भारत में कमर्शियल LPG सिलेंडरों की कीमतों में बड़ा इजाफा हुआ है। वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता और वेस्ट एशिया में बढ़ते तनाव के कारण सप्लाई चेन प्रभावित हुई है, जिसका सीधा असर LPG की कीमतों पर पड़ा है।
भारत की सरकारी तेल विपणन कंपनियों ने कमर्शियल LPG सिलेंडरों की कीमतों में बढ़ोतरी की है। इस बदलाव के बाद 19 किलो वाले कमर्शियल सिलेंडर और 5 किलो वाले मिनी सिलेंडर दोनों महंगे हो गए हैं।
यह बढ़ोतरी ऐसे समय में हुई है जब वैश्विक बाजार में भू-राजनीतिक तनाव के कारण ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है।
नई कीमतों के बाद देश के बड़े शहरों में कमर्शियल LPG सिलेंडर के दाम इस प्रकार हैं:
इन कीमतों में अंतर का कारण परिवहन लागत और स्थानीय टैक्स हैं, लेकिन कुल मिलाकर पूरे देश में कीमतें बढ़ी हैं।
इस मूल्य वृद्धि का मुख्य कारण वेस्ट एशिया में चल रहा संघर्ष है, जिसने वैश्विक ऊर्जा सप्लाई को प्रभावित किया है।
तनाव बढ़ने के कारण इस क्षेत्र से तेल की सप्लाई प्रभावित हुई है, जिससे कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है।
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर है, इसलिए वैश्विक कीमतों में बदलाव का सीधा असर देश पर पड़ता है।
Indian Oil Corporation, Bharat Petroleum और Hindustan Petroleum जैसी कंपनियां LPG की कीमतों की समीक्षा करती हैं।
इस बढ़ोतरी का सबसे ज्यादा असर व्यापारिक क्षेत्रों पर पड़ेगा।
इसका असर अंततः आम लोगों पर भी पड़ सकता है।
कमर्शियल LPG महंगा होने के बावजूद घरेलू LPG की कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ है।
यह कीमत मार्च में ₹60 की बढ़ोतरी के बाद तय की गई थी।
हालांकि, अगर वैश्विक कीमतें बढ़ती रहीं, तो आने वाले समय में घरेलू LPG भी महंगा हो सकता है।
LPG के विपरीत, पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ है।
यह स्थिरता पिछले साल मार्च में ₹2 प्रति लीटर की कटौती के बाद बनी हुई है।
वर्तमान स्थिति यह दिखाती है कि वैश्विक घटनाएं भारत जैसे देशों पर कितना प्रभाव डालती हैं।
यदि क्षेत्र में शांति स्थापित होती है, तो कीमतें कम भी हो सकती हैं।
कमर्शियल LPG की कीमतों में हालिया बढ़ोतरी यह दिखाती है कि भारत को अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में कितनी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।
जहां घरेलू उपभोक्ताओं को फिलहाल राहत मिली है, वहीं व्यापारिक क्षेत्र पर इसका दबाव साफ दिख रहा है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि यह बढ़ोतरी अस्थायी है या लंबे समय तक बनी रहती है।