Google ने भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए कई नई पहलों की घोषणा की है। कंपनी Google.org के माध्यम से भारत के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) की मदद के लिए 15 मिलियन डॉलर की फंडिंग देगी। इसके साथ ही शिक्षकों के लिए AI प्रशिक्षण कार्यक्रम का विस्तार किया जा रहा है, जिसके तहत वे मुफ्त ऑनलाइन कोर्स के जरिए अपनी सुविधानुसार प्रशिक्षण प्राप्त कर सकेंगे।
इन पहलों का मुख्य उद्देश्य शिक्षा और छोटे कारोबारों में AI का व्यावहारिक इस्तेमाल बढ़ाना है। इसके तहत कारोबारियों को कर्ज प्राप्त करने, नए बाजारों की पहचान करने और जरूरी नियमों का पालन करने में मदद देने वाले AI समाधान विकसित किए जाएंगे। वहीं, शिक्षकों को पढ़ाई की तैयारी और कक्षा में डिजिटल टूल्स के इस्तेमाल के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा। Google राज्य सरकारों और शैक्षणिक संस्थानों के साथ मिलकर AI शिक्षा और शोध को भी बढ़ावा देने की दिशा में काम कर रहा है।
गूगल ने अपनी AI एजुकेटर सीरीज़ Google AI Educator Series का विस्तार किया है। यह कार्यक्रम भारत में मई में शुरू किया गया था, जिसका उद्देश्य शिक्षकों को पढ़ाने के तरीकों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग करना सिखाना है। कंपनी के अनुसार, इस पहल के शुरू होने के बाद से 80,000 से अधिक शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है।
अब शिक्षक मुफ्त ऑनलाइन कोर्स के माध्यम से अपनी गति और सुविधा के अनुसार सीख सकेंगे। इसके लिए उन्हें किसी तय समय पर कक्षा में शामिल होने की जरूरत नहीं होगी। इस कोर्स का उद्देश्य शिक्षकों को AI की उपयोगिता समझाना और उनकी रोजमर्रा की शैक्षणिक जिम्मेदारियों को आसान बनाना है।
इस कार्यक्रम में शिक्षकों को Gemini और Gemini Notebook जैसे AI टूल्स के बारे में जानकारी दी जाएगी। इनकी मदद से शिक्षक पाठ योजनाएं तैयार कर सकते हैं, पढ़ाई से जुड़ी सामग्री विकसित कर सकते हैं और कक्षा की तैयारी में लगने वाला समय कम कर सकते हैं।
इस पहल का उद्देश्य शिक्षकों की भूमिका को AI से बदलना नहीं, बल्कि उनके काम को अधिक आसान और प्रभावी बनाना है। इन तकनीकों की बेहतर समझ से शिक्षक पढ़ाई की गुणवत्ता सुधारने और विद्यार्थियों की जरूरतों के अनुसार शिक्षण सामग्री तैयार करने में मदद ले सकते हैं।
Google इस कार्यक्रम का विस्तार करने के लिए बिहार, मध्य प्रदेश और सिक्किम की राज्य सरकारों के साथ काम कर रहा है। इसके अलावा, कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय भी इस पहल से जुड़ा है।
फिलहाल यह कोर्स अंग्रेजी में उपलब्ध है। कंपनी को उम्मीद है कि अक्टूबर के अंत तक इसके हिंदी, मराठी, तेलुगु, असमिया, ओड़िया और पंजाबी संस्करण भी उपलब्ध हो जाएंगे। यह कार्यक्रम राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 National Education Policy (NEP) 2020 के उद्देश्यों के अनुरूप है, जो भारत की शिक्षा व्यवस्था में सुधार और आधुनिक शिक्षण तरीकों को बढ़ावा देने पर जोर देती है।
Google 100 अटल टिंकरिंग लैब में शिक्षकों को सहायता देने के लिए भी काम कर रहा है। इस पहल के तहत ATL Saathi नामक Gemini-आधारित डेस्कटॉप एप्लिकेशन का उपयोग किया जाएगा। इसका उद्देश्य विज्ञान, तकनीक, इंजीनियरिंग और गणित (STEM) की पढ़ाई को अधिक व्यावहारिक और रोचक बनाना है।
इस एप्लिकेशन की मदद से शिक्षक विद्यार्थियों को गतिविधि-आधारित शिक्षा से जोड़ सकते हैं और पढ़ाई से संबंधित संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल कर सकते हैं। AI टूल्स को STEM पाठ्यक्रम से जोड़ने का उद्देश्य विद्यार्थियों में तकनीकी समझ, रचनात्मकता और समस्या सुलझाने की क्षमता विकसित करना है।
इसके अलावा, Google ने IIT Bombay और प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार कार्यालय के साथ साझेदारी की भी घोषणा की है। इन सहयोगों का उद्देश्य शैक्षणिक संस्थानों में AI शोध को बढ़ावा देना और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उपयोगी अनुप्रयोगों की खोज को प्रोत्साहित करना है।
Google.org भारत के गैर-लाभकारी संगठन The/Nudge को 15 मिलियन डॉलर का अनुदान देगा। इस राशि का इस्तेमाल देश के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों के लिए AI-आधारित समाधान विकसित करने में किया जाएगा।
Google के अनुसार, भारत में 9 करोड़ से अधिक MSMEs हैं, जो सामूहिक रूप से 34.5 करोड़ से ज्यादा लोगों को रोजगार देते हैं। ये उद्यम देश की अर्थव्यवस्था और रोजगार व्यवस्था में अहम भूमिका निभाते हैं। हालांकि, इनमें से कई कारोबारियों को औपचारिक वित्तीय सेवाओं तक पहुंचने, नए ग्राहकों तक पहुंच बनाने और सरकारी नियमों का पालन करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
इस फंडिंग से ऐसे AI समाधान तैयार किए जाएंगे, जो छोटे कारोबारियों को औपचारिक कर्ज प्राप्त करने, नए बाजार खोजने और जरूरी नियमों का पालन करने में सहायता कर सकें।
बेहतर वित्तीय सेवाओं तक पहुंच से पात्र कारोबारियों को उपलब्ध कर्ज विकल्पों की जानकारी मिल सकती है। वहीं, बाजार की पहचान करने वाले टूल्स संभावित ग्राहकों और कारोबार बढ़ाने के नए अवसरों को खोजने में मदद कर सकते हैं।
इसके अलावा, AI आधारित अनुपालन सहायता कारोबारियों के प्रशासनिक काम को आसान बना सकती है। इससे छोटे उद्यमियों को जरूरी दस्तावेजों और नियमों से जुड़े काम संभालने में कम समय लग सकता है। इस पहल का मुख्य जोर उन व्यावहारिक समस्याओं को दूर करना है, जो छोटे कारोबारों की तरक्की में बाधा बनती हैं।
इस पहल के तहत MSMEs की समस्याओं को हल करने वाले नए AI समाधानों के लिए प्रस्ताव भी आमंत्रित किए जाएंगे। इसके साथ ही छोटे शहरों और कस्बों में लोगों को रोजगार के लिए जरूरी कौशल सिखाने के उद्देश्य से बहुभाषी और आवाज पर आधारित एक डिजिटल मंच विकसित करने की योजना है।
यह मंच विशेष रूप से टियर-3 और टियर-4 शहरों में रहने वाले लोगों के लिए उपयोगी हो सकता है। इसके जरिए लोगों को रोजगार से जुड़े कौशल सीखने और छोटे कारोबारों के साथ रोजगार के अवसरों के लिए जुड़ने में मदद मिल सकती है।
आवाज के माध्यम से प्रशिक्षण और कई भाषाओं में उपलब्ध सामग्री का उद्देश्य उन लोगों तक भी पहुंच बनाना है, जिन्हें अंग्रेजी या डिजिटल तकनीक का अधिक अनुभव नहीं है।
Google की नई घोषणाएं शिक्षा, शोध, कौशल विकास और छोटे कारोबारों में AI के इस्तेमाल को बढ़ावा देने पर केंद्रित हैं। शिक्षकों के प्रशिक्षण कार्यक्रम से पढ़ाई की तैयारी आसान हो सकती है, जबकि The/Nudge को मिलने वाली फंडिंग MSMEs की वित्तीय और व्यावसायिक चुनौतियों को दूर करने में मदद कर सकती है।
क्षेत्रीय भाषाओं में प्रशिक्षण और आवाज आधारित डिजिटल मंच की योजना यह भी दर्शाती है कि AI सेवाओं को बड़े शहरों से आगे छोटे शहरों और कस्बों तक पहुंचाने पर ध्यान दिया जा रहा है।
हालांकि, इन पहलों की वास्तविक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि इन्हें कितनी प्रभावी तरीके से लागू किया जाता है, कितने शिक्षक और कारोबारी इनका उपयोग करते हैं और इनके परिणामों से कितना वास्तविक लाभ मिलता है।
Google की 15 मिलियन डॉलर की फंडिंग और शिक्षकों के लिए मुफ्त AI प्रशिक्षण का विस्तार भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के व्यावहारिक उपयोग को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। इन कार्यक्रमों के जरिए कंपनी शिक्षा, कौशल विकास, शोध और छोटे कारोबारों को सहयोग देने का प्रयास कर रही है।
यदि इन पहलों को प्रभावी ढंग से लागू किया जाता है, तो इनसे शिक्षकों का काम आसान बनाने, छोटे कारोबारों के विकास में मदद करने और रोजगार से जुड़े कौशल को बढ़ावा देने के अवसर मिल सकते हैं।