमाल SpaceX की reusable rocket technology का महत्वपूर्ण हिस्सा है। सफल लैंडिंग से यह भी दिखता है कि Falcon 9 के पहले चरण को कई अलग-अलग मिशनों में दोबारा इस्तेमाल किया जा सकता है।
Transporter-18 मिशन में दुनियाभर के व्यावसायिक और सरकारी ग्राहकों के लिए कई तरह के अंतरिक्ष यान और पेलोड भेजे गए। इनमें CubeSats और microsatellites के साथ-साथ अन्य प्रकार के अंतरिक्ष उपकरण भी शामिल थे।
मिशन में hosted payloads के अलावा दो ऐसे अंतरिक्ष यान भी शामिल थे, जिनमें reentry vehicles लगे थे। इसके साथ चार orbital transfer vehicles भी मिशन का हिस्सा थे।
इन orbital transfer vehicles का काम अतिरिक्त अंतरिक्ष यानों को बाद के चरण में अलग-अलग कक्षाओं तक पहुंचाना है। इससे एक ही मुख्य लॉन्च के जरिए कई पेलोड को उनकी निर्धारित कक्षीय स्थिति तक पहुंचाना संभव होता है।
कुल 130 पेलोड के साथ Transporter-18 ने SpaceX के छोटे उपग्रहों के लिए बनाए गए rideshare कार्यक्रम के बड़े स्तर को प्रदर्शित किया।
Transporter-18 उस दिन SpaceX का दूसरा लॉन्च था। इससे पहले कंपनी ने अमेरिका के Florida Space Coast से एक crewed mission लॉन्च किया था, जिसमें अंतरिक्ष यात्रियों को NASA के लिए International Space Station यानी ISS की ओर भेजा गया।
इस मिशन में शामिल अंतरिक्ष यात्रियों के लिए लगभग छह महीने का अंतरिक्ष प्रवास निर्धारित किया गया था। इस तरह एक ही दिन SpaceX ने मानव अंतरिक्ष उड़ान और व्यावसायिक उपग्रह प्रक्षेपण, दोनों क्षेत्रों में मिशन संचालित किए।
यह SpaceX के व्यापक लॉन्च कार्यक्रम को भी दर्शाता है, जिसमें उपग्रहों की तैनाती, वैज्ञानिक अनुसंधान और मानव अंतरिक्ष उड़ान जैसे अलग-अलग प्रकार के मिशन शामिल हैं।
Transporter-18 के जरिए Project Suncatcher को अंतरिक्ष में भेजे जाने से Google को AI कंप्यूटिंग हार्डवेयर के वास्तविक अंतरिक्ष वातावरण में प्रदर्शन से जुड़ा महत्वपूर्ण डेटा प्राप्त करने का अवसर मिलेगा।
इस प्रयोग से बिजली की उपलब्धता, ताप प्रबंधन, संचार व्यवस्था और AI प्रोसेसर की विश्वसनीयता जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं को समझने में मदद मिल सकती है।
फिलहाल Project Suncatcher एक शोध और प्रयोगात्मक परियोजना है। इसे अभी अंतरिक्ष में संचालित होने वाले किसी बड़े डेटा सेंटर के रूप में नहीं देखा जा सकता। हालांकि, इसके परीक्षण से मिलने वाले परिणाम यह तय करने में मदद कर सकते हैं कि भविष्य में इस विचार को बड़े स्तर पर विकसित किया जा सकता है या नहीं।
यदि तकनीक सफल साबित होती है, तो भविष्य में ऐसे बड़े उपग्रह समूहों की संभावना पर आगे शोध किया जा सकता है, जो अंतरिक्ष में AI workloads को संभालने में सक्षम हों। Project Suncatcher इसलिए Google के लिए केवल एक उपग्रह प्रयोग नहीं, बल्कि अंतरिक्ष और AI कंप्यूटिंग के बीच संभावित संबंध को समझने की दिशा में एक शुरुआती कदम है।