Google ने पेश किया AI Scam Detection फीचर, Android यूज़र्स को मिलेगा अलर्ट

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06 Jun 2026
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News Synopsis

Google ने Android यूज़र्स के लिए एक नया AI-पावर्ड स्कैम कॉल डिटेक्शन फीचर लॉन्च किया है। यह उन्नत तकनीक फर्जी और पहचान-छुपाकर की जाने वाली कॉल्स को रियल टाइम में पहचानकर यूज़र्स को अलर्ट करती है। यह अपडेट ऐसे समय में आया है, जब AI आधारित वॉइस स्कैम और कॉलर ID स्पूफिंग तेजी से बढ़ रहे हैं।

Android पर Google का नया AI Scam Call Detection फीचर

AI आधारित फोन स्कैम का बढ़ता खतरा

पिछले कुछ वर्षों में फोन स्कैम्स काफी बदल गए हैं। अब सिर्फ स्पैम कॉल्स या फिशिंग मैसेज ही समस्या नहीं हैं, बल्कि साइबर अपराधी अब AI का इस्तेमाल कर रहे हैं।

इन नए स्कैम्स में शामिल हैं:

  • असली आवाज की नकल करने वाली वॉइस क्लोनिंग तकनीक
  • कॉलर ID स्पूफिंग से भरोसेमंद नाम दिखाना
  • भावनाओं को प्रभावित करने वाली सोशल इंजीनियरिंग
  • फर्जी इमरजेंसी कॉल्स जिनमें पैसे की मांग की जाती है

उदाहरण के लिए आपको ऐसा कॉल आ सकता है, जो आपकी माँ के नाम से दिखे और आवाज भी बिल्कुल उनकी जैसी लगे। लेकिन असल में वह एक AI द्वारा बनाई गई नकली आवाज होती है।

इन तकनीकों के कारण असली और नकली कॉल्स में फर्क करना बेहद मुश्किल हो गया है।

Google ने यह फीचर क्यों बनाया?

AI तकनीक के बढ़ते उपयोग के साथ स्कैम भी ज्यादा खतरनाक हो गए हैं। इसी वजह से Google ने एक नया तरीका अपनाया।

अब सिर्फ आवाज पहचानने के बजाय Google कॉल करने वाले डिवाइस की पहचान करता है। यानी यह सिस्टम यह जांचता है कि कॉल वास्तव में किस फोन से आ रही है।

यह तरीका पुराने स्पैम फिल्टर की तुलना में कहीं ज्यादा सुरक्षित है।

Google का Scam Detection कैसे काम करता है?

डिवाइस आधारित वेरिफिकेशन सिस्टम

इस फीचर का मुख्य आधार “डिजिटल हैंडशेक” तकनीक है। जब कोई व्यक्ति Google Phone ऐप से कॉल करता है, तो उसका फोन बैकग्राउंड में एक वेरिफिकेशन सिग्नल भेजता है।

यह सिग्नल यह साबित करता है, कि कॉल असली डिवाइस से आ रही है।

रियल टाइम ऑथेंटिकेशन चेक

जब आपको कॉल आती है, तो आपका फोन जांच करता है:

  • क्या कॉल करने वाला डिवाइस वेरिफाइड है
  • क्या सिग्नल कॉन्टैक्ट से मेल खाता है
  • क्या कॉल भरोसेमंद नेटवर्क से आ रही है

यदि सब कुछ सही होता है, तो कॉल सुरक्षित मानी जाती है।

संदिग्ध कॉल मिलने पर क्या होता है?

अगर सिस्टम को किसी तरह की गड़बड़ी मिलती है, तो तुरंत यूज़र को चेतावनी दी जाती है।

यह मैसेज कुछ इस तरह हो सकता है:

“यह कॉल आपके सेव किए हुए कॉन्टैक्ट से नहीं हो सकती। सावधान रहें।”

यह अलर्ट यूज़र को सोचने का समय देता है, ताकि वे किसी भी निजी जानकारी या पैसे को साझा करने से पहले सतर्क रहें।

यह तकनीक क्यों बहुत महत्वपूर्ण है?

इस फीचर की सबसे बड़ी खासियत यह है, कि यह सिर्फ आवाज पर निर्भर नहीं करता। क्योंकि AI अब किसी भी व्यक्ति की आवाज को पूरी तरह से कॉपी कर सकता है।

इसके बजाय Google सिस्टम यह देखता है:

  • डिवाइस की असल पहचान
  • एन्क्रिप्टेड सिग्नल
  • वेरिफाइड कॉलर डेटा

इससे यह सुनिश्चित होता है, कि भले ही आवाज नकली हो, लेकिन असली डिवाइस से ही कॉल आनी चाहिए।

AI वॉइस फ्रॉड से सुरक्षा पर असर

AI आधारित स्कैम्स तेजी से बढ़ रहे हैं, खासकर फाइनेंशियल फ्रॉड के मामलों में।

इस नए सिस्टम के साथ:

  • फर्जी कॉल्स को जल्दी पहचानना आसान होगा
  • यूज़र्स को तुरंत अलर्ट मिलेगा
  • फ्रॉड की संभावना कम होगी
  • कॉल कम्युनिकेशन अधिक सुरक्षित बनेगा

किस डिवाइस पर उपलब्ध है, यह फीचर?

Google ने इस फीचर का रोलआउट शुरू कर दिया है। यह फिलहाल उपलब्ध है:

  • Pixel स्मार्टफोन पर (पहले चरण में)
  • Android 12 और उससे नए वर्जन पर
  • Google Phone ऐप के साथ

यह सिस्टम Rich Communication Services (RCS) पर आधारित है, इसलिए भविष्य में इसे और डिवाइस और ऐप्स में भी जोड़ा जा सकता है।

भविष्य में सुरक्षा का विकास

यह अपडेट केवल शुरुआत है। आने वाले समय में स्कैम प्रोटेक्शन और भी एडवांस हो सकता है।

संभावित सुधारों में शामिल हो सकते हैं:

  • बायोमेट्रिक कॉल वेरिफिकेशन
  • AI आधारित स्कैम प्रेडिक्शन
  • बैंकिंग सिक्योरिटी के साथ इंटीग्रेशन
  • क्रॉस-डिवाइस पहचान प्रणाली

निष्कर्ष:

Google का यह AI-आधारित Scam Call Detection फीचर मोबाइल सुरक्षा के क्षेत्र में एक बड़ा कदम है। यह सिस्टम कॉलर की आवाज के बजाय डिवाइस की पहचान पर ध्यान देकर फर्जी कॉल्स और AI वॉइस स्कैम्स से बेहतर सुरक्षा प्रदान करता है।

जैसे-जैसे स्कैम तकनीकें विकसित हो रही हैं, वैसे-वैसे यह फीचर Android यूज़र्स को अधिक सुरक्षित और भरोसेमंद संचार अनुभव देता है।

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