गूगल ने भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI के इस्तेमाल को वास्तविक और रोजमर्रा की समस्याओं से जोड़ने की दिशा में पांच नई टिकाऊ विकास पहलों की घोषणा की है। इन पहलों का संबंध सौर ऊर्जा, स्वच्छ ऊर्जा, कृषि, जलवायु अनुसंधान और स्टार्टअप से है। कंपनी का कहना है कि इन परियोजनाओं में AI, सैटेलाइट तस्वीरों और दूसरी आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया जाएगा, ताकि भारत को स्वच्छ ऊर्जा की ओर बढ़ने में मदद मिल सके और पर्यावरण से जुड़ी चुनौतियों का समाधान तलाशा जा सके।
इन घोषणाओं में सबसे महत्वपूर्ण पहल गूगल के Solar API का विस्तार है। अब यह तकनीक भारत में 30 करोड़ से अधिक छतों के बारे में जानकारी और उनके सौर ऊर्जा की क्षमता से जुड़े अनुमान उपलब्ध करा सकती है। इससे घरों की छतों पर सोलर पैनल लगाने की योजना बनाने वाली कंपनियों और इंस्टॉलर्स को काफी मदद मिल सकती है।
भारत में छतों पर सौर ऊर्जा लगाने का चलन लगातार बढ़ रहा है। सरकार की पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना PM Surya Ghar: Muft Bijli Yojana जैसी योजनाओं ने भी घरेलू रूफटॉप सोलर को बढ़ावा देने में भूमिका निभाई है। ऐसे समय में गूगल का Solar API विस्तार सौर ऊर्जा क्षेत्र में तकनीक के इस्तेमाल को और बढ़ा सकता है।
Google का Solar API AI Google's Solar API AI और सैटेलाइट इमेजरी की मदद से किसी छत की सौर क्षमता से जुड़ी जानकारी उपलब्ध कराता है। सोलर इंस्टॉलर इस जानकारी का इस्तेमाल यह समझने के लिए कर सकते हैं कि किसी घर की छत पर कितनी सौर ऊर्जा पैदा करने की संभावना है।
इस तकनीक की मदद से इंस्टॉलर को शुरुआती स्तर पर हर घर की छत का निरीक्षण करने के लिए मौके पर जाने की आवश्यकता कम हो सकती है। उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर सोलर सिस्टम का डिजाइन तैयार करने और ग्राहक के लिए प्रस्ताव बनाने में भी मदद मिल सकती है।
Google के अनुसार, Solar Ladder और OpenSolar जैसे प्लेटफॉर्म पहले से Solar API को अपने कामकाज में इस्तेमाल कर रहे हैं। इससे सोलर सिस्टम लगाने की प्रक्रिया को अधिक डेटा आधारित और व्यवस्थित बनाने में मदद मिल सकती है।
भारत में रूफटॉप सोलर का विस्तार होने के साथ ऐसी तकनीकें उपभोक्ताओं, इंस्टॉलर्स और सौर ऊर्जा कंपनियों के लिए योजना बनाने की प्रक्रिया को आसान बना सकती हैं।
Google ने भारत में स्वच्छ ऊर्जा से जुड़े अपने प्रयासों को आगे बढ़ाते हुए ReNew Power के साथ राजस्थान में 150MW की सौर परियोजना के लिए दीर्घकालिक समझौता भी किया है।
यह भारत में Google की Scope 3 पर केंद्रित दूसरी सौर परियोजना है। इस समझौते के बाद ReNew के साथ Google की कुल अनुबंधित सौर क्षमता बढ़कर 300MW हो गई है।
यह पहल Google की ओर से अपने परिचालन और व्यापक मूल्य श्रृंखला से जुड़े कार्बन उत्सर्जन को कम करने की कोशिशों का हिस्सा है। साथ ही, इससे भारत में स्वच्छ ऊर्जा क्षमता बढ़ाने में भी योगदान मिल सकता है।
Google की नई पहलों का फोकस केवल सौर ऊर्जा तक सीमित नहीं है। कंपनी कृषि और जलवायु क्षेत्र में भी तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाने की कोशिश कर रही है। इसके लिए Google ने Mitti Labs के साथ मिलकर तेलंगाना के हजारों छोटे और सीमांत धान किसानों से जुड़ी एक परियोजना शुरू की है।
इस परियोजना के तहत किसानों को Alternate Wetting and Drying यानी AWD नामक खेती की पद्धति अपनाने में मदद की जाएगी। सामान्य तौर पर धान के खेतों में लंबे समय तक पानी भरा रहता है। AWD पद्धति में खेतों को लगातार पानी में डुबोकर रखने के बजाय समय-समय पर पानी निकालने और फिर जरूरत के अनुसार दोबारा भरने की व्यवस्था की जाती है।
इस तरीके से खेती में पानी की खपत कम करने में मदद मिल सकती है। इसके साथ ही इसका पर्यावरण पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
लगातार पानी से भरे धान के खेतों से मीथेन जैसी ग्रीनहाउस गैस का उत्सर्जन हो सकता है। जब खेतों से कुछ समय के लिए पानी निकाला जाता है, तो मिट्टी में ऑक्सीजन पहुंचती है। इससे मीथेन बनने की प्रक्रिया को कम करने में मदद मिल सकती है।
Google के अनुसार, यह परियोजना 20 वर्षों में लगभग 30 लाख टन CO2 के बराबर उत्सर्जन कम करने में मदद कर सकती है। परियोजना के प्रभाव का आकलन सैटेलाइट डेटा और खेतों में मौजूद निगरानी नेटवर्क के माध्यम से किया जाएगा।
Google अपने Center for Climate Technology का भी विस्तार कर रहा है। कंपनी ने इस केंद्र को फरवरी में भारत सरकार के Office of the Principal Scientific Adviser के साथ मिलकर शुरू किया था।
शुरुआत में केंद्र का ध्यान हरित कार्यबल को तैयार करने और कम-कार्बन निर्माण सामग्री जैसे क्षेत्रों पर था। अब इसके दायरे में जल संरक्षण, ई-कचरा और बैटरी रीसाइक्लिंग को भी शामिल किया जाएगा।
भारत में इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के इस्तेमाल में तेजी के साथ ई-कचरे की मात्रा भी बढ़ रही है। वहीं इलेक्ट्रिक वाहनों और बैटरी आधारित तकनीकों के विस्तार के कारण बैटरी के सुरक्षित पुनर्चक्रण की जरूरत भी बढ़ रही है। ऐसे में इन क्षेत्रों में तकनीकी समाधान विकसित करना पर्यावरणीय दृष्टि से महत्वपूर्ण हो सकता है।
Google ने अपने Google DeepMind Accelerator: AI for the Planet कार्यक्रम के तहत चार भारतीय स्टार्टअप को भी समर्थन देने की घोषणा की है। इन स्टार्टअप में Terrastack, Varaha Climate, Farmers for Forests और Climitra Carbon शामिल हैं।
ये स्टार्टअप AI, सैटेलाइट डेटा, ड्रोन और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल कृषि, जैव विविधता और कार्बन प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में कर रहे हैं।
इस तरह की तकनीक से खेतों की निगरानी, पर्यावरणीय बदलावों की पहचान, कार्बन से जुड़े आंकड़ों का आकलन और प्राकृतिक संसाधनों के बेहतर प्रबंधन में मदद मिल सकती है। स्टार्टअप को तकनीकी और विशेषज्ञ सहायता मिलने से ऐसे समाधानों को बड़े स्तर पर लागू करने की संभावना भी बढ़ सकती है।
Google की पांच नई पहल यह दिखाती हैं कि AI का इस्तेमाल अब केवल चैटबॉट, सॉफ्टवेयर या डिजिटल सेवाओं तक सीमित नहीं रह गया है। कंपनी भारत में इसे सौर ऊर्जा, खेती, पानी, बिजली, ई-कचरे और जलवायु अनुसंधान जैसी वास्तविक समस्याओं से जोड़ने की कोशिश कर रही है।
भारत जैसे बड़े और विविध देश में सैटेलाइट डेटा और AI का इस्तेमाल संसाधनों की निगरानी तथा बेहतर योजना बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। छतों की सौर क्षमता का अनुमान लगाने से लेकर खेतों में पानी के बेहतर इस्तेमाल और कार्बन उत्सर्जन कम करने तक, इन तकनीकों का असर कई क्षेत्रों में दिखाई दे सकता है।
इन पहलों की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि तकनीक को जमीनी स्तर पर कितनी प्रभावी ढंग से लागू किया जाता है और किसानों, सोलर इंस्टॉलर्स, स्टार्टअप तथा अन्य हितधारकों को इसका वास्तविक लाभ कितना मिलता है। फिर भी Google की ये घोषणाएं यह संकेत देती हैं कि आने वाले समय में AI भारत की स्वच्छ ऊर्जा और पर्यावरणीय चुनौतियों से निपटने की रणनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकता है।