Google ने Google Maps के लिए एक नए फीचर की घोषणा की, जिससे यूजर्स सीधे ऐप के अंदर ही जगहों के बारे में मुश्किल और असल दुनिया से जुड़े सवाल पूछ सकते हैं। इस फीचर को 'Ask Maps' नाम दिया गया है। ये यूजर्स को आम बोलचाल की भाषा में सवाल पूछने और Maps के डेटा पर बेस्ड AI से मिले जवाब पाने की सुविधा देता है। इसके साथ ही इस टेक दिग्गज कंपनी ने 'Immersive Navigation' भी लॉन्च किया है, जिसे उसने Google Maps में ड्राइविंग के अनुभव के लिए एक दशक से भी ज्यादा समय का सबसे बड़ा अपडेट बताया है।
'Ask Maps' फीचर, कंपनी के Gemini AI मॉडल्स को प्लेटफॉर्म के बड़े मैपिंग डेटाबेस के साथ जोड़ता है। इससे यूजर्स को ऐसे जवाब मिल पाते हैं, जो ट्रेडिशनल Maps पहले नहीं दे पाते थे। Google ने कहा कि ऐप के अंदर एक नया 'Ask Maps' बटन दिया गया है, जिससे यूजर्स टेक्स्ट या आवाज के जरिए सवाल पूछ सकते हैं।
उदाहरण के लिए यूजर्स ऐसे सवाल पूछ सकते हैं, कि किसी खास समय पर किसी जगह तक पहुंचने के लिए गाड़ी चलाना बेहतर रहेगा या मेट्रो लेना, या फिर रास्ते में उन्हें कॉफी कहां मिल सकती है। कंपनी का दावा है, कि Google Maps ट्रैफिक की स्थिति, सफर में लगने वाला अनुमानित समय और आस-पास की जगहों का विश्लेषण करके नेविगेशन डायरेक्शन्स के साथ-साथ सजेशन भी देता है।
इसके अलावा ये ट्रिप प्लानिंग और नई जगहों को खोजने में भी मदद कर सकता है। उदाहरण के लिए जो यूजर्स रात में बाहर घूमने का प्लान बना रहे हैं, वे ऐसे सवाल पूछ सकते हैं, कि वे वेजिटेरियन स्नैक्स का मजा लेते हुए लाइव स्पोर्ट्स मैच कहां देख सकते हैं। इसके बाद 'Ask Maps' उपलब्ध डेटा को स्कैन करके रेलेवेंट सजेशन्स और इनसाइट्स दिखाता है, जैसे कि पॉपुलर मेन्यू आइटम्स, मैच के दिनों में वहां का माहौल कैसा रहता है, या वहां वैले पार्किंग की सुविधा उपलब्ध है, या नहीं।
ये फीचर यूजर की ऐप में की गई एक्टिविटीज के आधार पर जवाबों को पर्सनलाइज भी कर सकता है। ये उन जगहों को भी ध्यान में रखता है, जिन्हें यूजर्स ने पहले Maps में खोजा या सेव किया है। एक उदाहरण देते हुए Google ने बताया कि अगर कोई यूजर आम तौर पर शाकाहारी रेस्टोरेंट खोजता है, तो AI फीचर किसी नए शहर में खाने की जगहें सुझाते समय ऐसे ही ऑप्शन्स को प्राथमिकता देगा, जिससे यूजर की पसंद के मुताबिक बेहतर सुझाव मिल सकें।
Google के मुताबिक ये कन्वर्सेशनल इंटरफेस आगे के सवालों को भी सपोर्ट करता है। यूजर्स और सवाल पूछकर अपनी सर्च को और बेहतर बना सकते हैं, जैसे कि किस जगह पर पार्किंग की सुविधा ज्यादा आसान है या वहां पहुंचना ज्यादा सुविधाजनक है।
दावा किया गया है, कि AI पर बेस्ड ये एक्सपीरिएंस Google Maps पर उपलब्ध 30 करोड़ से भी ज्यादा जगहों की जानकारी पर बेस्ड है। ये भी कहा गया है, कि ये सिस्टम 50 करोड़ से भी ज्यादा कंट्रीब्यूटर्स के ग्लोबल कम्युनिटी से मिली जानकारी का भी इस्तेमाल करता है, जो जगहों के बारे में रिव्यू, फोटो, रेटिंग और अपडेट देते रहते हैं। Google Maps के Android और iOS वर्जन पर 'Ask Maps' फीचर भारत और US में रोल आउट होना शुरू हो गया है। ये फ़िलहाल अंग्रेजी में उपलब्ध है, और जल्द ही इसमें हिंदी सपोर्ट भी आने की उम्मीद है।
Ask Maps के साथ-साथ Google ने 'इमर्सिव नेविगेशन' की भी घोषणा की है। इसे Google Maps में ड्राइविंग के लिए एक दशक से भी ज्यादा समय का सबसे बड़ा अपडेट बताया जा रहा है। कंपनी के मुताबिक ऐप में विज़ुअल्स को फिर से डिजाइन किया गया है, जिससे ड्राइविंग से जुड़े गाइडेंस ज्यादा साफ और समझने में आसान हो जाते हैं। इस अपडेट के बाद Google Maps आस-पास के माहौल का 3D नजारा दिखा सकता है, जिसमें रास्ते में आने वाली इमारतें, जमीन की बनावट और ओवरपास शामिल हैं।
कंपनी के मुताबिक ये ऐप सड़क से जुड़ी जरूरी जानकारियों- जैसे लेन, क्रॉसवॉक, ट्रैफिक लाइट और स्टॉप साइन को भी तब हाइलाइट करता है, जब वे काम के होते हैं। रास्तों की ये स्पैटियल अंडरस्टैंडिंग Gemini मॉडल्स की मदद से काम करती है, जो Street View और हवाई तस्वीरों से मिली असल दुनिया की इमेजरी का विश्लेषण करते हैं।
Google Maps आगे के रास्ते का एक बड़ा प्रीव्यू भी देगा, ताकि ड्राइवर आने वाले मोड़ों या लेन बदलने की स्थितियों का बेहतर अंदाजा लगा सकें। वॉयस नेविगेशन के इंस्ट्रक्शन्स को भी अपडेट किया गया है, ताकि वे सुनने में ज्यादा बातचीत जैसे लगें।
इसके अलावा ये ऐप ड्राइवरों को अलग-अलग रास्तों के बीच फायदे-नुकसान समझने में मदद करेगा। ये ऐसे ऑप्शन्स दिखाएगा, जैसे कि कोई तेज रास्ता जिसमें टोल लगता हो, या कोई थोड़ा लंबा रास्ता जिसमें ट्रैफिक कम हो। Maps ड्राइवरों के कम्युनिटी से मिली रिपोर्ट का इस्तेमाल करके सड़क निर्माण या दुर्घटनाओं जैसी रुकावटों के बारे में भी उन्हें जानकारी देगा।
Google का कहना है, कि इमर्सिव नेविगेशन US में रोल आउट होना शुरू हो गया है। आने वाले महीनों में इसका विस्तार उन Android और iOS डिवाइसों के साथ-साथ उन गाड़ियों तक भी होगा, जो CarPlay, Android Auto और Google बिल्ट-इन वाली कारों को सपोर्ट करती हैं।