Google ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी AI की कंप्यूटिंग क्षमता को अंतरिक्ष तक ले जाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। कंपनी का Project Suncatcher अब अपने पहले कक्षीय परीक्षण की ओर बढ़ रहा है। इस परीक्षण के तहत एक प्रोटोटाइप उपग्रह को अंतरिक्ष में भेजा जाएगा, ताकि यह देखा जा सके कि Google के Tensor Processing Units (TPUs) अंतरिक्ष के कठिन वातावरण में किस तरह काम करते हैं।
Google ने 24 सितंबर 2026 को बताया कि यह परीक्षण SpaceX के Transporter-18 साझा प्रक्षेपण मिशन के माध्यम से किया जाएगा। इस मिशन में Google ने उपग्रह कंपनी Planet के साथ साझेदारी की है। वर्तमान प्रक्षेपण कार्यक्रम के अनुसार Transporter-18 मिशन को 1 अक्टूबर 2026 को कैलिफोर्निया के वैंडेनबर्ग स्पेस फोर्स बेस से लॉन्च करने की योजना है।
गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई Google CEO Sundar Pichai ने सोशल मीडिया मंच X पर इस परियोजना के बारे में लिखा कि क्या Google के TPU अंतरिक्ष में सुरक्षित रहकर काम कर सकते हैं, इसका पता अब लगाया जाएगा। उन्होंने इसे TPUs के लिए “एक छोटा कदम” बताया।
प्रोजेक्ट सनकैचर Google की एक दीर्घकालिक शोध परियोजना है, जिसका उद्देश्य यह पता लगाना है कि भविष्य में अंतरिक्ष में बड़े स्तर पर AI कंप्यूटिंग ढांचा स्थापित किया जा सकता है या नहीं। Google ने इस परियोजना की घोषणा नवंबर 2025 में की थी। उस समय कंपनी ने बताया था कि वह सौर ऊर्जा से चलने वाले उपग्रहों के ऐसे नेटवर्क की संभावनाओं का अध्ययन कर रही है, जिनमें उसके TPU चिप लगाए जा सकें।
Google के अनुसार, पृथ्वी की निचली कक्षा यानी Low Earth Orbit (LEO) में मौजूद उपग्रहों को लगभग लगातार सूर्य का प्रकाश मिल सकता है। कंपनी का अनुमान है कि अंतरिक्ष में सौर ऊर्जा से पृथ्वी की तुलना में आठ गुना तक अधिक सौर ऊर्जा उपलब्ध हो सकती है।
भविष्य में ऐसे कई उपग्रहों को एक नेटवर्क में जोड़ा जा सकता है। इससे वे मिलकर बड़े AI कार्यों को अंतरिक्ष में ही पूरा करने में सक्षम हो सकते हैं।
AI मॉडल लगातार बड़े और अधिक शक्तिशाली होते जा रहे हैं। इन्हें चलाने के लिए भारी मात्रा में कंप्यूटिंग शक्ति और बिजली की आवश्यकता होती है। इसी कारण Google जैसी कंपनियां भविष्य के लिए ऐसे विकल्पों पर शोध कर रही हैं, जो AI के बढ़ते कंप्यूटिंग बोझ को संभाल सकें।
अंतरिक्ष आधारित कंप्यूटिंग में सौर ऊर्जा की उपलब्धता एक महत्वपूर्ण संभावित लाभ हो सकती है। हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि अंतरिक्ष में AI डेटा सेंटर तुरंत स्थापित होने वाले हैं। Google इसे अभी एक शुरुआती शोध और परीक्षण परियोजना के रूप में देख रहा है।
पहले परीक्षण का मुख्य उद्देश्य यह जानना है कि Google के TPU अंतरिक्ष के वास्तविक वातावरण में कैसे काम करते हैं। रॉकेट लॉन्च के दौरान उपग्रहों और उनके भीतर लगे उपकरणों को तेज कंपन और अत्यधिक त्वरण का सामना करना पड़ता है।
Google के अनुसार, रॉकेट के अंतरिक्ष तक पहुंचने की लगभग 10 मिनट की यात्रा के दौरान अंतरिक्ष यान पर पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण बल से करीब 10 गुना तक भार पड़ सकता है। कुछ अलग-अलग उपकरणों पर यह बल 50 से 100 गुना तक पहुंच सकता है।
कंपनी ने जमीन पर कंपन परीक्षण करके उपग्रह को अलग-अलग दिशाओं में तेज गति से हिलाया, ताकि रॉकेट लॉन्च जैसी परिस्थितियों को दोहराया जा सके। Google ने बताया कि परीक्षणों में हार्डवेयर ने इन दबावों को सहन किया।
अंतरिक्ष में इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के लिए विकिरण एक गंभीर चुनौती है। पृथ्वी के वायुमंडल के बाहर सौर गतिविधियां और कॉस्मिक किरणें इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को प्रभावित कर सकती हैं।
Google ने अपने TPU को विकिरण के प्रभाव को समझने के लिए अमेरिका की UC Davis Crocker Nuclear Laboratory में प्रोटॉन बीम परीक्षण से गुजारा। इन परीक्षणों के दौरान AI कार्य चलाए गए और यह देखा गया कि विकिरण के कारण होने वाली त्रुटियां कंप्यूटिंग पर किस तरह असर डालती हैं।
Google के शुरुआती परिणामों के अनुसार, उसके Trillium TPU ने अपेक्षाकृत अच्छा प्रदर्शन किया और पांच वर्ष के अंतरिक्ष मिशन में अपेक्षित कुल विकिरण खुराक से भी अधिक स्तर को सहन करने की क्षमता दिखाई। हालांकि, कंपनी का कहना है कि वास्तविक अंतरिक्ष वातावरण में परीक्षण से ही अधिक उपयोगी जानकारी मिलेगी।
अंतरिक्ष में AI कंप्यूटिंग का एक और बड़ा सवाल है—गर्मी को कैसे नियंत्रित किया जाए।
TPU चिप बहुत अधिक कंप्यूटिंग करते समय काफी गर्मी पैदा कर सकती है। पृथ्वी पर कंप्यूटर और डेटा सेंटर में हवा और अन्य शीतलन प्रणालियों की मदद से गर्मी को बाहर निकाला जाता है। लेकिन अंतरिक्ष में वातावरण लगभग निर्वात होता है और सामान्य तरीके से हवा का प्रवाह उपलब्ध नहीं होता।
Google इस समस्या के समाधान के लिए हीट पाइप और रेडिएटर जैसी तकनीकों पर काम कर रहा है। कंपनी ने थर्मल वैक्यूम चैंबर में अंतरिक्ष जैसी गर्मी और निर्वात की परिस्थितियां बनाकर इन प्रणालियों का परीक्षण भी किया है। अब वास्तविक अंतरिक्ष परीक्षण से यह पता चलेगा कि ये प्रणालियां कितनी प्रभावी हैं।
Google की दीर्घकालिक योजना केवल एक उपग्रह तक सीमित नहीं है। कंपनी भविष्य में ऐसे उपग्रहों के समूह की कल्पना कर रही है, जिनमें कई TPU चिप लगे हों और जो एक-दूसरे के साथ मिलकर AI कंप्यूटिंग का काम करें।
इन उपग्रहों के बीच तेज संचार के लिए लेजर आधारित संपर्क प्रणाली का इस्तेमाल किया जा सकता है। Google के अनुसार, भविष्य के उपग्रहों को अपनी स्थिति और आसपास मौजूद दूसरे उपग्रहों की स्थिति की जानकारी लगातार रखनी होगी।
कंपनी ने बताया है कि 2027 में दो उपग्रहों के जरिए इस तरह के संपर्क से जुड़ी तकनीक का परीक्षण करने की योजना है।
अंतरिक्ष में कंप्यूटिंग की संभावना पर केवल Google ही काम नहीं कर रहा है। SpaceX और Tesla के प्रमुख एलन मस्क भी भविष्य में बड़ी मात्रा में कंप्यूटिंग क्षमता को अंतरिक्ष में ले जाने की संभावना की बात कर चुके हैं।
मस्क ने Google के Project Suncatcher से जुड़े एक वीडियो को साझा करते हुए कहा कि भविष्य में अंतरिक्ष में मौजूद कंप्यूटिंग क्षमता कुल कंप्यूटिंग का बहुत बड़ा हिस्सा हो सकती है।
हालांकि, अभी ऐसी स्थिति दूर है। Google स्वयं Project Suncatcher को एक दीर्घकालिक शोध परियोजना बता रहा है। पहला परीक्षण मुख्य रूप से यह समझने के लिए है कि हार्डवेयर, तापमान, विकिरण, संचार और अंतरिक्ष के अन्य भौतिक दबावों के बीच कैसे काम करता है।
Project Suncatcher अभी किसी तैयार अंतरिक्ष डेटा सेंटर की शुरुआत नहीं है। यह एक शुरुआती प्रयोग है, जिसके जरिए Google यह समझना चाहता है कि AI कंप्यूटिंग को अंतरिक्ष में ले जाने के लिए किन तकनीकी समस्याओं का समाधान करना होगा।
1 अक्टूबर 2026 के लिए निर्धारित Transporter-18 मिशन के साथ होने वाला परीक्षण Google को वास्तविक अंतरिक्ष वातावरण से महत्वपूर्ण आंकड़े उपलब्ध करा सकता है। इन आंकड़ों के आधार पर भविष्य के उपग्रहों, शीतलन प्रणालियों, विकिरण सुरक्षा और उपग्रहों के बीच संचार तकनीक में सुधार किया जा सकता है।
Google का कहना है कि बड़े तकनीकी बदलाव अक्सर एक बड़े लक्ष्य से शुरू होते हैं, लेकिन उन्हें हासिल करने के लिए छोटे-छोटे और व्यवस्थित प्रयोग करने पड़ते हैं। Project Suncatcher भी इसी सोच के तहत AI कंप्यूटिंग के भविष्य की एक संभावित दिशा तलाश रहा है।